MiddleEastCrisis: मध्य-पूर्व में अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच जारी भीषण संघर्ष का असर अब हवाई और समुद्री यातायात पर स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। क्षेत्र में बढ़ते सैन्य तनाव के कारण कई अंतरराष्ट्रीय उड़ानें रद्द या स्थगित कर दी गई हैं, जिससे बड़ी संख्या में भारतीय नागरिक विभिन्न देशों में फंस गए हैं। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए भारत सरकार ने विशेष उड़ानों के माध्यम से नागरिकों की सुरक्षित वापसी का अभियान शुरू कर दिया है।
हवाई मार्ग बाधित, समुद्री सुरक्षा पर भी असर
संघर्ष के चलते खाड़ी क्षेत्र के कई एयरस्पेस आंशिक या पूर्ण रूप से बंद कर दिए गए हैं। इससे न केवल यात्री उड़ानें प्रभावित हुई हैं, बल्कि कार्गो सेवाओं पर भी असर पड़ा है। समुद्री मार्गों पर भी तनाव बढ़ गया है, विशेषकर Strait of Hormuz और Gulf of Oman जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में।
भारत का बड़ा समुद्री व्यापार Suez Canal और रेड सी के रास्ते होकर गुजरता है। यदि यह मार्ग बाधित होता है, तो जहाजों को अफ्रीका के दक्षिणी छोर Cape of Good Hope से होकर लंबा रास्ता तय करना पड़ता है, जिससे समय और लागत दोनों में भारी वृद्धि होती है।
INS सूरत: राहत और निकासी के लिए तैयार
मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए भारतीय नौसेना का अत्याधुनिक गाइडेड मिसाइल डिस्ट्रॉयर INS Surat फिलहाल ओमान की खाड़ी के पास तैनात है। सूत्रों के अनुसार, हालात और बिगड़ने की स्थिति में यह युद्धपोत राहत और निकासी अभियान में तुरंत शामिल हो सकता है।
INS सूरत की प्रमुख विशेषताएं:
लंबाई: 163 मीटर
वजन: लगभग 7400 टन
अधिकतम गति: 30 नॉटिकल मील प्रति घंटा
चार शक्तिशाली गैस टर्बाइन इंजन
आधुनिक सर्विलांस रडार सिस्टम
पनडुब्बी रोधी रॉकेट और टॉरपीडो लॉन्चर
32 मीडियम रेंज सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलें
16 ब्रह्मोस एंटी-शिप मिसाइलें
यह युद्धपोत दुश्मन के रडार से बचते हुए ऑपरेशन करने में सक्षम है और किसी भी आपात स्थिति में भारतीय नागरिकों की सुरक्षित निकासी सुनिश्चित कर सकता है।
मिशन डेप्लॉयमेंट के तहत सतत तैनाती
भारतीय नौसेना ने वर्ष 2017 में ‘मिशन डेप्लॉयमेंट’ की शुरुआत की थी। इसके तहत दुनिया के महत्वपूर्ण समुद्री इलाकों में भारतीय युद्धपोतों की निरंतर तैनाती की जाती है। वर्तमान में भारतीय नौसैनिक पोत Gulf of Aden, स्ट्रेट ऑफ होरमुज, ओमान की खाड़ी, सेशेल्स के आसपास, मालदीव के निकट, अंडमान-निकोबार क्षेत्र और बंगाल की खाड़ी (म्यांमार-बांग्लादेश सीमा के पास) में सक्रिय रूप से मौजूद हैं।
अदन की खाड़ी भारत के लिए विशेष महत्व रखती है, क्योंकि देश का बड़ा व्यापारिक आवागमन इसी मार्ग से होता है। यहां किसी भी प्रकार की अस्थिरता का सीधा असर भारत की अर्थव्यवस्था और ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ सकता है।
सरकार और नौसेना पूरी तरह सतर्क
मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच भारतीय नौसेना और विदेश मंत्रालय लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। जरूरत पड़ने पर अदन की खाड़ी में तैनात अन्य युद्धपोतों को भी शीघ्र ही प्रभावित क्षेत्र में भेजा जा सकता है।
सरकार का स्पष्ट संदेश है कि संकट की इस घड़ी में हर भारतीय नागरिक की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। विशेष उड़ानों और नौसैनिक सहायता के माध्यम से फंसे हुए नागरिकों को सुरक्षित वापस लाने के हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं।
मध्य-पूर्व में हालात फिलहाल अत्यंत संवेदनशील बने हुए हैं, लेकिन भारत ने अपने नागरिकों और समुद्री हितों की सुरक्षा के लिए पूरी तैयारी कर रखी है।














