“संसद मार्ग थाने में राहुल गांधी, प्रियंका गांधी समेत कांग्रेस नेताओं का धरना | पीड़ित लोचब की शिकायत पर अज्ञात के खिलाफ मुकदमा | BNS की धारा 118 और 125 के तहत कार्रवाई”
नई दिल्ली। पेलेट गन से घायल होने के मामले में कांग्रेस सांसद और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी की मांग के बाद दिल्ली पुलिस ने आखिरकार FIR दर्ज कर ली। NEET पेपर लीक और कथित परीक्षा गड़बड़ी के खिलाफ 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन के दौरान घायल हुए लोचब की शिकायत पर यह मुकदमा दर्ज किया गया है। FIR घटना के करीब 31 दिन बाद दर्ज हुई। इसके साथ ही संसद मार्ग थाने में करीब सात घंटे से चल रहा राहुल गांधी का धरना समाप्त हो गया।
राहुल गांधी पीड़ित लोचब और उसके परिवार के साथ पुलिस थाने पहुंचे थे। उनके साथ कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा, जयराम रमेश समेत पार्टी के कई वरिष्ठ नेता भी मौजूद थे। कांग्रेस नेताओं ने पुलिस से लगातार मांग की कि पेलेट लगने की घटना की FIR दर्ज कर निष्पक्ष जांच की जाए और जांच अधिकारी का नाम भी बताया जाए।
सात घंटे के धरने के बाद पुलिस ने दर्ज की FIR
राहुल गांधी ने पुलिस पर FIR दर्ज करने में देरी करने का आरोप लगाते हुए कहा था कि जब तक शिकायत पर मुकदमा दर्ज नहीं होगा, वह थाने से नहीं हटेंगे। उन्होंने यहां तक कहा था कि जरूरत पड़ी तो वह 30 दिन या छह महीने तक भी पुलिस स्टेशन के बाहर धरने पर बैठ सकते हैं।
कांग्रेस नेताओं का आरोप था कि पीड़ित की शिकायत पहले ही पुलिस के पास पहुंच चुकी थी, लेकिन इसके बावजूद FIR दर्ज नहीं की गई। गुरुवार को राहुल गांधी खुद लोचब के साथ पुलिस स्टेशन पहुंचे और धरने पर बैठ गए। कई घंटे तक चली बातचीत और विरोध के बाद दिल्ली पुलिस ने आखिरकार FIR दर्ज कर ली।
FIR दर्ज होने के बाद राहुल गांधी ने अपना धरना खत्म किया। पुलिस की कार्रवाई को कांग्रेस ने पीड़ित को न्याय दिलाने की दिशा में पहला कदम बताया है।
BNS की धारा 118 और 125 के तहत मामला
दिल्ली पुलिस ने मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 118 और 125 के तहत FIR दर्ज की है। धारा 118 खतरनाक हथियार या साधनों का इस्तेमाल करते हुए जानबूझकर चोट पहुंचाने अथवा गंभीर चोट पहुंचाने से संबंधित अपराधों को कवर करती है। वहीं धारा 125 ऐसे कृत्य से संबंधित है, जिसमें किसी व्यक्ति की जान या निजी सुरक्षा को खतरा पैदा होता है।
FIR अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ दर्ज की गई है। अब पुलिस जांच के दौरान यह पता लगाने की कोशिश करेगी कि लोचब को पेलेट किस हथियार से लगी, उस समय मौके पर कौन-कौन से पुलिसकर्मी मौजूद थे और घटना के लिए जिम्मेदार व्यक्ति कौन था।
आंख और पेट में लगी थीं पेलेट, AIIMS में हुई सर्जरी
कांग्रेस के अनुसार, 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन के दौरान लोचब की आंख और पेट में पेलेट लगी थीं। चोट गंभीर होने के बाद उसे AIIMS ट्रॉमा सेंटर ले जाया गया, जहां उसकी सर्जरी की गई।
राहुल गांधी ने लोचब के मेडिकल रिकॉर्ड का हवाला देते हुए दिल्ली पुलिस के उस दावे पर सवाल उठाया कि प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने पेलेट गन का इस्तेमाल नहीं किया था। राहुल गांधी का कहना था कि अगर पुलिस ने पेलेट गन का इस्तेमाल नहीं किया, तो फिर पीड़ित के शरीर में पेलेट कैसे पहुंचीं।
उन्होंने दावा किया कि मेडिकल रिपोर्ट में लोचब की आंख में तीन पेलेट मिलने की बात दर्ज है। राहुल गांधी ने कहा कि उनका सवाल किसी व्यक्ति विशेष को दोषी ठहराना नहीं, बल्कि घटना की निष्पक्ष जांच कराना और पीड़ित परिवार को न्याय दिलाना है।
पहले भी पुलिस के पास पहुंची थी शिकायत
मामले में पुलिस की कार्रवाई को लेकर कांग्रेस ने सवाल उठाए हैं। पार्टी के अनुसार, लोचब 14 अगस्त को अपने वकीलों के साथ पुलिस के पास पहुंचा था और उसने लिखित शिकायत दी थी। आरोप है कि उस समय शिकायत लेने के बावजूद FIR दर्ज नहीं की गई।
