नई दिल्ली: ऊषा माहना “पर्दाफाश न्यूज”
त्योहारों की असली रौनक रोशनी से सजे घरों में ही नहीं, बल्कि उन चेहरों की मुस्कान में भी दिखाई देती है, जो अपनी खुशियां दूसरों के साथ बांटना जानते हैं। जब बच्चे अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करें, बुजुर्ग अपनी सुरीली आवाज से महफिल सजाएं, महिलाएं खेलों में उत्साह दिखाएं और एक ही परिसर में सैकड़ों परिवार आपसी मेल-मिलाप का आनंद लें, तो समझिए कि त्योहार का वास्तविक उद्देश्य साकार हो रहा है। पश्चिमी दिल्ली के मीरा बाग में आयोजित दिवाली मिलन मेला-2026 कुछ ऐसी ही यादें छोड़ गया।
इस आयोजन की खासियत केवल इसकी भव्यता नहीं थी, बल्कि वह सामुदायिक सोच थी, जिसने स्कूल और रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन को एक साझा मंच पर खड़ा किया। प्रसिद्ध समाजसेवी डॉ. हरीश सभरवाल और उनकी पुत्रवधू विभूति सभरवाल से जुड़े प्रूडेन्स स्कूल तथा मीरा बाग रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन (आरडब्ल्यूए) के संयुक्त प्रयासों से आयोजित इस मेले में करीब 300 से 350 निवासियों ने सहभागिता की। वहीं, लगभग 100 से 150 बच्चों ने विभिन्न प्रतियोगिताओं और गतिविधियों में भाग लेकर अपनी रचनात्मकता और हुनर का परिचय दिया।
लेकिन इस आयोजन की कहानी सिर्फ मंच पर हुई प्रस्तुतियों, सजावट और स्टॉल तक सीमित नहीं थी। इसके पीछे एक ऐसी सामुदायिक भावना भी थी, जो किसी भी रिहायशी क्षेत्र को केवल मकानों और सड़कों का समूह नहीं, बल्कि एक जीवंत परिवार बनाती है।
पर्दे के पीछे की सोच थी—स्कूल और समाज के बीच मजबूत रिश्ता
आमतौर पर स्कूलों में होने वाले कार्यक्रम विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों तक सीमित रह जाते हैं, जबकि रिहायशी क्षेत्रों के आयोजन में स्थानीय लोगों की भागीदारी अलग-अलग स्तर पर दिखाई देती है। मीरा बाग के इस दिवाली मेले में इन दोनों व्यवस्थाओं को एक साथ जोड़ने का प्रयास किया गया।
प्रूडेन्स स्कूल और आरडब्ल्यूए ने मिलकर ऐसा मंच तैयार किया, जहां स्कूल के विद्यार्थियों के साथ-साथ मीरा बाग के विभिन्न ब्लॉकों के बच्चों को भी अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिला। इसका संदेश साफ था कि बच्चों की प्रतिभा किसी एक संस्थान या परिवार तक सीमित नहीं होती। उन्हें प्रोत्साहन देने के लिए पूरा समाज आगे आए, तो उनकी रचनात्मकता को नई दिशा मिल सकती है।
मेले की तैयारियों में स्कूल प्रबंधन, आरडब्ल्यूए पदाधिकारियों, स्थानीय नागरिकों और सहयोगियों की भूमिका महत्वपूर्ण रही। आयोजन को केवल एक औपचारिक उत्सव बनाने के बजाय ऐसा अवसर बनाने की कोशिश की गई, जहां अलग-अलग आयु वर्ग के लोग एक-दूसरे से मिलें और सामुदायिक संबंध मजबूत हों।
रंगोली और दीयों में झलकी बच्चों की कल्पनाओं की दुनिया
