“आर्टेमिस अस्पताल गुरुग्राम में आयोजित राष्ट्रीय सम्मेलन में टीम को मिला सम्मान, डॉ. महीपाल सिंह को ‘फिजियो भारत सेवा रत्न’, डॉ. दीक्षा श्रीवास्तव को ‘रोगी सेवा रत्न’”
नोएडा/गुरुग्राम फिजियोथेरेपी और पुनर्वास चिकित्सा के क्षेत्र में नोएडा ने एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई है। आर्टेमिस अस्पताल, गुरुग्राम में आयोजित प्रतिष्ठित ‘फिजियो भारत-8’ राष्ट्रीय सम्मेलन में फर्स्ट वन रिहैब फाउंडेशन, नोएडा द्वारा प्रस्तुत शोध कार्य को निर्णायक मंडल ने सर्वश्रेष्ठ घोषित किया। शोध के क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए फाउंडेशन की पूरी टीम को सम्मानित किया गया।
राष्ट्रीय स्तर के इस सम्मेलन में देश के विभिन्न राज्यों से आए सैकड़ों फिजियोथेरेपिस्ट, चिकित्सकों, विशेषज्ञों और शोधार्थियों ने हिस्सा लिया। सम्मेलन का मुख्य विषय “आकलन, साक्ष्य और मूल्यांकन के माध्यम से दर्द प्रबंधन कौशल को आगे बढ़ाना” रखा गया था। ऐसे महत्वपूर्ण विषय पर आयोजित सम्मेलन में फाउंडेशन के शोध को सर्वश्रेष्ठ चुना जाना नोएडा के पुनर्वास एवं फिजियोथेरेपी क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है।

शोध प्रस्तुति ने विशेषज्ञों का खींचा ध्यान
फिजियो भारत-8 सम्मेलन में देशभर से आए विशेषज्ञों के सामने विभिन्न शोध, उपचार पद्धतियों और दर्द प्रबंधन से जुड़े वैज्ञानिक पहलुओं को प्रस्तुत किया गया। इसी क्रम में फर्स्ट वन रिहैब फाउंडेशन की ओर से प्रस्तुत शोध ने निर्णायक मंडल और विशेषज्ञों का विशेष ध्यान आकर्षित किया।
शोध की प्रस्तुति में रोगियों की स्थिति के वैज्ञानिक आकलन, उपचार के प्रभाव और परिणामों के मूल्यांकन जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं को केंद्र में रखा गया। सम्मेलन के निर्धारित विषय के अनुरूप शोध को साक्ष्य आधारित फिजियोथेरेपी और प्रभावी दर्द प्रबंधन की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास के तौर पर देखा गया।
13 सितंबर को हुई प्रस्तुति के बाद निर्णायक मंडल ने फाउंडेशन के शोध कार्य को सर्वश्रेष्ठ माना। इसके बाद फाउंडेशन की पूरी टीम को मंच पर सम्मानित किया गया। इस उपलब्धि ने यह संदेश भी दिया कि फिजियोथेरेपी के क्षेत्र में केवल उपचार ही नहीं, बल्कि निरंतर शोध, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और परिणामों का मूल्यांकन भी बेहद जरूरी है।
व्यक्तिगत उपलब्धियों से भी बढ़ा फाउंडेशन का गौरव
सम्मेलन में फर्स्ट वन रिहैब फाउंडेशन के सदस्यों को उनके व्यक्तिगत योगदान के लिए भी विशेष सम्मान प्रदान किए गए। फाउंडेशन के सदस्यों को अलग-अलग क्षेत्रों में उनके कार्य और योगदान के लिए मिले पुरस्कारों ने इस आयोजन को टीम के लिए और भी यादगार बना दिया।
डॉ. महीपाल सिंह को उनके समर्पण और सेवाभाव के लिए ‘फिजियो भारत सेवा रत्न पुरस्कार’ से सम्मानित किया गया। रोगियों के प्रति निरंतर सेवा, फिजियोथेरेपी के क्षेत्र में योगदान और समाज के प्रति जिम्मेदारी की भावना को देखते हुए उन्हें यह सम्मान प्रदान किया गया।
