‘एक सम्मान माँ के नाम’ कार्यक्रम में जरूरतमंद बच्चों को दिए गए जरूरी उपकरण, माताओं के बलिदान को मंच से मिला प्रणाम; भावुक कर गया टीम का अपने हाथों से भोजन कराना
नोएडा। मां केवल जन्म देने वाली नहीं होती, वह संघर्ष में सहारा, पीड़ा में शक्ति और हर मुश्किल में उम्मीद की सबसे मजबूत दीवार होती है। खासकर जब संतान दिव्यांग हो, तब मां का त्याग, धैर्य और समर्पण कई गुना बढ़ जाता है। ऐसे ही अनदेखे संघर्ष को सम्मान देने के उद्देश्य से सेक्टर-70 स्थित फर्स्टवन रिहैब फाउंडेशन में एक बेहद भावुक और प्रेरणादायी कार्यक्रम ‘एक सम्मान माँ के नाम’ आयोजित किया गया, जहां दिव्यांग बच्चों की माताओं को उनके निस्वार्थ प्रेम, बलिदान और समर्पण के लिए सम्मानित किया गया।
यह आयोजन सिर्फ एक सम्मान समारोह नहीं था, बल्कि उन माताओं के संघर्ष को समाज के सामने नमन करने का प्रयास था, जो हर दिन अपने बच्चों को नई जिंदगी देने की लड़ाई लड़ती हैं।
“इलाज ही नहीं, सम्मान और अस्तित्व दिलाना भी हमारा लक्ष्य”
संस्था के निदेशक डॉ. महिपाल सिंह ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि फर्स्टवन रिहैब फाउंडेशन का उद्देश्य केवल बच्चों का इलाज करना नहीं है, बल्कि उन्हें और उनके परिवार को समाज में सम्मानजनक पहचान और अस्तित्व दिलाना है।
उन्होंने कहा कि दिव्यांग बच्चों को मुख्यधारा से जोड़ना तभी संभव है जब उनके साथ खड़ी माताओं को मानसिक, सामाजिक और भावनात्मक संबल दिया जाए। यही सोच इस कार्यक्रम की आत्मा है।
जरूरतमंद बच्चों को बांटे गए जरूरी उपकरण और अध्ययन सामग्री
कार्यक्रम के दौरान संस्था ने दिव्यांग बच्चों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए उन्हें कई उपयोगी उपकरण और अध्ययन किट वितरित किए। इनमें शामिल रहे—
कूलर
पंखा
इलेक्ट्रॉनिक बुक
पज़ल
वॉकर
स्टिक
सीपी चेयर
अन्य शिक्षण सामग्री
इन उपकरणों को पाकर बच्चों और उनके अभिभावकों के चेहरों पर खुशी साफ झलक रही थी। कई परिवारों के लिए ये सामग्री न सिर्फ सुविधा बल्कि उनके दैनिक संघर्ष में बड़ी राहत बनकर सामने आई।

बच्चों को आत्मनिर्भरता का पाठ, स्वरोजगार की दी जानकारी
फर्स्टवन रिहैब फाउंडेशन ने कार्यक्रम को केवल वितरण तक सीमित नहीं रखा।
संस्था की ओर से बच्चों को यह भी समझाया गया कि वे अपनी क्षमताओं के अनुसार छोटे-छोटे स्वरोजगार के माध्यम से आत्मनिर्भर बन सकते हैं।
इस दौरान फर्स्टवन के बच्चों द्वारा तैयार किए गए हैंडवॉश और ग्लास क्लीनर अतिथियों को गिफ्ट के रूप में भेंट किए गए। यह संदेश था कि सही प्रशिक्षण और प्रोत्साहन मिलने पर दिव्यांग बच्चे भी समाज में योगदान देने की पूरी क्षमता रखते हैं।
माताओं को दी गई विशेष ट्रेनिंग, स्वास्थ्य के प्रति किया जागरूक
कार्यक्रम का एक महत्वपूर्ण हिस्सा वह रहा, जहां माता-पिता—विशेषकर माताओं—को घर पर बच्चों की नियमित एक्सरसाइज करवाने की ट्रेनिंग दी गई।
इसके साथ ही माताओं को यह भी बताया गया कि यदि वे स्वयं स्वस्थ रहेंगी तभी बच्चों की देखभाल बेहतर ढंग से कर पाएंगी। इसलिए उन्हें अपने खानपान, आराम और स्वास्थ्य जांच के प्रति सजग रहने का संदेश दिया गया।
संस्था ने स्पष्ट कहा कि मां का स्वस्थ रहना बच्चे के इलाज की पहली शर्त है।
मुख्य अतिथि ने की पहल की सराहना
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ. त्रिभुवन सिंह ने फर्स्टवन रिहैब फाउंडेशन की इस पहल को समाज के लिए अत्यंत प्रेरणादायक बताया।
उन्होंने कहा—
“महिलाओं का सम्मान ही स्वस्थ परिवार और सशक्त समाज की नींव है। आज यहां हमने उसी सच्चाई को जीवंत रूप में देखा है।”
उनके शब्दों ने कार्यक्रम को और भावनात्मक ऊंचाई दी।
जब टीम ने अपने हाथों से बच्चों को खिलाया खाना, नम हो गईं आंखें
पूरे आयोजन का सबसे भावुक और मानवीय क्षण तब आया जब फर्स्टवन रिहैब फाउंडेशन की टीम ने अपने हाथों से दिव्यांग बच्चों को लंच कराया।
यह दृश्य वहां मौजूद हर व्यक्ति को भीतर तक छू गया।
संस्था ने इसे अपने लिए “गर्व और अपार सुख का पल” बताया।
बच्चों की मुस्कान और माताओं की नम आंखें बता रही थीं कि सम्मान सिर्फ मंच पर शॉल देने से नहीं, बल्कि दिल से अपनाने से मिलता है।
समाज के लिए प्रेरणा हैं ये मां और बच्चे
कार्यक्रम के समापन पर संस्था ने यह संदेश दिया कि दिव्यांग बच्चे किसी भी तरह से समाज पर बोझ नहीं, बल्कि प्रेरणा हैं। और उनकी मांएं त्याग की जीवित मिसाल हैं।
उन्हें केवल दया नहीं,
सम्मान, सहयोग और बराबरी का अवसर चाहिए।














