Thursday, September 17, 2026
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सेक्टर-120 में अवैध वेंडरों को हटाने की कार्रवाई के बाद विवाद, प्राधिकरण प्रबंधक ने लगाए आरोपों को बताया निराधार

“वेंडरों की शिकायत के बाद सामने आया विवाद; प्रबंधक के अनुसार सड़क पर अतिक्रमण से यातायात और आपातकालीन सेवाएं प्रभावित होने की शिकायतों पर चलाया जा रहा था अभियान”

नोएडा, 17 सितंबर।
सेक्टर-120 में वेंडरों को हटाने की कार्रवाई के बाद कथित अवैध वसूली के आरोपों को लेकर विवाद सामने आया है। सोशल मीडिया पर इस मामले को लेकर चर्चा के बीच नोएडा प्राधिकरण के वर्क सर्किल-6 के सर्किल मैनेजर मनोज कुमार शुक्ला ने पूरे घटनाक्रम पर अपना पक्ष रखा है। प्रबंधक का कहना है कि प्राधिकरण की ओर से की जा रही कार्रवाई किसी व्यक्तिगत विवाद या वसूली के उद्देश्य से नहीं, बल्कि सेक्टर-120 के निवासियों और अपार्टमेंट ओनर्स एसोसिएशन (एओए) की ओर से लगातार मिल रही शिकायतों के आधार पर की जा रही थी।

दूसरी ओर, सोशल मीडिया पर प्रसारित पोस्ट के माध्यम से प्राधिकरण के एक कर्मचारी पर वेंडरों से कथित तौर पर पैसे मांगने के आरोप लगाए गए। इन आरोपों को लेकर सवाल भी उठाए गए। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के अनुसार इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में पूरे मामले में प्राधिकरण के दावे, वेंडरों से जुड़े आरोप और आधिकारिक रिकॉर्ड—तीनों को सामने रखकर वास्तविक स्थिति स्पष्ट किया जाना महत्वपूर्ण हो जाता है।

सड़क किनारे ठेलियों से यातायात प्रभावित होने की शिकायत

सर्किल मैनेजर मनोज कुमार शुक्ला के अनुसार, सेक्टर-120 में बड़ी संख्या में कथित अवैध वेंडरों द्वारा सड़क किनारे ठेलियां लगाए जाने के कारण सड़क पर वाहनों की पार्किंग बढ़ जाती थी। इससे सामान्य यातायात प्रभावित होने के साथ-साथ आपात स्थिति में एंबुलेंस जैसे वाहनों के आवागमन में भी परेशानी होने की शिकायतें सामने आई थीं।

प्रबंधक के मुताबिक, सेक्टर-120 के निवासियों तथा एओए की ओर से लंबे समय से इस तरह की शिकायतें प्राधिकरण तक पहुंच रही थीं। शिकायतों में सड़क पर ठेलियां लगाए जाने, यातायात व्यवस्था प्रभावित होने तथा आवागमन में बाधा पैदा होने का उल्लेख किया गया था। इन्हीं शिकायतों को आधार बनाकर प्राधिकरण की ओर से वेंडरों को हटाने की कार्रवाई शुरू की गई।

प्राधिकरण के पक्ष के अनुसार, कार्रवाई का मुख्य उद्देश्य सड़क और सार्वजनिक आवागमन की व्यवस्था को सुचारु बनाए रखना था।

चार-पांच महीने पहले भी हटाए गए थे करीब 50 वेंडर

प्राधिकरण प्रबंधक के अनुसार, लगभग चार-पांच महीने पहले भी सेक्टर-120 से करीब 50 अवैध वेंडरों को हटाया गया था। उनका कहना है कि सेक्टर-120 के निर्धारित वेंडिंग जोन में लगभग 15 वैध वेंडर ही हैं।

प्रबंधक के मुताबिक, कार्रवाई के बाद कुछ समय तक स्थिति नियंत्रित रही, लेकिन बाद में जिन स्थानों से वेंडरों को हटाया गया था, वहां धीरे-धीरे दोबारा ठेलियां लगनी शुरू हो गईं। इस वजह से प्राधिकरण को फिर से कार्रवाई करनी पड़ी।

उन्होंने यह भी बताया कि सेक्टर-119 और सेक्टर-120 के बीच की सड़क पर बड़ी संख्या में वेंडरों द्वारा दुकानें लगाए जाने की शिकायत संबंधित सोसायटी के निवासियों और एओए की ओर से की गई थी। इन शिकायतों के बाद प्राधिकरण की टीम पिछले कई दिनों से अभियान चलाकर ठेलियां हटाने का प्रयास कर रही थी।

