ग्रेटर नोएडा के सेक्टर-152 स्थित प्रतिष्ठित आवासीय परियोजना एटीएस पिक्चरेस्क में गुरुवार को एक बड़ा और हृदयविदारक हादसा हो गया। निर्माणाधीन टावर-23 की 37वीं मंजिल पर शटरिंग कार्य के दौरान सुरक्षा बेल्ट टूट जाने से दो मजदूर सैकड़ों फीट की ऊंचाई से नीचे गिर गए। हादसा इतना भयावह था कि दोनों श्रमिकों की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई।
मृतक श्रमिक मूल रूप से पश्चिम बंगाल के निवासी बताए जा रहे हैं और लंबे समय से परियोजना में कार्यरत थे। घटना के बाद निर्माण स्थल पर अफरा-तफरी मच गई, जबकि अन्य मजदूरों में भय और आक्रोश का माहौल देखा गया।
मुख्यमंत्री योगी ने लिया तत्काल संज्ञान
हादसे की सूचना मिलते ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मामले का संज्ञान लेते हुए अधिकारियों को जांच और आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए। प्रशासनिक अमला तत्काल मौके पर पहुंचा और घटनास्थल का निरीक्षण किया। एसडीएम सदर की टीम ने भी घटनास्थल पर पहुंचकर जांच शुरू कर दी है।
पुलिस ने दर्ज किया मुकदमा
नॉलेज पार्क थाना पुलिस ने मामले में तत्काल मुकदमा दर्ज कर लिया है। पुलिस, श्रम विभाग और प्रशासनिक अधिकारी यह पता लगाने में जुटे हैं कि हादसा तकनीकी खामी, सुरक्षा उपकरणों की गुणवत्ता में कमी या किसी मानवीय लापरवाही का परिणाम था।
सबसे बड़ा सवाल — क्या मजदूरों की सुरक्षा सिर्फ कागजों तक सीमित?
इस हादसे ने निर्माण स्थलों पर श्रमिक सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
37वीं मंजिल जैसी अत्यंत जोखिमपूर्ण ऊंचाई पर काम कर रहे श्रमिकों के लिए क्या पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम किए गए थे?
यदि सुरक्षा बेल्ट लगी हुई थी, तो वह आखिर टूटी कैसे?
क्या सुरक्षा उपकरणों की नियमित जांच और गुणवत्ता परीक्षण किया जा रहा था?
क्या निर्माण कंपनी और संबंधित ठेकेदारों ने श्रम सुरक्षा मानकों का पूर्ण पालन किया था?
क्या इस हादसे को बेहतर सुरक्षा प्रबंधन के जरिए रोका जा सकता था?
थाना नॉलेज पार्क क्षेत्रांतर्गत सेक्टर-152 में निर्माणाधीन ATS सोसाइटी के एक टॉवर पर काम करते हुए दो मजदूर 37 वीं मंजिल से सेफ्टी पिन टूट जाने के कारण गिर गए हैं। जिनको तत्काल उपचार हेतु अस्पताल भिजवाया गया है। जहाँ डॉक्टरों द्वारा दोनों मजदूरों को मृत घोषित कर दिया गया है। थाना… pic.twitter.com/DTvnNdARb9
— POLICE COMMISSIONERATE GAUTAM BUDDH NAGAR (@noidapolice) June 11, 2026
दो परिवारों पर टूटा दुखों का पहाड़
रोजी-रोटी की तलाश में सैकड़ों किलोमीटर दूर आए इन श्रमिकों के परिवारों पर इस हादसे ने दुखों का पहाड़ तोड़ दिया है। जिन हाथों से उनके घरों का चूल्हा जलता था, वे हमेशा के लिए खामोश हो गए। अब सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि पीड़ित परिवारों को न्याय, मुआवजा और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई कब और कैसे सुनिश्चित होगी।
निष्पक्ष जांच और जवाबदेही की मांग
यह घटना केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि निर्माण स्थलों पर सुरक्षा मानकों की वास्तविक स्थिति की गंभीर परीक्षा है। यदि जांच में किसी भी स्तर पर लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदार व्यक्तियों और संस्थाओं के खिलाफ कठोर कार्रवाई होना आवश्यक है। साथ ही यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि भविष्य में किसी भी श्रमिक को सुरक्षा में चूक की कीमत अपनी जान देकर न चुकानी पड़े।
ग्रेटर नोएडा का यह हादसा एक बार फिर याद दिलाता है कि विकास और ऊंची इमारतों की चमक के पीछे काम करने वाले श्रमिकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए, क्योंकि किसी भी निर्माण परियोजना की सबसे बड़ी पूंजी उसकी मानव शक्ति होती है।














