“गौर सिटी स्पोर्ट्स स्टेडियम के बाहर शांतिपूर्ण प्रदर्शन, अस्थायी रूप से खुला प्रवेश द्वार; ग्रीन बेल्ट में निर्माण की तैयारी ने बढ़ाई चिंता”
ग्रेटर नोएडा वेस्ट। वर्ष 2016 में शुरू हुआ चर्चित नागरिक अभियान “My Walk, My Rights” एक बार फिर पूरे जोश के साथ जीवित हो गया है। फर्क सिर्फ इतना है कि इस बार लड़ाई केवल वॉकिंग और स्टेडियम में प्रवेश के अधिकार तक सीमित नहीं है, बल्कि वर्षों पुराने पेड़ों, सार्वजनिक हरित क्षेत्र और पर्यावरण संरक्षण की भी बन चुकी है। शनिवार को गौर सिटी स्पोर्ट्स स्टेडियम के प्रवेश द्वार पर बड़ी संख्या में निवासियों ने शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन कर अपने अधिकारों और पर्यावरण संरक्षण को लेकर आवाज बुलंद की।
प्रदर्शन के दौरान पुलिस भी मौके पर पहुँची। निवासियों और प्रशासन के बीच बातचीत के बाद फिलहाल स्टेडियम का प्रवेश द्वार वॉकर्स के लिए अस्थायी रूप से खोल दिया गया। हालांकि प्रदर्शनकारियों का कहना है कि यह केवल एक अस्थायी राहत है और जब तक स्थायी समाधान नहीं निकलता, उनका संघर्ष जारी रहेगा।
“हम इसी टाउनशिप के निवासी हैं, स्टेडियम पर हमारा वैध अधिकार”
प्रदर्शन में शामिल निवासियों का कहना था कि उन्होंने इस टाउनशिप में घर खरीदते समय जिन सुविधाओं और खुले वातावरण का सपना देखा था, उनमें स्पोर्ट्स स्टेडियम और हरित क्षेत्र प्रमुख आकर्षण थे। वर्षों से लोग यहाँ सुबह-शाम टहलते रहे हैं, लेकिन हाल के दिनों में प्रवेश को लेकर उत्पन्न विवाद ने लोगों में असंतोष पैदा कर दिया।
निवासियों ने कहा कि वे इस टाउनशिप के स्थायी निवासी हैं और स्टेडियम के रखरखाव के लिए विभिन्न शुल्क भी देते हैं। ऐसे में उन्हें प्रवेश से वंचित करना उचित नहीं है। प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट किया कि यह केवल सुविधाओं का मुद्दा नहीं बल्कि नागरिक अधिकारों से जुड़ा विषय है।
अंदर का दृश्य देखकर बढ़ी चिंता, ग्रीन बेल्ट में मिले निर्माण के संकेत
गेट खुलने के बाद जब प्रदर्शनकारी स्टेडियम परिसर के भीतर पहुँचे तो उनकी चिंता और बढ़ गई। लोगों ने दावा किया कि ग्रीन बेल्ट क्षेत्र में बड़े पैमाने पर निर्माण की तैयारी दिखाई दी। कई स्थानों पर विशाल आरसीसी पिलर्स (RCC Pillars) खड़े करने के लिए गहरे गड्ढे खोदे जा चुके हैं।
स्थानीय निवासियों के अनुसार यह क्षेत्र वर्षों से हरित पट्टी के रूप में मौजूद रहा है और यहाँ बड़ी संख्या में पुराने पेड़ थे। लोगों का आरोप है कि निर्माण गतिविधियों के चलते कई पेड़ पहले ही काटे जा चुके हैं और जो पेड़ अभी बचे हुए हैं, उनके भी हटाए जाने की आशंका बनी हुई है।
निवासियों का कहना है कि यदि समय रहते इस पर रोक नहीं लगी तो आने वाले दिनों में क्षेत्र की हरियाली को अपूरणीय क्षति पहुँच सकती है।
35 प्रतिशत नॉन-एफएआर ग्रीन बेल्ट में निर्माण पर उठे सवाल