कर्मचारियों के हटते ही दोबारा लग जाती थीं ठेलियां

मनोज कुमार शुक्ला के मुताबिक, कार्रवाई के दौरान कर्मचारियों के वहां से हटते ही कुछ वेंडर दोबारा उसी स्थान पर ठेली लगा लेते थे। इससे प्राधिकरण की कार्रवाई के बावजूद स्थिति पूरी तरह नियंत्रित नहीं हो पा रही थी।

प्रबंधक के अनुसार, इसी क्रम में 15 सितंबर को प्राधिकरण की ओर से अभियान चलाया गया और दोनों स्थानों से बड़ी संख्या में कथित अवैध ठेलियां हटाई गईं। उनका कहना है कि अभियान के बाद जब वह अपने घर की ओर जा रहे थे, तब उन्हें दोबारा चार-पांच ठेलियां लगी हुई दिखाई दीं।

उन्होंने वेंडरों से ठेलियां हटाने के लिए कहा। प्रबंधक के अनुसार, इसके बाद कुछ वेंडरों और उनके सहयोगियों ने उनकी गाड़ी को घेर लिया, जिसके बाद विवाद की स्थिति उत्पन्न हो गई।

विवाद बढ़ने पर पुलिस बुलाने की बात

मनोज कुमार शुक्ला के अनुसार, विवाद बढ़ने की स्थिति में उन्होंने संबंधित पुलिस चौकी को फोन कर पुलिस को मौके पर बुलाया। उनके मुताबिक, पुलिस के पहुंचने के बाद वहां मौजूद लोग इधर-उधर हो गए।

प्रबंधक ने यह भी कहा कि घटना के दौरान कुछ लोगों ने उन पर आरोप लगाते हुए वीडियो बनाया। बाद में यह वीडियो अथवा उससे संबंधित सामग्री सोशल मीडिया पर प्रसारित की गई।

सोशल मीडिया पर प्रसारित पोस्ट में प्रबंधक पर कथित तौर पर रात करीब 10 बजे वेंडरों से पैसे मांगने का आरोप लगाया गया। इन आरोपों को कथित अवैध वसूली से जोड़ते हुए सवाल उठाए गए।

हालांकि, प्रबंधक ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि वह क्षेत्र में अवैध वेंडिंग और अतिक्रमण से संबंधित शिकायतों के आधार पर कार्रवाई कर रहे थे।

टाउन वेंडिंग कमेटी के सदस्य का भी किया उल्लेख

मनोज कुमार शुक्ला ने अपने पक्ष में टाउन वेंडिंग कमेटी के सदस्य अमरजीत का भी उल्लेख किया। उनके अनुसार, अमरजीत का लाइसेंस सेक्टर-76 स्थित वेंडिंग जोन में है और वह वहां दुकान लगाते हैं।

प्रबंधक ने आरोप लगाया कि अमरजीत सेक्टर-76 के सामने बाजार क्षेत्र में भी कुछ दुकानें लगवाते हैं तथा स्वयं भी पाव-भाजी की ठेली लगाते हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि सेक्टर-74 रेड लाइट के पहले भी उनके लोगों द्वारा ठेलियां लगाई जाती हैं और वर्तमान विवाद के पीछे उन्हीं लोगों की भूमिका होने का आरोप लगाया।

हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी के आधार पर नहीं हुई है। संबंधित अमरजीत का पक्ष भी इस समय उपलब्ध नहीं है। इसलिए इन आरोपों को संबंधित पक्ष का दावा मानते हुए ही देखा जाना उचित होगा।

कार्रवाई और आरोपों के बीच सामने आए अलग-अलग दावे

पूरे मामले में एक ओर सोशल मीडिया पर प्राधिकरण के कर्मचारी पर वेंडरों से कथित पैसे मांगने के आरोप लगाए गए हैं। दूसरी ओर, प्राधिकरण के सर्किल मैनेजर का कहना है कि विवाद अवैध वेंडरों को हटाने की कार्रवाई के दौरान हुआ।

यही विरोधाभासी दावे इस पूरे प्रकरण को महत्वपूर्ण बनाते हैं। एक पक्ष जहां इसे कथित वसूली से जोड़कर देख रहा है, वहीं प्राधिकरण का पक्ष है कि कार्रवाई क्षेत्र में अवैध वेंडिंग और अतिक्रमण की शिकायतों के आधार पर की गई।

पर्दाफाश न्यूज़ के स्तर पर उपलब्ध पेपर कटिंग में किसी स्वतंत्र जांच, आधिकारिक जांच रिपोर्ट या आरोपों की पुष्टि करने वाले दस्तावेज का उल्लेख नहीं है। इसलिए सोशल मीडिया पर लगाए गए आरोपों को अंतिम सत्य के रूप में प्रस्तुत करना उचित नहीं होगा।

