“राहुल गांधी ने फडणवीस से छात्रों की मांगों पर जल्द कार्रवाई की अपील की, बीजेपी ने पलटवार कर कांग्रेस नेताओं पर ही लगाए आदिवासी स्कूलों के संचालन और कुप्रबंधन के आरोप”
मुंबई: महाराष्ट्र में आदिवासी छात्रों की समस्याओं को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। कांग्रेस सांसद राहुल गांधी की ओर से मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को लिखी गई चिट्ठी के बाद अब भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस पर पलटवार किया है। राहुल गांधी ने अपने पत्र में राज्य के आदिवासी छात्रों की समस्याओं को गंभीरता से लेने और आंदोलन कर रहे छात्रों से बातचीत कर उनकी मांगों का जल्द समाधान करने की अपील की थी। इसके जवाब में महाराष्ट्र बीजेपी ने कांग्रेस पर ही आदिवासी छात्रों और स्कूलों के मुद्दे पर राजनीति करने तथा अपने नेताओं को बचाने का आरोप लगाया है।
राहुल गांधी ने सोमवार, 24 अगस्त को मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को पत्र लिखकर आदिवासी छात्रों की परेशानियों का मुद्दा उठाया था। उन्होंने कहा था कि सरकारी छात्रावासों में रहने की उम्र सीमा और कथित अपमानजनक नियमों के खिलाफ आदिवासी छात्र पिछले 10 दिनों से अधिक समय से भूख हड़ताल कर रहे हैं। कांग्रेस नेता ने मुख्यमंत्री से आग्रह किया था कि वह आंदोलनरत छात्रों से मुलाकात करें और उनकी समस्याओं का जल्द समाधान सुनिश्चित करें।
राहुल गांधी की इस पहल के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है। बीजेपी ने कांग्रेस नेता के पत्र पर सवाल उठाते हुए कहा कि आदिवासी छात्रों और स्कूलों की मौजूदा स्थिति को लेकर कांग्रेस को नैतिक सवाल उठाने से पहले अपने नेताओं की भूमिका पर जवाब देना चाहिए।
बीजेपी का पलटवार—‘कुछ आदिवासी स्कूल कांग्रेस नेताओं के संचालन में’
महाराष्ट्र बीजेपी ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट जारी कर राहुल गांधी पर निशाना साधा। पार्टी ने दावा किया कि जिन आदिवासी स्कूलों और संस्थानों को लेकर छात्र आंदोलन कर रहे हैं, उनमें से कुछ का संचालन कांग्रेस से जुड़े नेताओं द्वारा किया जाता है।
बीजेपी ने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि उनसे निष्पक्ष और अच्छी तरह शोध किए गए विचारों की उम्मीद नहीं की जाती, लेकिन जनता को तथ्यों की जानकारी होनी चाहिए। पार्टी का आरोप है कि आदिवासी छात्रों की समस्याओं को लेकर कांग्रेस द्वारा सरकार पर सवाल उठाए जा रहे हैं, जबकि कुछ संबंधित संस्थानों के प्रबंधन में कांग्रेस नेताओं की भूमिका रही है।
बीजेपी ने इसी आधार पर राहुल गांधी पर कांग्रेस नेताओं को बचाने की कोशिश करने का आरोप लगाया है। पार्टी का कहना है कि आदिवासी छात्रों की समस्याओं का राजनीतिक इस्तेमाल करने के बजाय उन संस्थानों की जिम्मेदारी और वहां के प्रबंधन की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए।
तीन बच्चियों की मौत वाले स्कूल का भी बीजेपी ने किया जिक्र
बीजेपी ने अपने पलटवार में उस आदिवासी स्कूल का भी जिक्र किया, जहां कुछ दिन पहले तीन बच्चियों की मौत का मामला सामने आया था। पार्टी के मुताबिक, इस स्कूल के निदेशक मारोतराव कोवसे कांग्रेस के पूर्व सांसद रह चुके हैं। बीजेपी ने दावा किया कि उनके बेटे विश्वजीत कोवसे गढ़चिरौली जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष होने के साथ-साथ स्कूल के सचिव भी हैं।
