कोलकाता। पश्चिम बंगाल की राजधानी Kकोलकाताolkata से इस वक्त एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने पुलिस महकमे, सत्ता गलियारों और जांच एजेंसियों—तीनों में हड़कंप मचा दिया है। Enforcement Directorate ने कोलकाता पुलिस के डिप्टी कमिश्नर (स्पेशल ब्रांच) शांतनु सिन्हा बिस्वास के खिलाफ लुकआउट नोटिस (Look Out Circular) जारी कर दिया है। केंद्रीय एजेंसी को आशंका है कि मनी लॉन्ड्रिंग जांच में लगातार गैरहाजिर रहने के बाद वे देश छोड़कर फरार होने की कोशिश कर सकते हैं।
यह कोई सामान्य प्रशासनिक कार्रवाई नहीं मानी जा रही, क्योंकि पहली बार बंगाल पुलिस के इतने वरिष्ठ अधिकारी पर केंद्रीय एजेंसी ने इतनी सख्त निगरानी का शिकंजा कसा है। सूत्रों के मुताबिक यह नोटिस देश के एयरपोर्ट, रेलवे स्टेशन और अंतरराष्ट्रीय ट्रांजिट पॉइंट्स तक प्रसारित कर दिया गया है, ताकि शांतनु सिन्हा बिस्वास की हर आवाजाही पर नजर रखी जा सके।
5 बार समन… फिर भी पेश नहीं हुए DCP, ED को बढ़ा शक
ईडी अधिकारियों के अनुसार शांतनु सिन्हा बिस्वास को पूछताछ के लिए कम से कम पांच बार समन भेजा गया, लेकिन वे एक बार भी एजेंसी के सामने उपस्थित नहीं हुए। हर बार या तो चुप्पी रही या फिर वकील के जरिए व्यस्तता का हवाला दिया गया। इसी लगातार असहयोग ने ईडी को यह मानने पर मजबूर किया कि अधिकारी जांच से बचने की कोशिश कर रहे हैं।
सूत्र यह भी बता रहे हैं कि जब ईडी की टीम अप्रैल में उनके आवास पर छापेमारी करने पहुंची थी, तब भी अधिकारी उपलब्ध नहीं मिले। बाद में उनके परिवार के सदस्यों को भी तलब किया गया, लेकिन वहां से भी अपेक्षित सहयोग नहीं मिला।
क्या है पूरा ‘सोना पप्पू सिंडिकेट’ मामला?
इस सनसनीखेज कार्रवाई की जड़ में है कुख्यात अपराधी और रियल एस्टेट नेटवर्क संचालक बिस्वजीत पोद्दार उर्फ ‘सोना पप्पू’। Biswajit Poddar alias Sona Pappu पर जमीन कब्जाने, रंगदारी, अवैध वसूली, फर्जी हाउसिंग डील, हत्या के प्रयास, हथियारबंदी और आपराधिक साजिश जैसे कई गंभीर मामले दर्ज हैं। ईडी का आरोप है कि सोना पप्पू और उसके सहयोगियों ने करोड़ों रुपये की अवैध कमाई को शेल कंपनियों, बिल्डर नेटवर्क और प्रभावशाली लोगों तक पहुंचाया।
जांच के दौरान एजेंसी को ऐसे दस्तावेज, डिजिटल रिकॉर्ड और वित्तीय लेनदेन मिले जिनसे संकेत मिला कि इस सिंडिकेट का संपर्क कुछ रसूखदार पुलिस अधिकारियों तक भी था। इन्हीं संदिग्ध आर्थिक संबंधों की कड़ी शांतनु सिन्हा बिस्वास तक पहुंची।
ED की रेड में क्या मिला? आलीशान फ्लैट, कारोबारी कनेक्शन और ‘महंगे गिफ्ट्स’ का सुराग
19 अप्रैल 2026 को ईडी की कोलकाता जोनल टीम ने शांतनु सिन्हा बिस्वास के आवास, उनके दूसरे प्रॉपर्टी ठिकानों और कारोबारी जय एस. कामदार से जुड़े परिसरों पर एक साथ छापेमारी की। एजेंसी के आधिकारिक प्रेस नोट में दावा किया गया कि जांच में “महंगे उपहार, वित्तीय लेनदेन, पुलिस अधिकारियों को विशेष लाभ पहुंचाने और जमीन हड़पने की सुनियोजित साजिश” के प्रमाण मिले हैं।
