“भारत मंडपम में BRICS के मुख्य ओपन सेशन की शुरुआत, PM मोदी बोले—BRICS केवल देशों का समूह नहीं, आम नागरिकों और संस्थाओं की भी हो भागीदारी”
नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित BRICS शिखर सम्मेलन के मुख्य ओपन सेशन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वैश्विक सहयोग, नवाचार, आपदा प्रबंधन, सप्लाई चेन, रोजगार और समावेशी विकास को लेकर भारत का व्यापक विजन दुनिया के सामने रखा। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि बदलती वैश्विक परिस्थितियों में केवल सरकारों के बीच सहयोग पर्याप्त नहीं है। BRICS को देशों की सीमाओं से आगे बढ़ाकर आम नागरिकों, संस्थाओं, युवाओं, स्टार्टअप्स, छोटे कारोबारियों और महिलाओं को भी इससे जोड़ना होगा।
BRICS के मुख्य ओपन सेशन का विषय “Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability: Shaping the Future for Inclusive Global Growth” रखा गया है। इसका उद्देश्य मजबूती, नवाचार, सहयोग और टिकाऊ विकास के आधार पर ऐसा वैश्विक ढांचा तैयार करना है, जिसमें विकास का लाभ अधिक से अधिक देशों और समाज के विभिन्न वर्गों तक पहुंच सके।
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में विशेष रूप से स्टार्टअप्स, MSME, कौशल विकास, रोजगार, महिलाओं के अवसर और वैश्विक सप्लाई चेन को मजबूत बनाने पर जोर दिया। उन्होंने BRICS देशों के बीच सहयोग को जमीन पर उतारने के लिए कई महत्वपूर्ण पहलों और प्रस्तावों का उल्लेख किया।
BRICS को सिर्फ सरकारों तक सीमित रखने के पक्ष में नहीं PM मोदी
प्रधानमंत्री मोदी ने स्पष्ट संदेश दिया कि BRICS का दायरा केवल सदस्य देशों की सरकारों और आधिकारिक संस्थाओं तक सीमित नहीं रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि आम नागरिकों और विभिन्न संस्थाओं की सक्रिय भागीदारी से ही BRICS का सहयोग वास्तविक अर्थों में व्यापक और प्रभावी बन सकता है।
भारत की ओर से BRICS इनक्यूबेटर नेटवर्क और स्टार्टअप इनोवेशन फंड का प्रस्ताव इसी सोच का हिस्सा है। इसका उद्देश्य सदस्य देशों के स्टार्टअप इकोसिस्टम को आपस में जोड़ना, नवाचार को बढ़ावा देना और युवाओं को नए अवसर उपलब्ध कराना है।
भारत का मानना है कि दुनिया की अर्थव्यवस्था तेजी से तकनीक और नवाचार आधारित हो रही है। ऐसे में BRICS देशों के बीच यदि स्टार्टअप्स, निवेशकों, इनक्यूबेटर्स और तकनीकी संस्थानों का बेहतर नेटवर्क तैयार होता है तो इससे रोजगार और नए कारोबार के अवसर बढ़ सकते हैं।
महामारी और आपदाओं से सबक, संकट के खिलाफ BRICS की तैयारी
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में दुनिया के सामने मौजूद बढ़ते संकटों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि वैश्विक तनाव का सीधा प्रभाव आम लोगों की जिंदगी पर पड़ रहा है। महामारी, जलवायु आपदाओं और सप्लाई चेन में आने वाली रुकावटों ने यह साबित कर दिया है कि दुनिया के देश एक-दूसरे से गहराई से जुड़े हुए हैं।
