प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न में आयोजित भारत-ऑस्ट्रेलिया CEO फोरम को संबोधित करते हुए भारत को दुनिया के सबसे आकर्षक निवेश गंतव्यों में से एक बताया। उन्होंने कहा कि भारत केवल दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था ही नहीं है, बल्कि आने वाले दशकों में स्वच्छ ऊर्जा, उन्नत विनिर्माण और आधुनिक बुनियादी ढांचे का वैश्विक केंद्र बनने की दिशा में भी तेजी से आगे बढ़ रहा है।
अपने संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने भारत की ऊर्जा सुरक्षा, हरित विकास और औद्योगिक विस्तार की महत्वाकांक्षी योजनाओं का उल्लेख करते हुए ऑस्ट्रेलियाई उद्योग जगत को भारत में दीर्घकालिक निवेश के लिए आमंत्रित किया। उन्होंने कहा कि भारत और ऑस्ट्रेलिया की साझेदारी केवल व्यापार तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भविष्य की वैश्विक अर्थव्यवस्था को आकार देने वाली रणनीतिक साझेदारी बन सकती है।
2030 तक 500 गीगावाट अक्षय ऊर्जा का लक्ष्य
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत ने ऊर्जा परिवर्तन को राष्ट्रीय प्राथमिकता बनाया है। देश का लक्ष्य वर्ष 2030 तक 500 गीगावाट अक्षय ऊर्जा क्षमता स्थापित करना है। इसके लिए सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, जलविद्युत और ग्रीन हाइड्रोजन जैसे क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर निवेश किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि भारत तेजी से एक ऐसा विनिर्माण इकोसिस्टम तैयार कर रहा है जहां सोलर मॉड्यूल, विंड टर्बाइन, बैटरी स्टोरेज सिस्टम और ग्रीन हाइड्रोजन से जुड़े उपकरणों का उत्पादन बड़े स्तर पर किया जा सके। इससे न केवल भारत की ऊर्जा जरूरतें पूरी होंगी, बल्कि देश वैश्विक सप्लाई चेन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा कि स्वच्छ ऊर्जा केवल पर्यावरण संरक्षण का विषय नहीं है, बल्कि यह आर्थिक विकास, रोजगार सृजन और ऊर्जा आत्मनिर्भरता से भी जुड़ा हुआ है।
2070 तक नेट-जीरो उत्सर्जन का संकल्प
प्रधानमंत्री मोदी ने दोहराया कि भारत वर्ष 2070 तक नेट-जीरो उत्सर्जन हासिल करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि यह लक्ष्य दुनिया के सामने भारत की जिम्मेदार और टिकाऊ विकास की सोच को दर्शाता है।
भारत ने पिछले कुछ वर्षों में अक्षय ऊर्जा उत्पादन में उल्लेखनीय प्रगति की है। सौर ऊर्जा क्षमता में तेज वृद्धि, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को बढ़ावा और हरित ईंधन पर निवेश देश को जलवायु परिवर्तन के खिलाफ वैश्विक प्रयासों में महत्वपूर्ण भागीदार बना रहा है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत आर्थिक विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाकर आगे बढ़ रहा है। यही मॉडल आने वाले समय में अन्य विकासशील देशों के लिए भी प्रेरणा बन सकता है।
परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग की संभावनाएं
अपने संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने वर्ष 2047 तक 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा क्षमता हासिल करने के भारत के लक्ष्य का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि स्वच्छ और स्थिर ऊर्जा स्रोत के रूप में परमाणु ऊर्जा भारत की दीर्घकालिक ऊर्जा रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
उन्होंने ऑस्ट्रेलिया के विशाल यूरेनियम भंडार और तकनीकी विशेषज्ञता का जिक्र करते हुए कहा कि दोनों देश इस क्षेत्र में मिलकर काम कर सकते हैं। ऑस्ट्रेलिया की क्षमताएं भारत की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि दोनों देशों के बीच परमाणु ऊर्जा सहयोग और मजबूत होता है, तो यह भारत की ऊर्जा सुरक्षा को नई मजबूती प्रदान करेगा।
इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में निवेश का न्योता
प्रधानमंत्री मोदी ने ऑस्ट्रेलियाई निवेशकों को भारत के तेजी से विकसित हो रहे इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में निवेश के लिए आमंत्रित किया। उन्होंने कहा कि भारत आने वाले वर्षों में बंदरगाहों, हवाई अड्डों, रेलवे नेटवर्क, राष्ट्रीय राजमार्गों और शहरी विकास परियोजनाओं पर बड़े पैमाने पर निवेश कर रहा है।
उन्होंने कहा कि आधुनिक बुनियादी ढांचे का निर्माण भारत की आर्थिक प्रगति का प्रमुख आधार है। सरकार का लक्ष्य लॉजिस्टिक्स लागत कम करना, कनेक्टिविटी बढ़ाना और निवेश के लिए बेहतर वातावरण तैयार करना है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत में इंफ्रास्ट्रक्चर विकास की गति और पैमाना निवेशकों के लिए अभूतपूर्व अवसर प्रदान करता है।
भारत और ऑस्ट्रेलिया की अर्थव्यवस्थाएं हैं पूरक
CEO फोरम को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत और ऑस्ट्रेलिया की अर्थव्यवस्थाएं एक-दूसरे की पूरक हैं। भारत के पास विशाल बाजार, युवा कार्यबल और तेज आर्थिक विकास है, जबकि ऑस्ट्रेलिया के पास प्राकृतिक संसाधन, पूंजी और तकनीकी विशेषज्ञता है।
उन्होंने कहा कि दोनों देशों की ताकतें मिलकर एक ऐसी साझेदारी बना सकती हैं जिससे दोनों अर्थव्यवस्थाओं को दीर्घकालिक लाभ होगा। यह सहयोग केवल व्यापार बढ़ाने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि नवाचार, अनुसंधान और औद्योगिक विकास को भी नई दिशा देगा।
किन क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर जोर?