बीजेपी ने इस मामले का उल्लेख करते हुए कांग्रेस से सवाल किया कि यदि पार्टी वास्तव में आदिवासी छात्रों और बच्चों की सुरक्षा को लेकर गंभीर है, तो उसे अपने नेताओं से जुड़े संस्थानों की स्थिति पर भी जवाब देना चाहिए।
हालांकि, बीजेपी के इन आरोपों के बीच संबंधित मामलों की पूरी प्रशासनिक और कानूनी जांच के निष्कर्षों को अलग-अलग देखना जरूरी होगा। किसी संस्था के संचालन में किसी राजनीतिक व्यक्ति या उसके परिवार से जुड़े होने मात्र से किसी घटना की जिम्मेदारी स्वतः तय नहीं होती। ऐसे मामलों में जांच और आधिकारिक रिपोर्ट के निष्कर्ष महत्वपूर्ण होते हैं।
यवतमाल के आश्रम स्कूल को लेकर भी बीजेपी का हमला
महाराष्ट्र बीजेपी ने यवतमाल के चिंधुजी लक्ष्मणराव पुरके आश्रम स्कूल का भी उल्लेख किया। पार्टी के अनुसार, स्कूल के निरीक्षण के दौरान छात्राओं के बाथरूम में दरवाजे तक नहीं पाए गए थे।
बीजेपी का दावा है कि इस स्कूल का संचालन पूर्व मंत्री और कांग्रेस नेता वसंत पुरके करते हैं। पार्टी ने इस उदाहरण के जरिए कांग्रेस पर आदिवासी छात्रों की सुविधाओं और सुरक्षा के मुद्दे पर दोहरा रवैया अपनाने का आरोप लगाया।
बीजेपी ने कहा कि जब सत्ता में रहते हुए कांग्रेस से जुड़े लोगों के नियंत्रण या प्रबंधन वाले संस्थानों में इस तरह की समस्याएं सामने आती हैं, तब कांग्रेस को सरकार पर सवाल उठाने से पहले अपने स्तर पर भी जवाबदेही तय करनी चाहिए।
Rahul Gandhi, we don’t expect fair or well-researched views from you, but here are some facts the public should know.
• The tribal schools that students are protesting against are run by Congress leaders. A few days ago, three young girls died at a school whose director,… https://t.co/p04i6yjeRq
— भाजपा महाराष्ट्र (@BJP4Maharashtra) August 24, 2026
‘गलत तरीके से नियंत्रण हासिल कर स्कूलों का दुरुपयोग’
महाराष्ट्र बीजेपी ने कांग्रेस पर एक और गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि कांग्रेस के सत्ता में रहने के दौरान कुछ आदिवासी स्कूलों पर गलत तरीके से नियंत्रण हासिल किया गया और बाद में उनका दुरुपयोग किया गया।
पार्टी का आरोप है कि लंबे समय तक आदिवासी समुदाय के हितों की अनदेखी करने वाले लोग अब छात्रों की समस्याओं को मुद्दा बनाकर खुद को बचाने की कोशिश कर रहे हैं। बीजेपी ने यह भी कहा कि कांग्रेस नेताओं के खिलाफ यदि किसी प्रकार की कार्रवाई चल रही है, तो उसे रोकने के लिए राजनीतिक दबाव बनाने की कोशिश सफल नहीं होगी।
बीजेपी का यह हमला ऐसे समय में सामने आया है जब आदिवासी छात्रों के आंदोलन ने राज्य सरकार के सामने छात्रावासों की व्यवस्था, उम्र सीमा और नियमों को लेकर सवाल खड़े किए हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में सरकार की ओर से छात्रों की मांगों पर क्या कदम उठाया जाता है, इस पर सबकी नजर रहेगी।
बीजेपी बोली—‘जनता कांग्रेस का तरीका समझ चुकी है’
बीजेपी ने अपने बयान में राहुल गांधी और कांग्रेस की राजनीति पर भी तीखा हमला बोला। पार्टी ने आरोप लगाया कि कांग्रेस पहले गलत काम होने देती है और जब किसी मामले में कार्रवाई शुरू होती है तो राजनीतिक हंगामा खड़ा कर देती है।
बीजेपी के मुताबिक, जनता अब कांग्रेस के इस राजनीतिक तरीके को समझ चुकी है। पार्टी ने राहुल गांधी से कहा कि वे महाराष्ट्र में राजनीतिक ड्रामा करने के बजाय आदिवासी छात्रों के वास्तविक मुद्दों पर गंभीरता से ध्यान दें और कांग्रेस नेताओं को बचाने की कोशिश बंद करें।
