“सैफई से गोरखपुर की तुलना कर पूर्व मुख्यमंत्री ने सरकार को घेरा, कहा—दस साल में अपने शहर को सैफई से बेहतर बनाना था; चुनाव आयोग पर भी गंभीर आरोप”
पर्दाफाश न्यूज़ | लखनऊ
उत्तर प्रदेश की राजनीति में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले सियासी तापमान लगातार बढ़ता जा रहा है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने रविवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और भाजपा सरकार पर तीखा राजनीतिक हमला बोला। अखिलेश यादव ने मुख्यमंत्री के गृह क्षेत्र गोरखपुर की तुलना सैफई से करते हुए विकास के दावों पर सवाल खड़े किए और कहा कि दस साल का समय कम नहीं होता। उनके मुताबिक, इस अवधि में गोरखपुर को सैफई से कहीं बेहतर विकसित किया जाना चाहिए था।
अखिलेश यादव ने तंज कसते हुए कहा कि अगर सैफई से प्रेरणा ली गई होती तो हालात अलग होते। उन्होंने गोरखपुर में जलभराव को लेकर सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि “जहां मेट्रो चलनी थी, वहां नाव चल रही है।” उनका यह बयान अब उत्तर प्रदेश की चुनावी राजनीति में सरकार बनाम विपक्ष के विकास मॉडल की बहस को और तेज करने वाला माना जा रहा है।
‘दस साल में सैफई से बेहतर गोरखपुर बनना चाहिए था’
अखिलेश यादव ने कहा कि मुख्यमंत्री को अपने शहर के विकास के लिए दस वर्षों में ऐसा काम करना चाहिए था जिसे उदाहरण के तौर पर पेश किया जा सके। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार लगातार सैफई का नाम लेती रहती है, लेकिन अगर सैफई को ही विकास का पैमाना माना जा रहा है तो गोरखपुर को उससे आगे निकलना चाहिए था।
उनके बयान का राजनीतिक निशाना केवल जलभराव तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने गोरखपुर की मौजूदा स्थिति को सरकार के विकास दावों के सामने रखकर सवाल किया कि जिस शहर को विकास की मिसाल बनाया जाना चाहिए था, वहां नागरिकों को बुनियादी समस्याओं से क्यों जूझना पड़ रहा है।
अखिलेश ने यह भी कहा कि गोरखपुर में जो कुछ हो रहा है, उससे ऐसा लगता है कि मामला आपसी खींचतान का है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि का दावा उन्होंने अपने बयान में नहीं किया।
‘मेट्रो की बात हुई, लेकिन नाव चलाने की स्थिति’
अखिलेश यादव के बयान का सबसे ज्यादा राजनीतिक असर डालने वाला हिस्सा गोरखपुर की मेट्रो परियोजना और जलभराव को लेकर उनका तंज रहा। उन्होंने कहा कि जिन स्थानों पर मेट्रो चलाने की बात हो रही थी, वहां पानी भरने के कारण नाव चलाने जैसी स्थिति दिखाई दे रही है।
यह बयान ऐसे समय आया है जब 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियां तेज हो चुकी हैं और सत्ता पक्ष तथा विपक्ष दोनों अपने-अपने विकास मॉडल को जनता के सामने रखने में जुटे हैं।
अखिलेश यादव ने अपने हमले को व्यंग्य का रूप देते हुए मुख्यमंत्री पर व्यक्तिगत राजनीतिक तंज भी कसा। उन्होंने सवाल उठाया कि आने वाले समय में मुख्यमंत्री भाजपा से लड़ेंगे या किसी दूसरी पार्टी से। इसी क्रम में उन्होंने यह भी कहा कि कहीं चुनाव में किसी “वाहिनी” से लड़ने की स्थिति न आ जाए।
चुनाव आयोग पर भी सीधा निशाना
अखिलेश यादव ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने 2017 और 2022 के विधानसभा चुनावों का संदर्भ देते हुए कहा कि 2017 में समाजवादी पार्टी ने पर्याप्त ध्यान नहीं दिया, जबकि उनके अनुसार 2022 का चुनाव निष्पक्ष नहीं था।
अखिलेश ने दावा किया कि यदि 2022 में चुनाव निष्पक्ष होते तो समाजवादी पार्टी की सरकार बनती। वहीं उन्होंने 2024 के लोकसभा चुनाव का उदाहरण देते हुए कहा कि उस समय पार्टी कार्यकर्ता अधिक जागरूक थे और इसी वजह से समाजवादी पार्टी बड़ी संख्या में सांसद जिताने में सफल रही।
हालिया सार्वजनिक बयानों में भी अखिलेश यादव चुनाव आयोग पर 2022 में कथित “वोट चोरी” को लेकर आरोप लगाते रहे हैं।
हालांकि, इन आरोपों को खबर में आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए; चुनाव परिणामों को पलटने वाला कोई स्थापित तथ्य इससे स्वतः सिद्ध नहीं होता।
फॉर्म-7 को लेकर भाजपा पर आरोप
अखिलेश यादव ने मतदाता सूची से जुड़े फॉर्म-7 के इस्तेमाल को लेकर भी भाजपा पर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि भाजपा ने निजी कंपनी के माध्यम से फॉर्म-7 भरवाकर भेजने का काम कराया और समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने कथित गड़बड़ियों को पकड़ने का काम किया।
उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ मामलों में फर्जी हस्ताक्षर के जरिए मतदाताओं के नाम हटाने का प्रयास किया गया। अखिलेश ने दावा किया कि समाजवादी पार्टी के “PDA प्रहरी” इस तरह की गतिविधियों पर नजर रख रहे हैं।
फॉर्म-7 को लेकर अखिलेश यादव पहले भी भाजपा पर मतदाता सूची से नाम हटाने की कथित साजिश के आरोप लगा चुके हैं। फरवरी 2026 में भी उन्होंने इसी मुद्दे पर गंभीर आरोप लगाए थे और सत्यापन तथा जांच की मांग की थी।
‘मुख्यमंत्री आयोग के पक्ष में बोल रहे हैं तो…’
चुनाव आयोग की विश्वसनीयता पर सवाल उठाते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि आयोग को किसी के इशारे पर काम नहीं करना चाहिए और उसे अपनी “क्रेडिबिलिटी” बचानी चाहिए।
उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर भी राजनीतिक हमला बोलते हुए कहा कि यदि मुख्यमंत्री चुनाव आयोग के पक्ष में बोल रहे हैं तो उनके अनुसार इसे गंभीरता से देखा जाना चाहिए।
यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि अखिलेश यादव के इन बयानों में लगाए गए आरोप राजनीतिक आरोप हैं। निर्वाचन प्रक्रिया में किसी अनियमितता का अंतिम निष्कर्ष सक्षम निर्वाचन अथवा न्यायिक प्रक्रिया और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही निकाला जा सकता है।
‘नोएडा में बड़े पैमाने पर वोट चोरी’ का दावा
अखिलेश यादव ने नोएडा में भी कथित तौर पर बड़े पैमाने पर वोट चोरी और फर्जी वोट बनाए जाने का आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि मतदाता सूची को प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है।
इन आरोपों ने नोएडा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश की चुनावी राजनीति में भी एक नया मुद्दा खड़ा कर दिया है। हालांकि, किसी भी क्षेत्र में फर्जी मतदाताओं अथवा बड़े पैमाने पर वोट हटाने के आरोपों की पुष्टि के लिए आधिकारिक मतदाता सूची, आपत्तियों, जांच रिपोर्ट और निर्वाचन अधिकारियों की कार्रवाई को देखना जरूरी होगा।
सपा-कांग्रेस की ‘लड़ाई’ पर अखिलेश का बड़ा बयान
सपा और कांग्रेस के बीच समय-समय पर सामने आने वाली बयानबाजी को लेकर पूछे गए सवाल पर अखिलेश यादव ने इसे राजनीतिक रणनीति का हिस्सा बताया।
उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी विरोधियों से भी सीखती है और दावा किया कि राजनीति में कई बार नेता ऊपर से लड़ते दिखाई देते हैं, जबकि अंदरखाने उनके बीच समीकरण अलग होते हैं।
अखिलेश ने कहा कि सपा और कांग्रेस के बीच जो भी राजनीतिक बयानबाजी दिखाई देती है, उसे उनकी रणनीति के हिस्से के रूप में देखा जाना चाहिए।
2027 को लेकर सपा और कांग्रेस के संबंधों पर हालिया रिपोर्टों में भी अखिलेश यादव के गठबंधन जारी रखने और सीटों के बंटवारे में “जीतने की क्षमता” को आधार बनाने की बात सामने आई है।
खिलाड़ियों के लिए बड़ा वादा, खेल बजट बढ़ाने का ऐलान
राजनीतिक हमलों के बीच अखिलेश यादव ने खिलाड़ियों के लिए भी बड़ा ऐलान किया। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी की सरकार बनने पर खेलों का बजट बढ़ाया जाएगा।
उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा सरकार ने खिलाड़ियों को सम्मान देने की परंपरा को रोक दिया है। अखिलेश ने कहा कि सत्ता में आने पर उनकी सरकार इसे दोबारा शुरू करेगी।
उन्होंने यश भारती पुरस्कार से सम्मानित लोगों को एक लाख रुपये मासिक और 21 लाख रुपये की सम्मान राशि देने की बात कही।
2027 से पहले विकास बनाम व्यवस्था का सवाल
अखिलेश यादव के रविवार के बयान को केवल राजनीतिक हमले के तौर पर नहीं, बल्कि 2027 की चुनावी बहस के संकेत के रूप में भी देखा जा सकता है। एक तरफ सरकार अपने विकास कार्यों और उपलब्धियों को चुनावी मुद्दा बनाने की तैयारी में है, तो दूसरी तरफ विपक्ष जलभराव, प्रशासनिक व्यवस्था, रोजगार, मतदाता सूची और स्थानीय समस्याओं को मुद्दा बनाकर सरकार को घेर रहा है।
गोरखपुर बनाम सैफई की तुलना इसी राजनीतिक टकराव का नया अध्याय है। अखिलेश यादव ने जिस अंदाज में “मेट्रो बनाम नाव” का तंज कसा है, वह आने वाले दिनों में राजनीतिक मंचों और चुनावी भाषणों में दोहराया जा सकता है।
अब असली सवाल यही है कि गोरखपुर के विकास, जलभराव और शहरी बुनियादी ढांचे पर सरकार क्या जवाब देती है? चुनाव आयोग पर लगाए गए आरोपों के संबंध में आधिकारिक पक्ष क्या है? और 2027 के चुनाव में जनता विकास के दावों और विपक्ष के सवालों में से किन मुद्दों को ज्यादा महत्व देती है?
उत्तर प्रदेश की सियासत में इन सवालों के जवाब आने वाले महीनों में चुनावी बहस की दिशा तय करने वाले प्रमुख मुद्दों में शामिल हो सकते हैं।















