नई दिल्ली। देश में पेट्रोल-डीजल और गैस की कीमतों को लेकर एक बार फिर बड़ी बहस छिड़ गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा देशवासियों से पेट्रोल-डीजल बचाने, सार्वजनिक परिवहन अपनाने और गैर-जरूरी खर्चों में कटौती की अपील के बाद अब केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी के ताजा बयान ने हालात की गंभीरता को और बढ़ा दिया है।
हरदीप पुरी ने खुलासा किया है कि सरकारी तेल कंपनियां (OMCs) हर दिन लगभग ₹1000 करोड़ का नुकसान झेल रही हैं। इतना ही नहीं, इस तिमाही में कुल घाटा ₹1 लाख करोड़ तक पहुंचने की आशंका जताई गई है। इन आंकड़ों ने देश में संभावित ऊर्जा संकट और आने वाले आर्थिक दबावों को लेकर नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है।
“ऊर्जा बचाइए, देश बचाइए” — PM मोदी की अपील
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को नागरिकों से अपील करते हुए कहा कि देश को मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में ऊर्जा संरक्षण की दिशा में गंभीर कदम उठाने होंगे। उन्होंने लोगों से कहा कि जहां संभव हो:
निजी वाहन कम इस्तेमाल करें
कार पूलिंग अपनाएं
सार्वजनिक परिवहन का अधिक उपयोग करें
पेट्रोल-डीजल की खपत सीमित करें
सूत्रों के अनुसार, पीएम मोदी ने लोगों से “कोरोना काल जैसी सतर्कता” बरतने की भी बात कही, ताकि देश आर्थिक और ऊर्जा चुनौतियों का मजबूती से सामना कर सके।
हरदीप पुरी का बड़ा खुलासा
केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए कहा कि भारत दुनिया के उन चुनिंदा देशों में शामिल है, जिन्होंने वैश्विक संकट के बावजूद नागरिकों पर ऊर्जा कीमतों का बोझ नहीं डाला।
उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल, गैस और एलपीजी की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं, लेकिन आम जनता को राहत देने के लिए सरकारी तेल कंपनियां अभी भी कम कीमत पर ईंधन बेच रही हैं।
पुरी के मुताबिक:
तेल कंपनियां ऊंची कीमत पर कच्चा तेल खरीद रही हैं
लेकिन उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए कम कीमत पर बेच रही हैं
इसी कारण प्रतिदिन लगभग ₹1000 करोड़ का नुकसान हो रहा है
उन्होंने यह भी कहा कि इस तिमाही में OMCs की अनुमानित अंडर-रिकवरी ₹2 लाख करोड़ तक पहुंच सकती है, जबकि कुल घाटा ₹1 लाख करोड़ के करीब रहने का अनुमान है।
“भारत ने कीमतें नहीं बढ़ाईं”
हरदीप पुरी ने कहा कि दुनिया के कई देशों में ईंधन संकट और भारी महंगाई देखने को मिल रही है, लेकिन भारत ने अब तक कीमतों को नियंत्रित रखा है।
उन्होंने कहा:
“भारत उन गिने-चुने देशों में है जिन्होंने ऊर्जा कीमतें नहीं बढ़ाईं और नागरिकों को स्थिर आपूर्ति सुनिश्चित की।”
मंत्री ने यह भी माना कि वैश्विक सैन्य संघर्षों और अंतरराष्ट्रीय अस्थिरता का सबसे ज्यादा असर भारत के ऊर्जा क्षेत्र पर पड़ रहा है।
6 करोड़ उपभोक्ताओं की सुरक्षा का दावा
सरकार का दावा है कि रोजाना देशभर के पेट्रोल पंपों पर आने वाले 6 करोड़ से अधिक उपभोक्ताओं की जरूरतों को बिना रुकावट पूरा किया जा रहा है।
केंद्र सरकार ने ईंधन पर एक्साइज ड्यूटी घटाकर आम जनता को राहत देने की कोशिश की है। हालांकि इस फैसले से सरकार को हर महीने लगभग ₹14,000 करोड़ के राजस्व नुकसान का सामना करना पड़ रहा है।
PM Sh @narendramodi Ji appeals to the citizens to curtail use of petrol and diesel, use public transport where possible, and car pool as much as possible.
Measures such these will help the nation conserve energy, save on the energy import bill and overcome the challenges arising… pic.twitter.com/D20ItaWFTo— Hardeep Singh Puri (@HardeepSPuri) May 10, 2026
क्या आने वाले दिनों में बढ़ सकती हैं कीमतें?
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें इसी तरह ऊंची बनी रहीं, तो सरकार और तेल कंपनियों पर दबाव और बढ़ सकता है। ऐसे में भविष्य में:
पेट्रोल-डीजल महंगा हो सकता है
LPG सिलेंडर की कीमतों में बदलाव संभव है
ऊर्जा बचत अभियान तेज किया जा सकता है
हालांकि सरकार फिलहाल आम जनता पर सीधा बोझ डालने से बचती दिखाई दे रही है।
वैश्विक संकट के बीच भारत की चुनौती
रूस-यूक्रेन संघर्ष, पश्चिम एशिया में तनाव और वैश्विक सप्लाई चेन पर असर ने पूरी दुनिया के ऊर्जा बाजार को अस्थिर कर दिया है। ऐसे समय में भारत जैसे आयात-निर्भर देश के लिए ऊर्जा सुरक्षा सबसे बड़ी चुनौती बनती जा रही है।
सरकार का फोकस अब केवल कीमत नियंत्रण पर नहीं, बल्कि “ऊर्जा बचत” को जन आंदोलन बनाने पर भी दिखाई दे रहा है।
सोशल मीडिया पर बढ़ी चर्चा
PM मोदी और हरदीप पुरी के बयानों के बाद सोशल Media पर कई तरह की प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। कुछ लोग इसे आने वाले बड़े आर्थिक फैसलों का संकेत मान रहे हैं, जबकि कुछ इसे सिर्फ एहतियाती अपील बता रहे हैं।
लेकिन इतना तय है कि सरकार पहली बार इतनी खुलकर ऊर्जा संकट और तेल कंपनियों के भारी नुकसान की बात कर रही है — और यही बात लोगों की चिंता बढ़ा रही है।