वहीं डॉ. दीक्षा श्रीवास्तव को रोगी सेवा के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य के लिए ‘फिजियो भारत रोगी सेवा रत्न पुरस्कार’ से सम्मानित किया गया। मरीजों की जरूरतों को समझते हुए बेहतर उपचार और सेवा उपलब्ध कराने के क्षेत्र में उनके योगदान को इस सम्मान के माध्यम से सराहा गया।

शिक्षा और उभरती प्रतिभा को भी मिला सम्मान
फाउंडेशन की उपलब्धियों का दायरा केवल शोध और रोगी सेवा तक सीमित नहीं रहा। शिक्षा और शैक्षणिक क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए डॉ. सुष्मिता भाटी को ‘शैक्षणिक उत्कर्ष पुरस्कार’ प्रदान किया गया।
फिजियोथेरेपी के क्षेत्र में नई पीढ़ी को तैयार करने, ज्ञान के विस्तार और अकादमिक गतिविधियों में योगदान को देखते हुए उन्हें यह सम्मान दिया गया। इससे यह स्पष्ट होता है कि फाउंडेशन उपचार के साथ-साथ शिक्षा और ज्ञान-विकास को भी अपने कार्य का महत्वपूर्ण हिस्सा मानता है।
इसी क्रम में अभिनव प्रताप सिंह को ‘उभरती प्रतिभा रत्न पुरस्कार’ से सम्मानित किया गया। उभरती प्रतिभा के रूप में उनके योगदान और भविष्य की संभावनाओं को देखते हुए दिया गया यह सम्मान फाउंडेशन की युवा प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
पोस्टर प्रेजेंटेशन की भी हुई जमकर सराहना
सम्मेलन में फाउंडेशन की सदस्य विधा पांडे ने पोस्टर प्रेजेंटेशन के माध्यम से शोध कार्य को विशेषज्ञों के सामने प्रस्तुत किया। पोस्टर प्रेजेंटेशन के दौरान शोध से जुड़े विभिन्न पहलुओं को व्यवस्थित और प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया गया।
देश के अलग-अलग हिस्सों से पहुंचे विशेषज्ञों और प्रतिभागियों ने प्रस्तुति की सराहना की। विशेषज्ञों की सकारात्मक प्रतिक्रिया ने फाउंडेशन की टीम का उत्साह बढ़ाया। राष्ट्रीय स्तर के मंच पर अपने शोध को प्रस्तुत करने और उस पर विशेषज्ञों से प्रतिक्रिया प्राप्त करने का अवसर टीम के लिए महत्वपूर्ण अनुभव साबित हुआ।
नोएडा से राष्ट्रीय मंच तक पहुंचा शोध और सेवा का संदेश
फर्स्ट वन रिहैब फाउंडेशन की इस उपलब्धि को केवल एक पुरस्कार तक सीमित नहीं माना जा रहा है। यह उपलब्धि नोएडा में फिजियोथेरेपी और पुनर्वास सेवाओं के क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों की राष्ट्रीय स्तर पर पहचान के रूप में देखी जा रही है।
आज के समय में दर्द प्रबंधन एक महत्वपूर्ण चिकित्सकीय चुनौती बन चुका है। चोट, सर्जरी, लंबे समय से चली आ रही शारीरिक समस्याओं और अन्य कारणों से बड़ी संख्या में लोगों को पुनर्वास और फिजियोथेरेपी की आवश्यकता होती है। ऐसे में उपचार के साथ-साथ वैज्ञानिक शोध और प्रमाण आधारित पद्धतियों का महत्व लगातार बढ़ रहा है।
