“देवेश कुमार बने राज्य योजना परिषद के उपाध्यक्ष, मिला कैबिनेट मंत्री स्तर का दर्जा; सीवान के डॉ. अजय कुमार सिंह को राज्य नागरिक परिषद में महत्वपूर्ण पद”
पटना। बिहार सरकार ने सोमवार को कई अहम नियुक्तियों का ऐलान कर राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में नई चर्चा को जन्म दे दिया। सरकार की ओर से जारी अधिसूचनाओं के मुताबिक, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के करीबी माने जाने वाले हरेंद्र बहादुर सिंह को राज्य नागरिक परिषद का महासचिव नियुक्त किया गया है। वहीं, बीजेपी के वरिष्ठ नेता देवेश कुमार को राज्य योजना परिषद का उपाध्यक्ष बनाया गया है। देवेश कुमार वही नेता हैं, जिन्होंने जुलाई 2026 में उपेंद्र कुशवाहा के बेटे दीपक प्रकाश के लिए अपनी विधान परिषद सदस्यता से इस्तीफा दिया था।
देवेश कुमार की नियुक्ति को खास महत्व इसलिए दिया जा रहा है क्योंकि राज्य योजना परिषद के उपाध्यक्ष का पद कैबिनेट मंत्री स्तर का है। सरकार के आदेश के अनुसार, इस पद पर नियुक्त व्यक्ति का कार्यकाल नियुक्ति की तारीख से तीन वर्ष या अगले आदेश तक, जो भी पहले हो, रहेगा।
इन नियुक्तियों के साथ बिहार की सत्ता के भीतर राजनीतिक प्रतिनिधित्व और पुराने संबंधों का संतुलन भी नजर आ रहा है। एक तरफ बीजेपी के संगठन में लंबे समय तक सक्रिय रहे देवेश कुमार को महत्वपूर्ण संवैधानिक-सदृश जिम्मेदारी मिली है, तो दूसरी ओर नीतीश कुमार के करीबी माने जाने वाले हरेंद्र बहादुर सिंह को राज्य नागरिक परिषद में अहम भूमिका दी गई है।
देवेश कुमार को कैबिनेट मंत्री स्तर का पद, राजनीतिक सफर फिर चर्चा में
राज्य योजना परिषद के उपाध्यक्ष बनाए गए देवेश कुमार का राजनीतिक सफर छात्र राजनीति से शुरू हुआ। वे छात्र जीवन से ही अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) से जुड़े रहे। बाद में बीजेपी संगठन में उन्होंने कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालीं।
देवेश कुमार बीजेपी में प्रदेश प्रवक्ता, प्रदेश उपाध्यक्ष, मुख्यालय प्रभारी और महासचिव जैसे पदों पर काम कर चुके हैं। संगठन के भीतर लंबे समय तक सक्रिय रहने के कारण उन्हें पार्टी के जमीनी और सांगठनिक कामकाज की अच्छी समझ रखने वाले नेताओं में गिना जाता है।
वे वर्ष 2021 में बिहार विधान परिषद के सदस्य बने थे। हालांकि जुलाई 2026 में उन्होंने अपनी MLC सीट से इस्तीफा देकर राजनीतिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी थी। उनकी सीट छोड़ने के फैसले को उपेंद्र कुशवाहा के बेटे दीपक प्रकाश के विधान परिषद पहुंचने से जोड़कर देखा गया था।
अब राज्य योजना परिषद के उपाध्यक्ष के रूप में उनकी नियुक्ति ने उनके राजनीतिक सफर को एक बार फिर नई दिशा दी है।
पीएम मोदी और अमित शाह का जताया आभार
नई जिम्मेदारी मिलने के बाद देवेश कुमार ने सोशल मीडिया के जरिए आभार जताया। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, बीजेपी नेता नितिन नवीन और राज्य योजना परिषद के प्रमुख एवं उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के प्रति धन्यवाद व्यक्त किया।
देवेश कुमार की नियुक्ति को बीजेपी संगठन में उनकी लंबी सक्रियता और पार्टी के प्रति उनके योगदान के संदर्भ में भी देखा जा रहा है। कैबिनेट मंत्री स्तर का दर्जा मिलने से यह नियुक्ति राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण हो गई है।
पंडित यमुना कारजी की विरासत से जुड़ा राजनीतिक परिवार
देवेश कुमार का संबंध स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े परिवार से है। वे स्वतंत्रता सेनानी पंडित यमुना कारजी के पोते हैं। यमुना कारजी ने आजादी की लड़ाई में सक्रिय भूमिका निभाई थी।
इसी राजनीतिक और सामाजिक पृष्ठभूमि के साथ देवेश कुमार ने छात्र जीवन में संगठनात्मक राजनीति से अपनी शुरुआत की। ABVP से जुड़ने के बाद उन्होंने बीजेपी में लगातार विभिन्न जिम्मेदारियां निभाईं।
विधान परिषद सदस्य बनने के बाद भी वे पार्टी संगठन में सक्रिय रहे। अब राज्य योजना परिषद में महत्वपूर्ण पद मिलना उनके राजनीतिक कद में एक और महत्वपूर्ण अध्याय के रूप में देखा जा रहा है।
सीवान को भी राज्य स्तर पर प्रतिनिधित्व, डॉ. अजय कुमार सिंह बने उपाध्यक्ष
बिहार सरकार की ओर से जारी दूसरी अधिसूचना में डॉ. अजय कुमार सिंह को राज्य नागरिक परिषद का उपाध्यक्ष नियुक्त किया गया है। डॉ. अजय कुमार सिंह स्वर्गीय बछेश्वर सिंह के पुत्र हैं और सीवान जिले के सिसवान थाना क्षेत्र के अंतर्गत नंदमुरा के निवासी बताए गए हैं।
