“सेक्टर-105 में स्टेप बाय स्टेप स्कूल के पांच छात्र बने ‘नन्हे पर्यावरण मित्र’, सफाई के साथ लोगों को भी दे रहे जिम्मेदारी निभाने का संदेश”
नोएडा। आमतौर पर बच्चों की दुनिया खेल, पढ़ाई और दोस्तों के साथ मस्ती तक सीमित मानी जाती है, लेकिन नोएडा के सेक्टर-105 में पांच बच्चों ने इस सोच को बदलने की एक प्रेरणादायक पहल शुरू की है। प्रसिद्ध स्टेप बाय स्टेप स्कूल में पढ़ने वाले पांच होनहार बच्चे अपने शहर को साफ-सुथरा, हरा-भरा और सुंदर बनाने के संकल्प के साथ हर महीने नियमित रूप से स्वच्छता अभियान चला रहे हैं। इन बच्चों ने सार्वजनिक स्थानों की सफाई को केवल एक दिन का अभियान नहीं, बल्कि अपनी जिम्मेदारी और नियमित आदत का हिस्सा बनाया है।
प्रशस्त कुमार, तिष्या पुरी, शिवनंदिनी धौल, यशवी टंडन और कबीर सिंह दयाल नाम के ये पांच बच्चे सेक्टर-105 में स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण को लेकर लोगों को जागरूक करने का काम कर रहे हैं। कम उम्र में सामाजिक जिम्मेदारी की समझ और अपने शहर के प्रति यह लगाव उन्हें दूसरों से अलग पहचान देता है।
जब बच्चों ने तय किया—‘शहर हमारा है, जिम्मेदारी भी हमारी’
सेक्टर-105 में इन बच्चों की पहल केवल सफाई तक सीमित नहीं है। उनका उद्देश्य लोगों के बीच यह संदेश पहुंचाना है कि सार्वजनिक स्थान किसी एक व्यक्ति, संस्था या प्राधिकरण की जिम्मेदारी नहीं हैं, बल्कि शहर में रहने वाले प्रत्येक नागरिक की साझा जिम्मेदारी हैं।
बच्चे हर महीने अभियान के लिए जुटते हैं और सार्वजनिक स्थानों को साफ रखने, कूड़ा निर्धारित स्थान पर डालने तथा पेड़-पौधों की देखभाल के प्रति लोगों को जागरूक करते हैं। उनके इस प्रयास में सबसे खास बात यह है कि वे दूसरों को केवल सलाह नहीं दे रहे, बल्कि खुद मैदान में उतरकर अपने हाथों से काम कर रहे हैं।
आज जब शहरों में बढ़ती आबादी के साथ कूड़ा प्रबंधन और पर्यावरण संरक्षण बड़ी चुनौती बनते जा रहे हैं, ऐसे में बच्चों की यह पहल समाज के सामने एक सकारात्मक उदाहरण पेश करती है।
पांच बच्चों की पहल ने बड़ों के सामने खड़ा किया बड़ा सवाल
इन बच्चों का अभियान एक महत्वपूर्ण सवाल भी सामने रखता है—क्या हम अपने शहर को उतना ही अपना समझते हैं, जितना अपना घर?