प्रधानमंत्री मोदी ने कई ऐसे क्षेत्रों का उल्लेख किया जहां भारत और ऑस्ट्रेलिया मिलकर बड़े अवसर पैदा कर सकते हैं। इनमें शामिल हैं:
क्लीन एनर्जी और ग्रीन हाइड्रोजन
क्रिटिकल मिनरल्स और माइनिंग
उन्नत विनिर्माण
कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI)
फिनटेक और डिजिटल इकोनॉमी
एविएशन और लॉजिस्टिक्स
फूड प्रोसेसिंग
शहरी विकास
रक्षा क्षेत्र
सेमीकंडक्टर और उभरती तकनीकें
उन्होंने कहा कि भविष्य की वैश्विक अर्थव्यवस्था इन क्षेत्रों पर आधारित होगी और भारत-ऑस्ट्रेलिया साझेदारी इसमें महत्वपूर्ण योगदान दे सकती है।
रेयर अर्थ्स और लिथियम पर विशेष फोकस
दुनिया में इलेक्ट्रिक वाहनों और बैटरी तकनीक की बढ़ती मांग को देखते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने रेयर अर्थ्स, लिथियम और बैटरी निर्माण के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया।
ऑस्ट्रेलिया दुनिया के प्रमुख लिथियम उत्पादक देशों में शामिल है, जबकि भारत इलेक्ट्रिक मोबिलिटी और बैटरी विनिर्माण को बढ़ावा दे रहा है। ऐसे में दोनों देशों के बीच सहयोग वैश्विक सप्लाई चेन को मजबूत करने में मदद कर सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह साझेदारी भारत को ऊर्जा भंडारण तकनीक और इलेक्ट्रिक वाहन उद्योग में प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त दिला सकती है।
CECA समझौते को जल्द पूरा करने की अपील
प्रधानमंत्री मोदी ने 2022 में हुए व्यापार समझौते का उल्लेख करते हुए व्यापक आर्थिक सहयोग समझौते (CECA) को जल्द अंतिम रूप देने की अपील की।
उन्होंने कहा कि यह समझौता दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश को नई गति देगा। इससे कंपनियों को बेहतर बाजार पहुंच मिलेगी और आर्थिक संबंध और मजबूत होंगे।
व्यापार विशेषज्ञों का मानना है कि CECA समझौता लागू होने के बाद दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है।
राज्यों और प्रांतों के बीच सीधी साझेदारी का सुझाव
प्रधानमंत्री मोदी ने एक नया सुझाव देते हुए कहा कि भारत के राज्यों और ऑस्ट्रेलिया के प्रांतों के बीच सीधे सहयोग को बढ़ावा दिया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि स्थानीय स्तर पर साझेदारी बढ़ने से निवेश, शिक्षा, तकनीक और कौशल विकास के नए अवसर पैदा होंगे। इससे दोनों देशों के लोगों के बीच संपर्क और सहयोग भी मजबूत होगा।
भविष्य की रणनीतिक साझेदारी की ओर कदम
मेलबर्न में अपने संबोधन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने स्पष्ट किया कि भारत और ऑस्ट्रेलिया के संबंध केवल आर्थिक लाभ तक सीमित नहीं हैं। दोनों देश लोकतांत्रिक मूल्यों, इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में स्थिरता और नियम-आधारित वैश्विक व्यवस्था के समर्थक हैं।
उन्होंने कहा कि साझा मूल्यों और साझा हितों के कारण दोनों देशों की साझेदारी आने वाले वर्षों में और मजबूत होगी।
मेलबर्न में भारत-ऑस्ट्रेलिया CEO फोरम को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत की विकास यात्रा, हरित ऊर्जा मिशन और निवेश संभावनाओं का व्यापक खाका प्रस्तुत किया। उन्होंने 2030 तक 500 गीगावाट अक्षय ऊर्जा क्षमता, 2047 तक 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा और 2070 तक नेट-जीरो उत्सर्जन के लक्ष्यों को दोहराते हुए भारत को भविष्य की वैश्विक अर्थव्यवस्था का प्रमुख केंद्र बताया।
साथ ही उन्होंने ऑस्ट्रेलियाई निवेशकों को ऊर्जा, इंफ्रास्ट्रक्चर, तकनीक, खनन और उन्नत विनिर्माण जैसे क्षेत्रों में साझेदारी के लिए आमंत्रित किया। यह संदेश केवल निवेश आकर्षित करने का प्रयास नहीं था, बल्कि भारत की उस दीर्घकालिक रणनीति का हिस्सा था जिसके तहत देश खुद को स्वच्छ ऊर्जा, तकनीकी नवाचार और सतत विकास का वैश्विक नेतृत्वकर्ता बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।














