नोएडा। गौतमबुद्ध नगर के लिए गर्व की बात है कि शहर के वरिष्ठ न्यूरो रिहैबिलिटेशन विशेषज्ञ एवं फर्स्ट वन रिहैब फाउंडेशन के संस्थापक डॉ. महीपाल सिंह को इंग्लैंड की प्रतिष्ठित संस्था इंटरनेशनल बुक ऑफ ऑनर द्वारा ‘एक्सीलेंस इन लीडरशिप अवॉर्ड’ से सम्मानित किए जाने की घोषणा की गई है। यह सम्मान उन्हें दिव्यांगजनों के पुनर्वास, पीडियाट्रिक न्यूरोरिहैबिलिटेशन, सेरेब्रल पाल्सी के उपचार, चिकित्सा शिक्षा, नेतृत्व और समाज सेवा के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए प्रदान किया जा रहा है।
संस्था ने 9 जुलाई 2026 को जारी अपने आधिकारिक पत्र में इस सम्मान की घोषणा करते हुए कहा कि डॉ. महीपाल सिंह का कार्य इस बात का जीवंत उदाहरण है कि यदि चिकित्सा विज्ञान के साथ संवेदनशीलता, समर्पण और मानवीय दृष्टिकोण जुड़ जाए तो हजारों दिव्यांग बच्चों और उनके परिवारों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाया जा सकता है। संस्था ने अपने पत्र में विशेष रूप से उल्लेख किया कि डॉ. सिंह ने वर्षों से ऐसे बच्चों और मरीजों के लिए आशा की नई किरण पैदा की है, जिन्हें समाज अक्सर उपेक्षा की दृष्टि से देखता है।
नोएडा से अंतरराष्ट्रीय पहचान तक का सफर
डॉ. महीपाल सिंह पिछले कई वर्षों से नोएडा में दिव्यांग बच्चों और न्यूरोलॉजिकल समस्याओं से जूझ रहे मरीजों के पुनर्वास के क्षेत्र में लगातार कार्य कर रहे हैं। उन्होंने अपने संस्थान फर्स्ट वन रिहैब फाउंडेशन के माध्यम से न केवल आधुनिक पुनर्वास सेवाओं को आम लोगों तक पहुंचाया, बल्कि आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों को भी गुणवत्तापूर्ण उपचार उपलब्ध कराने का प्रयास किया।
उनकी विशेष पहचान पीडियाट्रिक न्यूरोरिहैबिलिटेशन, सेरेब्रल पाल्सी, स्ट्रोक, स्पाइनल इंजरी और अन्य न्यूरोलॉजिकल विकारों के उपचार एवं पुनर्वास के क्षेत्र में है। उनका मानना है कि समय पर सही थेरेपी और परिवार की सक्रिय भागीदारी से दिव्यांग बच्चों को भी सामान्य जीवन की ओर अग्रसर किया जा सकता है।
दिव्यांग बच्चों के जीवन में बदलाव लाने का मिशन
डॉ. महीपाल सिंह का कार्य केवल एक चिकित्सक तक सीमित नहीं है। उन्होंने हजारों परिवारों को यह विश्वास दिलाया है कि दिव्यांगता किसी बच्चे के सपनों की सीमा नहीं बन सकती।
उन्होंने अपने क्लीनिकल अनुभव के साथ-साथ जागरूकता अभियानों, प्रशिक्षण कार्यक्रमों, सेमिनारों और सामाजिक पहल के माध्यम से लोगों को यह समझाने का प्रयास किया कि प्रारंभिक पहचान और नियमित पुनर्वास से दिव्यांग बच्चों की कार्यक्षमता में उल्लेखनीय सुधार संभव है।
यही कारण है कि आज उनके पास केवल उत्तर प्रदेश ही नहीं बल्कि देश के विभिन्न राज्यों से भी मरीज उपचार के लिए पहुंचते हैं।
इंटरनेशनल बुक ऑफ ऑनर ने सराहा मानवीय नेतृत्व
सम्मान की घोषणा करते हुए इंटरनेशनल बुक ऑफ ऑनर ने कहा कि डॉ. महीपाल सिंह ने अपने कार्यों से यह साबित किया है कि चिकित्सा केवल इलाज तक सीमित नहीं होती, बल्कि यह मानवता की सेवा का सबसे प्रभावी माध्यम भी बन सकती है।
संस्था के अनुसार उनका नेतृत्व केवल अस्पताल या क्लीनिक तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्होंने समाज में दिव्यांगजनों के अधिकार, सम्मान और बेहतर जीवन के लिए निरंतर कार्य किया है। शिक्षा, प्रशिक्षण और सामुदायिक सेवा के क्षेत्र में उनकी सक्रिय भूमिका ने उन्हें वैश्विक स्तर पर विशिष्ट पहचान दिलाई है।
क्या है इंटरनेशनल बुक ऑफ ऑनर?
