नोएडा। आज की भागदौड़ भरी जीवनशैली, लगातार बढ़ता मानसिक तनाव, मोबाइल और लैपटॉप पर बढ़ती निर्भरता तथा गलत दिनचर्या लोगों के स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव डाल रही है। इन्हीं चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए सेक्टर-73 स्थित महादेव अपार्टमेंट में रविवार को स्वास्थ्य, मानसिक संतुलन और स्वच्छता को लेकर एक विशेष जागरूकता अभियान आयोजित किया गया। यह कार्यक्रम आईकेयर नोएडा अभियान के अंतर्गत आयोजित हुआ, जिसमें लोगों को केवल बीमारी के इलाज नहीं, बल्कि बीमारी से बचाव और बेहतर जीवनशैली अपनाने का संदेश दिया गया।
आरएसआई और गलत पोस्चर बन रहे बड़ी समस्या
कार्यक्रम में फर्स्ट रिहैब फाउंडेशन के निदेशक, फिजियोथेरेपिस्ट एवं एर्गोनोमिस्ट डॉ. महिपाल सिंह ने स्वास्थ्य से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने रिपीटेटिव स्ट्रेन इंजरी (RSI), पोस्चरल करेक्शन, भावनात्मक स्वास्थ्य, मानसिक संतुलन और हीट वेव से बचाव जैसे विषयों को गंभीरता से समझाया।
उन्होंने बताया कि आज लगातार मोबाइल, कंप्यूटर और लैपटॉप पर लंबे समय तक काम करने के कारण गलत बैठने की आदतें तेजी से बढ़ रही हैं। गलत पोस्चर केवल गर्दन या पीठ दर्द तक सीमित नहीं रहता, बल्कि भविष्य में गंभीर मस्कुलोस्केलेटल समस्याओं का कारण बन सकता है।

शरीर, दिमाग और मन का संतुलन है सबसे जरूरी
डॉ. महिपाल सिंह ने कहा कि इंसान का स्वास्थ्य केवल शरीर तक सीमित नहीं है। मन, मस्तिष्क और शरीर तीनों मिलकर व्यक्ति की संपूर्ण कार्यक्षमता तय करते हैं।
उन्होंने समझाया कि जब शरीर में हल्का दर्द, थकान, तनाव या असहजता लंबे समय तक बनी रहती है तो व्यक्ति के व्यवहार में बदलाव आने लगते हैं। चिड़चिड़ापन बढ़ता है, मानसिक दबाव बढ़ता है और इसका असर केवल व्यक्ति तक सीमित नहीं रहता, बल्कि परिवार और सामाजिक रिश्तों पर भी पड़ता है।
उन्होंने कहा कि मानसिक स्थिति खराब होने पर लोग अक्सर अकेले रहने लगते हैं और संवाद कम कर देते हैं, जिससे तनाव और बढ़ता है।

भावनात्मक स्वास्थ्य भी उतना ही महत्वपूर्ण
डॉ. महिपाल सिंह ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि व्यक्ति के बोलने का तरीका, व्यवहार और भावनात्मक स्थिति भी उसके स्वास्थ्य को प्रभावित करती है।
उन्होंने कहा कि आधुनिक जीवनशैली में मानसिक स्वास्थ्य को अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है, जबकि लगातार तनाव, चिंता और नकारात्मक सोच शरीर की कार्यप्रणाली को प्रभावित करती है। अगर मन स्वस्थ रहेगा तो व्यक्ति की कार्यक्षमता, निर्णय क्षमता और पारिवारिक वातावरण भी बेहतर रहेगा।
हीट वेव को लेकर भी किया गया जागरूक
कार्यक्रम के दौरान बढ़ती गर्मी और हीट वेव के खतरों को लेकर भी लोगों को जागरूक किया गया।
डॉ. महिपाल सिंह ने पर्याप्त पानी पीने, शरीर को हाइड्रेट रखने, अत्यधिक धूप से बचने, संतुलित आहार लेने और गर्मी के दौरान विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी।
उन्होंने कहा कि मौसम में हो रहे बदलावों के बीच स्वास्थ्य सुरक्षा को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाना जरूरी हो गया है।
स्वच्छता अभियान और पौधारोपण से दिया सामाजिक जिम्मेदारी का संदेश
इस दौरान ऑक्यूपेशनल थेरेपिस्ट एवं प्रबंध निदेशक डॉ. दीक्षा श्रीवास्तव भी मौजूद रहीं। कार्यक्रम के अंतर्गत सोसाइटी के निवासियों ने स्वच्छता अभियान चलाया और पौधारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया।
सामुदायिक भागीदारी के माध्यम से लोगों को यह समझाने का प्रयास किया गया कि बेहतर स्वास्थ्य केवल व्यक्तिगत प्रयासों से नहीं, बल्कि सामाजिक जागरूकता और सामूहिक भागीदारी से भी जुड़ा हुआ है।

बच्चों ने भी निभाई सामाजिक जिम्मेदारी
कार्यक्रम की विशेष बात यह रही कि फर्स्ट रिहैब फाउंडेशन के बच्चों द्वारा तैयार किए गए हैंडवॉश, सैनिटाइज़र और साबुन जैसे स्वच्छता उत्पादों का वितरण भी किया गया।
यह पहल बच्चों में सामाजिक भागीदारी, स्वच्छता के प्रति जागरूकता और जिम्मेदारी की भावना विकसित करने की दिशा में एक सकारात्मक प्रयास बनकर सामने आई।
क्यों जरूरी हैं ऐसे अभियान?
बढ़ती जीवनशैली संबंधी बीमारियों की रोकथाम
मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता
गलत पोस्चर और स्क्रीन आधारित जीवनशैली से बचाव
हीट वेव जैसी चुनौतियों के प्रति सतर्कता
स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा
सामुदायिक स्वास्थ्य शिक्षा का विस्तार
आज के समय में स्वास्थ्य केवल इलाज का विषय नहीं, बल्कि जागरूकता, रोकथाम और संतुलित जीवनशैली का विषय बन चुका है। सेक्टर-73 में आयोजित यह अभियान इसी दिशा में समाज को जागरूक करने वाली एक महत्वपूर्ण पहल साबित हुआ।