प्रदर्शन के दौरान सबसे बड़ा प्रश्न यह उठा कि कथित रूप से 35 प्रतिशत नॉन-एफएआर (Non-FAR) ग्रीन बेल्ट क्षेत्र में निर्माण गतिविधियाँ किस आधार पर संचालित की जा रही हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि यह क्षेत्र हरित पट्टी के रूप में आरक्षित है, तो किसी भी प्रकार के स्थायी निर्माण के लिए संबंधित विभागों की अनुमति आवश्यक होती है। निवासियों ने मांग की कि इस पूरे मामले की पारदर्शी जांच कराई जाए और सार्वजनिक रूप से यह बताया जाए कि निर्माण के लिए कौन-कौन सी स्वीकृतियाँ प्राप्त की गई हैं।
लोगों का कहना है कि जब तक सभी दस्तावेज सार्वजनिक नहीं किए जाते, तब तक संदेह और विवाद की स्थिति बनी रहेगी।
2016 का आंदोलन फिर बना जनआंदोलन
गौर सिटी के पुराने निवासी बताते हैं कि वर्ष 2016 में “My Walk, My Rights” अभियान की शुरुआत वॉकिंग ट्रैक और सार्वजनिक स्थानों तक लोगों की पहुँच सुनिश्चित करने के उद्देश्य से हुई थी। उस समय भी बड़ी संख्या में निवासियों ने एकजुट होकर अपनी आवाज उठाई थी।
लगभग एक दशक बाद वही आंदोलन फिर से चर्चा में है। इस बार इसमें युवा, वरिष्ठ नागरिक, महिलाएँ और पर्यावरण प्रेमी बड़ी संख्या में शामिल हो रहे हैं।
प्रदर्शन में शामिल लोगों का कहना है कि अब यह केवल एक रास्ते या गेट का मुद्दा नहीं है। यह उस जीवनशैली और वातावरण को बचाने का प्रयास है जिसके आधार पर लोगों ने यहाँ अपना घर बसाया था।
“घर खरीदते समय हरियाली का सपना दिखाया गया था”
निवासियों का कहना है कि जब उन्होंने इस टाउनशिप में निवेश किया था, तब प्रचार सामग्री और प्रस्तुतियों में विशाल हरित क्षेत्र, खुले स्थान, वॉकिंग ट्रैक और खेल सुविधाओं को प्रमुखता से दिखाया गया था।
लोगों का कहना है कि इन्हीं सुविधाओं और हरित वातावरण को देखकर हजारों परिवारों ने यहाँ बसने का निर्णय लिया था। ऐसे में यदि आज उन्हीं क्षेत्रों में निर्माण कार्य शुरू हो जाता है और पेड़ों की कटाई होने लगती है, तो यह मूल अवधारणा और निवासियों की अपेक्षाओं के विपरीत है।
प्रदर्शन में शामिल कई वरिष्ठ नागरिकों ने कहा कि सुबह और शाम की सैर उनके स्वास्थ्य का महत्वपूर्ण हिस्सा है। यदि हरित क्षेत्र कम होते गए तो इसका सीधा असर लोगों के जीवन की गुणवत्ता पर पड़ेगा।
पर्यावरण संरक्षण को लेकर बढ़ी जनचिंता
विशेषज्ञों का मानना है कि तेजी से शहरीकरण के दौर में बड़े शहरों और टाउनशिपों में हरित क्षेत्र का संरक्षण अत्यंत आवश्यक हो गया है। पेड़ न केवल ऑक्सीजन प्रदान करते हैं, बल्कि तापमान नियंत्रित रखने, धूल कम करने और जैव विविधता को बनाए रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि वर्षों पुराने पेड़ों को हटाना केवल हरियाली का नुकसान नहीं बल्कि पूरे पर्यावरणीय संतुलन को प्रभावित करने वाला कदम हो सकता है। इसी कारण इस मुद्दे ने अब केवल स्थानीय सुविधा के प्रश्न से आगे बढ़कर पर्यावरण संरक्षण का रूप ले लिया है।
प्रशासन, प्राधिकरण और वन विभाग से हस्तक्षेप की मांग
