तेहरान/दोहा/वॉशिंगटन: अमेरिका और ईरान के बीच संभावित कूटनीतिक वार्ता को लेकर एक बार फिर भ्रम की स्थिति बन गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि ईरान ने बातचीत का अनुरोध किया है और दोनों देशों के प्रतिनिधि कतर की राजधानी दोहा में मिलने वाले हैं। दूसरी ओर, ईरान ने इस दावे को पूरी तरह खारिज करते हुए कहा है कि फिलहाल अमेरिका के साथ किसी भी स्तर की कोई औपचारिक बैठक तय नहीं हुई है।
ईरान ने ट्रंप के दावे को बताया गलत
ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने स्पष्ट किया कि दोहा में ईरानी प्रतिनिधिमंडल की यात्रा केवल पहले से तय 14-सूत्रीय समझौता ज्ञापन (MoU) के क्रियान्वयन से संबंधित है। उन्होंने कहा कि इस दौरे का उद्देश्य अमेरिका के साथ नई वार्ता शुरू करना नहीं है।
बघाई के अनुसार, व्यापक और अंतिम परमाणु समझौते पर बातचीत शुरू होने से पहले MoU में शामिल प्रारंभिक शर्तों को लागू करना आवश्यक है। इनमें विश्वास बहाली के उपाय, प्रतिबंधों से जुड़े कुछ प्रावधानों पर प्रगति तथा ईरान की जमी हुई संपत्तियों तक पहुंच सुनिश्चित करने जैसे मुद्दे शामिल हैं। उनका कहना है कि इन बिंदुओं पर ठोस प्रगति के बिना औपचारिक वार्ता शुरू नहीं की जाएगी।
ट्रंप का दावा और अमेरिकी रुख
डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया मंच Truth Social पर दावा किया कि ईरान ने स्वयं बैठक का अनुरोध किया है और दोनों देशों के बीच दोहा में वार्ता होगी। अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव को कम करने तथा होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़े सुरक्षा मुद्दों पर कूटनीतिक प्रयास जारी हैं।
व्हाइट हाउस की ओर से भी संकेत दिए गए हैं कि अमेरिका क्षेत्रीय स्थिरता और ईरान के साथ व्यापक समझौते की दिशा में आगे बढ़ने का इच्छुक है।
होर्मुज जलडमरूमध्य बना प्रमुख मुद्दा
हाल के सप्ताहों में होर्मुज जलडमरूमध्य में समुद्री सुरक्षा और सैन्य गतिविधियों को लेकर तनाव बढ़ा है। वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण इस समुद्री मार्ग पर बढ़ती अनिश्चितता के बीच कतर एक बार फिर संभावित मध्यस्थ की भूमिका में दिखाई दे रहा है।
हालांकि, ईरान का कहना है कि तकनीकी या राजनीतिक स्तर पर किसी नई बैठक की तारीख और स्थान पर अभी कोई अंतिम सहमति नहीं बनी है।
सार्वजनिक बयान बनाम पर्दे के पीछे की कूटनीति
विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका और ईरान के सार्वजनिक बयानों में स्पष्ट विरोधाभास दिखाई देता है, लेकिन यह आवश्यक नहीं कि पर्दे के पीछे कूटनीतिक संपर्क पूरी तरह रुके हों। अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में अक्सर औपचारिक घोषणाओं से पहले अनौपचारिक या मध्यस्थों के माध्यम से संवाद चलता रहता है।
यदि MoU की प्रारंभिक शर्तों पर सहमति बनती है और दोनों पक्ष विश्वास बहाली के कदम उठाते हैं, तो आने वाले समय में औपचारिक वार्ता की संभावना मजबूत हो सकती है। फिलहाल दोनों देशों के आधिकारिक बयानों से यह स्पष्ट है कि वार्ता की दिशा को लेकर अभी भी अनिश्चितता बनी हुई है और अगले कुछ दिन इस प्रक्रिया के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं।