अक्सर लोग अपने घर और आसपास की सफाई को लेकर सजग रहते हैं, लेकिन सार्वजनिक स्थानों की जिम्मेदारी किसी दूसरे की मान लेते हैं। यही सोच शहरों में गंदगी की समस्या को बढ़ाती है। सेक्टर-105 के इन बच्चों ने अपने व्यवहार से इस सोच को चुनौती देने का प्रयास किया है।
वे यह संदेश दे रहे हैं कि सफाई केवल सरकारी अभियान नहीं, बल्कि नागरिक संस्कार भी है। अगर छोटी उम्र में बच्चे सार्वजनिक स्थानों को स्वच्छ रखने की जिम्मेदारी समझ सकते हैं, तो बड़े लोग भी अपनी भूमिका निभाकर शहर की तस्वीर बदल सकते हैं।
RWA अध्यक्ष ने कहा—‘बदलाव की शुरुआत किसी भी उम्र में हो सकती है’
आरडब्ल्यूए सेक्टर-105 के अध्यक्ष दिव्य कृष्णात्रेय ने बच्चों की इस पहल की खुलकर सराहना की। उन्होंने कहा कि प्राधिकरण और स्वास्थ्य कर्मियों के प्रयासों के साथ आम नागरिकों की भागीदारी भी जरूरी है। जब तक लोग अपनी नैतिक जिम्मेदारी नहीं समझेंगे, तब तक स्वच्छ नोएडा का सपना पूरी तरह साकार नहीं हो सकता।
उन्होंने कहा कि प्रशस्त कुमार, तिष्या पुरी, शिवनंदिनी धौल, यशवी टंडन और कबीर सिंह दयाल जैसे बच्चों की पहल यह साबित करती है कि बदलाव की शुरुआत उम्र देखकर नहीं होती। यदि सोच और नीयत साफ हो तो कोई भी व्यक्ति अपने आसपास सकारात्मक बदलाव ला सकता है।
दिव्य कृष्णात्रेय के मुताबिक, इन बच्चों का प्रयास केवल सेक्टर-105 तक सीमित रहने वाला संदेश नहीं है, बल्कि पूरे नोएडा के लिए प्रेरणा का विषय है।
‘नन्हे पर्यावरण मित्र’ बने शहर के लिए उम्मीद की किरण
इन पांचों बच्चों को स्थानीय स्तर पर ‘नन्हे पर्यावरण मित्र’ के रूप में देखा जा सकता है। उनका प्रयास पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छता को लेकर नई पीढ़ी की सोच को सामने लाता है।
आज बच्चों को पर्यावरण के प्रति जागरूक करने के लिए स्कूलों में अनेक गतिविधियां आयोजित की जाती हैं। लेकिन जब बच्चे उन सीखों को अपने वास्तविक जीवन में उतारते हैं और सार्वजनिक स्थानों की सफाई तथा पौधों की देखभाल को अपनी जिम्मेदारी बनाते हैं, तो उसका प्रभाव कहीं अधिक व्यापक होता है।
इन बच्चों की पहल इस बात का उदाहरण है कि पर्यावरण संरक्षण केवल किताबों में पढ़ने का विषय नहीं, बल्कि रोजमर्रा की जिंदगी में अपनाई जाने वाली आदत है।
हर महीने अभियान, ताकि संदेश सिर्फ एक दिन तक सीमित न रहे
स्वच्छता अभियानों की सबसे बड़ी चुनौती उनकी निरंतरता होती है। कई बार किसी खास अवसर या अभियान के दौरान बड़ी संख्या में लोग सफाई के लिए जुटते हैं, लेकिन कुछ समय बाद स्थिति फिर पहले जैसी हो जाती है।
सेक्टर-105 के इन बच्चों ने इसी चुनौती को अलग तरीके से लिया है। उन्होंने स्वच्छता को किसी एक दिन या विशेष अवसर तक सीमित न रखते हुए हर महीने नियमित अभियान चलाने का संकल्प लिया है। यही निरंतरता इस पहल को और खास बनाती है।
नियमित अभियान के जरिए वे न केवल सार्वजनिक स्थानों को साफ रखने का प्रयास करते हैं, बल्कि लोगों में यह भावना विकसित करने की कोशिश भी करते हैं कि सफाई एक लगातार चलने वाली प्रक्रिया है।
पेड़-पौधों की देखभाल का भी दे रहे संदेश
इन बच्चों की पहल का दूसरा महत्वपूर्ण पक्ष पर्यावरण संरक्षण है। सार्वजनिक स्थलों को साफ रखने के साथ वे पेड़-पौधों की देखभाल का संदेश भी दे रहे हैं।
