“प्रकाशम जिले में पुलिस वाहन ने बाइक और ऑटो को मारी टक्कर, चार लोग गंभीर घायल; ग्रामीणों के मुताबिक कार से शराब की बोतलें और गांजा मिला, दो SI पर उठे सवाल”
आंध्र प्रदेश के प्रकाशम जिले में सोमवार को एक सड़क हादसे के बाद पुलिस महकमे को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए। अडांकी मंडल के शंकवरप्पाडु के पास एक पुलिस कार ने पहले बाइक और फिर एक ऑटो-रिक्शा को टक्कर मार दी। हादसे में चार लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। दुर्घटना के बाद मौके पर पहुंचे स्थानीय लोगों ने जब कार की जांच की तो उसमें शराब की बोतलें, गांजा और पुलिस की वर्दी मिलने का दावा किया। घटना के बाद ग्रामीणों और पुलिस के बीच कहासुनी की स्थिति भी बनी।
जानकारी के अनुसार, संथमगुलुरु के SI नागमल्लेश्वर राव और बल्लीकुरवा के SI नागराजू इसी कार से यात्रा कर रहे थे। हादसे के बाद दोनों अधिकारियों ने कार से उतरकर 108 एंबुलेंस सेवा को सूचना दी और घायलों को अस्पताल भिजवाने की व्यवस्था की। इसके बाद दोनों अधिकारी कथित तौर पर कार को घटनास्थल पर छोड़कर वहां से चले गए।
बाइक के बाद ऑटो से टकराई पुलिस कार
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, पुलिस कार पहले एक बाइक से टकराई और उसके बाद एक ऑटो-रिक्शा को भी अपनी चपेट में ले लिया। टक्कर इतनी जोरदार थी कि चार लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। स्थानीय लोगों ने घायलों को अस्पताल पहुंचाने में मदद की।
हादसे की सूचना मिलने के बाद अडांकी पुलिस भी मौके पर पहुंची। पुलिस ने दुर्घटनाग्रस्त वाहनों को कब्जे में लेने की प्रक्रिया शुरू की, लेकिन इससे पहले ही घटनास्थल पर बड़ी संख्या में ग्रामीण जमा हो चुके थे। ग्रामीणों ने पुलिस कार की जांच की। इसी दौरान कार के अंदर शराब की बोतलें और गांजा मिलने का दावा सामने आया।
यही दावा बाद में पूरे मामले का सबसे बड़ा मुद्दा बन गया। ग्रामीणों ने सवाल उठाया कि आखिर पुलिस की कार में शराब और गांजा कैसे पहुंचा और क्या दुर्घटना के समय वाहन में मौजूद पुलिसकर्मी नशे में थे?
वीडियो बनाने पर पुलिस-ग्रामीण आमने-सामने
मामला तब और गरमा गया जब अडांकी के CI सुब्बाराजू घटनास्थल पर पहुंचे। बताया गया कि कुछ स्थानीय लोग कार के अंदर मिले सामान की वीडियो और तस्वीरें बना रहे थे। पुलिस ने उन्हें वीडियो बनाने से रोकने की कोशिश की। इस दौरान ग्रामीणों और पुलिसकर्मियों के बीच कुछ देर तक कहासुनी हुई।
ग्रामीणों का कहना था कि यदि कार में कोई आपत्तिजनक सामान नहीं था तो उसकी जांच और वीडियो बनाने से रोकने की जरूरत क्यों पड़ी। दूसरी ओर, पुलिस ने घटनास्थल पर कानून-व्यवस्था बनाए रखने की कोशिश की। बाद में दुर्घटना में शामिल सभी वाहनों को पुलिस स्टेशन ले जाया गया।
YSRC नेता ने लगाए गंभीर आरोप
घटना के बाद YSRC के अडांकी विधानसभा क्षेत्र प्रभारी डॉ. अशोक कुमार ने पुलिस प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि यह केवल सड़क दुर्घटना का मामला नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक बड़ा मामला हो सकता है।
डॉ. अशोक कुमार के अनुसार, पलनाडु और प्रकाशम जिले के कुछ CI और SI ने बल्लीकुरवा स्थित गंगम्मा मंदिर के पास कथित तौर पर अवैध ग्रेनाइट कारोबारियों से मुलाकात की थी। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस अधिकारियों और ग्रेनाइट कारोबारियों के बीच अवैध रूप से ग्रेनाइट पत्थरों की ढुलाई को लेकर समझौता हुआ हो सकता है।