प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि भविष्य में दोबारा प्रवेश रोका गया या ग्रीन बेल्ट क्षेत्र में कथित निर्माण कार्य जारी रहा तो वे इस मुद्दे को संबंधित सभी विभागों के समक्ष उठाएँगे।
निवासियों ने प्रशासन, ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण, वन विभाग तथा अन्य सक्षम अधिकारियों से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। उनका कहना है कि मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और यदि किसी प्रकार की अनियमितता पाई जाती है तो उचित कार्रवाई की जानी चाहिए।
निवासियों की चार प्रमुख माँगें
प्रदर्शन के दौरान निवासियों ने अपनी माँगों को स्पष्ट रूप से सामने रखा। इनमें प्रमुख रूप से—
- ग्रीन बेल्ट एवं 35 प्रतिशत नॉन-एफएआर क्षेत्र में चल रहे निर्माण की तत्काल जांच।
- भूमि का सीमांकन (डिमार्केशन) कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट की जाए।
- सभी स्वीकृतियों और अनुमतियों का सत्यापन कर सार्वजनिक जानकारी उपलब्ध कराई जाए।
- वर्षों पुराने पेड़ों की सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए किसी भी कटान पर तत्काल रोक लगाई जाए।
- गौर स्टेडियम में सभी निवासियों के लिए स्थायी, पारदर्शी और निर्बाध प्रवेश व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, जिसके लिए नागरिक नियमित शुल्क भी अदा कर रहे हैं।
“पेड़ बनने में वर्षों लगते हैं, काटने में कुछ मिनट” — अनूप कुमार सोनी
गौतम बुद्ध नगर विकास समिति के सचिव अनूप कुमार सोनी ने प्रदर्शन के दौरान कहा कि यह संघर्ष किसी व्यक्ति या संस्था के खिलाफ नहीं बल्कि सार्वजनिक हित और पर्यावरण संरक्षण के लिए है।
उन्होंने कहा, “एक पेड़ बनने में वर्षों लगते हैं, लेकिन उसे काटने में कुछ मिनट। हम अपने पेड़ों, हरित क्षेत्र और अपने अधिकार—दोनों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध हैं। यदि आवश्यकता पड़ी तो जनहित, पर्यावरण संरक्षण और नागरिक अधिकारों की रक्षा के लिए यह लोकतांत्रिक जनआवाज़ आगे भी पूरी मजबूती के साथ उठती रहेगी।”
उनके इस वक्तव्य को उपस्थित लोगों ने जोरदार समर्थन दिया।
बड़ी संख्या में निवासी रहे मौजूद
इस शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन में अनीता प्रजापति, ज्ञानेश शर्मा, अमरजीत राठौर, योगेश भौगोर, मुकेश पाल, नेहा सिंगला, एच.के. भारद्वाज सहित बड़ी संख्या में स्थानीय निवासी और सामाजिक कार्यकर्ता मौजूद रहे। प्रदर्शन पूरी तरह शांतिपूर्ण रहा और लोगों ने लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात प्रशासन तक पहुँचाने का प्रयास किया।
गौर सिटी में शुरू हुई यह नई मुहिम आने वाले दिनों में किस दिशा में जाती है, इस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं। फिलहाल इतना स्पष्ट है कि “My Walk, My Rights” अब केवल एक वॉकिंग अभियान नहीं रहा, बल्कि हरित क्षेत्र, पर्यावरण संरक्षण और नागरिक अधिकारों की संयुक्त लड़ाई का प्रतीक बन चुका है।