मेले का सबसे जीवंत और आकर्षक पक्ष बच्चों की सहभागिता रही। फैंसी ड्रेस, रंगोली और दीया निर्माण जैसी प्रतियोगिताओं ने परिसर को रंगों, कल्पनाओं और उत्साह से भर दिया।
बच्चों ने अपनी कलात्मक प्रतिभा के माध्यम से रंगोली में सुंदर आकृतियां उकेरीं। दीया निर्माण के जरिए पारंपरिक कला के प्रति अपनी रुचि दिखाई, तो फैंसी ड्रेस प्रतियोगिता में अपनी कल्पनाशीलता और आत्मविश्वास का प्रदर्शन किया।
इन प्रतियोगिताओं का महत्व केवल पुरस्कार जीतने तक सीमित नहीं था। ऐसे मंच बच्चों को अपनी झिझक दूर करने, दूसरों के सामने अपनी प्रतिभा प्रस्तुत करने और स्वस्थ प्रतिस्पर्धा की भावना विकसित करने का अवसर देते हैं।
प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले बच्चों को क्षेत्रीय विधायक श्री मनोज कुमार शौकीन और वरिष्ठ पुलिस अधिकारी श्री घनश्याम बंसल, आईपीएस द्वारा पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया। पुरस्कार पाकर बच्चों के चेहरों पर दिखाई देने वाली खुशी ने आयोजन की रौनक को और बढ़ा दिया।
यहां एक महत्वपूर्ण बात भी सामने आई कि जब बच्चों की उपलब्धियों पर पूरा मोहल्ला तालियां बजाता है, तो उनके भीतर आगे बढ़ने का उत्साह और आत्मविश्वास दोनों मजबूत होते हैं।
जब बुजुर्गों के सुरों ने बांधा समां, तो युवा भी झूम उठे
किसी भी सामुदायिक आयोजन की खूबसूरती तब बढ़ जाती है, जब उसमें केवल एक पीढ़ी नहीं, बल्कि हर उम्र के लोगों की भागीदारी हो। मीरा बाग के दिवाली मेले में संगीत ने यही काम किया।
मीरा बाग निवासी और प्रसिद्ध गायक लक्ष्य ने अपनी मधुर आवाज में शानदार प्रस्तुति देकर उपस्थित लोगों का मन मोह लिया। उनकी गायकी ने माहौल में संगीत और उत्साह का ऐसा रंग भरा कि लोग कार्यक्रम का आनंद लेते नजर आए।
वहीं, क्षेत्र के वरिष्ठ नागरिक बेदी साहब ने भी अपने गीतों से महफिल में चार चांद लगा दिए। उनकी प्रस्तुति इस बात का उदाहरण रही कि प्रतिभा और संगीत का आनंद उम्र का मोहताज नहीं होता। बुजुर्गों की सक्रिय भागीदारी ने आयोजन को पारिवारिक स्वरूप प्रदान किया।
एक ओर बच्चों की नई पीढ़ी अपनी प्रतिभा दिखा रही थी, तो दूसरी ओर वरिष्ठ नागरिक अपने अनुभव और कला से समारोह को समृद्ध कर रहे थे। यही वह खूबसूरत तालमेल था, जिसने मेले को केवल मनोरंजन का कार्यक्रम न रहने देकर पीढ़ियों के बीच संवाद का अवसर बना दिया।
तंबोला में महिलाओं का उत्साह, स्टॉलों पर परिवारों की रौनक
मेले में महिलाओं की भागीदारी भी विशेष आकर्षण का केंद्र रही। तंबोला के आयोजन में महिलाओं ने पूरे उत्साह के साथ हिस्सा लिया। खेल के दौरान हंसी-मजाक, उत्सुकता और जीतने की उम्मीद ने माहौल को मनोरंजक बना दिया।
