“दारुस्सलाम में ईद मिलाद-उन-नबी के कार्यक्रम में AIMIM प्रमुख ने संविधान, हिजाब, स्वतंत्रता संग्राम, SIR, नशे की समस्या और हैदराबाद में बढ़ती हत्याओं समेत कई मुद्दों पर सरकार और संस्थाओं को घेरा”
हैदराबाद: ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के अध्यक्ष और हैदराबाद से सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने एक बार फिर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर तीखा राजनीतिक हमला बोला है। 1501वीं ईद मिलाद-उन-नबी के अवसर पर दारुस्सलाम में आयोजित ‘जलसा-ए-रहमतुल-लिल-आलमीन’ को संबोधित करते हुए ओवैसी ने संविधान, मनुस्मृति, धार्मिक स्वतंत्रता, हिजाब, स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास, SIR और हैदराबाद में बढ़ती आपराधिक घटनाओं समेत कई मुद्दों पर अपने विचार रखे।
अपने संबोधन में ओवैसी ने आरोप लगाया कि RSS और उससे जुड़े विचारों ने ऐतिहासिक रूप से भारतीय संविधान की जगह मनुस्मृति को प्राथमिकता देने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि भारत ने 26 नवंबर 1949 को संविधान को स्वीकार किया, लेकिन इसके कुछ दिनों बाद संविधान को लेकर संघ के मुखपत्र में आपत्ति जताई गई थी। ओवैसी ने इसे संविधान और डॉ. भीमराव आंबेडकर की भूमिका के विरोध से जोड़ते हुए सत्तारूढ़ राजनीतिक विचारधारा पर निशाना साधा।
हिजाब के मुद्दे पर हाईकोर्ट के आदेश से असहमति
ओवैसी ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के हिजाब से जुड़े आदेश पर भी कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने कहा कि वह इस आदेश से सहमत नहीं हैं और उनकी नजर में यह इस्लाम तथा मुसलमानों की धार्मिक प्रथाओं में दखल का मामला है। उन्होंने यह भी कहा कि संबंधित मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है और शीर्ष अदालत के फैसले का इंतजार किया जाना चाहिए।
AIMIM प्रमुख ने अपने संबोधन में धार्मिक स्वतंत्रता और संविधान द्वारा दिए गए अधिकारों को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि किसी भी समुदाय की धार्मिक प्रथाओं से जुड़े मामलों में संवेदनशीलता और संवैधानिक दृष्टिकोण जरूरी है। उनका कहना था कि धार्मिक मामलों में न्यायिक और प्रशासनिक फैसलों का असर सीधे लोगों की धार्मिक स्वतंत्रता पर पड़ सकता है।
‘RSS ने संविधान का विरोध किया था’
संविधान और मनुस्मृति के मुद्दे पर ओवैसी ने RSS पर सीधे आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि देश ने 26 नवंबर 1949 को संविधान को अपनाया, लेकिन चार दिन बाद 30 नवंबर को संघ के मुखपत्र में संविधान को लेकर आपत्ति प्रकाशित की गई थी।
ओवैसी ने दावा किया कि उस समय संविधान की जगह मनुस्मृति को प्राथमिकता देने की बात कही गई थी। उन्होंने कहा कि डॉ. आंबेडकर द्वारा तैयार किए गए संविधान को लेकर उस विचारधारा को आपत्ति थी।
अपने भाषण में उन्होंने मनुस्मृति को लेकर मौजूदा राजनीतिक बहस का भी जिक्र किया और कहा कि देश को यह तय करना होगा कि शासन और नागरिक अधिकारों का आधार संविधान होगा या कोई धार्मिक-सामाजिक ग्रंथ।
सावरकर और स्वतंत्रता संग्राम का भी उठाया मुद्दा
ओवैसी ने हिंदुत्व विचारक विनायक दामोदर सावरकर का उल्लेख करते हुए उनके जेल जीवन और अंग्रेजों को लिखे गए पत्रों को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने सावरकर की तुलना स्वतंत्रता संग्राम में शामिल मुस्लिम नेताओं और स्वतंत्रता सेनानियों से करते हुए कहा कि इतिहास को एकतरफा नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए।
उन्होंने अल्लामा फजल-ए-हक खैराबादी का उदाहरण देते हुए कहा कि उन्होंने अंग्रेजी शासन के दौरान कठिन परिस्थितियों का सामना किया, लेकिन उनके अनुसार उन्होंने अंग्रेजों से रिहाई की मांग करते हुए पत्र नहीं लिखा।
ओवैसी ने अपने भाषण में स्वतंत्रता आंदोलन में मुसलमानों की भूमिका को भी रेखांकित करने की कोशिश की और कहा कि देश के इतिहास में मुस्लिम स्वतंत्रता सेनानियों के योगदान को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।
‘सेलुलर जेल का पहला कैदी मौलवी अलाउद्दीन था’