फिजियो भारत-8 जैसे राष्ट्रीय सम्मेलन विशेषज्ञों को एक साझा मंच उपलब्ध कराते हैं, जहां वे अपने अनुभव, शोध और उपचार पद्धतियों को साझा कर सकते हैं। फाउंडेशन के शोध का सर्वश्रेष्ठ चुना जाना इसी वैज्ञानिक और शोधपरक दृष्टिकोण की सफलता के तौर पर देखा जा सकता है।
सम्मान ने टीम के उत्साह को दी नई उड़ान
फाउंडेशन के पदाधिकारियों ने कहा कि सम्मेलन में मिली यह सफलता किसी एक व्यक्ति की उपलब्धि नहीं, बल्कि पूरी टीम की कड़ी मेहनत, समर्पण और शोध के प्रति प्रतिबद्धता का परिणाम है। टीम ने कहा कि इस तरह के सम्मान उन्हें भविष्य में और बेहतर काम करने के लिए प्रेरित करते हैं।
पदाधिकारियों के मुताबिक शोध और मरीजों की बेहतर सेवा के बीच मजबूत संबंध है। किसी भी उपचार पद्धति को प्रभावी बनाने के लिए लगातार उसके परिणामों का अध्ययन, मूल्यांकन और आवश्यकतानुसार उसमें सुधार किया जाना जरूरी है। फाउंडेशन इसी सोच के साथ आगे बढ़ने के लिए प्रतिबद्ध है।
राष्ट्रीय सम्मेलन में एक साथ शोध, रोगी सेवा, शिक्षा और उभरती प्रतिभा के लिए फाउंडेशन के सदस्यों को सम्मान मिलना टीम के लिए विशेष गौरव का विषय रहा।

एक मंच पर शोध, सेवा, शिक्षा और नई प्रतिभा
फिजियो भारत-8 में फर्स्ट वन रिहैब फाउंडेशन की उपलब्धियों को अगर व्यापक नजरिए से देखा जाए तो इसमें चार महत्वपूर्ण आयाम सामने आते हैं—शोध, रोगी सेवा, शिक्षा और प्रतिभा विकास।
शोध के क्षेत्र में टीम का काम सर्वश्रेष्ठ चुना गया। डॉ. महीपाल सिंह को सेवा के लिए सम्मान मिला। डॉ. दीक्षा श्रीवास्तव को रोगी सेवा में उत्कृष्ट योगदान के लिए पुरस्कार प्रदान किया गया। डॉ. सुष्मिता भाटी को शैक्षणिक क्षेत्र में योगदान के लिए सम्मानित किया गया और अभिनव प्रताप सिंह को उभरती प्रतिभा के रूप में पहचान मिली। वहीं विधा पांडे की पोस्टर प्रेजेंटेशन को विशेषज्ञों की सराहना हासिल हुई।
इस प्रकार सम्मेलन फाउंडेशन के लिए केवल पुरस्कार प्राप्त करने का अवसर नहीं रहा, बल्कि उसकी पूरी कार्यप्रणाली और टीम के अलग-अलग क्षेत्रों में योगदान को राष्ट्रीय मंच पर पहचान दिलाने वाला आयोजन बन गया।
भविष्य में और बेहतर शोध का संकल्प
फाउंडेशन की टीम का कहना है कि मिले सम्मान को वह अंतिम उपलब्धि नहीं, बल्कि आगे की जिम्मेदारी के रूप में देखती है। टीम भविष्य में शोध और रोगी सेवा के क्षेत्र में और बेहतर कार्य करने के साथ-साथ फिजियोथेरेपी की वैज्ञानिक समझ को मजबूत करने की दिशा में काम जारी रखेगी।
फिजियो भारत-8 में मिली सफलता ने फर्स्ट वन रिहैब फाउंडेशन के लिए नई संभावनाओं के द्वार खोल दिए हैं। राष्ट्रीय स्तर पर शोध को मिली पहली पहचान और टीम के सदस्यों को मिले व्यक्तिगत सम्मान से निश्चित तौर पर संस्थान का मनोबल बढ़ा है।
नोएडा से शुरू हुई यह शोध और सेवा की पहल अब राष्ट्रीय मंच पर अपनी पहचान बना चुकी है। फिजियो भारत-8 में मिली यह उपलब्धि आने वाले समय में फाउंडेशन को शोध, उपचार, शिक्षा और पुनर्वास के क्षेत्र में और व्यापक कार्य करने की प्रेरणा देगी।