15 और 16 सितंबर की कार्रवाई का रिकॉर्ड बताएगा असली स्थिति

इस पूरे मामले में कई ऐसे सवाल हैं जिनका जवाब आधिकारिक रिकॉर्ड से मिल सकता है। मसलन, 15 और 16 सितंबर को किस आधार पर कार्रवाई की गई? संबंधित क्षेत्र में कितने वैध वेंडर पंजीकृत हैं? कितने वेंडरों को हटाया गया? हटाए गए वेंडरों के विरुद्ध किस नियम या प्रावधान के तहत कार्रवाई की गई? कार्रवाई के दौरान प्राधिकरण की टीम में कौन-कौन से अधिकारी और कर्मचारी मौजूद थे?

इन सवालों के जवाब यदि प्राधिकरण के आधिकारिक अभिलेखों से सामने आते हैं तो विवाद की वास्तविक स्थिति काफी हद तक स्पष्ट हो सकती है।

इसी तरह, यदि किसी कर्मचारी पर वेंडरों से पैसे मांगने का आरोप लगाया गया है तो उस आरोप के समर्थन में उपलब्ध वीडियो, ऑडियो, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान अथवा अन्य साक्ष्यों की जांच भी महत्वपूर्ण होगी।

वैध और अवैध वेंडरों की स्थिति स्पष्ट होना जरूरी

मामले का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि सेक्टर-120 में निर्धारित वेंडिंग जोन और सड़क किनारे लगाए जा रहे ठेलियों की स्थिति क्या है। प्राधिकरण प्रबंधक के अनुसार निर्धारित वेंडिंग जोन में करीब 15 वैध वेंडर हैं, जबकि सड़क किनारे लगाए जाने वाले अन्य वेंडरों को अवैध बताया गया है।

ऐसे में यह स्पष्ट होना जरूरी है कि जिन लोगों के खिलाफ कार्रवाई हुई, उनमें से कितने वेंडर आधिकारिक रूप से पंजीकृत थे और कितने बिना अनुमति के वहां दुकान लगा रहे थे। यदि किसी वेंडर के पास वैध दस्तावेज हैं, तो उसके खिलाफ कार्रवाई का आधार भी सार्वजनिक रिकॉर्ड से स्पष्ट होना चाहिए।

जांच और आधिकारिक दस्तावेजों से ही निकलेगा निष्कर्ष

फिलहाल सोशल मीडिया पर लगाए गए कथित वसूली के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। वहीं प्राधिकरण प्रबंधक ने इन आरोपों को निराधार बताते हुए कार्रवाई को सड़क पर अतिक्रमण, अवैध वेंडिंग और यातायात प्रभावित होने की शिकायतों से जोड़ा है।

ऐसे में मामले की वास्तविक स्थिति जानने के लिए दोनों पक्षों के दावों की स्वतंत्र जांच आवश्यक दिखाई देती है। 15 और 16 सितंबर को हुई कार्रवाई का आधिकारिक रिकॉर्ड, संबंधित क्षेत्र में पंजीकृत वेंडरों का विवरण, हटाए गए वेंडरों की सूची, कार्रवाई का नियमगत आधार और उपलब्ध वीडियो या अन्य साक्ष्य इस विवाद की तस्वीर साफ करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।

फिलहाल उपलब्ध तथ्यों के आधार पर इतना स्पष्ट है कि सेक्टर-120 में वेंडरों को हटाने की कार्रवाई को लेकर दो अलग-अलग दावे सामने आए हैं। प्राधिकरण इसे शिकायतों के आधार पर चलाया गया अतिक्रमण-विरोधी अभियान बता रहा है, जबकि सोशल मीडिया पर कुछ पोस्टों में कथित वसूली के आरोप लगाए गए हैं। इन दोनों दावों में से वास्तविक स्थिति क्या है, यह संबंधित अधिकारियों की निष्पक्ष जांच और आधिकारिक दस्तावेजों के आधार पर ही स्पष्ट हो सकेगा।

— पर्दाफाश न्यूज़ | विशेष रिपोर्ट

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VIKAS TRIPATHI
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VIKAS TRIPATHI भारत देश की सभी छोटी और बड़ी खबरों को सामने दिखाने के लिए "पर्दाफास न्यूज" चैनल को लेके आए हैं। जिसके लोगो के बीच में करप्शन को कम कर सके। हम देश में समान व्यवहार के साथ काम करेंगे। देश की प्रगति को बढ़ाएंगे।
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