नई दिल्ली/मैड्रिड: भारत की सुरक्षा एजेंसियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक बड़ी सफलता मिली है। पंजाब पुलिस की एंटी-गैंगस्टर टास्क फोर्स (AGTF) से मिली खुफिया जानकारी के आधार पर स्पेन की सुरक्षा एजेंसियों ने भारत के वांटेड गैंगस्टर गुरप्रीत सिंह उर्फ गोल्डी ढिल्लों को राजधानी मैड्रिड में हिरासत में लिया है। अब भारतीय एजेंसियां उसे भारत लाने के लिए प्रत्यर्पण (Extradition) की कानूनी प्रक्रिया में जुट गई हैं।
गोल्डी ढिल्लों पर हत्या की साजिश, रंगदारी, धमकी, संगठित अपराध और विदेश से गैंग ऑपरेट करने जैसे कई गंभीर आरोप हैं। उसका नाम पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़ और दिल्ली-एनसीआर में सक्रिय कई आपराधिक मामलों में सामने आ चुका है।
कैसे हुई गिरफ्तारी?
सूत्रों के अनुसार, पंजाब पुलिस की एंटी-गैंगस्टर टास्क फोर्स लंबे समय से गोल्डी ढिल्लों की गतिविधियों पर नजर रखे हुए थी। भारतीय एजेंसियों ने उसकी लोकेशन और अन्य महत्वपूर्ण सूचनाएं स्पेन की सुरक्षा एजेंसियों के साथ साझा कीं।
इसी इनपुट के आधार पर मैड्रिड में कार्रवाई करते हुए स्पेनिश अधिकारियों ने उसे हिरासत में ले लिया। हालांकि फिलहाल उसकी गिरफ्तारी और भारत प्रत्यर्पण को लेकर अंतिम आधिकारिक घोषणा का इंतजार है।
किन मामलों में है आरोपी?
गोल्डी ढिल्लों कई हाई-प्रोफाइल मामलों में वांटेड है।
उसका नाम चंडीगढ़ के सेक्टर-11 में एक फार्मेसी कैशियर जानकी दास की दिनदहाड़े हत्या की साजिश में सामने आया था। इसके अलावा आम आदमी पार्टी की विधायक नीना मित्तल को धमकी देने के मामले में भी उस पर आरोप हैं।
जांच एजेंसियों के अनुसार, वह विदेश में बैठकर पंजाब और आसपास के राज्यों में रंगदारी, धमकी और शूटरों के जरिए आपराधिक गतिविधियों को संचालित करता था।
गोल्डी बरार का करीबी
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, गोल्डी ढिल्लों को “गोल्डी राजपुरा” के नाम से भी जाना जाता है। वह कनाडा में बैठे गैंगस्टर सतिंदरजीत सिंह उर्फ गोल्डी बरार का करीबी सहयोगी माना जाता है।
गोल्डी बरार को भारत सरकार पहले ही आतंकवादी घोषित कर चुकी है। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की कई चार्जशीट में गोल्डी ढिल्लों और गोल्डी बरार का नाम सह-साजिशकर्ता के रूप में शामिल किया गया है।
हालांकि पुलिस ने स्पष्ट किया है कि गोल्डी ढिल्लों और गोल्डी बरार दो अलग-अलग व्यक्ति हैं।
लॉरेंस बिश्नोई गैंग से भी रहा संबंध
जांच एजेंसियों के मुताबिक, गोल्डी ढिल्लों पहले लॉरेंस बिश्नोई गैंग से जुड़ा हुआ था।
बाद में दोनों के बीच मतभेद और गैंगवार की स्थिति पैदा हो गई, जिसके बाद उसने अपना अलग नेटवर्क तैयार कर लिया। इसके बावजूद उसका संगठित अपराध से संबंध लगातार बना रहा।
2022 में भाग गया था विदेश
पंजाब पुलिस के अनुसार, गोल्डी ढिल्लों वर्ष 2022 में भारत छोड़कर विदेश भाग गया था।
विदेश में रहने के बावजूद उसने भारत में अपना नेटवर्क सक्रिय रखा। जांच में सामने आया कि वह सोशल मीडिया, एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग ऐप्स और अपने गुर्गों के जरिए अपराधों को अंजाम दिलाता था।
उस पर कई राज्यों में रंगदारी वसूलने, शूटर उपलब्ध कराने और हत्या की साजिश रचने के आरोप हैं।
विदेश से चला रहा था गैंग
सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि विदेश भागने के बाद भी गोल्डी ढिल्लों ने अपना आपराधिक नेटवर्क खत्म नहीं किया।
- उसने पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़ और दिल्ली-एनसीआर में कई नए सदस्यों को गैंग से जोड़ा। कई मामलों में हथियारों की सप्लाई, शूटरों की भर्ती और अपराधों की योजना विदेश से ही बनाई जाती थी।
एक मामले में उसके दो गुर्गों को मोहाली और राजपुरा में हत्या की योजना बनाते समय गिरफ्तार किया गया था। उनके पास से हथियार और नशीले पदार्थ भी बरामद किए गए थे।
प्रत्यर्पण प्रक्रिया क्या होती है?