इंटरनेशनल बुक ऑफ ऑनर एक अंतरराष्ट्रीय संस्था है जिसकी स्थापना 27 सितंबर 2022 को ब्रिटिश संसद में आयोजित भारत-यूके लीडरशिप समिट के बाद की गई थी।
संस्था का उद्देश्य दुनिया भर में ऐसे प्रेरणादायक व्यक्तित्वों को पहचान देना है जिन्होंने समाज के उत्थान के लिए असाधारण कार्य किए हैं। यह संस्था शांति, सामाजिक न्याय, मानवाधिकार, स्वास्थ्य, शिक्षा, पर्यावरण संरक्षण तथा मानवीय सेवा जैसे क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान देने वाली हस्तियों को सम्मानित करती है।
इस संस्था की चयन प्रक्रिया को भी काफी प्रतिष्ठित माना जाता है। इसके जूरी पैनल में शिक्षाविद, वैज्ञानिक, चिकित्सक, स्वास्थ्य विशेषज्ञ, राजनेता, समाज सुधारक और विभिन्न क्षेत्रों के अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ शामिल होते हैं, जो उम्मीदवारों के कार्यों का विस्तृत मूल्यांकन करने के बाद सम्मान के लिए चयन करते हैं।
भारत की चिकित्सा प्रतिभा को मिला वैश्विक सम्मान
विशेषज्ञों का मानना है कि डॉ. महीपाल सिंह को मिला यह सम्मान केवल उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं है, बल्कि भारतीय चिकित्सा व्यवस्था, विशेषकर न्यूरो रिहैबिलिटेशन और दिव्यांग पुनर्वास के क्षेत्र में कार्य कर रहे चिकित्सकों के लिए भी प्रेरणा का विषय है।
आज जब दुनिया स्वास्थ्य सेवाओं में मानवीय दृष्टिकोण को अधिक महत्व दे रही है, ऐसे समय में किसी भारतीय विशेषज्ञ को अंतरराष्ट्रीय मंच पर नेतृत्व सम्मान मिलना देश के लिए भी गौरव का विषय माना जा रहा है।
नोएडा के लिए गर्व का क्षण
डॉ. महीपाल सिंह की इस उपलब्धि से नोएडा के चिकित्सा एवं सामाजिक क्षेत्र में खुशी का माहौल है। उनके सहयोगियों, चिकित्सकों, सामाजिक संगठनों तथा मरीजों के परिवारों ने इसे पूरे शहर के लिए सम्मान बताया है।
कई लोगों का कहना है कि डॉ. सिंह ने वर्षों तक बिना किसी प्रचार-प्रसार की इच्छा के समाज के सबसे संवेदनशील वर्ग—दिव्यांग बच्चों—के लिए काम किया है। यही समर्पण आज उन्हें अंतरराष्ट्रीय पहचान दिला रहा है।
सेवा, समर्पण और नेतृत्व की मिसाल
डॉ. महीपाल सिंह का मानना है कि चिकित्सा का वास्तविक उद्देश्य केवल बीमारी का उपचार नहीं, बल्कि व्यक्ति को आत्मनिर्भर और सम्मानजनक जीवन जीने योग्य बनाना है। यही सोच उनके कार्यों में दिखाई देती है। उन्होंने चिकित्सा विशेषज्ञता को सामाजिक जिम्मेदारी के साथ जोड़ते हुए हजारों परिवारों के जीवन में नई उम्मीद जगाई है।
इंग्लैंड की प्रतिष्ठित संस्था द्वारा दिया जाने वाला ‘एक्सीलेंस इन लीडरशिप अवॉर्ड’ इस बात का प्रमाण है कि समाज के लिए निस्वार्थ भाव से किया गया कार्य सीमाओं का मोहताज नहीं होता। नोएडा के डॉ. महीपाल सिंह की यह उपलब्धि न केवल शहर बल्कि पूरे देश के लिए गर्व और प्रेरणा का विषय बन गई है।














