“2021 की प्रताड़ना याद कर भावुक हुए कैलाश विजयवर्गीय; बोले—‘हम पर नॉन-बेलेबल केस ठोके गए, संघ प्रचारकों को सताया गया’; बंगाल फतह को बताया देश की आंतरिक सुरक्षा की जीत “
इंदौर/कोलकाता
पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी की ऐतिहासिक जीत ने सिर्फ दिल्ली में जश्न नहीं कराया, बल्कि उन नेताओं की आंखें भी नम कर दीं जिन्होंने इस राजनीतिक लड़ाई को जमीन पर बेहद करीब से लड़ा था।
ऐसे ही एक नेता हैं कैलाश विजयवर्गीय— 2021 बंगाल चुनाव में भाजपा के केंद्रीय प्रभारी रहे विजयवर्गीय सोमवार को जैसे ही बंगाल में भाजपा की दो-तिहाई बहुमत की बढ़त पर बोले, उनकी आवाज भर्रा गई, आंखों से आंसू निकल पड़े और कैमरे के सामने वह उन्हें पोंछते नजर आए।
उनके शब्द थे—
“ये सिर्फ चुनावी जीत नहीं… प्रधानमंत्री मोदी और अमित शाह की तरफ से पूरे देश को मिला बहुत बड़ा तोहफा है।”
और यहीं से शुरू हुआ भावनाओं, आरोपों और राजनीतिक विस्फोटों से भरा उनका बयान।
‘2021 में हमें कुचला गया, झूठे केस लगाए गए’—संघ और BJP कार्यकर्ताओं की पीड़ा याद कर भर आए कैलाश
कैलाश विजयवर्गीय ने साफ कहा कि 2021 का बंगाल चुनाव भाजपा के लिए सिर्फ हार नहीं था, बल्कि प्रताड़ना का अध्याय था।
उन्होंने दावा किया कि:
भाजपा कार्यकर्ताओं को निशाना बनाया गया,
संघ प्रचारकों पर दबाव बनाया गया,
खुद उन पर गंभीर और नॉन-बेलेबल मुकदमे लगाए गए,
और पार्टी कैडर को मानसिक व कानूनी रूप से तोड़ने की कोशिश हुई।
विजयवर्गीय ने कहा कि बंगाल की जमीन पर भाजपा का काम करना उस समय आसान नहीं था, क्योंकि राजनीतिक विरोध का जवाब लोकतांत्रिक तरीके से नहीं बल्कि डर और दमन से दिया जाता था।
यही वजह थी कि सोमवार को नतीजे आते देख उनकी आंखों में सिर्फ खुशी नहीं, “संघर्ष का हिसाब” भी दिख रहा था।
आंसुओं के पीछे छिपा संदेश—‘ये खुशी नहीं, वर्षों की तपस्या का फूटना है’
जब कैलाश विजयवर्गीय की आंखों से आंसू निकले तो उन्होंने खुद कहा:
“ये डर के नहीं, खुशी के आंसू हैं… वर्षों की मेहनत और संघर्ष आज रंग लाया है।”
राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि विजयवर्गीय का यह भावुक होना प्रतीकात्मक है, क्योंकि बंगाल भाजपा के लिए वर्षों तक “Mission Impossible” माना जाता रहा। लेकिन इस बार पार्टी ने न सिर्फ बहुमत पार किया बल्कि तृणमूल के गढ़ में निर्णायक सेंध लगा दी।
‘ममता राज में बंगाल देशविरोधी गतिविधियों का अड्डा बन रहा था’—कैलाश का सबसे बड़ा हमला
भावुकता के बीच विजयवर्गीय ने ममता सरकार पर बेहद गंभीर आरोप लगाए।
उन्होंने कहा कि तृणमूल कांग्रेस के शासनकाल में पश्चिम बंगाल:
अवैध घुसपैठ का गलियारा बन गया था,
गैरकानूनी हथियारों की सप्लाई का रास्ता बन गया था,
नकली नोटों की एंट्री पॉइंट बन गया था,
और देश की आंतरिक सुरक्षा से समझौते का “गेटवे” बन चुका था।
उनके मुताबिक यह जीत सिर्फ एक राज्य की सरकार बदलने भर की घटना नहीं, बल्कि “देशविरोधी नेटवर्क पर राजनीतिक प्रहार” है।
मोदी-शाह को बताया ‘देश का सबसे बड़ा राजनीतिक तोहफा’
कैलाश विजयवर्गीय ने साफ कहा कि:
“जैसे अनुच्छेद 370 हटना, CAA आना और नक्सलवाद पर चोट ऐतिहासिक थी, वैसे ही बंगाल में भाजपा की जीत भी उतनी ही बड़ी राष्ट्रीय घटना है।”
उन्होंने इस जीत का पूरा श्रेय Narendra Modi के नेतृत्व और Amit Shah की रणनीति को दिया।
कहा कि वर्षों से जिस बंगाल को भाजपा राजनीतिक रूप से छू भी नहीं पा रही थी, वहां दो-तिहाई बहुमत से सरकार बनना साधारण चुनावी सफलता नहीं बल्कि “रणनीतिक चमत्कार” है।
बंगाल में BJP की पहली सरकार, राष्ट्रीय राजनीति में बड़ा संदेश
पश्चिम बंगाल में भाजपा की पहली सरकार बनना खुद में राष्ट्रीय राजनीति का बड़ा मोड़ माना जा रहा है।
अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय मीडिया दोनों ने इसे प्रधानमंत्री मोदी की तीसरी पारी के बीच सबसे बड़ी चुनावी उपलब्धियों में गिना है।
प्रधानमंत्री ने भी भाजपा मुख्यालय से कहा कि:
“आज बंगाल भयमुक्त हुआ है… अब बदला नहीं, बदलाव होगा।”
यानी दिल्ली से भी और इंदौर से भी एक ही राजनीतिक संदेश जा रहा है—
बंगाल में सिर्फ सत्ता नहीं बदली, पूरा नैरेटिव बदल गया।
सोशल मीडिया पर भी चर्चा—‘संघर्ष का हिसाब पूरा हुआ’
Reddit और सोशल प्लेटफॉर्म्स पर भाजपा समर्थकों के बीच यही भावना दिखी कि यह जीत केवल सीटों की नहीं बल्कि “लंबे संघर्ष का प्रतिफल” है। कई यूजर्स ने लिखा कि 2021 के बाद जिस तरह बंगाल भाजपा कैडर ने जमीन नहीं छोड़ी, उसका नतीजा अब सामने है।
सबसे बड़ा निष्कर्ष—कैलाश के आंसू ने क्या बता दिया?
कैलाश विजयवर्गीय का भावुक होना सिर्फ निजी प्रतिक्रिया नहीं था।
उसने तीन बड़े संकेत दिए:
भाजपा इस जीत को ऐतिहासिक वैचारिक विजय मान रही है,
2021 की हार और प्रताड़ना का बदला “जनादेश” में देख रही है,
और ममता शासन को राष्ट्रीय सुरक्षा बनाम राष्ट्रवाद की लड़ाई में पेश कर रही है।
यानी यह सिर्फ आंखों के आंसू नहीं थे—














