Tuesday, June 16, 2026
Your Dream Technologies
HomeNationalराज्य बार काउंसिलों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने की दिशा में सुप्रीम...

राज्य बार काउंसिलों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने की दिशा में सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक कदम

देश की न्यायिक व्यवस्था में महिलाओं की भागीदारी को मजबूत करने की दिशा में सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण और दूरगामी फैसला सुनाया है। शीर्ष अदालत ने बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) को राज्य बार काउंसिलों में महिलाओं के लिए निर्धारित 10 प्रतिशत सह-चयन (को-ऑप्शन) सीटों को भरने हेतु एक समान, पारदर्शी और निष्पक्ष प्रक्रिया तैयार करने का निर्देश दिया है।

क्यों महत्वपूर्ण है यह फैसला?

भारत में महिला वकीलों की संख्या लगातार बढ़ रही है, लेकिन बार काउंसिलों और निर्णय लेने वाले संस्थानों में उनका प्रतिनिधित्व अभी भी अपेक्षाकृत कम है। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट का यह निर्देश केवल सीटों के आवंटन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह न्यायिक व्यवस्था में लैंगिक समानता और समावेशी नेतृत्व को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।

सुप्रीम कोर्ट की पीठ, जिसमें मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति वी. मोहना शामिल थे, ने स्पष्ट किया कि महिलाओं को पर्याप्त प्रतिनिधित्व देना न्यायिक संस्थाओं को अधिक संवेदनशील, संतुलित और लोकतांत्रिक बनाने के लिए आवश्यक है।

महिलाओं के लिए 30 प्रतिशत प्रतिनिधित्व का लक्ष्य

सुप्रीम कोर्ट के पूर्व निर्देशों के अनुसार, राज्य बार काउंसिलों में महिलाओं को कुल 30 प्रतिशत प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने की व्यवस्था की गई है। इसमें—

20 प्रतिशत सीटें चुनाव के माध्यम से भरी जाएंगी।

10 प्रतिशत अतिरिक्त सीटें सह-चयन (को-ऑप्शन) के जरिए दी जाएंगी।

अब तक सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि सह-चयन की प्रक्रिया किस प्रकार अपनाई जाए ताकि यह पारदर्शी, निष्पक्ष और सभी राज्यों में समान रूप से लागू हो सके।

बार काउंसिल ऑफ इंडिया की भूमिका

सुनवाई के दौरान BCI ने अदालत को बताया कि उसने को-ऑप्शन के लिए आवश्यक नियम तैयार कर लिए हैं और उन्हें न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करने के लिए तैयार है।

सुप्रीम कोर्ट ने BCI की ओर से पेश अधिवक्ता राधिका गौतम को यह जिम्मेदारी सौंपी है कि वे राज्य बार काउंसिलों के नवनिर्वाचित सदस्यों और अन्य संबंधित पक्षों से व्यापक परामर्श के बाद सह-चयन की एक समान प्रक्रिया तैयार करें।

यह प्रक्रिया निम्नलिखित सिद्धांतों पर आधारित होने की अपेक्षा है—

पारदर्शिता

निष्पक्षता

जवाबदेही

समान अवसर

क्षेत्रीय आवश्यकताओं का सम्मान

छोटे राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की चुनौतियां

सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता मीनाक्षी अरोड़ा ने छोटे राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से जुड़ी व्यावहारिक समस्याओं की ओर न्यायालय का ध्यान आकर्षित किया।

उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि गोवा में लगभग 4,000 वकीलों का समुदाय होने के बावजूद, महाराष्ट्र और गोवा बार काउंसिल में पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं मिल पाता। इसी प्रकार दमन और दीव तथा पूर्वोत्तर राज्यों के वकीलों को भी प्रतिनिधित्व संबंधी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।

मुख्य न्यायाधीश ने इन चिंताओं को गंभीर और वास्तविक बताते हुए संकेत दिया कि BCI को प्रक्रिया तैयार करते समय राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की विशिष्ट परिस्थितियों को ध्यान में रखना चाहिए।

इस फैसले के व्यापक प्रभाव

यह निर्णय केवल महिलाओं के लिए आरक्षण का मामला नहीं है, बल्कि न्यायिक संस्थानों में संरचनात्मक बदलाव का संकेत भी है।

इस फैसले से—

महिला वकीलों को नेतृत्व के अधिक अवसर मिलेंगे।

बार काउंसिलों में विविधता और समावेशिता बढ़ेगी।

नीति निर्माण और निर्णय प्रक्रिया में महिलाओं की भागीदारी मजबूत होगी।

युवा महिला अधिवक्ताओं को पेशे में आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलेगी।

न्यायिक व्यवस्था में लैंगिक संतुलन स्थापित करने में मदद मिलेगी।

आगे की राह

अब सबसे महत्वपूर्ण चुनौती यह सुनिश्चित करना है कि सह-चयन की प्रक्रिया केवल औपचारिकता बनकर न रह जाए, बल्कि वास्तव में योग्य और सक्षम महिला वकीलों को प्रतिनिधित्व प्रदान करे।

इसके लिए आवश्यक होगा कि—

चयन के मानदंड स्पष्ट और सार्वजनिक हों।

प्रक्रिया में सभी हितधारकों की भागीदारी हो।

राज्यों की स्थानीय परिस्थितियों को ध्यान में रखा जाए।

चयन प्रक्रिया की नियमित समीक्षा और निगरानी की जाए।

सुप्रीम कोर्ट का यह कदम भारतीय न्यायिक व्यवस्था में महिलाओं की भागीदारी को नई दिशा देने वाला साबित हो सकता है। यदि इसे प्रभावी ढंग से लागू किया गया, तो यह देश की कानूनी संस्थाओं को अधिक प्रतिनिधिक, समावेशी और उत्तरदायी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर सिद्ध होगा।

- Advertisement -
Your Dream Technologies
VIKAS TRIPATHI
VIKAS TRIPATHIhttp://www.pardaphaas.com
VIKAS TRIPATHI भारत देश की सभी छोटी और बड़ी खबरों को सामने दिखाने के लिए "पर्दाफास न्यूज" चैनल को लेके आए हैं। जिसके लोगो के बीच में करप्शन को कम कर सके। हम देश में समान व्यवहार के साथ काम करेंगे। देश की प्रगति को बढ़ाएंगे।
RELATED ARTICLES
- Advertisment -

Most Popular

Recent Comments

Call Now Button