ग्रेटर नोएडा: यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यीडा) की स्थापना वर्ष 2001 में क्षेत्र को औद्योगिक, आर्थिक और शहरी विकास के नए केंद्र के रूप में विकसित करने के उद्देश्य से की गई थी। लगभग 25 वर्षों के बाद भी प्राधिकरण की कई महत्वाकांक्षी परियोजनाएं पूरी तरह धरातल पर नहीं उतर पाई हैं, जिसके चलते इसकी कार्यशैली और विकास की गति को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
यमुना प्राधिकरण क्षेत्र का दौरा करने और स्थानीय लोगों से बातचीत करने पर यह सामने आया कि क्षेत्र में विकास को लेकर उम्मीदें तो बड़ी हैं, लेकिन अपेक्षित परिणाम अभी तक व्यापक रूप से दिखाई नहीं दे रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि वर्षों से अनेक बड़ी परियोजनाओं की घोषणाएं की जाती रही हैं, लेकिन उनमें से कई योजनाएं अभी भी विभिन्न चरणों में हैं।
कई महत्वाकांक्षी परियोजनाएं अब भी विकासाधीन
यमुना प्राधिकरण द्वारा समय-समय पर फिल्म सिटी, हेरिटेज सिटी, फाइनेंशियल सिटी, जापानी एवं कोरियन सिटी, मेडिकल डिवाइस पार्क, इलेक्ट्रॉनिक्स पार्क, सेमीकंडक्टर पार्क, मल्टी मॉडल लॉजिस्टिक पार्क, एयरपोर्ट मेट्रो और पॉड टैक्सी जैसी परियोजनाओं की घोषणा की गई है।
हालांकि इनमें से कई परियोजनाओं पर कार्य जारी है, लेकिन स्थानीय स्तर पर लोगों का मानना है कि इन योजनाओं का प्रभाव अभी तक अपेक्षित रूप से दिखाई नहीं दे रहा है। उनका कहना है कि घोषित परियोजनाओं और जमीनी प्रगति के बीच अंतर महसूस किया जा सकता है।
जेवर एयरपोर्ट से जुड़ी हैं सबसे अधिक उम्मीदें
यमुना प्राधिकरण क्षेत्र में नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा (जेवर एयरपोर्ट) सबसे महत्वपूर्ण परियोजना माना जा रहा है। हवाई अड्डे का निर्माण कार्य तेजी से आगे बढ़ रहा है और इसके शुरू होने के बाद क्षेत्र में निवेश, रोजगार और शहरी विकास की नई संभावनाएं बनने की उम्मीद जताई जा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि एयरपोर्ट के संचालन से यमुना क्षेत्र को नई पहचान मिल सकती है। हालांकि कुछ स्थानीय लोग यह भी सवाल उठा रहे हैं कि क्या पूरे क्षेत्र की विकास यात्रा का मूल्यांकन केवल एक परियोजना के आधार पर किया जाना चाहिए।
रोजगार और औद्योगिक विकास पर भी उठ रहे प्रश्न
यमुना प्राधिकरण का गठन मुख्य रूप से औद्योगिक विकास को बढ़ावा देने के लिए किया गया था। क्षेत्र में बड़ी संख्या में औद्योगिक भूखंड आवंटित किए गए हैं और निवेश आकर्षित करने के प्रयास लगातार किए जा रहे हैं।
इसके बावजूद स्थानीय लोगों का कहना है कि उद्योगों की वास्तविक स्थिति, उत्पादन और रोजगार सृजन को लेकर विस्तृत और सार्वजनिक समीक्षा की आवश्यकता है। उनका मानना है कि क्षेत्र में स्थापित होने वाली परियोजनाओं का लाभ स्थानीय युवाओं तक किस स्तर तक पहुंचा है, इसका आकलन किया जाना चाहिए।
किसानों और निवेशकों की अपेक्षाएं
यमुना प्राधिकरण क्षेत्र के अनेक किसानों ने विकास योजनाओं के लिए अपनी भूमि उपलब्ध कराई थी। किसानों और निवेशकों को उम्मीद थी कि क्षेत्र में तेजी से शहरी और औद्योगिक विकास होगा, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी।
कई ग्रामीणों का कहना है कि विकास कार्यों की गति और रोजगार के अवसरों को लेकर उनकी अपेक्षाओं के अनुरूप परिणाम अभी पूरी तरह सामने नहीं आए हैं। हालांकि क्षेत्र में एयरपोर्ट और अन्य परियोजनाओं के कारण भविष्य को लेकर आशा भी बनी हुई है।
स्थानीय लोगों ने जताई नाराजगी
क्षेत्र के कई गांवों में लोगों ने विकास कार्यों की गति पर असंतोष व्यक्त किया। कुछ लोगों ने नाम प्रकाशित न करने की शर्त पर कहा कि वर्षों से कई परियोजनाओं की घोषणा हो रही है, लेकिन उनका लाभ आम लोगों को अपेक्षित रूप से नहीं मिल पाया है।
कुछ स्थानीय निवासियों ने प्राधिकरण की कार्यप्रणाली, प्रशासनिक प्रक्रियाओं और परियोजनाओं के क्रियान्वयन की गति पर भी सवाल उठाए। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग
स्थानीय नागरिकों और निवेशकों का कहना है कि विकास परियोजनाओं की वास्तविक प्रगति, निवेश, रोजगार सृजन और समयसीमा को लेकर नियमित सार्वजनिक जानकारी उपलब्ध कराई जानी चाहिए। उनका मानना है कि इससे जनता का विश्वास और अधिक मजबूत होगा।
विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी विकास प्राधिकरण की सफलता का आकलन केवल घोषणाओं से नहीं, बल्कि समयबद्ध परियोजनाओं, रोजगार सृजन, औद्योगिक गतिविधियों और नागरिक सुविधाओं के आधार पर किया जाता है।
भविष्य की दिशा पर टिकी निगाहें
यमुना प्राधिकरण के पास विशाल भूमि बैंक, यमुना एक्सप्रेसवे, नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा और बड़े निवेश आकर्षित करने की क्षमता मौजूद है। ऐसे में आने वाले वर्षों को प्राधिकरण के लिए निर्णायक माना जा रहा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि अब नई घोषणाओं से अधिक आवश्यकता उन परियोजनाओं को समय पर पूरा करने की है, जिनसे क्षेत्र के विकास, रोजगार और निवेश की उम्मीदें जुड़ी हुई हैं।
यमुना प्राधिकरण के सामने सबसे बड़ी चुनौती केवल परियोजनाओं को पूरा करना नहीं, बल्कि किसानों, निवेशकों और आम नागरिकों के विश्वास को मजबूत करना भी है। विकास की वास्तविक तस्वीर आने वाले वर्षों में जमीनी स्तर पर दिखाई देने वाले परिणामों से तय होगी।














