Wednesday, May 6, 2026
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नोएडा की मिट्टी से फिर उठेगी दंगल की दहाड़! शालिनी सिंह की बड़ी पहल से कुश्ती प्रतिभाओं को मिला अंतरराष्ट्रीय मंच

नोएडा की पहचान अब सिर्फ ऊंची इमारतों, एक्सप्रेसवे और कॉरपोरेट टावरों तक सीमित नहीं रहने वाली, बल्कि एक बार फिर यह शहर अपनी पुरानी खेल विरासत—अखाड़ों और पहलवानों की धरती—के रूप में राष्ट्रीय स्तर पर चमकने की तैयारी कर रहा है। इस दिशा में एक बेहद महत्वपूर्ण और प्रेरणादायक पहल की है नोएडा सिटीजन फोरम (NCF) की कार्यकारी अध्यक्ष शालिनी सिंह ने, जिनके प्रयासों से अब ग्रामीण क्षेत्र के उभरते पहलवानों को अंतरराष्ट्रीय स्तर की ट्रेनिंग और आधुनिक सुविधाओं का लाभ मिलने लगा है।

बुधवार को ग्राम सोरखा, सेक्टर-115 नोएडा में आयोजित एक विशेष कुश्ती प्रोत्साहन कार्यक्रम ने स्थानीय खेल जगत में नई ऊर्जा भर दी। इस कार्यक्रम का आयोजन रिलायंस फाउंडेशन के सहयोग से किया गया, जिसमें फ्रांस के अंतरराष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त रेसलिंग कोच दामीन जैकोमेली ने शिरकत कर युवा खिलाड़ियों को विश्वस्तरीय प्रशिक्षण दिया। विदेशी कोच की मौजूदगी और ग्रामीण पहलवानों के साथ उनका सीधा अभ्यास सत्र इस आयोजन को बेहद खास बना गया।

शालिनी सिंह ने कहा—नोएडा की पहचान फिर बनेगी पहलवानों की धरती

कार्यक्रम के केंद्र में रहीं शालिनी सिंह ने साफ कहा कि नोएडा की मिट्टी का कुश्ती से ऐतिहासिक रिश्ता रहा है। यहां के कई अखाड़े लगभग सौ वर्ष पुराने हैं और इस क्षेत्र ने अनेक दमदार पहलवान देश को दिए हैं। लेकिन बदलते समय में आधुनिक सुविधाओं की कमी के कारण यहां की प्रतिभाएं पीछे छूटती जा रही थीं।

इसी कमी को दूर करने के लिए शालिनी Singh ने खुद बहलोलपुर और सर्फाबाद जैसे पारंपरिक अखाड़ों का दौरा किया और वहां खिलाड़ियों की सबसे बड़ी जरूरत—कुश्ती मैट—तत्काल उपलब्ध कराए। उनका कहना है कि सिर्फ परंपरा से खेल जिंदा नहीं रहता, उसे आधुनिक संसाधनों, तकनीक और सही मार्गदर्शन की भी जरूरत होती है।

उन्होंने कहा—

“हमारा उद्देश्य नोएडा के ग्रामीण बच्चों को ऐसा मंच देना है जहां गांव का खिलाड़ी भी अंतरराष्ट्रीय स्तर की ट्रेनिंग लेकर राष्ट्रीय पदक जीतने का सपना देख सके। नोएडा को फिर से पहलवानों की राजधानी बनाना हमारा संकल्प है।”

फ्रांस के कोच दामीन जैकोमेली ने सिखाए आधुनिक कुश्ती के गुर

कार्यक्रम का सबसे आकर्षक हिस्सा रहा फ्रांस से आए विश्वस्तरीय रेसलिंग कोच दामीन जैकोमेली का प्रशिक्षण सत्र। उन्होंने स्थानीय बच्चों और युवा पहलवानों को—

