“भ्रामक विज्ञापन, गलत दावे और लेबल नियमों की अनदेखी पर खाद्य नियामक की सख्ती | डोमिनोज के पांच लाइसेंस निलंबित, अमेजन के एक गोदाम का लाइसेंस रद्द | KFC, मैकडॉनल्ड्स, पिज्जा हट समेत बड़े फूड आउटलेट भी कार्रवाई के दायरे में”
नई दिल्ली। देश में बिकने वाले खाद्य और पेय उत्पादों को लेकर भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने अब तक की अपनी हालिया कार्रवाइयों में बड़ी खाद्य कंपनियों, ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म, रेस्टोरेंट और पांच सितारा होटल श्रृंखलाओं पर शिकंजा कसा है। भ्रामक विज्ञापनों, गलत दावों और लेबल संबंधी नियमों के कथित उल्लंघन को लेकर नियामक ने हाल के महीनों में 150 से अधिक नोटिस जारी किए हैं। कार्रवाई की जद में नेस्ले इंडिया, पेप्सिको, कोका-कोला इंडिया, एबॉट इंडिया, रेड बुल इंडिया और डैनोन इंडिया जैसी बड़ी कंपनियां शामिल हैं।
FSSAI ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट के जरिए हाल के महीनों में की गई कार्रवाई का ब्योरा साझा करते हुए कहा कि खाद्य कानूनों और नियमों के गंभीर उल्लंघन के मामलों में विभिन्न Food Business Operators (FBOs) के खिलाफ कार्रवाई की गई है। नियामक ने साफ किया कि उपभोक्ताओं को सही जानकारी मिले और बाजार में खाद्य उत्पाद निर्धारित मानकों के अनुरूप ही बेचे जाएं, इसके लिए निगरानी और प्रवर्तन कार्रवाई जारी है।
बड़े ब्रांडों पर सीधी नजर
FSSAI की कार्रवाई में जिन प्रमुख कंपनियों के नाम सामने आए हैं, उनमें नेस्ले इंडिया, पेप्सिको, एबॉट इंडिया, रेड बुल इंडिया, डैनोन इंडिया, मॉन्स्टर एनर्जी इंडिया, हेल एनर्जी, मोंडेलेज इंडिया, कोका-कोला इंडिया, डियाजियो, पर्नो रिकार्ड, फेरेरो इंडिया और केनव्यू इंक शामिल हैं।
इन कंपनियों के खिलाफ की गई कार्रवाई का मुख्य आधार भ्रामक विज्ञापन, गलत या अनुचित दावे और खाद्य उत्पादों पर लेबल संबंधी निर्धारित नियमों का पालन नहीं करना बताया गया है। नियामक ने यह भी संकेत दिया है कि कार्रवाई केवल नोटिस तक सीमित नहीं रही, बल्कि गंभीर मामलों में उत्पादों की जब्ती और लाइसेंस संबंधी कदम भी उठाए गए हैं।
खाद्य उत्पादों के पैकेट पर लिखी जानकारी उपभोक्ता के लिए बेहद महत्वपूर्ण होती है। उत्पाद में इस्तेमाल सामग्री, पोषण संबंधी जानकारी, दावे और अन्य आवश्यक विवरणों को लेकर नियम इसलिए बनाए गए हैं ताकि ग्राहक खरीदारी से पहले सही जानकारी के आधार पर फैसला कर सके। ऐसे में गलत या भ्रामक जानकारी को लेकर नियामक की सख्ती सीधे उपभोक्ता अधिकारों से जुड़ती है।
ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म भी नहीं बचे
FSSAI की कार्रवाई का दायरा केवल खाद्य निर्माता कंपनियों तक सीमित नहीं रहा। नियामक ने अमेजन और फ्लिपकार्ट को भी 12 नोटिस जारी किए हैं। FSSAI के मुताबिक, अमेजन के एक गोदाम का लाइसेंस भी रद्द किया गया है।
यह कार्रवाई इसलिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर खाद्य उत्पादों की बिक्री तेजी से बढ़ी है। उपभोक्ता अब पैकेज्ड फूड, पेय पदार्थ, सप्लीमेंट और अन्य खाद्य सामग्री का बड़ा हिस्सा ऑनलाइन खरीदते हैं। ऐसे में ऑनलाइन बिक्री के दौरान उत्पाद की जानकारी और खाद्य सुरक्षा नियमों का पालन सुनिश्चित करना भी नियामक की प्राथमिकता बन गया है।
FSSAI का यह कदम संकेत देता है कि खाद्य सुरक्षा की जिम्मेदारी केवल निर्माता तक सीमित नहीं है। वितरण, भंडारण और बिक्री की प्रक्रिया में जुड़े कारोबारियों और प्लेटफॉर्म को भी निर्धारित नियमों का पालन करना होगा।
डोमिनोज के पांच लाइसेंस निलंबित
रेस्टोरेंट और फूड सर्विस सेक्टर में भी FSSAI ने बड़ी कार्रवाई की है। नियामक के मुताबिक KFC, मैकडॉनल्ड्स, पिज्जा हट, डोमिनोज और कोस्टा कॉफी जैसे प्रमुख खाद्य सेवा प्रतिष्ठानों को 30 से अधिक नोटिस जारी किए गए हैं।
इनमें डोमिनोज के पांच लाइसेंस निलंबित किए जाने की जानकारी भी सामने आई है। लाइसेंस निलंबन जैसी कार्रवाई यह बताती है कि नियामक अब केवल चेतावनी या नोटिस जारी करने तक सीमित नहीं रहना चाहता, बल्कि गंभीर या लगातार सामने आने वाले उल्लंघनों पर कठोर प्रवर्तन कार्रवाई करने के लिए भी तैयार है।