अंडमान की सेलुलर जेल का जिक्र करते हुए ओवैसी ने दावा किया कि अंडमान भेजे गए शुरुआती कैदियों में हैदराबाद के मौलवी अलाउद्दीन शामिल थे, जिन्हें उन्होंने मक्का मस्जिद का इमाम बताया। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में मुस्लिम स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान को भी उचित स्थान दिया जाना चाहिए।
ओवैसी ने अपने भाषण के दौरान कहा कि देश की आजादी की लड़ाई किसी एक समुदाय या वर्ग की लड़ाई नहीं थी। इसमें अलग-अलग समुदायों के लोगों ने हिस्सा लिया और अनेक लोगों ने जेलों में यातनाएं सहीं तथा अपनी जान तक गंवाई।
SIR को लेकर लोगों से घबराने की अपील नहीं
दक्षिणी राज्यों में चल रही SIR प्रक्रिया का मुद्दा उठाते हुए ओवैसी ने उन लोगों को आश्वस्त करने की कोशिश की, जिनके नाम कथित तौर पर ‘विसंगतियों’ की सूची में आए हैं। उन्होंने कहा कि अगर किसी व्यक्ति को नोटिस मिलता है तो उसे घबराने या परेशान होने की जरूरत नहीं है।
AIMIM प्रमुख ने कहा कि उनकी पार्टी और उसके कार्यकर्ता ऐसे लोगों के साथ खड़े रहेंगे और पूरी प्रक्रिया में उनकी मदद करेंगे। उन्होंने लोगों से दस्तावेजों और प्रक्रिया को लेकर सतर्क रहने तथा किसी भी तरह की परेशानी होने पर उचित सहायता लेने की अपील की।
हैदराबाद में ‘एंटी-मर्डर स्क्वाड’ बनाने की मांग
ओवैसी ने अपने भाषण में हैदराबाद और तेलंगाना में बढ़ती हत्याओं और अपराध की घटनाओं पर भी चिंता जताई। उन्होंने तेलंगाना सरकार से हैदराबाद शहर में हत्याओं की रोकथाम और उनकी जांच के लिए एक समर्पित ‘एंटी-मर्डर स्क्वाड’ गठित करने की मांग की।
उन्होंने कहा कि हत्या जैसे गंभीर मामलों में जांच के साथ-साथ न्यायिक प्रक्रिया भी तेजी से पूरी होनी चाहिए। ओवैसी ने सुझाव दिया कि ऐसे मामलों की सुनवाई एक साल के भीतर पूरी करने की व्यवस्था हो, ताकि पीड़ित परिवारों को जल्द न्याय मिल सके।
AIMIM प्रमुख ने मुख्यमंत्री से तेलंगाना हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से हत्या के मामलों की त्वरित सुनवाई के लिए विशेष अदालतों की स्थापना पर विचार करने का अनुरोध करने की भी अपील की। उन्होंने बताया कि इस संबंध में वह तेलंगाना सरकार को पहले ही ज्ञापन सौंप चुके हैं।
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नशे के खिलाफ युवाओं को संदेश—‘मदद मांगने में संकोच न करें’
ओवैसी ने तेलंगाना, विशेष रूप से हैदराबाद में बढ़ती नशीली दवाओं की समस्या को लेकर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि कई युवा नशे की लत के कारण अपना भविष्य बर्बाद कर रहे हैं और यह समस्या अब गंभीर सामाजिक चिंता बनती जा रही है।
अपने व्यक्तिगत अनुभव का जिक्र करते हुए ओवैसी ने कहा कि वह भी कभी सिगरेट पीते थे, लेकिन अब उन्होंने इसे छोड़ दिया है। उन्होंने नशे की लत से जूझ रहे युवाओं से मदद मांगने की अपील करते हुए कहा कि उन्हें शर्म या संकोच महसूस करने की जरूरत नहीं है।
उन्होंने कहा कि अगर कोई व्यक्ति नशे की समस्या से परेशान है तो वह उनके पास आ सकता है और वह उसे नशा मुक्ति केंद्र तक पहुंचाने में मदद करेंगे। ओवैसी ने युवाओं से कहा कि उनकी जिंदगी और भविष्य बेहद कीमती है और समय रहते मदद लेना कमजोरी नहीं, बल्कि एक जरूरी कदम है।
कई मुद्दों पर सरकार को घेरा
ईद मिलाद-उन-नबी के कार्यक्रम में ओवैसी का भाषण कई राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों पर केंद्रित रहा। उन्होंने एक ओर संविधान और धार्मिक स्वतंत्रता को लेकर RSS-BJP की विचारधारा पर सवाल उठाए, वहीं दूसरी ओर हैदराबाद में अपराध, नशे की समस्या और न्यायिक प्रक्रिया में तेजी लाने की जरूरत पर जोर दिया।
ओवैसी के संबोधन में इतिहास और वर्तमान राजनीति के साथ-साथ स्थानीय प्रशासन और कानून-व्यवस्था से जुड़े मुद्दे भी प्रमुख रहे। उन्होंने अपने भाषण के जरिए मुस्लिम समुदाय से जुड़े धार्मिक और राजनीतिक सवालों को उठाते हुए सरकारों से संवैधानिक अधिकारों की रक्षा तथा सामाजिक समस्याओं पर प्रभावी कार्रवाई की मांग की।
उनके बयान ऐसे समय में आए हैं जब संविधान, धार्मिक स्वतंत्रता, हिजाब, मतदाता सूची और विभिन्न राज्यों में चल रही राजनीतिक बहस को लेकर देश की राजनीति में लगातार चर्चा हो रही है। ऐसे में ओवैसी के इस भाषण ने इन मुद्दों पर राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया है।














