पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक नया मोड़ आ गया है। असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी All India Majlis-e-Ittehadul Muslimeen (AIMIM) ने हुमायूं कबीर की जनता उन्नयन पार्टी के साथ मिलकर आगामी विधानसभा चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया है। इस गठबंधन को सीधे तौर पर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और उनकी पार्टी तृणमूल कांग्रेस के लिए चुनौती माना जा रहा है।
25 मार्च को कोलकाता में शक्ति प्रदर्शन
ओवैसी ने घोषणा की है कि वह 25 मार्च को Kolkata में हुमायूं कबीर के साथ संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस करेंगे। हालांकि, सीट शेयरिंग को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है, लेकिन दोनों दलों का साथ आना राज्य की राजनीति में नए समीकरण बना सकता है।
तृणमूल से अलग होकर नई पार्टी
हुमायूं कबीर को पहले तृणमूल कांग्रेस से निष्कासित कर दिया गया था, जिसके बाद उन्होंने दिसंबर में अपनी नई पार्टी ‘जनता उन्नयन पार्टी’ बनाई। यह पार्टी खुद को तृणमूल कांग्रेस के विकल्प के रूप में पेश कर रही है और अब AIMIM के साथ गठबंधन कर चुनावी मैदान में उतरने जा रही है।
182 सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी
कबीर ने ऐलान किया है कि उनकी पार्टी राज्य की 294 में से 182 सीटों पर चुनाव लड़ने की योजना बना रही है। उन्होंने 15 उम्मीदवारों की पहली सूची भी जारी कर दी है और खुद मुर्शिदाबाद जिले की रेजिनगर और नौदा सीट से चुनाव लड़ने की तैयारी में हैं।
भवानीपुर में ममता के खिलाफ मुस्लिम उम्मीदवार
इस गठबंधन की सबसे चर्चित रणनीति भवानीपुर सीट को लेकर है, जहां Mamata Banerjee के खिलाफ मुस्लिम उम्मीदवार पूनम बेगम को उतारा गया है। इस सीट पर पहले से ही Suvendu Adhikari भी चुनौती दे रहे हैं, जिससे मुकाबला त्रिकोणीय और दिलचस्प हो गया है।
मुस्लिम वोट बैंक पर नजर
पश्चिम बंगाल में मुस्लिम आबादी करीब 27 से 30 प्रतिशत के बीच मानी जाती है, खासकर सीमावर्ती जिलों में इसका प्रभाव अधिक है। अब ओवैसी और हुमायूं कबीर के साथ आने से सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि क्या मुस्लिम वोट बैंक में बंटवारा होगा, जो अब तक बड़े पैमाने पर तृणमूल कांग्रेस के पक्ष में जाता रहा है।
चुनावी समीकरण बदलने की कोशिश
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि AIMIM ने बिहार और महाराष्ट्र में अपने प्रदर्शन से संकेत दिया है कि वह नए राज्यों में भी अपनी पकड़ मजबूत करना चाहती है। बंगाल में यह गठबंधन उसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
294 सदस्यीय पश्चिम बंगाल विधानसभा के लिए चुनाव 23 और 29 अप्रैल को दो चरणों में होंगे, जबकि मतगणना 4 मई को की जाएगी। ऐसे में ओवैसी–हुमायूं गठबंधन की एंट्री से चुनावी मुकाबला और भी रोचक और जटिल होने की संभावना है।














