“2018 के चर्चित न्यू ईयर सेलिब्रेशन फायरिंग केस में हाईकोर्ट ने कहा—निकट भविष्य में अपील पर अंतिम सुनवाई की संभावना नहीं; अगली सुनवाई 11 अगस्त को होगी”
नई दिल्ली/साहेबगंज:साल 2018 के चर्चित हर्ष फायरिंग मामले में बिहार के साहेबगंज से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के विधायक और पूर्व पर्यटन मंत्री राजू कुमार सिंह को दिल्ली हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। दिल्ली हाईकोर्ट ने राउज एवेन्यू स्थित एमपी-एमएलए कोर्ट द्वारा सुनाई गई चार वर्ष की सजा पर फिलहाल रोक (Stay) लगा दी है। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि निकट भविष्य में इस मामले की अपील पर अंतिम सुनवाई होने की संभावना नहीं है, इसलिए अपील लंबित रहने तक सजा पर रोक लगाना उचित होगा।
हाईकोर्ट के इस आदेश के बाद जहां राजू कुमार सिंह के समर्थकों में खुशी की लहर दौड़ गई, वहीं यह मामला एक बार फिर राजनीतिक और कानूनी गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 11 अगस्त तय की है।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला 31 दिसंबर 2018 की रात का है, जब दिल्ली के फतेहपुर बेरी स्थित एक फार्महाउस में नए साल के स्वागत के लिए भव्य समारोह आयोजित किया गया था। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में मेहमान मौजूद थे। जश्न के दौरान कथित रूप से विधायक राजू कुमार सिंह द्वारा लाइसेंसी हथियार से हर्ष फायरिंग की गई।
इसी दौरान चली एक गोली समारोह में मौजूद अर्चना गुप्ता नामक महिला को लग गई। गंभीर रूप से घायल महिला को तत्काल अस्पताल ले जाया गया, लेकिन इलाज के दौरान उनकी मृत्यु हो गई। घटना के बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की और लंबे समय तक चली सुनवाई के बाद मामला राउज एवेन्यू स्थित विशेष एमपी-एमएलए कोर्ट तक पहुंचा।
यह घटना उस समय भी राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियों में रही थी क्योंकि इसमें एक जनप्रतिनिधि का नाम सामने आया था और हर्ष फायरिंग जैसी खतरनाक प्रवृत्ति पर गंभीर सवाल उठे थे।
राउज एवेन्यू कोर्ट ने सुनाई थी चार साल की सजा
लंबी सुनवाई और साक्ष्यों के परीक्षण के बाद विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने ने राजू कुमार सिंह को दोषी ठहराते हुए भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 304 भाग-II के तहत चार वर्ष की साधारण कैद तथा आर्म्स एक्ट के उल्लंघन के लिए दो महीने की अतिरिक्त सजा सुनाई थी।
इसके साथ ही अदालत ने 25 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया था। न्यायालय ने स्पष्ट निर्देश दिया था कि यह राशि मृतक अर्चना गुप्ता के परिवार को मुआवजे के रूप में दी जाए, ताकि पीड़ित परिवार को कुछ आर्थिक सहायता मिल सके।
अदालत ने अपने फैसले में कहा था कि हथियार का प्रयोग अत्यंत जिम्मेदारी का विषय है और सार्वजनिक समारोह में इस प्रकार की लापरवाही गंभीर परिणाम उत्पन्न कर सकती है।
हाईकोर्ट ने क्यों दी राहत?
राजू कुमार सिंह ने निचली अदालत के फैसले को दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। उनकी ओर से दायर अपील में कहा गया कि मामले की अंतिम सुनवाई जल्द होने की संभावना नहीं है और अपील लंबित रहने तक सजा पर रोक लगाई जानी चाहिए।
दिल्ली हाईकोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कहा कि अपील के शीघ्र निस्तारण की संभावना फिलहाल नहीं दिख रही है। ऐसे में न्यायहित को ध्यान में रखते हुए फिलहाल सजा पर रोक लगाई जाती है।
हालांकि अदालत ने दोषसिद्धि को अंतिम रूप से समाप्त नहीं किया है। यह केवल अंतरिम राहत है और अंतिम फैसला अपील की सुनवाई पूरी होने के बाद ही आएगा।
बचाव पक्ष ने क्या रखा तर्क?
