Tuesday, September 22, 2026
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किसानों के मुद्दे अब नोएडा प्राधिकरण की बोर्ड बैठक में होंगे पेश,”10 प्रतिशत आबादी भूखंड, ‘जहां है जैसी है’ आबादी छोड़ने और गांवों को मॉडल ग्राम बनाने की मांग पर एजेंडा तैयार करने के निर्देश”

 

नोएडा। किसानों की वर्षों से लंबित मांगों को लेकर ग्राम विकास संगठन नोएडा ने एक बार फिर नोएडा प्राधिकरण का दरवाजा खटखटाया है। संगठन के संयोजक डीपी चौहान के नेतृत्व में पदाधिकारियों ने सेक्टर-96 स्थित नोएडा प्राधिकरण के मुख्य प्रशासनिक कार्यालय के जनसुनवाई कक्ष में पहुंचकर अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी पुष्पराज सिंह को अलग-अलग दो प्रत्यावेदन सौंपे। संगठन ने किसानों से जुड़े प्रमुख मुद्दों को आगामी प्राधिकरण बोर्ड बैठक में शामिल कर ठोस निर्णय लेने की मांग की।

जनसुनवाई के दौरान संगठन के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी अशोक चौहान ने अधिकारियों के समक्ष किसानों की लंबित समस्याओं और पूर्व में हुई बैठकों में लिए गए निर्णयों का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि किसानों के अधिकारों से जुड़े मामलों पर लंबे समय से चर्चा होती रही है, लेकिन अब जरूरत इन मामलों को निर्णायक स्तर तक पहुंचाने की है।

अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी पुष्पराज सिंह ने संगठन के पदाधिकारियों की बात सुनी और दोनों प्रत्यावेदनों का अवलोकन किया। संगठन के अनुसार, उन्होंने किसानों के 10 प्रतिशत आबादी भूखंड, आबादी को ‘जहां है जैसी है’ के आधार पर छोड़े जाने तथा अन्य संबंधित मांगों को आगामी बोर्ड बैठक में शामिल किए जाने का आश्वासन दिया। इसके लिए ओएसडी हर्षिता तिवारी को बोर्ड बैठक के लिए एजेंडा तैयार करने के निर्देश दिए गए।


29 मई की बैठक में उठे थे तीन प्रमुख मुद्दे

अशोक चौहान ने अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी पुष्पराज सिंह को अवगत कराया कि ग्राम विकास संगठन नोएडा के पदाधिकारियों की पूर्व में 29 मई 2026 को नोएडा प्राधिकरण के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक हुई थी। बैठक में किसानों से जुड़े तीन महत्वपूर्ण प्रतिवेदनों पर विस्तार से चर्चा हुई थी।

बैठक में अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी सतीश पाल, विशेष कार्याधिकारी क्रांति शेखर, अरविंद कुमार, महाप्रबंधक नियोजन, महाप्रबंधक अशोक कुमार अरोड़ा तथा महाप्रबंधक एसपी सिंह समेत संबंधित अधिकारी मौजूद रहे थे।

संगठन का कहना है कि बैठक में जिन मुद्दों पर चर्चा हुई थी, वे केवल किसी एक गांव या कुछ किसानों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि नोएडा क्षेत्र के बड़ी संख्या में प्रभावित किसानों के अधिकारों से जुड़े हुए हैं।

पहला मुद्दा—अर्जित भूमि के बदले 10 प्रतिशत आबादी भूखंड

ग्राम विकास संगठन ने मांग रखी कि अर्जित भूमि के सापेक्ष करार नियमावली 1997 के प्रावधानों का पालन करते हुए पात्र किसानों को 10 प्रतिशत आबादी भूखंड उपलब्ध कराया जाए।

संगठन के अनुसार, किसानों की भूमि विकास कार्यों के लिए अधिग्रहित की गई, लेकिन इसके एवज में मिलने वाले उनके अधिकारों को लेकर लंबे समय से विवाद बना हुआ है। किसानों का कहना है कि भूमि अधिग्रहण और उससे जुड़े समझौतों में जो अधिकार निर्धारित किए गए थे, उनका पूरी तरह पालन किया जाना चाहिए।

अशोक चौहान ने कहा कि किसानों को उनके अधिकार देने में देरी से समस्या लगातार गंभीर होती जा रही है। उनका कहना है कि अब इस मुद्दे पर स्पष्ट नीति और समयबद्ध कार्रवाई की जरूरत है।


‘आबादी जहां है, जैसी है’ के आधार पर छोड़ने की मांग

बैठक में दूसरा प्रमुख मुद्दा गांवों की आबादी को जहां है, जैसी है के आधार पर छोड़े जाने का था। संगठन ने भूमि अधिग्रहण अधिनियम, 1894 की धारा 48 के तहत आबादी को डिनोटिफाइड किए जाने की मांग अधिकारियों के सामने रखी।

संगठन का तर्क है कि लंबे समय से गांवों में मौजूद आबादी, मकान और अन्य निर्माण किसानों के सामाजिक एवं पारिवारिक जीवन का हिस्सा हैं। ऐसे मामलों में किसानों को राहत देने के लिए मौजूदा आबादी को उसी स्थिति में छोड़ने की नीति अपनाई जानी चाहिए।

अशोक चौहान के मुताबिक, आबादी से जुड़ा मामला किसानों के लिए बेहद संवेदनशील है। उन्होंने कहा कि वर्षों से गांवों में रहने वाले परिवारों को अपनी जमीन और मकानों के भविष्य को लेकर अनिश्चितता में नहीं रखा जाना चाहिए।


