दिल्ली की सड़कों पर अब ट्रैफिक नियम तोड़ना केवल जुर्माना भरने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि लापरवाही करने वालों को लाइसेंस निलंबन, वाहन संबंधी सेवाओं पर रोक और जरूरत पड़ने पर वाहन जब्ती जैसी कड़ी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है। राजधानी में सड़क सुरक्षा और अनुशासन को मजबूत करने के लिए मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने ट्रैफिक चालानों के निपटारे की नई, सख्त और समयबद्ध डिजिटल व्यवस्था लागू करने की घोषणा की है। इस नई प्रणाली के तहत अब हर चालान का तय समय में भुगतान या ऑनलाइन आपत्ति दर्ज करना अनिवार्य होगा।
सरकार के मुताबिक, केंद्र द्वारा संशोधित केंद्रीय मोटर वाहन नियम, 1989 के प्रावधानों को दिल्ली में लागू किया जाएगा, जिससे ट्रैफिक चालान की पूरी प्रक्रिया कागजी औपचारिकताओं से निकलकर डिजिटल निगरानी, ऑनलाइन रिकॉर्ड और स्वचालित नोटिस प्रणाली से जुड़ जाएगी। इसका सीधा मतलब है कि अब ट्रैफिक नियमों की अनदेखी करने वालों के लिए चालान से बच निकलना लगभग असंभव होगा। कैमरों, डिजिटल सर्विलांस और ई-निगरानी के जरिए होने वाले उल्लंघन स्वतः रिकॉर्ड होंगे और संबंधित वाहन मालिक के नाम चालान जारी किया जाएगा। )
नई व्यवस्था के तहत पुलिस या अधिकृत अधिकारी कागजी अथवा इलेक्ट्रॉनिक चालान जारी कर सकेंगे। यदि विभाग के पास वाहन मालिक का मोबाइल नंबर दर्ज है तो ई-चालान तीन दिनों के भीतर भेज दिया जाएगा, जबकि भौतिक नोटिस पंद्रह दिनों के अंदर पहुंचाया जाएगा। सरकार ने साफ कहा है कि सभी वाहन मालिक अपने ड्राइविंग लाइसेंस और आरसी में मोबाइल नंबर व पता तुरंत अपडेट करा लें, क्योंकि भविष्य में “नोटिस नहीं मिला” जैसा बहाना स्वीकार नहीं किया जाएगा।
सबसे अहम बदलाव चालान के निपटारे की समयसीमा को लेकर किया गया है। अब किसी भी चालान के जारी होने के बाद संबंधित व्यक्ति के पास कुल 45 दिन होंगे—या तो वह जुर्माना भर दे या ऑनलाइन पोर्टल पर दस्तावेजी साक्ष्य के साथ अपनी आपत्ति दर्ज करे। यदि इस अवधि में कोई प्रतिक्रिया नहीं दी गई तो चालान स्वतः स्वीकार माना जाएगा और अगले 30 दिनों के भीतर भुगतान करना अनिवार्य होगा। यदि दर्ज की गई आपत्ति अधिकारी खारिज कर देता है, तब भी व्यक्ति के पास दो ही विकल्प होंगे—30 दिन के भीतर पूरा भुगतान करे या चालान राशि का 50 प्रतिशत जमा कर अदालत का दरवाजा खटखटाए। यानी अब सीधे कोर्ट जाकर चालान रुकवाने की पुरानी राह बंद कर दी गई है।
दिल्ली सरकार ने बार-बार नियम तोड़ने वालों के लिए और भी कड़ा प्रावधान रखा है। यदि कोई चालक एक वर्ष में पांच या उससे अधिक बार ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करता है, तो उसे “गंभीर उल्लंघनकर्ता” की श्रेणी में रखा जाएगा। ऐसे मामलों में ड्राइविंग लाइसेंस निलंबित किया जा सकता है या उसे अयोग्य घोषित किया जा सकता है। सरकार का मानना है कि बार-बार नियम तोड़ने वाले ही सड़क हादसों और सार्वजनिक असुरक्षा की बड़ी वजह बनते हैं, इसलिए उन पर सिर्फ जुर्माना नहीं बल्कि ड्राइविंग अधिकारों पर भी प्रहार जरूरी है।
समयसीमा के भीतर भुगतान न करने वालों की मुश्किलें यहीं खत्म नहीं होंगी। निर्धारित अवधि बीतने के बाद प्रतिदिन इलेक्ट्रॉनिक नोटिस भेजे जाएंगे। इसके बावजूद भुगतान लंबित रहने पर संबंधित व्यक्ति के नाम से जुड़े सभी वाहन संबंधी काम रोक दिए जाएंगे—जैसे रोड टैक्स भुगतान, लाइसेंस नवीनीकरण, वाहन पंजीकरण, एनओसी, ट्रांसफर या अन्य ट्रांजैक्शन। पोर्टल पर वाहन को “Not To Be Transacted” के रूप में चिह्नित कर दिया जाएगा। जरूरत पड़ने पर अदालत के आदेश के तहत पुलिस वाहन जब्त भी कर सकती है। यानी अब एक लंबित चालान आपकी पूरी वाहन व्यवस्था ठप कर सकता है।
दिल्ली में पहले भी ई-चालान को लेकर लोगों की शिकायतें, देरी, फर्जी संदेश और कोर्ट प्रक्रिया की जटिलताएं सामने आती रही हैं। सोशल मीडिया और ऑनलाइन मंचों पर कई वाहन मालिकों ने गलत चालान, फर्जी एसएमएस और लंबे समय तक लंबित निस्तारण को लेकर चिंता जताई थी। ऐसे में सरकार का दावा है कि यह नई डिजिटल व्यवस्था जवाबदेही तय करेगी, हर आदेश ऑनलाइन अपलोड होगा और नागरिकों को अपनी स्थिति रियल टाइम में दिखाई देगी। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि इस सख्ती के साथ पोर्टल की तकनीकी क्षमता और शिकायत निवारण की निष्पक्षता भी उतनी ही जरूरी होगी।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने दिल्लीवासियों से अपील की है कि ट्रैफिक नियमों को केवल कानूनी मजबूरी नहीं बल्कि नागरिक जिम्मेदारी के रूप में लें। सरकार का दावा है कि इस नई डिजिटल, पारदर्शी और जवाबदेह व्यवस्था से सड़क दुर्घटनाओं में कमी आएगी, ट्रैफिक अनुशासन मजबूत होगा और राजधानी में कानून पालन की संस्कृति विकसित होगी। साफ है—अब दिल्ली में चालान सिर्फ कागज का पर्चा नहीं, बल्कि वाहन मालिक की पूरी ड्राइविंग विश्वसनीयता का डिजिटल रिकॉर्ड होगा।














