“ग्रेटर नोएडा में ‘प्रेरणा विमर्श-2026’ के समापन समारोह में मुख्यमंत्री ने साधा निशाना, कहा- संवैधानिक पद की मर्यादा बनाए रखना हर व्यक्ति की जिम्मेदारी”
ग्रेटर नोएडा: पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी की उस टिप्पणी को लेकर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की, जिसमें अंसारी ने भारत में हिंदू दक्षिणपंथी सांप्रदायिकता को कट्टरपंथी वामपंथी उग्रवाद से बड़ा खतरा बताया था। ग्रेटर नोएडा में आयोजित ‘प्रेरणा विमर्श-2026: उत्कर्ष नारी सम्मान, युवा स्वाभिमान’ कार्यक्रम के समापन समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने अंसारी के बयान को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए आरोप लगाया कि इस तरह के वक्तव्य भारत की सनातन परंपरा और हिंदू समाज को बदनाम करने का प्रयास हैं।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि कुछ लोग ऐसे होते हैं, जो जिस पद पर रहते हैं उसकी मर्यादा को बनाए रखने के बजाय उसे तोड़ने का प्रयास करते हैं। उन्होंने कहा कि पूर्व उपराष्ट्रपति जैसे संवैधानिक पद पर रह चुके व्यक्ति की ओर से इस प्रकार का बयान आना दुर्भाग्यपूर्ण है।
उन्होंने अंसारी के बयान पर सवाल उठाते हुए कहा कि ऐसे वक्तव्य भारत और उसकी परंपराओं के लिए चिंताजनक हैं। मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि भारत की छवि को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खराब करने के लिए कुछ ताकतें लगातार दुष्प्रचार करती रही हैं और ऐसे बयान उसी व्यापक विमर्श का हिस्सा हैं।
‘सनातन परंपरा को कोसने का प्रयास’
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में कहा कि भारत की पहचान उसकी प्राचीन सांस्कृतिक और सनातन परंपराओं से जुड़ी हुई है। उनके मुताबिक, हिंदू परंपरा को कट्टरता या आतंकवाद से जोड़ना तथ्यात्मक और वैचारिक रूप से अनुचित है।
उन्होंने आरोप लगाया कि अंसारी के बयान में सनातन परंपरा और हिंदू समाज के प्रति नकारात्मक दृष्टिकोण दिखाई देता है। योगी ने कहा कि भारत की सांस्कृतिक विरासत को समझे बिना उसके सामाजिक और धार्मिक स्वरूप पर टिप्पणी करना देश की परंपराओं का अपमान है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत ने सदियों से विविध विचारों, पंथों और परंपराओं को स्थान दिया है। ऐसे में देश की बहुलतावादी संस्कृति को किसी एक विचारधारा के चश्मे से देखना उचित नहीं है।
यह भाव पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी जी समझ पाते, तो वे भारत और भारतीयता को या भारत की हिंदू दृष्टि को कोसते नहीं… pic.twitter.com/QQ8ZlImfGJ
— Yogi Adityanath (@myogiadityanath) September 20, 2026
राहुल गांधी के कार्यक्रम पर भी मुख्यमंत्री ने साधा निशाना
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने भाषण के दौरान कांग्रेस नेता राहुल गांधी के प्रयागराज में आयोजित ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम का भी जिक्र किया। उन्होंने राहुल गांधी के कार्यक्रम में दिए गए वक्तव्यों पर आपत्ति जताते हुए कहा कि सार्वजनिक जीवन में रहने वाले लोगों को अपने आचरण और शब्दों की मर्यादा का ध्यान रखना चाहिए।
योगी ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी के कार्यक्रम में महिलाओं के सम्मान से जुड़े विषयों को लेकर जिस प्रकार की बातें सामने आईं, वे नारी शक्ति के सम्मान के अनुरूप नहीं थीं। उन्होंने कहा कि भारतीय परंपरा में नारी के सम्मान को विशेष स्थान दिया गया है।
मुख्यमंत्री ने संस्कृत की प्रसिद्ध उक्ति ‘यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवताः’ का उल्लेख करते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति में महिलाओं के सम्मान को समाज की मूल भावना माना गया है। उनके मुताबिक, जो लोग इस भावना को नहीं समझते, उनसे समाज को बहुत अधिक उम्मीद नहीं करनी चाहिए।
योगी ने विपक्ष पर समाज में भ्रम और अराजकता पैदा करने का आरोप भी लगाया। हालांकि, उनके इन राजनीतिक आरोपों पर संबंधित विपक्षी दलों की प्रतिक्रिया इस रिपोर्ट में शामिल नहीं है।
क्या कहा था हामिद अंसारी ने?
पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी ने शुक्रवार को नई दिल्ली स्थित इंडिया इस्लामिक कल्चरल सेंटर में आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए भारत में उभरते राजनीतिक और सामाजिक रुझानों पर चिंता व्यक्त की थी।
अंसारी ने अपने वक्तव्य में एक पुस्तक का संदर्भ देते हुए पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू से जुड़ी एक टिप्पणी का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि विदेश मंत्रालय के अधिकारियों की एक बैठक में उस समय विदेश सचिव गुंडेविया ने भारत के सामने मौजूद खतरे के संदर्भ में हिंदू दक्षिणपंथी सांप्रदायिकता को लेकर चिंता व्यक्त की थी।
अंसारी ने कहा कि भारत के लिए खतरे के रूप में केवल वामपंथ को देखना उचित नहीं है और उन्होंने नेहरू से जुड़ी उक्त टिप्पणी का हवाला देते हुए हिंदू राइट-विंग कम्युनलिज्म को खतरे के रूप में प्रस्तुत किया।
उन्होंने दिवंगत संवैधानिक विशेषज्ञ और लेखक ए.जी. नूरानी की पुस्तक ‘The RSS: A Menace to India’ का भी संदर्भ दिया। अंसारी ने नूरानी के जीवन और उनके लेखन को याद करते हुए भारत में उभरते उन रुझानों पर चिंता जताई, जिन्हें उन्होंने नागरिक राष्ट्रवाद की अवधारणा के लिए चुनौती के रूप में देखा।
यही टिप्पणी अब राजनीतिक विवाद के केंद्र में है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इसे भारत की सनातन परंपरा और हिंदू समाज के प्रति आपत्तिजनक बताया है।
VHP ने भी जताया विरोध
पूर्व उपराष्ट्रपति के बयान पर विश्व हिंदू परिषद ने भी प्रतिक्रिया व्यक्त की। संगठन के प्रवक्ता सुरेंद्र जैन ने अंसारी के वक्तव्य को भारत की परंपराओं का अपमान बताया।
जैन ने कहा कि भारत की महान परंपराओं को लेकर इस प्रकार की टिप्पणी स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने दावा किया कि देश में रेडिकल लेफ्ट-विंग एक्सट्रीमिज्म की तुलना में राइट-विंग हिंदू कम्युनलिज्म को अधिक बड़ा खतरा बताना वास्तविकता को एकतरफा तरीके से प्रस्तुत करना है।
VHP प्रवक्ता ने अंसारी के पूर्व के कुछ बयानों और अयोध्या के राम जन्मभूमि मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लेकर उनके रुख का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि संगठन अंसारी के वर्तमान बयान की कड़ी निंदा करता है।
बयानों से तेज हुई राजनीतिक बहस
हामिद अंसारी की टिप्पणी और उसके बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की प्रतिक्रिया ने एक बार फिर भारत में सांप्रदायिकता, राष्ट्रवाद, संवैधानिक मूल्यों और राजनीतिक विचारधाराओं को लेकर बहस को तेज कर दिया है।
एक ओर अंसारी ने अपने वक्तव्य में हिंदू दक्षिणपंथी सांप्रदायिकता को भारत के लिए गंभीर चुनौती के रूप में प्रस्तुत किया और इसके समर्थन में ऐतिहासिक संदर्भों तथा ए.जी. नूरानी के लेखन का हवाला दिया। दूसरी ओर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस दृष्टिकोण को भारत की सनातन परंपरा और हिंदू समाज के प्रति नकारात्मक नजरिया बताते हुए खारिज किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत की पहचान उसकी सांस्कृतिक विरासत, परंपराओं और विविधता में निहित है। उनके मुताबिक, भारत को समझने के लिए उसकी सभ्यता और सांस्कृतिक निरंतरता को समझना आवश्यक है।
संवैधानिक पदों की मर्यादा पर भी सवाल
योगी आदित्यनाथ की प्रतिक्रिया का एक महत्वपूर्ण हिस्सा संवैधानिक पदों की मर्यादा से जुड़ा रहा। उन्होंने सीधे तौर पर कहा कि पूर्व उपराष्ट्रपति का पद अत्यंत महत्वपूर्ण संवैधानिक पद है और इस पद पर रह चुके व्यक्ति के सार्वजनिक वक्तव्यों का प्रभाव व्यापक होता है।
उनके अनुसार, ऐसे पदों पर रहे लोगों से अपेक्षा की जाती है कि वे देश की एकता, सामाजिक समरसता और संवैधानिक मर्यादाओं को ध्यान में रखते हुए अपनी बात रखें।
हालांकि, अंसारी के वक्तव्य का मूल संदर्भ भारत में सांप्रदायिकता और राजनीतिक विचारधाराओं से जुड़े ऐतिहासिक तथा समकालीन विमर्श पर था। इस संदर्भ में उनके समर्थक उनके बयान को एक वैचारिक चिंता के रूप में देखते हैं, जबकि आलोचक इसे हिंदू समाज और भारतीय परंपरा के प्रति अनुचित टिप्पणी मान रहे हैं।
‘प्रेरणा विमर्श’ के मंच से बड़ा राजनीतिक संदेश
ग्रेटर नोएडा में आयोजित कार्यक्रम का मुख्य केंद्र नारी सम्मान, युवा स्वाभिमान और सामाजिक विमर्श था, लेकिन मुख्यमंत्री के संबोधन में राष्ट्रीय राजनीति और वैचारिक मुद्दों की भी स्पष्ट छाप दिखाई दी।
हामिद अंसारी के बयान पर प्रतिक्रिया से लेकर राहुल गांधी के कार्यक्रम पर टिप्पणी तक, मुख्यमंत्री ने विपक्षी राजनीति और वैचारिक बहस से जुड़े मुद्दों को अपने संबोधन में प्रमुखता से उठाया।
राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण उत्तर प्रदेश में अगले विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच मुख्यमंत्री का यह बयान विशेष महत्व रखता है। हालांकि, अंसारी और राहुल गांधी से जुड़े मुद्दों पर राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर आगे भी जारी रहने की संभावना है।















