Saturday, April 25, 2026
Your Dream Technologies
HomeUttar Pradeshयूपी पंचायत चुनाव पर बड़ा सस्पेंस: 26 मई के बाद भी कुर्सी...

यूपी पंचायत चुनाव पर बड़ा सस्पेंस: 26 मई के बाद भी कुर्सी पर रह सकते हैं ग्राम प्रधान, सरकार ला सकती है प्रशासकीय समिति फॉर्मूला

उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव को लेकर बना असमंजस अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचता दिख रहा है। राज्य की 57 हजार से अधिक ग्राम पंचायतों में मौजूदा ग्राम प्रधानों का कार्यकाल 26 मई 2026 को समाप्त हो रहा है, लेकिन मौजूदा हालात में समय से चुनाव कराए जाने की संभावना लगभग टूट चुकी है। ऐसे में योगी सरकार एक ऐसे विकल्प पर गंभीरता से विचार कर रही है, जिससे पंचायतों का कामकाज भी न रुके और ग्राम प्रधानों की नाराजगी भी न बढ़े। सूत्रों के अनुसार, चुनाव टलने की स्थिति में ग्राम पंचायतों की कमान सीधे अफसरों को सौंपने के बजाय ‘प्रशासकीय समिति’ को दी जा सकती है, जिसकी अगुवाई मौजूदा ग्राम प्रधान ही करेंगे।

दरअसल उत्तर प्रदेश पंचायत राज अधिनियम के तहत ग्राम पंचायतों का कार्यकाल पांच वर्ष का होता है। 2021 में चुनी गई ग्राम पंचायतों का संवैधानिक कार्यकाल 26 मई 2026 को खत्म हो रहा है। सामान्य परिस्थितियों में इस अवधि से पहले चुनाव सम्पन्न हो जाने चाहिए थे, लेकिन आरक्षण निर्धारण, नई ओबीसी आयोग रिपोर्ट, परिसीमन और मतदाता सूची पुनरीक्षण जैसी प्रक्रियाओं में देरी के कारण चुनावी टाइमलाइन लगातार खिसकती चली गई। इससे पंचायत चुनाव समय पर होना अब लगभग असंभव माना जा रहा है।

यही वजह है कि पंचायती राज विभाग और राज्य सरकार अब वैकल्पिक प्रशासनिक व्यवस्था तैयार करने में जुट गए हैं। आमतौर पर ऐसी स्थिति में एडीओ पंचायत या किसी प्रशासनिक अधिकारी को ग्राम पंचायत का प्रशासक बनाकर जिम्मेदारी दी जाती है, लेकिन इस बार सरकार सीधे नौकरशाही के हाथ में पंचायतें देने से बचना चाहती है। इसके पीछे दो बड़े कारण हैं— पहला, ग्राम प्रधानों का मजबूत राजनीतिक दबाव; दूसरा, पंचायत स्तर पर लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व की निरंतरता बनाए रखना। इसलिए प्रशासकीय समिति मॉडल को सबसे व्यवहारिक रास्ता माना जा रहा है।

इस प्रस्तावित प्रशासकीय समिति में मौजूदा ग्राम प्रधान, पंचायत सदस्य तथा प्रशासन के नामित अधिकारी शामिल होंगे। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि समिति का अध्यक्ष भी ग्राम प्रधान को ही बनाए जाने की चर्चा है। यानी तकनीकी रूप से पंचायत का कार्यकाल भले समाप्त हो जाए, लेकिन चुनाव होने तक ग्राम प्रधान प्रभावी रूप से पंचायत की कमान संभाले रह सकते हैं। विकास कार्यों की स्वीकृति, पंचायत निधि का सीमित उपयोग, मनरेगा एवं ग्रामीण योजनाओं की निगरानी, पेयजल-सफाई जैसी मूलभूत सेवाओं की देखरेख इसी समिति के माध्यम से होगी। इससे न तो पंचायतों में प्रशासनिक शून्यता पैदा होगी और न ही लाखों ग्राम प्रधानों को एक झटके में हाशिये पर धकेला जाएगा।

पंचायत चुनाव में देरी की सबसे बड़ी वजह इलाहाबाद हाईकोर्ट में लंबित सुनवाई भी बनी हुई है। समय से चुनाव कराने की मांग को लेकर दायर याचिका पर कई तारीखों से लगातार सुनवाई टल रही है। 23 अप्रैल को भी इस मामले में निर्णायक बहस नहीं हो सकी। हाईकोर्ट पहले ही राज्य निर्वाचन आयोग से चुनावी तैयारियों में हो रही देरी पर कड़े सवाल पूछ चुका है। अब सबकी निगाह इस बात पर है कि अदालत चुनाव टालने को किस नजर से देखती है और क्या सरकार को कोई सख्त समयसीमा देती है।

राजनीतिक गलियारों में इस पूरे घटनाक्रम को बेहद संवेदनशील माना जा रहा है, क्योंकि उत्तर प्रदेश में ग्राम प्रधान केवल स्थानीय जनप्रतिनिधि नहीं, बल्कि विधानसभा और लोकसभा चुनावों में जमीनी संगठन की रीढ़ भी माने जाते हैं। यदि सरकार उन्हें पूरी तरह हटाकर अफसरशाही बैठाती है तो व्यापक नाराजगी पैदा हो सकती है। यही कारण है कि प्रशासकीय समिति के जरिये “कार्यकाल विस्तार जैसा प्रभाव” देने का फार्मूला तैयार किया जा रहा है, ताकि प्रधानों को सम्मानजनक भूमिका मिलती रहे और पंचायत स्तर पर भाजपा का जनसंपर्क तंत्र भी कमजोर न पड़े।

ग्रामीण इलाकों में भी इस मुद्दे को लेकर भारी उत्सुकता है। पंचायत चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे दावेदारों में बेचैनी है, जबकि मौजूदा प्रधान इस संभावना से राहत महसूस कर रहे हैं कि उन्हें तत्काल पदमुक्त नहीं होना पड़ेगा। सोशल मीडिया और स्थानीय राजनीतिक चर्चाओं में इसे “ग्राम प्रधानों की बोनस पारी” कहा जाने लगा है। हालांकि विपक्ष इस देरी को सरकार की चुनावी तैयारी की कमजोरी और आरक्षण प्रक्रिया की विफलता से जोड़कर हमला बोल रहा है।

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या 26 मई के बाद उत्तर प्रदेश की पंचायतों में वास्तव में ‘प्रधान राज’ जारी रहेगा या अदालत और चुनाव आयोग कोई नया मोड़ लाएंगे। फिलहाल संकेत साफ हैं— पंचायत चुनाव दूर खिसकते दिख रहे हैं और सरकार ग्राम प्रधानों को हटाने के बजाय उन्हें ही नई प्रशासकीय संरचना में शामिल कर सियासी संतुलन साधने की तैयारी में है। ऐसे में आने वाले कुछ दिन यूपी की गांव राजनीति के लिए बेहद अहम साबित होने वाले हैं।

- Advertisement -
Your Dream Technologies
VIKAS TRIPATHI
VIKAS TRIPATHIhttp://www.pardaphaas.com
VIKAS TRIPATHI भारत देश की सभी छोटी और बड़ी खबरों को सामने दिखाने के लिए "पर्दाफास न्यूज" चैनल को लेके आए हैं। जिसके लोगो के बीच में करप्शन को कम कर सके। हम देश में समान व्यवहार के साथ काम करेंगे। देश की प्रगति को बढ़ाएंगे।
RELATED ARTICLES
- Advertisment -

Most Popular

Recent Comments

Call Now Button