नई दिल्ली। कांग्रेस नेतृत्व की गुरुवार को हुई महत्वपूर्ण बैठक में एक ऐसा सवाल उठा जिसने पार्टी की जमीनी हकीकत को सामने ला दिया। कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने संगठन की स्थिति पर सीधे सवाल उठाते हुए कहा कि केवल आंदोलनों और घोषणाओं से राजनीतिक लड़ाई नहीं जीती जा सकती, जब तक पार्टी का बूथ स्तर पर मजबूत ढांचा मौजूद न हो।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में राहुल गांधी, केसी वेणुगोपाल, प्रियंका गांधी वाड्रा, जयराम रमेश सहित कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। हालिया विधानसभा चुनावों के बाद महासचिवों और प्रदेश प्रभारियों की यह पहली संयुक्त समीक्षा बैठक थी।
“बूथ पर संगठन है कहां?”
बैठक के दौरान प्रियंका गांधी ने संगठन की वास्तविक स्थिति पर चिंता जताते हुए कहा कि पार्टी लगातार जनता के मुद्दों को उठाने और बूथ स्तर तक पहुंचाने की बात करती है, लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या बूथ स्तर पर कांग्रेस का प्रभावी संगठन मौजूद है?
उनका यह बयान कांग्रेस के लिए आत्ममंथन का संकेत माना जा रहा है। प्रियंका गांधी ने स्पष्ट कहा कि यदि जमीनी कार्यकर्ता और बूथ नेटवर्क मजबूत नहीं होगा तो केवल राजनीतिक घोषणाएं और अभियान अपेक्षित परिणाम नहीं दे पाएंगे।
हर मुद्दे पर आंदोलन नहीं, रणनीतिक फोकस जरूरी
प्रियंका गांधी ने यह भी कहा कि कांग्रेस को हर मुद्दे पर आंदोलन और प्रदर्शन करने की रणनीति से बाहर निकलना होगा। उन्होंने सुझाव दिया कि पार्टी को एक समय में जनता से जुड़े एक-दो महत्वपूर्ण मुद्दों पर केंद्रित होकर लंबी और प्रभावी लड़ाई लड़नी चाहिए।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह टिप्पणी कांग्रेस की वर्तमान कार्यशैली पर एक महत्वपूर्ण संकेत है। लगातार कई मुद्दों को एक साथ उठाने से पार्टी का संदेश बिखर जाता है और जनता के बीच उसका प्रभाव कम हो जाता है।
युवाओं और छात्रों के मुद्दों को केंद्र में रखने की तैयारी
बैठक में नीट-यूजी परीक्षा, भर्ती परीक्षाओं में पेपर लीक, सीबीएसई की ऑन-स्क्रीन मार्किंग प्रणाली तथा शिक्षा व्यवस्था से जुड़े विवादों पर विस्तार से चर्चा हुई।
कांग्रेस नेतृत्व का मानना है कि देश का युवा वर्ग वर्तमान समय में सबसे अधिक प्रभावित वर्ग है। बेरोजगारी, परीक्षा घोटाले और भर्ती प्रक्रियाओं में अनियमितताओं ने करोड़ों युवाओं के भविष्य पर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं।
मल्लिकार्जुन खरगे ने भी कहा कि नीट और अन्य भर्ती परीक्षाओं में सामने आए विवादों ने युवाओं और उनके परिवारों का शिक्षा व्यवस्था से विश्वास कमजोर किया है। राहुल गांधी स्वयं प्रभावित छात्रों और युवाओं से मिलकर उनकी समस्याओं को राष्ट्रीय स्तर पर उठाते रहे हैं।
कांग्रेस के सामने दोहरी चुनौती
राजनीतिक दृष्टि से कांग्रेस इस समय दोहरी चुनौती का सामना कर रही है—
पहली चुनौती: भाजपा के मजबूत संगठनात्मक ढांचे और चुनावी मशीनरी का मुकाबला करना।
दूसरी चुनौती: अपने ही संगठन को बूथ स्तर तक पुनर्जीवित करना।
प्रियंका गांधी का बयान इसी दूसरी चुनौती की ओर इशारा करता है। उनका संदेश साफ है कि केवल सरकार की आलोचना या आंदोलनों से राजनीतिक जमीन तैयार नहीं होगी, बल्कि मजबूत संगठन, सक्रिय कार्यकर्ता और निरंतर जनसंपर्क ही कांग्रेस को पुनर्जीवित कर सकते हैं।
संविधान और लोकतांत्रिक संस्थाओं की रक्षा का मुद्दा
बैठक में संविधान, लोकतंत्र और सामाजिक न्याय के मुद्दों पर भी चर्चा हुई। खरगे ने कहा कि जिन लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत बनाने में दशकों लगे, उन्हें कमजोर करने के प्रयास हो रहे हैं। ऐसे समय में कांग्रेस की जिम्मेदारी केवल राजनीतिक संघर्ष तक सीमित नहीं है, बल्कि संविधान और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा करना भी उसका दायित्व है।
राजनीतिक संदेश क्या है?
इस बैठक से निकलकर आया सबसे बड़ा संदेश यह है कि कांग्रेस अब केवल सरकार विरोधी राजनीति तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि अपने संगठनात्मक ढांचे की कमजोरियों को स्वीकार करते हुए उसे मजबूत करने की दिशा में कदम बढ़ाना चाहती है।
प्रियंका गांधी की टिप्पणी केवल एक संगठनात्मक समीक्षा नहीं, बल्कि कांग्रेस के लिए चेतावनी भी है कि यदि जमीनी ढांचा मजबूत नहीं हुआ तो बड़े मुद्दे उठाने के बावजूद राजनीतिक लाभ हासिल करना मुश्किल होगा।
आने वाले महीनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि कांग्रेस युवाओं, बेरोजगारी, परीक्षा घोटालों और महंगाई जैसे मुद्दों को किस रणनीति के तहत आगे बढ़ाती है और क्या वह बूथ स्तर पर संगठन को मजबूत करने में सफल हो पाती है।