अब सबसे महत्वपूर्ण चरण प्रत्यर्पण का है।
प्रत्यर्पण वह कानूनी प्रक्रिया है जिसके तहत एक देश किसी आरोपी या अपराधी को दूसरे देश को सौंपता है, ताकि उस पर मुकदमा चलाया जा सके।
भारत और स्पेन के बीच मौजूद कानूनी प्रक्रियाओं के तहत भारतीय एजेंसियां आवश्यक दस्तावेज और अदालत के आदेश स्पेन सरकार को सौंपेंगी। इसके बाद वहां की अदालत तय करेगी कि आरोपी को भारत भेजा जाएगा या नहीं।
भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह कार्रवाई?
विशेषज्ञों का मानना है कि विदेशों में छिपे गैंगस्टरों पर कार्रवाई भारत की कानून-व्यवस्था के लिए बड़ी उपलब्धि है।
पिछले कुछ वर्षों में कई भारतीय गैंगस्टर कनाडा, यूरोप और अन्य देशों में जाकर अपना नेटवर्क चला रहे हैं। वहां बैठकर वे सोशल मीडिया और डिजिटल माध्यमों से रंगदारी, धमकी और अपराधों को संचालित करते हैं।
ऐसे अपराधियों की गिरफ्तारी अंतरराष्ट्रीय पुलिस सहयोग की सफलता मानी जा रही है।
एजेंसियों के सामने आगे की चुनौती
हालांकि हिरासत में लिया जाना एक बड़ी सफलता है, लेकिन भारत लाना आसान प्रक्रिया नहीं होती।
प्रत्यर्पण के दौरान अदालत में आरोपी कानूनी दलीलें दे सकता है। मानवाधिकार, राजनीतिक उत्पीड़न या अन्य आधारों पर भी प्रत्यर्पण को चुनौती दी जा सकती है।
इसलिए भारतीय एजेंसियां मजबूत कानूनी दस्तावेज तैयार कर रही हैं ताकि अदालत में प्रत्यर्पण का अनुरोध स्वीकार हो सके।
स्पेन में गोल्डी ढिल्लों की हिरासत भारत की सुरक्षा एजेंसियों और पंजाब पुलिस के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है। यदि प्रत्यर्पण प्रक्रिया सफल रहती है, तो भारत में उसके खिलाफ लंबित कई मामलों की सुनवाई आगे बढ़ सकेगी।
यह कार्रवाई इस बात का भी संकेत है कि विदेशों में छिपे संगठित अपराधियों के खिलाफ भारत अब अंतरराष्ट्रीय सहयोग के जरिए लगातार कार्रवाई कर रहा है। आने वाले दिनों में स्पेन की अदालत और दोनों देशों की कानूनी प्रक्रिया तय करेगी कि गोल्डी ढिल्लों को कब और किन शर्तों पर भारत लाया जाएगा।