इसके साथ ही परिसर में लगाए गए विभिन्न स्टॉलों ने मेले को एक छोटे से उत्सवी बाजार का रूप दे दिया। बच्चों के मनोरंजन के लिए खेलों के स्टॉल थे, तो परिवारों की खरीदारी और पसंद को ध्यान में रखते हुए क्रॉकरी, कपड़ों तथा अन्य उत्पादों के काउंटर भी लगाए गए थे।
प्रतिष्ठित सूट ब्रांड ‘रिवाज’ का विशेष काउंटर लोगों के आकर्षण का केंद्र रहा। वहीं, रोशन दी कुल्फी की ओर से खानपान की विशेष व्यवस्था ने मेले में आने वाले लोगों को स्वाद का आनंद भी दिया।
परिवारों के लिए यह अवसर केवल खरीदारी या खानपान तक सीमित नहीं रहा। एक-दूसरे से मिलने, बातचीत करने और रोजमर्रा की व्यस्त जिंदगी से कुछ समय निकालकर साथ बैठने का अवसर भी मिला।
अतिथियों की मौजूदगी ने बढ़ाई आयोजन की गरिमा
समारोह में क्षेत्रीय विधायक, पुलिस प्रशासन, चिकित्सा जगत, उद्योग और सामाजिक क्षेत्र से जुड़ी कई प्रतिष्ठित हस्तियों ने शिरकत की।
इनमें क्षेत्रीय विधायक श्री मनोज कुमार शौकीन, पूर्व एसएचओ श्री अनिल शर्मा, वर्तमान एसएचओ श्री विश्वनाथ, वरिष्ठ पुलिस अधिकारी श्री घनश्याम बंसल, आईपीएस, महाराजा अग्रसेन अस्पताल के एमडी डॉ. दीपक सिंगला, सहगल नियो अस्पताल के डॉ. नारायण सहगल तथा स्टीलबर्ड के चेयरमैन श्री रमेश कपूर प्रमुख रूप से शामिल रहे।
विधायक श्री मनोज कुमार शौकीन ने मेले का भ्रमण किया और विभिन्न गतिविधियों का अवलोकन किया। उन्होंने प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले बच्चों को पुरस्कार प्रदान कर उनका उत्साहवर्धन किया।
अतिथियों की उपस्थिति ने आयोजन को सामाजिक स्तर पर एक व्यापक पहचान दी। साथ ही, स्थानीय निवासियों और विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े प्रतिष्ठित लोगों को एक-दूसरे से संवाद करने का अवसर भी मिला।
आयोजन की असली ताकत मंच पर नहीं, पर्दे के पीछे काम करने वाली टीम थी
किसी भी बड़े आयोजन की सफलता का श्रेय केवल मंच पर दिखाई देने वाले चेहरों को नहीं दिया जा सकता। उसके पीछे कई दिनों की योजना, आपसी समन्वय, जिम्मेदारियों का बंटवारा और अनेक लोगों की मेहनत होती है।
मीरा बाग के दिवाली मेले में भी आरडब्ल्यूए और प्रूडेन्स स्कूल की टीमों ने मिलकर महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन की ओर से श्री गुलशन कुमार कपूर, श्री अरुण अबरोल, श्री राजीव सिंघला और उनकी पूरी टीम ने आयोजन को सफल बनाने में सक्रिय योगदान दिया। ब्लॉक के संरक्षक श्री एम.एल. पारिक और श्री रमेश कपूर सहित क्षेत्र के वरिष्ठ नागरिकों का मार्गदर्शन और सहयोग भी महत्वपूर्ण रहा।
मीरा बाग मंदिर के प्रधान नारंग साहब अपनी धर्मपत्नी के साथ समारोह में शामिल हुए। क्षेत्र के अन्य गणमान्य नागरिकों की सहभागिता ने भी आयोजन को सामुदायिक स्वरूप प्रदान किया।
दूसरी ओर, प्रूडेन्स स्कूल की ओर से सुश्री विभूति सभरवाल, सुश्री पूजा कत्याल और उनकी टीम ने व्यवस्थाओं से लेकर कार्यक्रमों के संचालन तक विशेष योगदान दिया।