किसी एक हिस्से में पैदा हुआ संकट दूसरे देशों की अर्थव्यवस्था, स्वास्थ्य व्यवस्था और आम नागरिकों के जीवन को प्रभावित कर सकता है। ऐसे में भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए पहले से तैयारी करना जरूरी है।
भारत की अध्यक्षता में इसी दिशा में BRICS देशों को संकटों के प्रति अधिक तैयार और सक्षम बनाने पर जोर दिया गया। संक्रामक बीमारियों की पहचान और रोकथाम के लिए BRICS Integrated Early Warning System बनाने पर सहमति बनी है। यह व्यवस्था संभावित स्वास्थ्य संकटों की शुरुआती पहचान और समय रहते कार्रवाई में मदद करने के उद्देश्य से तैयार की जा रही है।
इसके साथ ही प्राकृतिक और अन्य आपदाओं के प्रभाव को कम करने के लिए Early Warning Data Integration Guidelines तैयार की गई हैं। इससे विभिन्न देशों के बीच जरूरी डेटा और सूचनाओं के बेहतर आदान-प्रदान में मदद मिलने की उम्मीद है।
चार स्तंभों पर भारत की BRICS रणनीति
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत की अध्यक्षता के दौरान BRICS से जुड़े सभी प्रयास चार प्रमुख स्तंभों पर केंद्रित रहे हैं—Resilience, Innovation, Cooperation और Sustainability।
यानी वैश्विक संकटों के सामने मजबूती, नई तकनीक और विचारों को बढ़ावा, देशों के बीच सहयोग तथा टिकाऊ विकास।
प्रधानमंत्री ने कहा कि सभी सदस्य देशों के सहयोग और समर्थन से साझा विजन को अलग-अलग क्षेत्रों में व्यावहारिक सहयोग में बदलने में सफलता मिली है।
भारत का प्रयास रहा है कि BRICS को केवल बैठकों और घोषणाओं का मंच बनाने के बजाय ऐसी ठोस पहलों से जोड़ा जाए, जिनका असर आर्थिक गतिविधियों, रोजगार, व्यापार, तकनीक और नागरिक सुविधाओं पर दिखाई दे।
सप्लाई चेन को मजबूत करने के लिए लॉजिस्टिक्स फ्रेमवर्क
वैश्विक अर्थव्यवस्था में सप्लाई चेन की भूमिका लगातार बढ़ी है। महामारी और अंतरराष्ट्रीय तनावों के दौरान सप्लाई चेन में आई बाधाओं ने दुनिया के सामने नई चुनौतियां खड़ी की थीं। इसी अनुभव को देखते हुए BRICS देशों के बीच लॉजिस्टिक्स और सप्लाई चेन सहयोग को मजबूत करने पर विशेष ध्यान दिया गया।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि BRICS Logistics Supply Chain Cooperation Framework सदस्य देशों की सप्लाई चेन को अधिक विश्वसनीय और मजबूत बनाने में सहायक होगा।
इसका उद्देश्य लॉजिस्टिक्स से जुड़े अनुभव साझा करना, आपूर्ति व्यवस्था में बेहतर तालमेल स्थापित करना और भविष्य में किसी संकट की स्थिति में आवश्यक वस्तुओं की आवाजाही को अधिक प्रभावी बनाए रखना है।
भारत की ओर से इस पहल को वैश्विक व्यापार और आर्थिक स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण कदम के तौर पर देखा जा रहा है।
BRICS Connect से कौशल, रोजगार और महिलाओं के अवसर बढ़ाने की तैयारी
BRICS सहयोग को आम लोगों तक पहुंचाने के लिए BRICS Connect की भूमिका भी महत्वपूर्ण बताई गई। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि इसके माध्यम से कौशल विकास, रोजगार और महिलाओं के लिए अवसर बढ़ाने पर काम किया जाएगा।
