लखनऊ। राजधानी लखनऊ के पीजीआई थाना क्षेत्र में हुए चर्चित प्रॉपर्टी डीलर संदीप सिंह हत्याकांड का सनसनीखेज खुलासा करते हुए पुलिस और एसटीएफ की संयुक्त टीम ने हत्या की साजिश रचने वाले दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। जांच में सामने आया है कि जमीन विवाद और वर्षों पुरानी रंजिश ने एक ऐसी खूनी साजिश को जन्म दिया, जिसमें संदीप सिंह की जान लेने के लिए पांच लाख रुपये की सुपारी दी गई थी।
यह मामला केवल एक हत्या नहीं, बल्कि जमीन के विवाद से उपजी उस आपराधिक मानसिकता का उदाहरण है, जहां मतभेदों का समाधान कानून नहीं बल्कि बंदूक और सुपारी के जरिए तलाशा जाने लगा है।
जमीन का विवाद बना खूनी दुश्मनी का कारण
एसटीएफ की जांच में खुलासा हुआ है कि मुख्य आरोपी दिनेश कुमार यादव और मृतक संदीप सिंह के बीच लंबे समय से जमीन को लेकर विवाद चल रहा था। समय के साथ यह विवाद इतनी गहरी दुश्मनी में बदल गया कि दिनेश ने संदीप को हमेशा के लिए रास्ते से हटाने का फैसला कर लिया।
पुलिस के अनुसार हत्या की साजिश बेहद सुनियोजित तरीके से रची गई। दिनेश कुमार यादव ने अपने पुराने परिचित मुकररबीं उर्फ मुबीन के माध्यम से शूटरों तक संपर्क साधा और संदीप सिंह की हत्या के लिए पांच लाख रुपये की सुपारी तय की गई।
27 मई को मिली थी हत्या की ‘डेडलाइन’
जांच में सामने आया है कि दिनेश यादव ने शूटरों को 27 मई तक हर हाल में वारदात को अंजाम देने का निर्देश दिया था। हत्या के दिन शूटरों ने फोन कर दिनेश को मिशन पूरा होने की जानकारी भी दी थी।
इस खुलासे ने साफ कर दिया है कि हत्या कोई अचानक हुई वारदात नहीं थी, बल्कि पूरी तैयारी और योजना के तहत अंजाम दिया गया एक सुनियोजित अपराध था।
मुखबिर की सूचना बनी खुलासे की कुंजी
मामले की जांच कर रही एसटीएफ को 21 मई को महत्वपूर्ण सूचना मिली कि हत्याकांड से जुड़ा एक आरोपी डालोना अंडरपास के पास आने वाला है। सूचना के आधार पर घेराबंदी कर मुकररबीं उर्फ मुबीन को गिरफ्तार किया गया।
पूछताछ के दौरान मुबीन ने हत्या की साजिश का पूरा राज खोल दिया। उसके बयान और अन्य तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर मुख्य साजिशकर्ता दिनेश कुमार यादव को लखनऊ एसटीएफ मुख्यालय बुलाकर पूछताछ की गई, जहां पर्याप्त सबूत मिलने के बाद उसे भी गिरफ्तार कर लिया गया।
हत्या के पीछे केवल रंजिश नहीं, आपराधिक नेटवर्क का भी संकेत
पुलिस अधिकारियों का मानना है कि इस हत्याकांड में केवल व्यक्तिगत दुश्मनी ही नहीं, बल्कि सुपारी किलिंग से जुड़े एक संगठित आपराधिक नेटवर्क की भूमिका की भी जांच की जा रही है। शूटरों की तलाश जारी है और संभावना है कि आने वाले दिनों में इस मामले में और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं।
कानून-व्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती
राजधानी लखनऊ में खुलेआम सुपारी देकर हत्या कराए जाने का मामला कानून-व्यवस्था के लिए भी गंभीर सवाल खड़े करता है। यह घटना बताती है कि जमीन और संपत्ति से जुड़े विवाद किस तरह संगठित अपराध का रूप ले रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में समय रहते कानूनी हस्तक्षेप और विवाद समाधान की व्यवस्था मजबूत करना बेहद जरूरी है।
अभी जांच जारी, शूटरों की तलाश तेज
एसटीएफ ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर पीजीआई थाना पुलिस के सुपुर्द कर दिया है। पुलिस अब हत्या को अंजाम देने वाले शूटरों और इस साजिश से जुड़े अन्य संभावित आरोपियों की तलाश में जुटी हुई है। अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश किया जाएगा।
सवाल जो अभी बाकी हैं
पांच लाख रुपये की सुपारी किन शूटरों को दी गई थी?
क्या इस हत्या में और भी लोग शामिल थे?
जमीन विवाद की वास्तविक पृष्ठभूमि क्या थी?
क्या शूटर किसी बड़े आपराधिक गिरोह से जुड़े हैं?
इन सवालों के जवाब आने वाले दिनों में जांच के आगे बढ़ने के साथ सामने आ सकते हैं, लेकिन फिलहाल इतना साफ है कि संदीप सिंह की हत्या कोई सामान्य अपराध नहीं, बल्कि सुनियोजित सुपारी किलिंग थी, जिसकी पटकथा जमीन विवाद की आग में लिखी गई थी।














