उत्तर प्रदेश की सियासत में शनिवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X राजनीतिक अखाड़े में तब्दील हो गया, जब समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक की मुलाकात पर तंज कसते हुए एक वीडियो पोस्ट कर दिया। इस वीडियो में दो स्टूलों को जोड़कर कुर्सी बनाने की कोशिश दिखाई गई और कैप्शन था—“दो स्टूलों को मिलाने से कुर्सी नहीं बनती!” बस फिर क्या था, इस एक लाइन ने यूपी की सत्ता बनाम विपक्ष की लड़ाई को सोशल मीडिया पर खुली जुबानी जंग में बदल दिया।
दरअसल, शुरुआत ब्रजेश पाठक की उस पोस्ट से हुई जिसमें उन्होंने केशव प्रसाद मौर्य के साथ अपनी मुलाकात की तस्वीर साझा करते हुए लिखा कि दोनों के बीच विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर व्यापक चर्चा हुई। भाजपा खेमे में इसे सरकार की समन्वय बैठक और मजबूत टीमवर्क के संदेश के रूप में पेश किया गया, लेकिन अखिलेश यादव ने इसे सीधे सत्ता की अंदरूनी कुर्सी राजनीति से जोड़ते हुए व्यंग्य कर दिया। सपा प्रमुख ने बिना नाम लिए यह संदेश देने की कोशिश की कि भाजपा के भीतर दो दावेदारों की नजदीकी से सत्ता की कुर्सी हासिल नहीं होने वाली। यही तंज BJP के दोनों उपमुख्यमंत्रियों को नागवार गुजरा।
दो स्टूलों को मिलाने से कुर्सी नहीं बनती! pic.twitter.com/RLdHEcMF2u
— Akhilesh Yadav (@yadavakhilesh) May 1, 2026
अखिलेश के तंज पर सबसे तीखा पलटवार केशव प्रसाद मौर्य की तरफ से आया। उन्होंने लिखा कि “एक फिट और हिट जोड़ी से आपका घबराना बिल्कुल जायज है, क्योंकि केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक की जोड़ी आज जनता के भरोसे की पहचान बन चुकी है।” इतना ही नहीं, मौर्य ने अपने जवाब को वैचारिक और सामाजिक प्रतिनिधित्व का रंग देते हुए खुद को महान चक्रवर्ती सम्राट चंद्रगुप्त मौर्य की परंपरा का प्रतिनिधि बताया और भगवान गौतम बुद्ध की विरासत से जुड़ा हुआ कहा। उन्होंने समाजवादी पार्टी पर शाक्य, कुशवाहा, मौर्य, सैनी और अन्य वंचित वर्गों के उत्पीड़न का आरोप लगाते हुए लिखा कि इन अन्यायों का जवाब लोकतांत्रिक तरीके से “कमल खिलाकर” दिया जाएगा। साथ ही 2047 तक विकसित भारत और विकसित उत्तर प्रदेश के संकल्प का भी जिक्र कर दिया।
आदरणीय श्री अखिलेश यादव जी,
एक फिट और हिट जोड़ी से आपका घबराना निहायत ही जायज है। आपकी जानकारी के लिए यह अच्छा भी है क्योंकि केशव प्रसाद मौर्य और श्री @brajeshpathakup जी की जोड़ी आज जनता के भरोसे की पहचान बन चुकी है।
मैं, महान चक्रवर्ती सम्राट चंद्रगुप्त मौर्य के वंश का…
— Keshav Prasad Maurya (@kpmaurya1) May 2, 2026
इसके बाद ब्रजेश पाठक भी पीछे नहीं रहे। उन्होंने अखिलेश यादव को सीधे संबोधित करते हुए लिखा कि “आज नए उत्तर प्रदेश की सुपर जोड़ी की चर्चा सब जगह है, इसलिए आपकी परेशानी समझ सकता हूं।” पाठक ने कहा कि वे और केशव प्रसाद मौर्य जनता जनार्दन की सेवा के लिए 24 घंटे उपलब्ध हैं और बातों से ज्यादा धरातल पर काम करने में विश्वास रखते हैं। उन्होंने समाजवादी पार्टी की राजनीति को “तुष्टीकरण”, “कुर्सी मोह” और “कुत्सित सोच” करार देते हुए दावा किया कि यह नया उत्तर प्रदेश है जहां विकास, जनता का विश्वास और भाजपा का आशीर्वाद साथ-साथ चल रहा है। पाठक ने साफ कहा कि 2027 में भाजपा फिर सरकार बनाएगी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को पूरा करेगी।
आज के नए उत्तर प्रदेश की सुपर जोड़ी की चर्चा सब जगह है। इसलिए अखिलेश जी मैं आपकी परेशानी को समझ सकता हूं। मेरे परम मित्र और पारिवारिक सदस्य श्री केशव प्रसाद मौर्य और मेरे घर के दरवाजे जनता जनार्दन की सेवा के लिए 24 घंटे खुले हैं। हम बातों से ज्यादा धरातल पर कार्य करने में भरोसा…
— Brajesh Pathak (@brajeshpathakup) May 2, 2026
यानी एक साधारण-सी फोटो पोस्ट से शुरू हुआ मामला अब सत्ता की कुर्सी, OBC प्रतिनिधित्व, विकास मॉडल और 2027 के चुनावी दावे तक पहुंच चुका है। राजनीतिक विश्लेषक मान रहे हैं कि भाजपा के दोनों डिप्टी सीएम का एक साथ आना और उसके तुरंत बाद अखिलेश का ‘कुर्सी’ वाला व्यंग्य, दरअसल यूपी की उस अंदरूनी बहस को हवा देता है जिसमें लंबे समय से यह चर्चा चलती रही है कि योगी सरकार के बाद भाजपा में अगला चेहरा कौन हो सकता है। अखिलेश इसी अंतर्विरोध को उछालकर भाजपा में असहजता पैदा करना चाहते हैं, जबकि मौर्य और पाठक इस मौके को ‘डबल इंजन सुपर जोड़ी’ बनाम ‘हताश विपक्ष’ के नैरेटिव में बदलने में जुटे हैं।
दिलचस्प बात यह है कि पिछले कुछ दिनों से अखिलेश यादव लगातार भाजपा सरकार, स्वास्थ्य व्यवस्था और चुनावी मुद्दों पर आक्रामक सोशल मीडिया लाइन ले रहे हैं, जबकि भाजपा के दोनों डिप्टी सीएम भी हर मोर्चे पर फ्रंटफुट पर दिख रहे हैं। ऐसे में X पर छिड़ी यह सियासी जंग केवल शब्दों की नोकझोंक नहीं, बल्कि 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले नैरेटिव सेट करने की शुरुआती डिजिटल लड़ाई मानी जा रही है। जनता के बीच संदेश साफ है—एक तरफ अखिलेश भाजपा की अंदरूनी कुर्सी की खींचतान दिखाना चाहते हैं, तो दूसरी तरफ भाजपा इसे “जनता के भरोसे की सुपर जोड़ी” बताकर विपक्ष की बेचैनी साबित करना चाहती है।
उत्तर प्रदेश की राजनीति में फिलहाल सवाल सिर्फ इतना नहीं है कि “दो स्टूलों से कुर्सी बनती है या नहीं”, बल्कि यह है कि इस डिजिटल व्यंग्य युद्ध में जनता किसे मजबूत कुर्सी पर बैठाने का मन बना रही है। आने वाले दिनों में यह सोशल मीडिया तकरार जमीन की सियासत को कितना प्रभावित करेगी, इस पर सबकी नजरें टिक गई हैं।














