नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और वैश्विक ऊर्जा संकट के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को एक ऐसा संदेश दिया, जिसकी चर्चा पूरे देश में हो रही है। प्रधानमंत्री मोदी कैबिनेट बैठक में अपने आवास से दफ्तर तक महज दो गाड़ियों के छोटे काफिले के साथ पहुंचे। इसका वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर इसे “सादगी”, “ऊर्जा बचत” और “नेतृत्व द्वारा उदाहरण” की मिसाल बताया जा रहा है।
प्रधानमंत्री ने हाल ही में देशवासियों से पेट्रोल, डीजल और गैस का संयमित उपयोग करने की अपील की थी। उन्होंने कहा था कि वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए ऊर्जा संरक्षण अब केवल आर्थिक जरूरत नहीं, बल्कि राष्ट्रीय जिम्मेदारी भी बन गया है। अब उसी अपील को खुद अमल में लाकर प्रधानमंत्री ने बड़ा राजनीतिक और प्रशासनिक संदेश दिया है।
सूत्रों के मुताबिक, सामान्य परिस्थितियों में प्रधानमंत्री के सुरक्षा काफिले में 14 से 17 वाहन शामिल रहते हैं। इसके अतिरिक्त स्थानीय पुलिस, सुरक्षा एजेंसियों और रूट सुरक्षा में तैनात वाहनों को जोड़ दिया जाए तो कई बार यह संख्या 30 से 40 तक पहुंच जाती है। लेकिन बुधवार को वायरल हुए वीडियो में प्रधानमंत्री का काफिला बेहद छोटा दिखाई दिया, जिसने लोगों का ध्यान खींच लिया।
अमित शाह और राजनाथ सिंह ने भी घटाए वाहन
प्रधानमंत्री की अपील का असर केंद्र सरकार के वरिष्ठ मंत्रियों पर भी साफ दिखाई दिया। गृह मंत्री अमित शाह, जो सामान्य तौर पर 11 से 12 गाड़ियों के सुरक्षा काफिले के साथ चलते हैं, वे बुधवार को केवल चार गाड़ियों के साथ कैबिनेट बैठक में पहुंचे।
इसी तरह रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी अपने काफिले में भारी कटौती की। Z+ सुरक्षा प्राप्त राजनाथ सिंह के साथ सामान्य तौर पर लगभग 11 वाहन चलते हैं, लेकिन प्रधानमंत्री की अपील के बाद उन्होंने अपने काफिले को घटाकर चार गाड़ियों तक सीमित कर दिया।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने भी अपने सुरक्षा काफिले में वाहनों की संख्या कम कर दी है। जानकारी के अनुसार, अब उनका काफिला भी केवल चार वाहनों तक सीमित रखा गया है।
BJP नेताओं ने कहा — “प्रधानसेवक ने फिर पेश की मिसाल”
भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने प्रधानमंत्री मोदी की पहल की सराहना करते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि प्रधानमंत्री ने एक बार फिर साबित किया है कि वे सही मायनों में देश के “प्रधानसेवक” हैं।
#WATCH | Delhi: Prime Minister Narendra Modi has reduced his convoy size significantly. Reduction in vehicles was done while maintaining essential security components as per SPG protocol. pic.twitter.com/kuC9OfyAxN
— ANI (@ANI) May 13, 2026
उन्होंने कहा कि जब नेतृत्व स्वयं उदाहरण प्रस्तुत करता है, तब वह एक जन-आंदोलन का रूप ले लेता है। नितिन नवीन ने यह भी घोषणा की कि वे स्वयं भी अपने काफिले में वाहनों की संख्या कम कर रहे हैं और ऊर्जा संरक्षण की दिशा में अन्य कदम उठाएंगे।
BJP शासित राज्यों में भी दिखा असर
प्रधानमंत्री की अपील का असर भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों पर भी दिखाई देने लगा है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री Yogi Adityanath ने मंगलवार को प्रशासनिक अधिकारियों के साथ बैठक कर ऊर्जा बचत और ईंधन संरक्षण को लेकर दिशा-निर्देश दिए।
सूत्रों के अनुसार, कई राज्यों में मुख्यमंत्री और मंत्रियों ने अपने सुरक्षा काफिलों में चलने वाली गाड़ियों की संख्या लगभग 50 प्रतिशत तक कम कर दी है। इसके साथ ही सरकारी विभागों को भी ईंधन की खपत कम करने और संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग के निर्देश दिए जा रहे हैं।
ऊर्जा बचत को जन आंदोलन बनाने की कोशिश
विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिम एशिया में जारी अस्थिरता के कारण वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है। ऐसे समय में केंद्र सरकार ऊर्जा संरक्षण को एक बड़े राष्ट्रीय अभियान के रूप में आगे बढ़ाने की तैयारी में दिखाई दे रही है।
प्रधानमंत्री मोदी की यह पहल केवल सरकारी काफिलों तक सीमित नहीं मानी जा रही, बल्कि इसे आम नागरिकों के लिए भी एक संदेश के रूप में देखा जा रहा है — कि देशहित में संसाधनों का सीमित और जिम्मेदार उपयोग आज समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।