नोएडा के गांवों को मॉडल ग्राम बनाने की मांग

ग्राम विकास संगठन ने नोएडा प्राधिकरण के अंतर्गत आने वाले गांवों को आधुनिक सुविधाओं से युक्त मॉडल ग्राम के रूप में विकसित करने की मांग भी उठाई।

संगठन का कहना है कि नोएडा शहर के विकास के साथ ग्रामीण क्षेत्रों का समानांतर विकास भी जरूरी है। जिन गांवों की जमीन पर नोएडा का विस्तार हुआ, वहां रहने वाले ग्रामीणों को भी बेहतर सड़क, नाली, जल निकासी, स्वच्छता, प्रकाश, स्वास्थ्य, शिक्षा और अन्य बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध होनी चाहिए।

संगठन के अनुसार, गांवों को मॉडल ग्राम के रूप में विकसित करने से ग्रामीण आबादी और आधुनिक नोएडा के बीच विकास का अंतर कम किया जा सकता है।


बैठक का कार्यवृत्त भी जारी हुआ था

अशोक चौहान ने अधिकारियों को बताया कि 29 मई की बैठक के बाद नोएडा प्राधिकरण के ओएसडी क्रांति शेखर की ओर से सक्षम स्तर से अनुमोदन के बाद बैठक का कार्यवृत्त जारी किया गया था।

संगठन का कहना है कि जब किसानों से जुड़े मुद्दों पर अधिकारियों के साथ बैठक हो चुकी है और उसका कार्यवृत्त भी जारी किया जा चुका है, तो अब इन विषयों को आगे बढ़ाकर नीतिगत निर्णय लेने की आवश्यकता है।

अशोक चौहान ने कहा कि किसानों की मांगों को केवल बैठकों और पत्राचार तक सीमित रखने के बजाय उन्हें बोर्ड के समक्ष रखकर निर्णय कराया जाना चाहिए।


‘किसानों के साथ हुआ छल-कपट’—अशोक चौहान

ग्राम विकास संगठन के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी अशोक चौहान ने नोएडा प्राधिकरण की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि किसानों के पास अपने दावों के समर्थन में दस्तावेज और साक्ष्य मौजूद हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि इन दस्तावेजों के बावजूद किसानों को उनके अधिकारों से वंचित किया गया है।

उन्होंने कहा कि किसानों के बीच यह भावना लगातार मजबूत हुई है कि उनके साथ न्याय नहीं हुआ। इसी कारण समय-समय पर नोएडा प्राधिकरण के खिलाफ किसान आंदोलन करते रहे हैं।

अशोक चौहान ने कहा कि किसान किसी टकराव की स्थिति नहीं चाहते, बल्कि अपने अधिकारों और वर्षों से लंबित मामलों का न्यायपूर्ण समाधान चाहते हैं। उनका कहना है कि यदि किसानों की समस्याओं पर बोर्ड स्तर से सकारात्मक निर्णय होता है तो इससे प्राधिकरण और किसानों के बीच विश्वास का माहौल मजबूत होगा।


बोर्ड बैठक में एजेंडा शामिल कराने के निर्देश

जनसुनवाई के दौरान सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी पुष्पराज सिंह ने संगठन के पदाधिकारियों की बात सुनने के बाद किसानों से जुड़े मुद्दों को आगामी बोर्ड बैठक में शामिल करने का आश्वासन दिया।

संगठन के मुताबिक, उन्होंने 10 प्रतिशत आबादी भूखंड, ‘आबादी जहां है जैसी है’ के आधार पर छोड़ने सहित अन्य किसानों से जुड़े विषयों को बोर्ड बैठक के एजेंडे में शामिल करने के लिए ओएसडी हर्षिता तिवारी को एजेंडा तैयार करने के निर्देश दिए।

अब किसानों की निगाहें आगामी बोर्ड बैठक पर टिक गई हैं। यदि इन विषयों पर बोर्ड में चर्चा होती है और सकारात्मक निर्णय लिया जाता है तो इसे लंबे समय से लंबित किसान समस्याओं के समाधान की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा सकता है।


किसानों को अब फैसले का इंतजार

ग्राम विकास संगठन ने स्पष्ट किया है कि वह किसानों के अधिकारों से जुड़े इन मुद्दों को लगातार उठाता रहेगा। संगठन का कहना है कि 10 प्रतिशत आबादी भूखंड, आबादी को ‘जहां है जैसी है’ के आधार पर छोड़ने और गांवों के समग्र विकास जैसे विषयों पर स्पष्ट निर्णय होने तक किसानों की आवाज उठाई जाती रहेगी।

अशोक चौहान ने कहा कि किसानों की मांगें किसी व्यक्तिगत लाभ से जुड़ी नहीं हैं, बल्कि वर्षों से चली आ रही व्यवस्था, समझौतों और किसानों के अधिकारों से संबंधित हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि नोएडा प्राधिकरण आगामी बोर्ड बैठक में इन विषयों पर गंभीरता से विचार करेगा और किसानों के हित में ठोस निर्णय लिया जाएगा।

फिलहाल, जनसुनवाई के बाद किसानों में यह उम्मीद जगी है कि लंबे समय से लंबित मुद्दे अब फाइलों और बैठकों से आगे बढ़कर नोएडा प्राधिकरण के बोर्ड स्तर पर निर्णय की प्रक्रिया तक पहुंचेंगे। आगामी बोर्ड बैठक में इन मुद्दों पर क्या निर्णय होता है, इस पर किसानों और ग्रामीण संगठनों की नजर बनी हुई है।

 

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VIKAS TRIPATHI
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