नोएडा, 4 अगस्त। कभी देश के सबसे स्वच्छ और व्यवस्थित शहरों में गिने जाने वाले नोएडा की सफाई व्यवस्था अब गंभीर चुनौतियों का सामना कर रही है। शहर की स्वच्छता को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच आरडब्ल्यूए सेक्टर-105 के अध्यक्ष दिव्य कृष्णात्रेय ने नोएडा प्राधिकरण और जनप्रतिनिधियों से जन स्वास्थ्य विभाग को तत्काल प्रभाव से पुनः बहाल करने की मांग की है। उनका कहना है कि जन स्वास्थ्य विभाग को समाप्त किए जाने के बाद से सफाई व्यवस्था का समन्वय कमजोर हुआ है और इसका सीधा असर शहर की स्वच्छता पर दिखाई देने लगा है।
दिव्य कृष्णात्रेय ने जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा कि नोएडा केवल एक आधुनिक शहर नहीं, बल्कि लाखों लोगों का घर है। इसकी स्वच्छता, सुंदरता और व्यवस्थित जीवनशैली ने इसे देशभर में एक अलग पहचान दिलाई है। लेकिन पिछले कुछ समय से जिस प्रकार सफाई व्यवस्था प्रभावित हुई है, उसने नागरिकों की चिंता बढ़ा दी है। उनका मानना है कि यदि समय रहते इस दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए गए तो नोएडा की वर्षों की मेहनत से बनी स्वच्छ छवि को नुकसान पहुंच सकता है।
जन स्वास्थ्य विभाग खत्म होने के बाद बढ़ा कार्यभार
दिव्य कृष्णात्रेय के अनुसार पहले जन स्वास्थ्य विभाग केवल सफाई, कूड़ा प्रबंधन, सार्वजनिक स्वास्थ्य और स्वच्छता से जुड़े कार्यों की निगरानी करता था। विभाग के पास इस कार्य के लिए समर्पित अधिकारी और कर्मचारी होते थे, जिससे पूरे शहर में नियमित निरीक्षण और त्वरित कार्रवाई संभव हो पाती थी।
उन्होंने कहा कि विभाग समाप्त होने के बाद यह जिम्मेदारी विभिन्न कार्य-सर्किलों को सौंप दी गई। जबकि इन सर्किलों के पास पहले से ही सड़क निर्माण, सीवर, जलापूर्ति, पार्कों के रखरखाव और अन्य विकास कार्यों का भारी दबाव है। ऐसे में सफाई व्यवस्था भी उन्हीं के जिम्मे आने से नियमित निगरानी प्रभावित हुई है।
उनका कहना है कि परिणामस्वरूप कई स्थानों पर सफाई कार्यों में देरी, कूड़ा उठान की अनियमितता तथा स्वच्छता से जुड़ी शिकायतों के समाधान में विलंब जैसी समस्याएं सामने आ रही हैं।
‘स्वच्छता केवल सफाई नहीं, नागरिकों के स्वास्थ्य से भी जुड़ा विषय’
आरडब्ल्यूए अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि जन स्वास्थ्य विभाग की बहाली केवल प्रशासनिक पुनर्गठन का विषय नहीं है, बल्कि यह सीधे तौर पर नागरिकों के स्वास्थ्य और पर्यावरण से जुड़ा मुद्दा है।
उन्होंने कहा कि यदि शहर की सफाई व्यवस्था कमजोर होगी तो इसका असर केवल सौंदर्य पर नहीं पड़ेगा बल्कि संक्रमण, बीमारियों और प्रदूषण जैसी समस्याएं भी बढ़ सकती हैं। इसलिए जन स्वास्थ्य विभाग को दोबारा स्थापित करना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता बन गया है।
उन्होंने कहा कि एक अलग विभाग होने से स्वच्छता संबंधी कार्यों की जवाबदेही स्पष्ट रहती है और समस्याओं का समाधान भी तेजी से हो पाता है।
नोएडा की स्वच्छता साख बचाने की अपील
दिव्य कृष्णात्रेय ने कहा कि नोएडा ने वर्षों की मेहनत और बेहतर प्रशासनिक व्यवस्था के बल पर राष्ट्रीय स्तर पर स्वच्छ शहरों में अपनी मजबूत पहचान बनाई थी। यहां की चौड़ी सड़कें, व्यवस्थित सेक्टर, नियमित सफाई और बेहतर नागरिक सुविधाएं इसकी विशेषता रही हैं।
