“मेट्रो स्टेशन-101 के पास महीनों से गड्ढों में सफर कर रहे 7X के लोगों को मिली राहत, NMRC के टेंडर तक प्राधिकरण ने संभाला मोर्चा”
नोएडा।
सड़क अगर इतनी टूट जाए कि वाहन चालक सड़क पर चलने के बजाय गड्ढों के बीच रास्ता तलाशने लगें, तो समझिए विकास की कहानी में कहीं न कहीं विराम लग गया है। लेकिन नोएडा में इस कहानी का एक नया अध्याय सामने आया है। ‘पर्दाफाश की न्यूज’ में सड़क की बदहाली का मुद्दा सामने आने के बाद अब प्राधिकरण ने टूटी सड़क पर सीमेंट-कंक्रीट का मरहम लगा दिया है।
मेट्रो स्टेशन-101 के पास सड़क की हालत लंबे समय से वाहन चालकों और आसपास के 7X सेक्टरों के निवासियों के लिए परेशानी का कारण बनी हुई थी। जगह-जगह उखड़ी सड़क, बड़े-बड़े गड्ढे, बिखरी निर्माण सामग्री और धूल-मिट्टी ने ऐसा माहौल बना रखा था कि सड़क कम और किसी अस्थायी ऑफ-रोड ट्रैक का एहसास ज्यादा होने लगा था।
अब तस्वीर बदली है। प्राधिकरण की टीम ने मौके पर पहुंचकर क्षतिग्रस्त हिस्से पर सीमेंट-कंक्रीट से मरम्मत का काम कराया, जिससे फिलहाल लोगों को आवाजाही में राहत मिली है।
टेंडर अपनी जगह, सड़क की परेशानी अपनी जगह
बताया गया है कि मेट्रो स्टेशन-101 के पास क्षतिग्रस्त सड़क का हिस्सा NMRC के अधिकार क्षेत्र में आता है। ऐसे में स्थायी मरम्मत के लिए टेंडर प्रक्रिया पूरी होने में समय लग सकता है।
यानी सरकारी फाइलों की अपनी रफ्तार है और सड़क पर चलने वाले लोगों की अपनी।
फाइल कहती है—
“प्रक्रिया पूरी होने दीजिए।”
सड़क पर चलने वाला कहता है—
“तब तक हम गड्ढों से ही गुजरते रहें?”
इसी बीच 7X क्षेत्र के निवासियों के लिए प्राधिकरण की ओर से अस्थायी राहत का रास्ता निकाला गया। स्थायी समाधान आने तक क्षतिग्रस्त हिस्से को सीमेंट-कंक्रीट से ठीक कराया गया।
GM Civil और SM ने संभाला मोर्चा
स्थानीय स्तर पर मिली जानकारी के अनुसार, GM Civil श्री ए.के. अरोड़ा और SM श्री अरुण, WC-6 की पहल से क्षतिग्रस्त सड़क की तत्काल मरम्मत कराई गई।
मौके की तस्वीरों में भी सड़क पर श्रमिकों द्वारा मरम्मत का काम करते हुए देखा जा सकता है। सड़क के गड्ढों और उखड़े हिस्से पर सामग्री डालकर उसे समतल करने का काम किया गया, ताकि रोजाना इस रास्ते से गुजरने वाले लोगों को तत्काल राहत मिल सके।
यह कदम इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि स्थायी मरम्मत की प्रक्रिया में समय लगना तय है, लेकिन तब तक सड़क को पूरी तरह बदहाल छोड़ देना भी लोगों के लिए परेशानी का कारण बन सकता था।
‘पर्दाफाश’ की खबर के बाद जागा सिस्टम?
अब सवाल यह है कि क्या खबर के बाद ही प्राधिकरण जागा?
यह बात निश्चित रूप से तभी कही जा सकती है जब प्राधिकरण की ओर से इसे आधिकारिक तौर पर खबर से जोड़कर बताया जाए। हालांकि, स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़क की बदहाली का मुद्दा सामने आने और खबर प्रकाशित होने के बाद प्रशासनिक स्तर पर तेजी दिखाई दी।
और यही लोकतंत्र में खबर की असली ताकत भी है—
जहां सड़क चुप हो जाती है, वहां खबर बोलती है।
हालांकि व्यंग्य अपनी जगह है, लेकिन सड़क की मरम्मत की तस्वीरें यह जरूर बताती हैं कि आखिरकार जिम्मेदार एजेंसियों ने समस्या पर काम शुरू किया है।
गड्ढों से ‘कंक्रीट’ तक का सफर
कुछ समय पहले तक इस सड़क पर वाहन चलाना किसी परीक्षा से कम नहीं था। कहीं सड़क उखड़ी थी, कहीं गड्ढा था और कहीं सड़क की ऊपरी परत पूरी तरह गायब दिखाई देती थी।
बरसात के दौरान ऐसी सड़कें और भी खतरनाक हो जाती हैं। पानी भरने के बाद गड्ढे दिखाई नहीं देते और वाहन चालकों को उनकी गहराई का अंदाजा तब लगता है, जब वाहन उसमें उतर चुका होता है।
अब कम से कम तत्काल स्थिति में सीमेंट-कंक्रीट की मरम्मत से रास्ता बेहतर हुआ है।
हालांकि असली परीक्षा अब भी बाकी है—क्या यह अस्थायी मरम्मत लंबे समय तक टिकेगी और स्थायी सड़क कब बनेगी?
शुक्रिया भी बनता है साहब!
आमतौर पर सरकारी काम में देरी हो तो सवाल पूछे जाते हैं, लेकिन जब कोई विभाग या अधिकारी तत्काल कदम उठाता है तो उसकी सराहना भी होनी चाहिए।
7X क्षेत्र के निवासियों की ओर से नोएडा प्राधिकरण की टीम, GM Civil ए.के. अरोड़ा और SM अरुण, WC-6 के प्रति आभार जताया गया है कि स्थायी समाधान की प्रक्रिया के बीच तत्काल राहत देने का प्रयास किया गया।
क्योंकि जनता को सिर्फ यह नहीं चाहिए कि फाइल में लिखा हो—
“सड़क की मरम्मत प्रस्तावित है।”
जनता चाहती है कि सड़क पर भी दिखाई दे—
“मरम्मत हो रही है।”
अब अगली नजर स्थायी मरम्मत पर
फिलहाल सीमेंट-कंक्रीट की मरम्मत से लोगों को राहत मिली है। लेकिन यह व्यवस्था अंतरिम समाधान है। स्थायी सड़क निर्माण के लिए NMRC से संबंधित प्रक्रिया और टेंडर का इंतजार रहेगा।
अब 7X के लोगों की नजर इस बात पर रहेगी कि जिस सड़क को फिलहाल कंक्रीट का सहारा मिला है, उसे स्थायी रूप से कब दुरुस्त किया जाता है।
क्योंकि नोएडा की सड़कों का इतिहास भी बड़ा दिलचस्प है—
पहले गड्ढे बनते हैं, फिर शिकायत होती है, फिर खबर आती है, फिर निरीक्षण होता है, फिर फाइल चलती है और आखिर में कहीं जाकर सड़क चलने लायक बनती है।
इस बार कम से कम कहानी का एक हिस्सा जल्दी पूरा हुआ है।
गड्ढों ने खबर बनाई, खबर ने सवाल उठाए और अब सड़क पर कंक्रीट नजर आ रहा है।
अब देखना यह है कि यह ‘तत्काल राहत’ कब स्थायी समाधान में बदलती है।