रेस्टोरेंट और फूड आउटलेट में खाद्य सामग्री की गुणवत्ता, भंडारण, तैयारी, प्रस्तुति और उपभोक्ता को दी जाने वाली जानकारी खाद्य सुरक्षा व्यवस्था का अहम हिस्सा है। ऐसे में बड़े ब्रांडों के खिलाफ कार्रवाई से पूरे फूड सर्विस उद्योग में अनुपालन को लेकर दबाव बढ़ना तय माना जा रहा है।
5-स्टार होटल भी जांच के दायरे में
FSSAI ने देश के बड़े होटल और रेस्टोरेंट ब्रांडों पर भी निगरानी बढ़ाई है। मैरियट, हिल्टन, हयात, रैडिसन, फोर सीजन्स और शांगरी-ला समेत 20 से अधिक पांच सितारा होटल और रेस्टोरेंट को नोटिस जारी किए गए।
इससे स्पष्ट है कि खाद्य सुरक्षा मानकों को लागू करने में नियामक छोटे कारोबारियों तक सीमित कार्रवाई नहीं कर रहा। देश और दुनिया के बड़े ब्रांड भी यदि नियमों के दायरे में आते हैं तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जा रही है।
ऊर्जा पेय और मादक पेय भी निगरानी में
FSSAI ने ऊर्जा पेय और मादक पेय बनाने वाली कंपनियों के खिलाफ भी कार्रवाई की है। रेड बुल इंडिया, मॉन्स्टर एनर्जी इंडिया और हेल एनर्जी जैसे ऊर्जा पेय ब्रांडों के नाम सूची में शामिल हैं। वहीं डियाजियो और पर्नो रिकार्ड जैसी कंपनियां भी कार्रवाई के दायरे में आई हैं।
ऊर्जा और मादक पेय से जुड़े उत्पादों में उपभोक्ता को दी जाने वाली जानकारी और लेबलिंग का महत्व और बढ़ जाता है। इसलिए ऐसे उत्पादों पर विज्ञापन, दावे और लेबल संबंधी नियमों के पालन को लेकर नियामक की निगरानी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
नोटिस के बाद कंपनियों ने शुरू किए सुधारात्मक कदम
FSSAI ने इस सप्ताह की शुरुआत में कहा था कि उसके नोटिस के बाद कई कंपनियों ने नियमों के अनुपालन के लिए सुधारात्मक कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। यानी नियामक की कार्रवाई का उद्देश्य केवल दंडात्मक कार्रवाई करना नहीं, बल्कि कंपनियों को खाद्य कानूनों के अनुरूप अपनी प्रक्रियाओं में सुधार के लिए बाध्य करना भी है।
150 से अधिक नोटिसों की कार्रवाई ऐसे समय में सामने आई है जब देश में पैकेज्ड और ब्रांडेड खाद्य उत्पादों का बाजार लगातार विस्तार कर रहा है। विज्ञापन के जरिए उपभोक्ताओं को आकर्षित करने की प्रतिस्पर्धा भी तेज है। ऐसे माहौल में किसी उत्पाद के बारे में किया गया दावा उपभोक्ता के खरीद निर्णय को सीधे प्रभावित करता है।
उपभोक्ता के लिए क्यों अहम है FSSAI की कार्रवाई?
किसी खाद्य उत्पाद का पैकेट केवल बिक्री का माध्यम नहीं होता, बल्कि वह उपभोक्ता के लिए उत्पाद से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी का स्रोत भी होता है। यदि लेबल पर जानकारी अधूरी, गलत या भ्रामक हो तो उपभोक्ता सही फैसला लेने से वंचित हो सकता है।
इसी तरह विज्ञापन में किए गए ऐसे दावे, जो उत्पाद की वास्तविक प्रकृति या गुणों के बारे में उपभोक्ता को भ्रमित कर सकते हैं, खाद्य नियमन के लिहाज से गंभीर विषय हैं। FSSAI की हालिया कार्रवाई इसी व्यापक चिंता को रेखांकित करती है।
बड़े ब्रांड, बड़ी जिम्मेदारी
FSSAI की कार्रवाई का सबसे बड़ा संदेश यही है कि बाजार में किसी भी कंपनी का आकार उसे नियमों से ऊपर नहीं रखता। नेस्ले से लेकर पेप्सिको, कोका-कोला से लेकर बड़े ऊर्जा पेय ब्रांड, ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से लेकर अंतरराष्ट्रीय होटल श्रृंखलाओं तक—खाद्य कारोबार से जुड़े हर पक्ष को निर्धारित मानकों का पालन करना होगा।
हालांकि किसी कंपनी को नोटिस मिलना अपने आप में अंतिम रूप से दोष सिद्ध होना नहीं है। नोटिस नियामक प्रक्रिया का हिस्सा है और संबंधित पक्षों को जवाब तथा अनुपालन सुधार का अवसर मिलता है। लेकिन लाइसेंस निलंबन, लाइसेंस रद्द करने और उत्पाद जब्त करने जैसी कार्रवाइयां यह जरूर दर्शाती हैं कि FSSAI ने खाद्य सुरक्षा और उपभोक्ता हितों को लेकर प्रवर्तन अभियान तेज कर दिया है।
अब निगाह इस बात पर होगी कि नोटिस पाने वाली कंपनियां कितनी तेजी से सुधारात्मक कदम उठाती हैं और FSSAI आगे अनुपालन की निगरानी किस तरह करता है। देश के करोड़ों उपभोक्ताओं के लिए इस पूरी कार्रवाई का सीधा मतलब है—पैकेट पर लिखे दावे, विज्ञापन में किए गए वादे और उत्पाद की वास्तविकता के बीच अंतर पर नियामक की नजर पहले से कहीं ज्यादा कड़ी हो गई है।














