नोएडा। सेक्टर-63 थाना क्षेत्र में हुए हिंसक श्रमिक आंदोलन और आगजनी मामले में नोएडा पुलिस को बड़ी कामयाबी मिली है। पुलिस ने आंदोलन के दौरान वाहनों में आग लगाने, तोड़फोड़ करने और हिंसा भड़काने के आरोप में मुख्य आरोपी नरेश कुमार को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस जांच में इस मामले के तार हरियाणा में हुए पूर्व श्रमिक आंदोलनों और हिंसक घटनाओं से भी जुड़े पाए गए हैं।
पुलिस के अनुसार, आरोपी लंबे समय से श्रमिक आंदोलनों के नाम पर उग्र भीड़ को भड़काने और सुनियोजित तरीके से हिंसक गतिविधियों को अंजाम देने में शामिल रहा है। गिरफ्तारी के बाद पुलिस को कई अहम सुराग मिले हैं, जिनके आधार पर अब पूरे नेटवर्क की जांच तेज कर दी गई है।
13 अप्रैल 2026 को भड़की थी हिंसा
जानकारी के मुताबिक, 13 अप्रैल 2026 को नोएडा के सेक्टर-63 क्षेत्र में विभिन्न कंपनियों के श्रमिक और मजदूर अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे। शुरुआत में प्रदर्शन शांतिपूर्ण बताया जा रहा था, लेकिन कुछ ही देर बाद हालात बेकाबू हो गए।
प्रदर्शन के दौरान अचानक हिंसा भड़क उठी और उपद्रवियों ने कई वाहनों में आग लगा दी। क्षेत्र में अफरा-तफरी मच गई और सड़क पर खड़े वाहनों को निशाना बनाया गया। पुलिस और प्रशासन के लिए स्थिति को नियंत्रित करना बड़ी चुनौती बन गया था।
सबसे गंभीर घटना सेक्टर-63 स्थित विपुल मोटर्स के पास सामने आई, जहां खड़ी दर्जनों गाड़ियों और दोपहिया वाहनों में आग लगा दी गई। इस पूरी घटना के वीडियो और सीसीटीवी फुटेज सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुए थे।
सीसीटीवी फुटेज और मोबाइल लोकेशन से आरोपी तक पहुंची पुलिस
नोएडा पुलिस ने घटना के बाद कई टीमों का गठन किया और तकनीकी जांच शुरू की। पुलिस ने आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और मोबाइल लोकेशन की मदद से आरोपी की पहचान की।
जांच में सामने आया कि गिरफ्तार आरोपी नरेश कुमार हिंसा के दौरान मौके पर मौजूद था और उसने भीड़ को उकसाने के साथ-साथ वाहनों में आग लगाने की घटना में सक्रिय भूमिका निभाई थी।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, आरोपी को बेहद सुनियोजित तरीके से गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तारी से बचने के लिए वह लगातार अपनी लोकेशन बदल रहा था और मोबाइल सिम तक बदल चुका था, लेकिन पुलिस की सर्विलांस टीम ने आखिरकार उसे ट्रेस कर लिया।
हरियाणा हिंसा से भी जुड़े मिले तार
जांच के दौरान पुलिस को यह भी पता चला कि आरोपी पहले हरियाणा के मानेसर क्षेत्र में हुए बड़े श्रमिक आंदोलन और हिंसा में भी शामिल रह चुका है।
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, आरोपी का संपर्क विभिन्न श्रमिक यूनियनों और उग्र प्रदर्शन से जुड़े लोगों के साथ था। उसके मोबाइल फोन से कई संदिग्ध संपर्क और बातचीत के रिकॉर्ड भी मिले हैं, जिनकी अब गहराई से जांच की जा रही है।
जांच एजेंसियों को आशंका है कि कुछ लोग संगठित तरीके से श्रमिक असंतोष को हिंसक दिशा देने का प्रयास कर रहे थे।
महिला कंपनी परिसर में कर्मचारियों को भड़काने का आरोप
पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि घटना से पहले आरोपी ने सेक्टर-63 स्थित एक कंपनी परिसर में जाकर कर्मचारियों को उकसाने का प्रयास किया था। इसके बाद बड़ी संख्या में लोग सड़क पर उतर आए और हालात बिगड़ते चले गए।
जांच में पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या इस पूरे आंदोलन को पहले से योजनाबद्ध तरीके से हिंसक बनाने की तैयारी की गई थी।
आगजनी और तोड़फोड़ से करोड़ों का नुकसान
हिंसा के दौरान कई चारपहिया और दोपहिया वाहन जलकर राख हो गए। आसपास के व्यावसायिक प्रतिष्ठानों और कंपनियों को भी भारी नुकसान पहुंचा।
स्थानीय लोगों और कंपनी कर्मचारियों के बीच घटना के बाद भय का माहौल बन गया था। कई घंटों तक सड़कें बाधित रहीं और पुलिस बल को इलाके में तैनात करना पड़ा।
पुलिस अब पूरे नेटवर्क की जांच में जुटी
नोएडा पुलिस का कहना है कि यह गिरफ्तारी सिर्फ शुरुआत है। घटना में शामिल अन्य आरोपियों की पहचान भी की जा रही है। पुलिस डिजिटल साक्ष्यों, कॉल डिटेल रिकॉर्ड और सोशल मीडिया गतिविधियों की भी जांच कर रही है।
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, हिंसा फैलाने और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
श्रमिक आंदोलन या सुनियोजित हिंसा?
यह मामला अब केवल एक श्रमिक आंदोलन तक सीमित नहीं रह गया है। पुलिस यह जांच कर रही है कि क्या आंदोलन की आड़ में कुछ असामाजिक तत्वों ने हिंसा और अराजकता फैलाने की साजिश रची थी।
विशेषज्ञों का मानना है कि श्रमिकों की समस्याएं और मांगें लोकतांत्रिक तरीके से उठाई जानी चाहिए, लेकिन हिंसा, आगजनी और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान किसी भी आंदोलन की वैधता को कमजोर कर देता है।
कानून व्यवस्था पर बड़ा सवाल
इस घटना ने एक बार फिर औद्योगिक क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था, श्रमिक असंतोष और भीड़ नियंत्रण जैसे मुद्दों को चर्चा के केंद्र में ला दिया है।
अब सभी की नजर इस बात पर है कि पुलिस इस मामले में आगे किन लोगों तक पहुंचती है और क्या इस हिंसा के पीछे कोई बड़ा संगठित नेटवर्क काम कर रहा था।