उनकी नियुक्ति को सीवान के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। राज्य स्तरीय निकाय में जिले को प्रतिनिधित्व मिलने के बाद स्थानीय राजनीतिक और सामाजिक हलकों में इस फैसले को लेकर चर्चा शुरू हो गई है।
डॉ. अजय कुमार सिंह की नियुक्ति सिर्फ एक प्रशासनिक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व के लिहाज से भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। सीवान जैसे राजनीतिक रूप से संवेदनशील जिले से आने वाले व्यक्ति को राज्य नागरिक परिषद में जिम्मेदारी मिलने से स्थानीय स्तर पर भी इसका असर दिखाई देने की संभावना है।
हरेंद्र बहादुर सिंह की नियुक्ति से नीतीश कुमार का प्रभाव फिर चर्चा में
इन नियुक्तियों में सबसे अधिक राजनीतिक चर्चा हरेंद्र बहादुर सिंह को लेकर हो रही है। उन्हें राज्य नागरिक परिषद का महासचिव बनाया गया है। हरेंद्र बहादुर सिंह को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का करीबी माना जाता है।
सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली सरकार में यह नियुक्ति इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि इससे सरकार के भीतर नीतीश कुमार के राजनीतिक प्रभाव की चर्चा फिर तेज हो गई है।
बिहार की राजनीति में नीतीश कुमार लंबे समय से सत्ता और संगठन के बीच संतुलन बनाने की राजनीति के लिए जाने जाते रहे हैं। ऐसे में उनके करीबी माने जाने वाले व्यक्ति को राज्य नागरिक परिषद जैसे महत्वपूर्ण निकाय में महासचिव की जिम्मेदारी मिलना स्वाभाविक रूप से राजनीतिक संकेतों के तौर पर देखा जा रहा है।
राज्य नागरिक परिषद का महासचिव पद परिषद के कामकाज में महत्वपूर्ण भूमिका रखता है। ऐसे में हरेंद्र बहादुर सिंह की नियुक्ति को सरकार के भीतर अनुभव और राजनीतिक भरोसे के संयोजन के रूप में भी देखा जा रहा है।
एक ही फैसले में कई राजनीतिक संदेश
बिहार सरकार की ताजा नियुक्तियों को केवल प्रशासनिक फेरबदल मानना आसान नहीं होगा। इन फैसलों में अलग-अलग राजनीतिक और क्षेत्रीय समीकरणों की झलक भी दिखाई देती है।
एक ओर बीजेपी के संगठन में लंबे समय तक काम कर चुके देवेश कुमार को कैबिनेट मंत्री स्तर का पद दिया गया है। दूसरी ओर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के करीबी हरेंद्र बहादुर सिंह को राज्य नागरिक परिषद का महासचिव बनाया गया है। वहीं सीवान के डॉ. अजय कुमार सिंह को परिषद में उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी देकर क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व को भी जगह दी गई है।
यानी नियुक्तियों की यह तस्वीर संगठन, सत्ता और क्षेत्रीय संतुलन—तीनों के मेल की ओर इशारा करती है।
तीन साल या अगले आदेश तक रहेगा कार्यकाल
सरकारी अधिसूचना के मुताबिक राज्य योजना परिषद के उपाध्यक्ष पद पर देवेश कुमार का कार्यकाल नियुक्ति की तारीख से तीन वर्ष अथवा अगले आदेश तक, जो भी पहले हो, प्रभावी रहेगा।
कैबिनेट मंत्री स्तर का दर्जा मिलने के कारण इस नियुक्ति का प्रशासनिक महत्व भी बढ़ जाता है। वहीं राज्य नागरिक परिषद में हरेंद्र बहादुर सिंह और डॉ. अजय कुमार सिंह की नियुक्तियां परिषद के कामकाज और राजनीतिक प्रतिनिधित्व के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही हैं।
बिहार की सियासत में नई नियुक्तियों से नई चर्चा
बिहार की राजनीति में सत्ता के समीकरण लगातार बदलते रहे हैं और ऐसे में सरकार की महत्वपूर्ण नियुक्तियां हमेशा राजनीतिक संदेश लेकर आती हैं। सोमवार को सामने आई इन नियुक्तियों ने भी इसी वजह से राजनीतिक विश्लेषकों और स्थानीय नेताओं का ध्यान खींचा है।
देवेश कुमार के मामले में बीजेपी संगठन के एक पुराने और सक्रिय चेहरे को महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिली है। हरेंद्र बहादुर सिंह की नियुक्ति नीतीश कुमार से उनके करीबी संबंधों के कारण चर्चा में है, जबकि डॉ. अजय कुमार सिंह की नियुक्ति ने सीवान को राज्य स्तरीय प्रतिनिधित्व दिया है।
इन तीनों नियुक्तियों को साथ रखकर देखें तो सरकार ने संगठन के पुराने चेहरों, राजनीतिक भरोसे और क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व के बीच संतुलन बनाने की कोशिश की है।
आने वाले समय में इन नियुक्तियों का वास्तविक राजनीतिक और प्रशासनिक प्रभाव कितना दिखाई देता है, यह देखने वाली बात होगी। लेकिन फिलहाल इतना तय है कि सोमवार को जारी इन आदेशों ने बिहार की सियासत में नई चर्चा जरूर छेड़ दी है।