बताया गया कि कारोबारी जय कामदार, सोना पप्पू गिरोह और कुछ पुलिस अफसरों के बीच एक वित्तीय पुल की तरह काम कर रहा था। ईडी अब यह खंगाल रही है कि क्या सरकारी प्रभाव का इस्तेमाल निजी प्रॉपर्टी विवादों, फर्जी शिकायतों और अवैध कब्जों में किया गया।
गोलपार्क से बालीगंज तक दहशत: कैसे खड़ा हुआ ‘सोना पप्पू का साम्राज्य’
कोलकाता के दक्षिणी इलाकों—गोलपार्क, कंकुलिया रोड, बालीगंज, आनंदपुर और अलीपुर—में लंबे समय से सोना पप्पू के दबदबे की चर्चा रही है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि फ्लैट दिलाने, जमीन छुड़ाने और निर्माण कार्यों में हिस्सेदारी के नाम पर इस गिरोह ने करोड़ों की उगाही की। जो विरोध करता, उसके खिलाफ गुंडों के जरिए हमला, बमबाजी या दबाव बनाया जाता।
फरवरी में कंकुलिया रोड पर दो गुटों के बीच हुई हिंसक झड़प, बमबाजी और फायरिंग ने इस सिंडिकेट की ताकत को खुलकर सामने ला दिया था। उसी के बाद कोलकाता पुलिस की FIR से शुरू हुई जांच अब मनी लॉन्ड्रिंग की केंद्रीय जांच में बदल चुकी है।
ममता सरकार के करीबी अधिकारी पर शिकंजा, बढ़े राजनीतिक मायने
शांतनु सिन्हा बिस्वास को राज्य की सत्ता के बेहद नजदीकी अधिकारियों में गिना जाता रहा है। हाल के दिनों में उन्हें Mamata Banerjee के कार्यक्रमों और सुरक्षा घेरों में प्रमुखता से देखा गया था। ऐसे में उनके खिलाफ ईडी की यह कार्रवाई अब सिर्फ एक आपराधिक जांच नहीं, बल्कि बंगाल की प्रशासनिक और राजनीतिक साख पर सीधा सवाल बनती जा रही है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर जांच में वित्तीय लेनदेन, पुलिस संरक्षण और सिंडिकेट फंडिंग के बड़े प्रमाण सामने आते हैं, तो यह मामला राज्य सरकार के लिए गंभीर असहजता पैदा कर सकता है।
सबसे बड़ा सवाल: DCP आखिर कहां हैं?
ईडी के सूत्रों के मुताबिक एजेंसी को अभी तक शांतनु सिन्हा बिस्वास की स्पष्ट लोकेशन नहीं मिल सकी है। यही वजह है कि लुकआउट नोटिस जारी कर उन्हें “मूवेबल रिस्क” श्रेणी में रखा गया है। जांच एजेंसी का मानना है कि अगर समय रहते उन्हें पूछताछ के दायरे में नहीं लाया गया, तो कई अहम वित्तीय कड़ियां टूट सकती हैं।
अब सबकी नजर इस बात पर है कि—
क्या DCP जल्द ईडी के सामने पेश होंगे?
क्या गिरफ्तारी की नौबत आएगी?
और क्या ‘सोना पप्पू सिंडिकेट’ से जुड़े पुलिस-राजनीति-प्रॉपर्टी गठजोड़ का बड़ा चेहरा बेनकाब होगा?
कोलकाता में यह मामला अब सिर्फ एक अपराधी और एक पुलिस अधिकारी का नहीं रह गया है। यह उस पूरे नेटवर्क की परतें खोल रहा है जिसमें अपराध, रियल एस्टेट, प्रभावशाली कारोबारी और सिस्टम के भीतर मौजूद संरक्षण—सब एक साथ दिखाई दे रहे हैं। ED का लुकआउट नोटिस इस बात का संकेत है कि आने वाले दिनों में बंगाल से और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं।