सजा सुनाए जाने से पहले बचाव पक्ष ने अदालत में कहा था कि यह घटना किसी पूर्व नियोजित हत्या का मामला नहीं थी। उनका कहना था कि राजू कुमार सिंह का किसी की जान लेने का इरादा नहीं था और घटना दुर्भाग्यपूर्ण परिस्थितियों में हुई।
बचाव पक्ष ने यह भी दलील दी थी कि राजू कुमार सिंह एक निर्वाचित जनप्रतिनिधि हैं, उनका सार्वजनिक जीवन लंबा रहा है और उनका पूर्व रिकॉर्ड बेदाग रहा है। इसी आधार पर प्रोबेशन अथवा राहत की मांग भी की गई थी।
हालांकि ट्रायल कोर्ट ने इन दलीलों को स्वीकार नहीं किया और दोषसिद्धि बरकरार रखते हुए सजा सुनाई थी।
अभियोजन पक्ष का रुख
अभियोजन पक्ष का कहना रहा कि सार्वजनिक समारोह में हथियार का इस्तेमाल अत्यंत गैर-जिम्मेदाराना था। हर्ष फायरिंग जैसी घटनाएं अक्सर निर्दोष लोगों की जान ले लेती हैं और समाज में गलत संदेश देती हैं।
सरकारी पक्ष ने अदालत से कहा था कि लाइसेंसी हथियार रखने वाले व्यक्ति पर सामान्य नागरिक से अधिक जिम्मेदारी होती है। यदि हथियार का प्रयोग लापरवाही से किया जाए और उसके कारण किसी की मृत्यु हो जाए तो उसे हल्के में नहीं लिया जा सकता।
साहेबगंज में समर्थकों ने मनाया जश्न
दिल्ली हाईकोर्ट से राहत मिलने की खबर जैसे ही बिहार के साहेबगंज पहुंची, भाजपा कार्यकर्ताओं और राजू कुमार सिंह के समर्थकों में उत्साह का माहौल बन गया। कई स्थानों पर कार्यकर्ताओं ने एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर खुशी जाहिर की।
समर्थकों का कहना है कि उन्हें न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है और अंतिम सुनवाई में भी विधायक को राहत मिलने की उम्मीद है। वहीं विपक्षी दल इस मामले पर संयमित प्रतिक्रिया देते हुए अंतिम न्यायिक निर्णय का इंतजार करने की बात कह रहे हैं।
हर्ष फायरिंग पर फिर उठे सवाल
इस मामले ने एक बार फिर देशभर में हर्ष फायरिंग की घटनाओं पर बहस छेड़ दी है। विवाह समारोहों, राजनीतिक आयोजनों और निजी पार्टियों में हथियारों का प्रदर्शन तथा हवा में गोलियां चलाने की घटनाएं समय-समय पर सामने आती रही हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में कठोर कार्रवाई और जनजागरूकता दोनों आवश्यक हैं, क्योंकि हवा में चलाई गई गोली भी किसी निर्दोष व्यक्ति की जान ले सकती है। कई राज्यों की पुलिस लगातार इस तरह की घटनाओं के खिलाफ अभियान चलाती रही है, फिर भी ऐसे मामले पूरी तरह रुक नहीं पाए हैं।
11 अगस्त की सुनवाई पर टिकी निगाहें
अब पूरे मामले की निगाहें 11 अगस्त को होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हैं। उस दिन दिल्ली हाईकोर्ट में अपील पर आगे की कार्यवाही होगी और अदालत आगे की कानूनी प्रक्रिया तय करेगी।
कानूनी जानकारों का कहना है कि सजा पर रोक का अर्थ दोषमुक्ति नहीं होता। यह केवल अंतरिम राहत है, जबकि अंतिम निर्णय अपील की विस्तृत सुनवाई और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही दिया जाएगा।
फिलहाल राहत, अंतिम फैसला अभी बाकी
दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश ने राजू कुमार सिंह को तत्काल बड़ी कानूनी राहत अवश्य प्रदान की है, लेकिन मामले का अंतिम अध्याय अभी लिखा जाना बाकी है। एक ओर पीड़ित परिवार न्याय की उम्मीद लगाए हुए है, तो दूसरी ओर विधायक के समर्थक अंतिम फैसले का इंतजार कर रहे हैं। आगामी सुनवाई इस बहुचर्चित मामले की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। न्यायपालिका का अंतिम निर्णय न केवल इस मामले के पक्षकारों के लिए, बल्कि सार्वजनिक आयोजनों में हथियारों के उपयोग से जुड़े भविष्य के मामलों के लिए भी महत्वपूर्ण मिसाल बन सकता है।