इस पूरे विवाद में एक तरफ कांग्रेस आदिवासी छात्रों के आंदोलन और उनकी मांगों को लेकर महाराष्ट्र सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग कर रही है, तो दूसरी ओर बीजेपी कांग्रेस नेताओं से जुड़े संस्थानों की स्थिति को मुद्दा बनाकर विपक्ष पर हमला कर रही है।
राहुल गांधी की मांग—छात्रों से बात करे सरकार
राहुल गांधी की ओर से मुख्यमंत्री को लिखे पत्र का मुख्य फोकस आंदोलन कर रहे आदिवासी छात्रों की समस्याओं पर था। उन्होंने मुख्यमंत्री से अपील की कि सरकार छात्रों से बातचीत करे और उनकी शिकायतों का समाधान निकाले।
छात्रों की ओर से सरकारी हॉस्टल में रहने की उम्र सीमा और कथित अपमानजनक नियमों को लेकर विरोध किया जा रहा है। लंबे समय से जारी भूख हड़ताल के कारण मामला और गंभीर हो गया है। ऐसे में सरकार के सामने चुनौती है कि वह छात्रों की मांगों को सुने, नियमों की समीक्षा करे और ऐसा समाधान निकाले जिससे आदिवासी विद्यार्थियों की शिक्षा प्रभावित न हो।
बीजेपी का राहुल गांधी को पलटवार—‘पहले कर्नाटक और तेलंगाना में सुधार करें’
महाराष्ट्र बीजेपी ने राहुल गांधी पर हमला करते हुए उन्हें कर्नाटक और तेलंगाना की ओर भी ध्यान देने की सलाह दी। पार्टी ने कहा कि राहुल गांधी को महाराष्ट्र की व्यवस्था पर सवाल उठाने से पहले उन राज्यों में आदिवासी कल्याण विभागों और छात्रावासों की स्थिति सुधारने पर ध्यान देना चाहिए, जहां कांग्रेस की सरकारें हैं।
बीजेपी ने दावा किया कि महाराष्ट्र सरकार आदिवासी समुदाय और छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में पूरी तरह सक्षम है। पार्टी का कहना है कि राज्य सरकार मामले की जांच और आवश्यक कार्रवाई करने में सक्षम है और किसी राजनीतिक हस्तक्षेप की जरूरत नहीं है।
आदिवासी छात्रों का मुद्दा बना सियासी टकराव का नया केंद्र
महाराष्ट्र में आदिवासी छात्रों का आंदोलन अब केवल छात्रावासों के नियमों और सुविधाओं तक सीमित नहीं रह गया है। राहुल गांधी के पत्र के बाद यह मुद्दा सीधे कांग्रेस और बीजेपी के बीच राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया है।
एक ओर कांग्रेस सरकार से छात्रों की मांगों पर तत्काल कार्रवाई और संवाद की मांग कर रही है। दूसरी ओर बीजेपी कांग्रेस नेताओं से जुड़े आदिवासी स्कूलों की व्यवस्थाओं और उनके संचालन को लेकर सवाल खड़े कर रही है। दोनों दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि आंदोलन कर रहे छात्रों की वास्तविक समस्याओं का समाधान कितनी जल्दी होता है।
अब निगाह मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और महाराष्ट्र सरकार के अगले कदम पर है। यदि सरकार छात्रों के साथ बातचीत कर उनकी मांगों पर ठोस निर्णय लेती है, तो लंबे समय से जारी आंदोलन खत्म होने की राह खुल सकती है। वहीं यदि विवाद जारी रहता है, तो आदिवासी छात्रों का यह मुद्दा आने वाले दिनों में महाराष्ट्र की राजनीति में और बड़ा रूप ले सकता है।
फिलहाल, राहुल गांधी की चिट्ठी ने आदिवासी छात्रों की समस्याओं को राज्य की राजनीति के केंद्र में ला दिया है और बीजेपी के पलटवार ने इस मुद्दे को कांग्रेस बनाम बीजेपी की राजनीतिक लड़ाई में बदल दिया है। अब जरूरत इस बात की है कि राजनीतिक आरोपों से आगे बढ़कर छात्रों की शिक्षा, सुरक्षा, सम्मान और छात्रावासों की बुनियादी सुविधाओं से जुड़े सवालों का ठोस समाधान निकाला जाए।