उन्होंने चिंता जताई कि यदि मौजूदा व्यवस्था लंबे समय तक जारी रही तो शहर की यही पहचान प्रभावित हो सकती है। उन्होंने कहा कि किसी भी आधुनिक शहर की पहचान केवल ऊंची इमारतों और चौड़ी सड़कों से नहीं होती बल्कि उसकी स्वच्छता और सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था से भी होती है।
फोनरवा और विभिन्न आरडब्ल्यूए भी जता चुके हैं चिंता
प्रेस विज्ञप्ति में बताया गया कि यह मांग केवल सेक्टर-105 तक सीमित नहीं है। फोनरवा (Federation of Noida Residents Welfare Associations) सहित विभिन्न सेक्टरों के आरडब्ल्यूए प्रतिनिधि भी समय-समय पर पत्र लिखकर तथा अधिकारियों से मुलाकात कर जन स्वास्थ्य विभाग की बहाली की मांग उठा चुके हैं।
आरडब्ल्यूए प्रतिनिधियों का कहना है कि नागरिक लगातार सफाई व्यवस्था को लेकर अपनी शिकायतें दर्ज करा रहे हैं। ऐसे में स्थायी समाधान तभी संभव है जब स्वच्छता के लिए अलग और समर्पित विभाग दोबारा कार्यरत किया जाए।
जनप्रतिनिधियों और प्राधिकरण से त्वरित निर्णय की मांग
दिव्य कृष्णात्रेय ने सांसद, विधायक और नोएडा प्राधिकरण के वरिष्ठ अधिकारियों से अपील करते हुए कहा कि वे इस विषय को केवल प्रशासनिक फाइल तक सीमित न रखें, बल्कि इसे जनहित और सार्वजनिक स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से देखें।
उन्होंने कहा कि यदि जन स्वास्थ्य विभाग शीघ्र बहाल किया जाता है तो न केवल सफाई व्यवस्था में सुधार होगा बल्कि नागरिकों का प्रशासन पर विश्वास भी मजबूत होगा। साथ ही शहर की स्वच्छता रैंकिंग और प्रतिष्ठा को भी नई मजबूती मिलेगी।
‘जनभागीदारी और प्रशासन दोनों की है समान जिम्मेदारी’
आरडब्ल्यूए अध्यक्ष ने कहा कि स्वच्छ शहर बनाने की जिम्मेदारी केवल प्रशासन की नहीं बल्कि प्रत्येक नागरिक की भी है। लोगों को भी घरों और सार्वजनिक स्थानों पर सफाई बनाए रखने, कूड़ा निर्धारित स्थान पर डालने और स्वच्छता नियमों का पालन करने की आदत विकसित करनी चाहिए।
हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि नागरिकों की भागीदारी तभी प्रभावी हो सकती है जब प्रशासनिक ढांचा मजबूत हो और सफाई व्यवस्था की नियमित निगरानी के लिए समर्पित विभाग कार्यरत हो।
नोएडा को फिर दिलानी होगी पुरानी पहचान
दिव्य कृष्णात्रेय ने विश्वास जताया कि शासन और प्रशासन जनता की इस न्यायोचित मांग पर सकारात्मक निर्णय लेगा। उन्होंने कहा कि यदि जन स्वास्थ्य विभाग को पुनः स्थापित किया जाता है तो शहर की सफाई व्यवस्था में तेजी से सुधार होगा और नोएडा एक बार फिर देश के सबसे स्वच्छ एवं सुव्यवस्थित शहरों की सूची में अग्रणी स्थान हासिल कर सकेगा।
उन्होंने कहा कि यह केवल एक विभाग की बहाली नहीं होगी, बल्कि नोएडा के भविष्य, नागरिकों के स्वास्थ्य और शहर की प्रतिष्ठा को सुरक्षित रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।
मुख्य बिंदु
- जन स्वास्थ्य विभाग की तत्काल बहाली की मांग।
- आरडब्ल्यूए सेक्टर-105 के अध्यक्ष दिव्य कृष्णात्रेय ने जारी की प्रेस विज्ञप्ति।
- विभाग खत्म होने से सफाई व्यवस्था प्रभावित होने का दावा।
- कार्य-सर्किलों पर बढ़े अतिरिक्त बोझ को बताया मुख्य कारण।
- फोनरवा सहित कई आरडब्ल्यूए पहले भी उठा चुके हैं यह मांग।
- जनप्रतिनिधियों और नोएडा प्राधिकरण से शीघ्र निर्णय लेने की अपील।














