नोएडा: बढ़ती आबादी और तेजी से हो रहे शहरी विस्तार के बीच नोएडा में सीवर व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। 11 सितंबर 2026 को सेक्टर-56 के डी, एफ, जी ब्लॉक तथा जनता फ्लैट्स की सीवर समस्या के स्थायी समाधान के लिए नवनिर्मित सम्पवेल का लोकार्पण किया गया। इसी अवसर पर सेक्टर-51 की सीवर समस्या के समाधान के लिए प्रस्तावित 8 MLD क्षमता वाले सम्पवेल का शिलान्यास भी किया गया।
कार्यक्रम में गौतमबुद्धनगर के सांसद डॉ. महेश शर्मा, नोएडा के विधायक श्री पंकज सिंह तथा नोएडा प्राधिकरण के अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी (पीआरएस) और महाप्रबंधक (जल) सहित संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।
सेक्टर-56 में 5 MLD क्षमता का सम्पवेल तैयार
सेक्टर-56 के डी, एफ, जी ब्लॉक और जनता फ्लैट्स में सीवर की बढ़ती समस्या को देखते हुए नवनिर्मित सम्पवेल को अब संचालन के लिए तैयार किया गया है। इसकी उत्सर्जन क्षमता 5 MLD यानी प्रतिदिन 50 लाख लीटर सीवर प्रवाह को संभालने की है।
इस परियोजना के निर्माण पर लगभग 142.61 लाख रुपये की लागत आई है। अधिकारियों के अनुसार, इस सम्पवेल के संचालन से सेक्टर-56 से निकलने वाले सीवर का बेहतर तरीके से निस्तारण सुनिश्चित किया जा सकेगा।
स्थापित सम्पवेल से सेक्टर-56 से उत्सर्जित सीवर को सीवर पंपिंग स्टेशन-55 के माध्यम से सीवर ट्रीटमेंट प्लांट, सेक्टर-54 तक पहुंचाया जाएगा, जहां इसका उपचार किया जाएगा। इससे मौजूदा सीवर नेटवर्क पर दबाव कम होने के साथ क्षेत्र में जल निकासी व्यवस्था भी अधिक प्रभावी होने की उम्मीद है।
बढ़ती आबादी को ध्यान में रखकर बनाई गई योजना
नोएडा के सेक्टरों में लगातार बढ़ती आबादी के कारण सीवर नेटवर्क पर दबाव बढ़ रहा है। ऐसे में केवल मौजूदा समस्या का समाधान करना ही नहीं, बल्कि भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए सीवर इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करना भी जरूरी है।
सेक्टर-56 में तैयार किए गए इस सम्पवेल की क्षमता इसी भविष्य की आवश्यकता को ध्यान में रखकर तय की गई है। परियोजना के पूरा होने के बाद आने वाले वर्षों में सेक्टर-56 की आबादी बढ़ने पर भी सीवर निस्तारण व्यवस्था के प्रभावित होने की संभावना कम होगी।
सेक्टर-56 के लिए 5 MLD की क्षमता वाला यह सम्पवेल भविष्य की आबादी के दबाव को देखते हुए तैयार किया गया है।
सेक्टर-51 में 8 MLD के सम्पवेल का शिलान्यास
इसी कार्यक्रम के दौरान सेक्टर-51 की सीवर समस्या के समाधान के लिए प्रस्तावित नए सम्पवेल का शिलान्यास किया गया। प्रस्तावित सम्पवेल की क्षमता 8 MLD होगी। इसके निर्माण पर लगभग 483.34 लाख रुपये खर्च किए जाने का अनुमान है।
यह परियोजना केवल सेक्टर-51 तक सीमित नहीं होगी, बल्कि इसके माध्यम से आसपास के कई क्षेत्रों की सीवर व्यवस्था को भी बेहतर तरीके से जोड़ा जाएगा। प्रस्तावित योजना के तहत सेक्टर-51 (पार्ट-बी), केंद्रीय विहार, होशियारपुर तथा दो ड्रेन डी-11 और डी-10 को इस सम्पवेल के माध्यम से जोड़े जाने की योजना है।
इसके बाद सीवर को एसटीपी-50 के माध्यम से शोधित करते हुए निस्तारित किया जाएगा। इस व्यवस्था का उद्देश्य सीवर के व्यवस्थित संग्रह, पंपिंग और उपचार को एक बेहतर नेटवर्क से जोड़ना है।
NGT के निर्देशों के अनुरूप होगा सीवर निस्तारण
सेक्टर-51 में प्रस्तावित सम्पवेल परियोजना को राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) के दिशा-निर्देशों के क्रम में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। योजना के तहत संबंधित क्षेत्रों और ड्रेनों से आने वाले प्रवाह को सम्पवेल के माध्यम से जोड़कर एसटीपी-50 तक पहुंचाया जाएगा।
वहां सीवर का शोधन किए जाने के बाद उसका निस्तारण किया जाएगा। इससे खुले तौर पर सीवर के प्रवाह और उससे जुड़ी पर्यावरणीय समस्याओं को नियंत्रित करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