बदलते रोजगार बाजार में नई तकनीकों के कारण कौशल की जरूरत भी तेजी से बदल रही है। ऐसे में सदस्य देशों के बीच कौशल विकास से जुड़े अनुभवों और सफल मॉडलों का आदान-प्रदान युवाओं के लिए उपयोगी साबित हो सकता है।
महिलाओं को आर्थिक गतिविधियों से जोड़ने और उनके लिए नए अवसर पैदा करने पर भी BRICS Connect के जरिए काम करने की बात कही गई है।
MSME के लिए BRICS पोर्टल, कारोबारियों को मिलेंगे नए बाजार
छोटे कारोबारियों और MSME सेक्टर को BRICS सहयोग से जोड़ने के लिए BRICS MSME Portal शुरू किया गया है। इसका उद्देश्य छोटे और मध्यम कारोबारियों को जरूरी जानकारी, वित्तीय अवसरों और नए बाजारों तक पहुंच उपलब्ध कराना है।
MSME क्षेत्र रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है। अलग-अलग BRICS देशों के छोटे कारोबारियों को एक-दूसरे के बाजारों, कारोबारी अवसरों और वित्तीय संसाधनों की जानकारी मिलने से सीमा पार व्यापार और सहयोग को बढ़ावा मिल सकता है।
इस पहल से छोटे उद्यमों को बड़े अंतरराष्ट्रीय बाजारों से जोड़ने की संभावनाएं भी मजबूत हो सकती हैं।
शहरों की परिवहन व्यवस्था सुधारने पर भी सहयोग
BRICS सहयोग का दायरा केवल व्यापार और उद्योग तक सीमित नहीं रखा गया है। प्रधानमंत्री मोदी ने शहरों में आवाजाही को बेहतर बनाने के लिए सदस्य देशों के बीच अनुभव साझा करने पर भी जोर दिया।
तेजी से बढ़ते शहरीकरण के दौर में ट्रैफिक, सार्वजनिक परिवहन, शहरी नियोजन और टिकाऊ मोबिलिटी बड़ी चुनौती बन चुके हैं। ऐसे में BRICS देशों के शहरों में अपनाए गए सफल मॉडल और तकनीकी अनुभव साझा करने से शहरी परिवहन व्यवस्था को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है।
भारत का संदेश—साझा चुनौतियों का समाधान भी साझा प्रयास से
BRICS के मंच से प्रधानमंत्री मोदी का संदेश स्पष्ट रहा कि मौजूदा वैश्विक चुनौतियां किसी एक देश तक सीमित नहीं हैं। महामारी से लेकर जलवायु आपदाओं, सप्लाई चेन में रुकावटों और आर्थिक अस्थिरता तक—इनका प्रभाव सीमाओं से परे जाता है।
ऐसे में भविष्य की वैश्विक व्यवस्था को अधिक मजबूत, समावेशी और टिकाऊ बनाने के लिए देशों के बीच सहयोग आवश्यक है।
भारत की अध्यक्षता में BRICS के एजेंडे में स्वास्थ्य सुरक्षा, आपदा प्रबंधन, सप्लाई चेन, स्टार्टअप, MSME, कौशल, रोजगार और महिलाओं के आर्थिक अवसर जैसे मुद्दों को प्रमुखता मिलना इसी व्यापक सोच को दर्शाता है।
प्रधानमंत्री मोदी ने BRICS को केवल सरकारों के बीच संवाद का मंच नहीं बल्कि नागरिकों, संस्थाओं, युवाओं, उद्यमियों और समाज के विभिन्न वर्गों को जोड़ने वाले सहयोग के नेटवर्क के रूप में विकसित करने की दिशा दिखाई है।
भारत मंडपम से दिया गया यह संदेश ऐसे समय में सामने आया है जब दुनिया आर्थिक, पर्यावरणीय और भू-राजनीतिक चुनौतियों के बीच नए सहयोग के रास्ते तलाश रही है। BRICS के जरिए भारत ने जिस मॉडल पर जोर दिया है, उसमें मजबूती के साथ नवाचार, सहयोग के साथ स्थिरता और आर्थिक विकास के साथ आम नागरिकों की भागीदारी को भविष्य की वैश्विक प्रगति का आधार बनाने की कोशिश दिखाई देती है।