इसके बाद 17 अगस्त को ईमेल और फोन के जरिए भी मामले को आगे बढ़ाने का प्रयास किया गया, लेकिन कांग्रेस के मुताबिक पुलिस की ओर से कोई संतोषजनक कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद राहुल गांधी स्वयं पीड़ित को लेकर थाने पहुंचे।
कांग्रेस का आरोप है कि यदि शिकायत पहले ही दर्ज कर ली जाती तो राहुल गांधी को थाने में धरने पर बैठने की जरूरत नहीं पड़ती। पार्टी ने इसे पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल बताया है।
राहुल का आरोप—‘ऊपर से ऑर्डर’ की बात कही गई
धरने के दौरान राहुल गांधी ने पुलिस अधिकारियों से बातचीत का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि उन्हें बताया गया कि FIR दर्ज नहीं की जा सकती क्योंकि “ऊपर से ऑर्डर” हैं।
राहुल गांधी ने कहा कि कांग्रेस की मांग बेहद स्पष्ट है—पीड़ित की शिकायत पर FIR दर्ज हो और मामले की जांच करने वाले अधिकारी का नाम बताया जाए। उन्होंने कहा कि वह केवल लोचब और उसके परिवार के लिए न्याय की मांग कर रहे हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि अगर किसी व्यक्ति को पुलिस कार्रवाई के दौरान पेलेट लगी है तो इसकी जांच होनी चाहिए। उनके मुताबिक, मेडिकल रिकॉर्ड में मौजूद तथ्यों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
थाने में राहुल के साथ जुटे कांग्रेस के कई बड़े नेता
राहुल गांधी के धरने में प्रियंका गांधी वाड्रा, कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश और पार्टी के कई वरिष्ठ नेता शामिल हुए। लोचब और उसकी मां भी राहुल गांधी के साथ मौजूद रहे।
कांग्रेस नेताओं ने पुलिस अधिकारियों से कई बार बातचीत की और FIR दर्ज करने की मांग दोहराई। मामले को लेकर थाने के बाहर और परिसर में काफी राजनीतिक हलचल रही। राहुल गांधी के काफिले में शामिल वाहनों को भी बाद में थाना परिसर से बाहर निकाला गया।
करीब सात घंटे तक चले इस घटनाक्रम के बाद जब पुलिस ने FIR दर्ज कर ली, तब राहुल गांधी ने धरना समाप्त किया।
अब जांच में सामने आएगा पेलेट किसने चलाई
FIR दर्ज होने के बाद मामले की दिशा अब पुलिस जांच पर निर्भर करेगी। सबसे बड़ा सवाल यही है कि प्रदर्शन के दौरान लोचब को लगी पेलेट का स्रोत क्या था और इसके लिए कौन जिम्मेदार है।
पुलिस को घटना से जुड़े वीडियो, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान, मेडिकल रिपोर्ट और मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों की जानकारी की जांच करनी होगी। इसके अलावा यह भी महत्वपूर्ण होगा कि जिस समय प्रदर्शन हुआ, उस दौरान सुरक्षा बलों की तैनाती और उनके पास उपलब्ध उपकरणों का इस्तेमाल किस तरह हुआ था।
कांग्रेस पहले से ही इस मामले में पुलिस की भूमिका पर सवाल उठा रही है, जबकि पुलिस का रुख रहा है कि उसके कर्मियों ने पेलेट गन का इस्तेमाल नहीं किया। ऐसे में FIR के बाद होने वाली जांच दोनों पक्षों के दावों की वास्तविकता सामने लाने में महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।
31 दिन बाद FIR ने बढ़ाया सियासी तापमान
घटना और FIR के बीच करीब 31 दिनों का अंतर अब राजनीतिक बहस का बड़ा मुद्दा बन गया है। कांग्रेस इसे पीड़ित के साथ अन्याय और पुलिस की कथित निष्क्रियता से जोड़ रही है। वहीं अब FIR दर्ज होने के बाद जांच एजेंसियों के सामने घटना की पूरी सच्चाई सामने लाने की जिम्मेदारी है।
राहुल गांधी के थाने में धरने और उसके बाद FIR दर्ज होने से यह मामला एक बार फिर राजनीतिक सुर्खियों में आ गया है। कांग्रेस ने साफ संकेत दिया है कि वह इस मामले को आगे भी उठाएगी और जांच में पारदर्शिता की मांग करती रहेगी।
फिलहाल FIR दर्ज हो चुकी है। अब निगाह इस बात पर है कि पुलिस जांच किस दिशा में आगे बढ़ती है, लोचब को लगी पेलेट का स्रोत क्या निकलता है और आखिर इस घटना के लिए जिम्मेदार व्यक्ति तक पुलिस कब पहुंचती है।














