गाजीपुर। सादात नगर पंचायत के वार्ड नंबर नौ में वर्ष 1937 में बने संस्कृत महाविद्यालय के भवन को गिराकर नगर पंचायत कार्यालय बनवाने के मामले में जांच शुरू हो गई है। जिलाधिकारी अनुपम शुक्ला ने प्रकरण की जांच के लिए टीम गठित की है। रविवार को अपर जिलाधिकारी (भू-राजस्व) सुनील त्रिवेदी और सैदपुर एसडीएम ज्योति चौरसिया की टीम सादात पहुंची। अधिकारियों ने महाविद्यालय के प्रबंधक योगेश्वर प्रसाद से संबंधित अभिलेख प्राप्त किए और स्थानीय लोगों के बयान दर्ज किए।
जांच टीम ने नगर निवासी शिवानंद सिंह मुन्ना, विजेंद्र प्रताप सिंह, पूर्व प्रधानाचार्य रामधनी शर्मा, ब्रजनाथ उर्फ साधु यादव, सुदामा राम विश्वकर्मा, बैकुंठ सिंह, मनीष यादव, प्रदीप सिंह, अंजनी कुमार, उमेश सिंह और पलकधारी राजभर सहित कई लोगों से पूछताछ की। ग्रामीणों ने बताया कि जिस स्थान पर नगर पंचायत कार्यालय का निर्माण कराया जा रहा है, वहां कई दशकों से संस्कृत महाविद्यालय संचालित होता रहा है।
इससे पहले शनिवार को भाजपा जिलाध्यक्ष ओमप्रकाश राय और वरिष्ठ नेता सच्चिदानंद सिंह ने भी मौके का निरीक्षण किया था। उन्होंने वहां मौजूद जखनियां के नायब तहसीलदार विवेकानंद सिंह से जानकारी ली और विद्यालय की भूमि पर निर्माण का विरोध जताया।
महाविद्यालय के प्रबंधक योगेश्वर प्रसाद और प्रिंसिपल हामिद सिद्दीकी के अनुसार, संबंधित जमीन आबादी की है और मामला न्यायालय में विचाराधीन है। आरोप है कि मुकदमा लंबित रहने के बावजूद एसडीएम अतुल कुमार के निर्देश पर अधिशासी अधिकारी सोनल जैन की मौजूदगी में सीएनडीएस अभियंता अभिलाष पांडेय और ठेकेदार राकेश सिंह ने विद्यालय की चहारदीवारी और कमरे गिरा दिए थे। अब जांच टीम अभिलेखों और बयानों के आधार पर मामले की पड़ताल कर रही है।