शहरी क्षेत्रों में हरियाली बनाए रखना लगातार चुनौतीपूर्ण होता जा रहा है। ऐसे में पौधों को बचाना, उनके आसपास कूड़ा न डालना और हरित क्षेत्रों की देखभाल करना पर्यावरण संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।
बच्चों का संदेश स्पष्ट है—स्वच्छ शहर केवल चमकती सड़कों और साफ पार्कों से नहीं बनता, बल्कि उसके लिए हरियाली, स्वच्छ वातावरण और नागरिकों की जिम्मेदार भागीदारी भी जरूरी है।
बच्चों की पहल से बड़ों को सीख
सेक्टर-105 की यह पहल इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें बच्चों ने किसी बड़े निर्देश का इंतजार नहीं किया। उन्होंने अपने स्तर पर जिम्मेदारी समझी और उसे व्यवहार में उतारना शुरू किया।
यह पहल अभिभावकों, स्कूलों, आरडब्ल्यूए और समाज के लिए भी एक सकारात्मक संदेश है कि बच्चों को केवल स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण के बारे में पढ़ाना पर्याप्त नहीं है। उन्हें ऐसे अवसर भी दिए जाने चाहिए, जहां वे इन मूल्यों को व्यवहार में लागू कर सकें।
जब बच्चे अपने आसपास बदलाव लाने की कोशिश करते हैं तो उसका असर परिवार और समाज पर भी पड़ता है। उनके साथ आने वाले दूसरे बच्चे भी प्रेरित हो सकते हैं और धीरे-धीरे यह प्रयास एक सामुदायिक अभियान का रूप ले सकता है।
‘स्वच्छ नोएडा’ का सपना तभी पूरा होगा, जब नागरिक भी आगे आएं
नोएडा को आधुनिक और नियोजित शहर के रूप में विकसित करने के साथ उसकी स्वच्छता और हरियाली बनाए रखना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। इसके लिए प्राधिकरण और सफाई कर्मचारियों की भूमिका निश्चित रूप से अहम है, लेकिन नागरिकों की जिम्मेदारी को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
सड़कों पर कूड़ा न फेंकना, सार्वजनिक स्थानों को नुकसान न पहुंचाना, पेड़-पौधों की रक्षा करना और दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित करना—ये ऐसे छोटे कदम हैं, जिनका सामूहिक प्रभाव बड़ा हो सकता है।
सेक्टर-105 के पांच बच्चों ने इसी सोच को अपने अभियान के माध्यम से आगे बढ़ाया है।
छोटी उम्र, बड़ा संदेश
प्रशस्त कुमार, तिष्या पुरी, शिवनंदिनी धौल, यशवी टंडन और कबीर सिंह दयाल की पहल का सबसे बड़ा संदेश यही है कि शहर को बदलने के लिए हमेशा किसी बड़े अभियान या बड़े बजट की जरूरत नहीं होती। बदलाव की शुरुआत पांच बच्चों के छोटे से संकल्प से भी हो सकती है।
इन बच्चों के प्रयास ने यह साबित किया है कि स्वच्छता की जिम्मेदारी केवल किसी विभाग की नहीं, बल्कि हर नागरिक की है। अगर समाज के अन्य लोग भी इनसे प्रेरणा लेकर अपने आसपास की सफाई और पर्यावरण संरक्षण की जिम्मेदारी उठाएं, तो नोएडा को और स्वच्छ, सुंदर और हरा-भरा बनाने की दिशा में बड़ा बदलाव संभव है।
मील का पत्थर बन सकता है बच्चों का संकल्प
सेक्टर-105 में शुरू हुआ यह अभियान आने वाले समय में दूसरे सेक्टरों और आवासीय क्षेत्रों के लिए भी उदाहरण बन सकता है। बच्चों की इस पहल को यदि स्कूल, आरडब्ल्यूए, अभिभावक और स्थानीय नागरिक सामूहिक सहयोग दें, तो यह एक व्यापक नागरिक अभियान का रूप ले सकती है।
इन पांच नन्हे पर्यावरण मित्रों ने फिलहाल अपने हाथों में झाड़ू और पौधों की देखभाल की जिम्मेदारी लेकर जो शुरुआत की है, वह आने वाली पीढ़ी के लिए बड़ा संदेश है—शहर हमारा है, इसलिए उसकी स्वच्छता और सुंदरता की जिम्मेदारी भी हमारी है।