एक परियोजना पूरी, दूसरी की शुरुआत
11 सितंबर का दिन नोएडा की सीवर व्यवस्था के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण रहा क्योंकि एक तरफ सेक्टर-56 की लंबे समय से चली आ रही सीवर समस्या के समाधान के लिए तैयार सम्पवेल का लोकार्पण हुआ, वहीं दूसरी तरफ सेक्टर-51 और आसपास के क्षेत्रों के लिए बड़े स्तर की नई परियोजना की शुरुआत की गई।
5 MLD क्षमता वाले सेक्टर-56 सम्पवेल और 8 MLD क्षमता वाले प्रस्तावित सेक्टर-51 सम्पवेल के जरिए नोएडा प्राधिकरण ने सीवर नेटवर्क की क्षमता बढ़ाने की दिशा में कदम आगे बढ़ाया है।
आज, दिनांक 11.09.2026 को नौएडा क्षेत्र में बढ़ती आबादी के दृष्टिगत सीवर व्यवस्था को सुदृढ़ करने हेतु सैक्टर-56 में नवनिर्मित सम्पवेल का लोकार्पण एवं सैक्टर-51 में सम्पवेल का शिलान्यास किया गया। कार्यक्रम में माननीय सांसद डॉ. महेश शर्मा @dr_maheshsharma, माननीय विधायक श्री पंकज… pic.twitter.com/y4WDsMjtMz
— NOIDA Authority (@noida_authority) September 11, 2026
सेक्टर-51 परियोजना के पूरा होने के बाद कई आवासीय क्षेत्रों और दो प्रमुख ड्रेनों को एसटीपी-50 से जोड़कर सीवर का वैज्ञानिक तरीके से उपचार और निस्तारण किया जा सकेगा।
स्थानीय क्षेत्रों को मिलेगी राहत
सीवर से जुड़ी समस्याएं किसी भी शहरी क्षेत्र में लोगों के लिए बड़ी परेशानी का कारण बनती हैं। सीवर ओवरफ्लो, जलभराव और निकासी की समस्या से जहां आम लोगों को असुविधा होती है, वहीं इससे पर्यावरण और सार्वजनिक स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
सेक्टर-56 में नए सम्पवेल के संचालन से डी, एफ, जी ब्लॉक और जनता फ्लैट्स को राहत मिलने की उम्मीद है। वहीं सेक्टर-51 में प्रस्तावित परियोजना का दायरा बड़ा होने के कारण सेक्टर-51 पार्ट-बी के साथ केंद्रीय विहार, होशियारपुर और संबंधित ड्रेनों की व्यवस्था को भी इससे लाभ मिलेगा।
सीवर नेटवर्क को भविष्य के लिए तैयार करने पर जोर
नोएडा में लगातार बढ़ती आबादी और नए आवासीय क्षेत्रों के विकास को देखते हुए सीवर नेटवर्क को भविष्य की जरूरतों के अनुरूप तैयार करना बड़ी चुनौती है। नई सम्पवेल परियोजनाएं इसी दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही हैं।
सेक्टर-56 में 5 MLD क्षमता का सम्पवेल जहां वर्तमान और भविष्य के सीवर दबाव को संभालने के लिए तैयार किया गया है, वहीं सेक्टर-51 में 8 MLD क्षमता का प्रस्तावित सम्पवेल आसपास के व्यापक क्षेत्र को सीवर नेटवर्क से जोड़ने का काम करेगा।
दोनों परियोजनाओं में सीवर को पंपिंग सिस्टम के जरिए संबंधित एसटीपी तक पहुंचाकर उपचारित करने की व्यवस्था रखी गई है। इससे सीवर निस्तारण की प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित और वैज्ञानिक बनाने में मदद मिलेगी।
नोएडा में बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करने की कवायद
कार्यक्रम में मौजूद जनप्रतिनिधियों और नोएडा प्राधिकरण के अधिकारियों की मौजूदगी में इन दोनों परियोजनाओं को क्षेत्र की आधारभूत सुविधाओं के विस्तार से जोड़कर देखा गया। शहर में सड़क, पानी और बिजली के साथ-साथ सीवर व्यवस्था को मजबूत करना भी तेजी से बढ़ते शहरी क्षेत्रों की प्रमुख जरूरत बन चुका है।
सेक्टर-56 में परियोजना पूरी होने के बाद अब लोगों को इसके संचालन से राहत मिलने की उम्मीद है। वहीं सेक्टर-51 में 8 MLD क्षमता के सम्पवेल के निर्माण के बाद आसपास के क्षेत्रों में सीवर निस्तारण की व्यवस्था को और मजबूत किया जा सकेगा।
कुल मिलाकर, सेक्टर-56 में 5 MLD सम्पवेल का लोकार्पण और सेक्टर-51 में 8 MLD सम्पवेल का शिलान्यास नोएडा की सीवर व्यवस्था को भविष्य की जरूरतों के अनुरूप मजबूत करने की दिशा में अहम कदम है। इससे न केवल मौजूदा सीवर समस्याओं के समाधान में मदद मिलेगी, बल्कि बढ़ती आबादी के साथ भविष्य में उत्पन्न होने वाले दबाव को भी नियंत्रित करने की तैयारी की जा रही है।