ग्राउंड कंट्रोल टेक्निक

बैलेंस शिफ्टिंग

डिफेंसिव लॉक

फास्ट टेकडाउन

इंटरनेशनल फ्रीस्टाइल मूवमेंट

मैच फिटनेस ड्रिल्स

जैसी आधुनिक तकनीकों की जानकारी दी।

ग्रामीण पृष्ठभूमि से आने वाले खिलाड़ियों के लिए यह अनुभव किसी सपने से कम नहीं था। पहली बार कई बच्चों ने विदेशी कोच से सीधे अभ्यास किया और अंतरराष्ट्रीय स्तर की तैयारी का अनुभव लिया। कोच दामीन ने खिलाड़ियों की फुर्ती, जुनून और प्राकृतिक ताकत की सराहना करते हुए कहा कि अगर इन्हें सही सुविधा और निरंतर प्रशिक्षण मिले तो नोएडा से कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी निकल सकते हैं।

पुराने अखाड़ों को मिलेगा नया जीवन, सुविधाओं का विस्तार शुरू

शालिनी सिंह ने बताया कि नोएडा सिटीजन फोरम अब क्षेत्र के पारंपरिक अखाड़ों का सर्वे कर रहा है ताकि वहां—

कुश्ती मैट

फिटनेस इक्विपमेंट

शेड

पीने के पानी की व्यवस्था

प्रशिक्षण सहयोग

प्रतियोगिता आयोजन

जैसी सुविधाएं विकसित की जा सकें।

उनका मानना है कि गांवों के अखाड़े केवल खेल स्थल नहीं, बल्कि सामाजिक अनुशासन, शारीरिक क्षमता और युवा ऊर्जा के केंद्र होते हैं। यदि इन्हें पुनर्जीवित किया गया तो इसका असर सीधे युवाओं को नशे, अपराध और भटकाव से दूर रखने में भी दिखेगा।

नोएडा में राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय कुश्ती प्रतियोगिताओं की तैयारी का संकेत

शालिनी सिंह ने भविष्य की योजना भी साझा करते हुए कहा कि उनका लक्ष्य केवल मैट बांटना या एक-दो कैंप कराना नहीं है, बल्कि आने वाले समय में नोएडा में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर की कुश्ती प्रतियोगिताएं आयोजित कराना है ताकि यहां के खिलाड़ियों को बाहर भटकना न पड़े और खेल संस्कृति को स्थानीय स्तर पर ही बड़ा मंच मिले।

यह बयान साफ संकेत देता है कि नोएडा में खेल इंफ्रास्ट्रक्चर को लेकर एक संगठित मुहिम शुरू हो चुकी है।

कार्यक्रम में जुटे खेल और समाज के कई बड़े चेहरे

इस अवसर पर भारतीय कुश्ती संघ, जिला गौतमबुद्ध नगर के अध्यक्ष सतपाल यादव, नोएडा सिटीजन फोरम की सचिव गरिमा त्रिपाठी, उपाध्यक्ष चक्रधर मिश्रा, इन्द्रजीत पहलवान, रवि यादव, जतन पहलवान, प्रमोद यादव, संजय शर्मा, अंकित पहलवान, राजेश पहलवान और सर्फाबाद टीम के सोनू यादव समेत बड़ी संख्या में खिलाड़ी, ग्रामीण और गणमान्य लोग मौजूद रहे।

गांव के बच्चों और अभिभावकों में इस आयोजन को लेकर जबरदस्त उत्साह दिखाई दिया। स्थानीय लोगों का कहना था कि पहली बार किसी ने गांव के अखाड़ों की क्षमता को इतने गंभीर तरीके से पहचाना है।

नोएडा में खेल क्रांति की शुरुआत?

एक तरफ शहर स्मार्ट सिटी बन रहा है, दूसरी तरफ उसकी जड़ों में छिपी खेल प्रतिभाओं को नया जीवन देने की यह पहल कई मायनों में ऐतिहासिक मानी जा रही है। शालिनी सिंह की इस मुहिम ने यह संदेश दे दिया है कि अगर सही नेतृत्व और संसाधन मिलें तो नोएडा की मिट्टी से फिर दंगल के ऐसे सितारे निकल सकते हैं जो देश-दुनिया में शहर का नाम रोशन करें।

यानी साफ है—

नोएडा के गांवों में अब सिर्फ मिट्टी नहीं उड़ेगी,
यहीं से मेडल जीतने वाले नए पहलवान भी निकलेंगे।

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