“नोएडा के सबसे व्यस्त मार्गों में शामिल डीएससी रोड का बदलेगा स्वरूप”
नोएडा प्राधिकरण ने शहर की यातायात व्यवस्था को आधुनिक और सुगम बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। शहर के अत्यंत महत्वपूर्ण डीएससी (Dadri-Surajpur-Chhalera) मार्ग और सेक्टर-79 टी-पॉइंट से डीएससी मार्ग तक के हिस्से को ‘मॉडल रोड’ के रूप में विकसित करने की तैयारी शुरू कर दी गई है। करीब 25.53 करोड़ रुपये की लागत से प्रस्तावित यह परियोजना न केवल यातायात जाम की समस्या को कम करेगी, बल्कि शहर की सुंदरता और बुनियादी ढांचे को भी नई पहचान देगी।
नोएडा प्राधिकरण द्वारा तैयार की गई योजना के अनुसार सिंचाई नाले से कुलेसरा पुल तक के मार्ग तथा सेक्टर-79 टी-पॉइंट से डीएससी मार्ग तक के पूरे स्ट्रेच को आधुनिक सुविधाओं से लैस किया जाएगा। कंसलटेंट द्वारा तैयार प्रस्तावों को सैद्धांतिक स्वीकृति के लिए सक्षम स्तर पर भेज दिया गया है और मंजूरी मिलते ही छह माह के भीतर कार्य पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
औद्योगिक और आवासीय क्षेत्रों की लाइफलाइन है डीएससी मार्ग
डीएससी मार्ग नोएडा के उन प्रमुख संपर्क मार्गों में शामिल है, जो शहर के औद्योगिक, व्यावसायिक और आवासीय क्षेत्रों को एक-दूसरे से जोड़ता है। यह मार्ग एनएसईजेड (NSEZ), फेस-2, सेक्टर-80, सेक्टर-81 और हॉजरी कॉम्प्लेक्स जैसे महत्वपूर्ण औद्योगिक क्षेत्रों तक सीधी पहुंच प्रदान करता है।
प्रतिदिन हजारों कर्मचारी, उद्यमी, स्थानीय निवासी और मालवाहक वाहन इस मार्ग का उपयोग करते हैं। यही कारण है कि डीएससी रोड को नोएडा की आर्थिक गतिविधियों की धुरी माना जाता है। शहर के विभिन्न हिस्सों से आने-जाने वाले लोगों के लिए यह मार्ग एक प्रमुख प्रवेश द्वार का काम करता है।
एलिवेटेड रोड का दबाव बढ़ा रहा है ट्रैफिक जाम
नोएडा प्राधिकरण द्वारा किए गए निरीक्षण में पाया गया कि एलिवेटेड रोड से उतरने वाले वाहनों का भारी दबाव डीएससी मार्ग पर पड़ता है। विशेष रूप से सिंचाई नाले से कुलेसरा पुल तक का हिस्सा सुबह और शाम के समय अत्यधिक व्यस्त रहता है।
ऑफिस समय के दौरान यहां लंबा ट्रैफिक जाम लगना आम बात बन चुकी है। कई बार लोगों को कुछ किलोमीटर का सफर तय करने में आधे घंटे से अधिक समय लग जाता है। इससे न केवल ईंधन की बर्बादी होती है बल्कि प्रदूषण भी बढ़ता है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में क्षेत्र में तेजी से हुए विकास और आबादी बढ़ने के कारण इस मार्ग पर वाहनों का दबाव कई गुना बढ़ गया है। ऐसे में सड़क के उन्नयन और यातायात प्रबंधन की आवश्यकता लंबे समय से महसूस की जा रही थी।
‘मॉडल रोड’ के रूप में होगा आधुनिक विकास
प्राधिकरण की योजना के तहत डीएससी मार्ग को केवल सड़क चौड़ीकरण तक सीमित नहीं रखा जाएगा, बल्कि इसे एक पूर्ण ‘मॉडल रोड’ के रूप में विकसित किया जाएगा।
इस परियोजना में सड़क की गुणवत्ता सुधारने के साथ-साथ फुटपाथ, हरित पट्टी, आधुनिक स्ट्रीट लाइट, सुव्यवस्थित साइनेज, बेहतर ड्रेनेज व्यवस्था और ट्रैफिक प्रबंधन से जुड़े अन्य आवश्यक कार्य शामिल किए जाएंगे। सड़क के दोनों ओर सौंदर्यीकरण पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा ताकि यह मार्ग शहर की आधुनिक पहचान के अनुरूप दिखाई दे।
विशेषज्ञों का मानना है कि मॉडल रोड की अवधारणा केवल यातायात सुधार तक सीमित नहीं होती, बल्कि यह नागरिक सुविधाओं और शहरी सौंदर्य को भी बेहतर बनाती है।
सेक्टर-79 टी-पॉइंट से डीएससी मार्ग तक भी होगा कायाकल्प