हालांकि, ये आरोप राजनीतिक तौर पर लगाए गए हैं और इनकी स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। ऐसे में पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि पुलिस वाहन में शराब और गांजा कैसे पहुंचा और दुर्घटना के समय वास्तव में क्या परिस्थितियां थीं।
‘सिर्फ हादसा नहीं, बड़ी साजिश’ का आरोप
डॉ. अशोक कुमार ने आरोप लगाया कि दुर्घटना के बाद पुलिस वाहन की तलाशी में कथित तौर पर शराब की बोतलें और गांजा मिलना बेहद गंभीर मामला है। उन्होंने कहा कि इसकी जांच केवल सड़क हादसे तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि पुलिस वाहन के इस्तेमाल, उसमें मौजूद सामान और संबंधित अधिकारियों की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए।
उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि जब स्थानीय लोग कार में मिले सामान की तस्वीरें और वीडियो बना रहे थे, तब पुलिस ने उन्हें ऐसा करने से क्यों रोका। उनके मुताबिक, अगर पूरी प्रक्रिया पारदर्शी थी तो ग्रामीणों को वीडियो बनाने से रोकने की जरूरत नहीं थी।
YSRC नेता ने यह भी सवाल उठाया कि आंध्र प्रदेश सरकार राज्य को गांजा मुक्त बनाने की बात करती है, ऐसे में यदि पुलिस की कार से गांजा बरामद होने का दावा सही है तो इसकी जिम्मेदारी किसकी होगी?
क्या हादसे के समय कार चला रहे थे नशे में?
इस घटना के बाद सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि दुर्घटना के समय पुलिस कार कौन चला रहा था और क्या चालक ने शराब का सेवन किया था? ग्रामीणों ने इस संबंध में संदेह जताया है। हालांकि, केवल कार में शराब की बोतलें मिलने से यह साबित नहीं होता कि चालक हादसे के समय शराब के नशे में था।
इस सवाल का जवाब मेडिकल जांच, वाहन की फोरेंसिक जांच और दुर्घटना की तकनीकी जांच से ही सामने आ सकता है। यदि संबंधित पुलिसकर्मियों की मेडिकल जांच हुई है, तो उसकी रिपोर्ट मामले की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण होगी।
जांच के बाद सामने आएगा पूरा सच
फिलहाल इस घटना में चार लोगों के गंभीर रूप से घायल होने के साथ-साथ पुलिस वाहन से कथित तौर पर गांजा और शराब मिलने का मामला जांच के केंद्र में है। पुलिस ने दुर्घटना में शामिल वाहनों को थाने पहुंचा दिया है। अब जांच एजेंसियों के सामने यह पता लगाने की चुनौती है कि कार में मिला कथित गांजा और शराब किसका था, वह वाहन में कैसे आया और दुर्घटना के समय कार की वास्तविक स्थिति क्या थी।
साथ ही, यह भी जांच का विषय होगा कि दोनों SI किस काम से उस रास्ते पर जा रहे थे, दुर्घटना से पहले और बाद में उनकी गतिविधियां क्या थीं और क्या वाहन में किसी अन्य व्यक्ति की मौजूदगी थी।
फिलहाल राजनीतिक आरोपों और ग्रामीणों के दावों के बीच सबसे जरूरी सवाल निष्पक्ष जांच और तथ्य सामने आने का है। हादसे में घायल चार लोगों की स्थिति, पुलिसकर्मियों की भूमिका और कार से मिले कथित सामान की जांच इस पूरे मामले में अहम साबित होगी। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि यह महज एक सड़क दुर्घटना थी या इसके पीछे कोई और मामला भी जुड़ा हुआ है।