डॉ. हरीश सभरवाल और विभूति सभरवाल से जुड़े इस संयुक्त प्रयास में शिक्षा संस्थान और स्थानीय सामाजिक संगठन की साझेदारी देखने को मिली। यह साझेदारी बताती है कि यदि संस्थान अपनी सामाजिक जिम्मेदारियों को समझते हुए स्थानीय समुदाय के साथ कदम मिलाकर चलें, तो ऐसे आयोजन केवल मनोरंजन ही नहीं, बल्कि सामाजिक जुड़ाव का माध्यम भी बन सकते हैं।
एक शाम का उत्सव, लेकिन रिश्तों के लिए लंबे समय की पूंजी
दिवाली मिलन मेला-2026 की सबसे बड़ी उपलब्धि शायद यह रही कि इसमें बच्चों से लेकर वरिष्ठ नागरिकों तक सभी को अपनी जगह मिली। यहां किसी एक वर्ग का कार्यक्रम नहीं था, बल्कि पूरा मीरा बाग एक साझा उत्सव का हिस्सा बना।
आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में एक ही क्षेत्र में रहने वाले लोग कई बार एक-दूसरे को नाम तक से नहीं जानते। व्यस्त दिनचर्या, कामकाज और निजी जिम्मेदारियों के बीच सामाजिक मेल-मिलाप के अवसर कम होते जा रहे हैं। ऐसे में सामुदायिक आयोजन लोगों को करीब लाने का काम करते हैं।
बच्चों को अपनी प्रतिभा दिखाने का मंच मिला, बुजुर्गों को अपनी कला साझा करने का अवसर मिला, महिलाओं ने मनोरंजक गतिविधियों में हिस्सा लिया और परिवारों को एक साथ समय बिताने का मौका मिला।
आयोजकों ने सभी अतिथियों, अभिभावकों, बच्चों, प्रतिभागियों, स्थानीय निवासियों और सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त किया। उनका कहना था कि सभी के सहयोग और उत्साह के बिना इस आयोजन को यादगार बनाना संभव नहीं था।
आखिर में सबसे बड़ी रोशनी रिश्तों की थी!
मीरा बाग का यह दिवाली मिलन मेला एक बात को खूबसूरती से रेखांकित कर गया कि त्योहारों की सार्थकता केवल सजावट, रोशनी और आतिशबाजी में नहीं, बल्कि उन रिश्तों में छिपी होती है, जिन्हें हम समय देकर मजबूत बनाते हैं।
प्रूडेन्स स्कूल और मीरा बाग आरडब्ल्यूए की संयुक्त पहल ने यह दिखाया कि सामाजिक संगठनों और शैक्षणिक संस्थानों के बीच सकारात्मक तालमेल से स्थानीय समुदाय को एक नई ऊर्जा दी जा सकती है।
करीब 350 निवासियों और 100 से 150 बच्चों की भागीदारी वाला यह आयोजन अपने पीछे केवल तस्वीरें और यादें ही नहीं छोड़ गया, बल्कि एक ऐसा संदेश भी दे गया, जिसकी जरूरत आज हर समाज को है—एक-दूसरे के सुख-दुख में शामिल होना, बच्चों की प्रतिभा को प्रोत्साहित करना, बुजुर्गों का सम्मान करना और आपसी भाईचारे को मजबूत बनाना।
क्योंकि अंततः किसी भी मोहल्ले की असली पहचान वहां खड़ी इमारतों, चौड़ी सड़कों या चमकदार बाजारों से नहीं, बल्कि वहां रहने वाले लोगों के बीच मौजूद अपनत्व से होती है।
मीरा बाग की इस शाम में दीप तो अनेक जले, लेकिन सबसे खूबसूरत रोशनी उन रिश्तों में दिखाई दी, जिन्होंने पूरे क्षेत्र को एक परिवार की तरह जोड़ दिया।