परियोजना का दूसरा महत्वपूर्ण हिस्सा सेक्टर-79 टी-पॉइंट से डीएससी मार्ग तक का स्ट्रेच है। यह क्षेत्र तेजी से विकसित हो रहे आवासीय सेक्टरों को जोड़ता है और यहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोग आवागमन करते हैं।
इस मार्ग के विकास से सेक्टर-79, सेक्टर-78, सेक्टर-77 और आसपास के क्षेत्रों के निवासियों को सीधा लाभ मिलेगा। वर्तमान में यहां कई स्थानों पर ट्रैफिक दबाव और सड़क संरचना से जुड़ी समस्याएं सामने आती हैं, जिन्हें मॉडल रोड परियोजना के माध्यम से दूर करने की योजना बनाई गई है।
25 करोड़ रुपये से अधिक की लागत वाली परियोजना
नोएडा प्राधिकरण द्वारा तैयार किए गए प्रस्ताव के अनुसार परियोजना पर कुल 2,553.70 लाख रुपये यानी लगभग 25.53 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।
लागत का विवरण
सिंचाई नाले से कुलेसरा पुल तक
- प्रस्तावित लागत: ₹1,496.56 लाख
सेक्टर-79 टी-पॉइंट से डीएससी मार्ग तक
- प्रस्तावित लागत: ₹1,057.14 लाख
यह निवेश शहर के यातायात ढांचे को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि भविष्य में बढ़ने वाले ट्रैफिक को ध्यान में रखते हुए यह परियोजना दीर्घकालिक लाभ प्रदान करेगी।
छह माह में पूरा करने का लक्ष्य
प्राधिकरण ने इस महत्वाकांक्षी परियोजना को समयबद्ध तरीके से पूरा करने का लक्ष्य तय किया है। प्रस्तावों को सैद्धांतिक स्वीकृति के लिए सक्षम स्तर पर भेजा जा चुका है। मंजूरी मिलते ही निर्माण कार्य शुरू कर दिया जाएगा।
अधिकारियों के अनुसार सभी प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद छह माह के भीतर परियोजना को धरातल पर उतारने का लक्ष्य रखा गया है। यदि निर्धारित समयसीमा के भीतर कार्य पूरा हो जाता है तो अगले वर्ष तक इस पूरे क्षेत्र की तस्वीर बदली हुई नजर आएगी।
उद्योगों और कारोबार को मिलेगा सीधा फायदा
डीएससी मार्ग का संबंध सीधे नोएडा के औद्योगिक विकास से है। एनएसईजेड, फेस-2 और हॉजरी कॉम्प्लेक्स जैसे औद्योगिक क्षेत्रों में प्रतिदिन हजारों कर्मचारी कार्य करने आते हैं।
बेहतर सड़क और सुगम यातायात व्यवस्था से माल परिवहन में लगने वाला समय कम होगा। इससे उद्योगों की उत्पादकता बढ़ेगी और लॉजिस्टिक लागत में भी कमी आएगी। कारोबारियों का मानना है कि इस परियोजना के पूरा होने के बाद क्षेत्र में निवेश को भी बढ़ावा मिलेगा।
नागरिकों को मिलेगी जाम और प्रदूषण से राहत
शहर के निवासियों के लिए यह परियोजना किसी राहत से कम नहीं होगी। लंबे ट्रैफिक जाम के कारण लोगों को रोजाना समय और ईंधन दोनों की हानि उठानी पड़ती है।
मॉडल रोड बनने के बाद वाहनों की आवाजाही अधिक व्यवस्थित होगी, जिससे जाम कम लगेगा और यात्रा समय घटेगा। इसके साथ ही वाहनों के लंबे समय तक खड़े रहने से होने वाले प्रदूषण में भी कमी आने की उम्मीद है।
आधुनिक नोएडा की दिशा में एक और कदम
पिछले कुछ वर्षों में नोएडा प्राधिकरण शहर के प्रमुख मार्गों, चौराहों और सार्वजनिक स्थानों के आधुनिकीकरण पर लगातार काम कर रहा है। डीएससी मार्ग और सेक्टर-79 टी-पॉइंट को मॉडल रोड के रूप में विकसित करने की योजना इसी श्रृंखला का हिस्सा है।
यदि यह परियोजना तय समय पर पूरी हो जाती है तो न केवल यातायात व्यवस्था बेहतर होगी बल्कि नोएडा को एक आधुनिक, सुव्यवस्थित और स्मार्ट शहर के रूप में स्थापित करने की दिशा में भी यह एक महत्वपूर्ण उपलब्धि साबित होगी। शहरवासियों को अब स्वीकृति मिलने और निर्माण कार्य शुरू होने का इंतजार है, क्योंकि यह परियोजना आने वाले वर्षों में लाखों लोगों की दैनिक यात्रा को आसान बनाने वाली साबित हो सकती है।














