ग्रेटर नोएडा: ग्रेटर नोएडा के ईकोटेक-3 औद्योगिक क्षेत्र में स्थित इलेक्ट्रॉनिक चिप निर्माण करने वाली आईएलजीआईएम (ILGIM) कंपनी में सोमवार और मंगलवार की मध्यरात्रि लगी भीषण आग ने एक दर्दनाक हादसे का रूप ले लिया। आग पर काबू पाने के दौरान कंपनी की साइड की दीवार और लोहे का भारी बीम अचानक भरभराकर गिर पड़ा, जिसकी चपेट में आकर पांच फायरकर्मी मलबे में दब गए। इस हादसे में दो बहादुर फायरकर्मियों ने अपने प्राण न्यौछावर कर दिए, जबकि तीन अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। इस घटना ने पूरे गौतमबुद्ध नगर को झकझोर कर रख दिया है।
आधी रात को मची अफरा-तफरी, कई दमकल गाड़ियां मौके पर पहुंचीं
सोमवार देर रात आईएलजीआईएम कंपनी में अचानक आग लगने की सूचना मिलते ही पुलिस, फायर सर्विस और स्थानीय प्रशासन में हड़कंप मच गया। आग की भयावहता को देखते हुए विभिन्न फायर स्टेशनों से दमकल की कई गाड़ियों को तत्काल मौके पर रवाना किया गया। देखते ही देखते फैक्ट्री परिसर में धुएं का घना गुबार छा गया और आग ने फैक्ट्री के एक बड़े हिस्से को अपनी चपेट में ले लिया।
फायर ब्रिगेड के जवानों ने बिना समय गंवाए मोर्चा संभाला और घंटों की कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाने में सफलता हासिल की। लेकिन इसी दौरान एक ऐसा हादसा हुआ जिसने पूरे राहत अभियान को मातम में बदल दिया।
दीवार और लोहे का बीम गिरते ही मलबे में दब गए फायरकर्मी
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार जब फायरकर्मी फैक्ट्री के अंदर और आसपास आग बुझाने में जुटे हुए थे, तभी कंपनी की साइड की दीवार अचानक भरभराकर गिर गई। इसके साथ ही ऊपर लगा भारी लोहे का बीम भी नीचे आ गिरा। किसी को संभलने का मौका तक नहीं मिला और पांच फायरकर्मी मलबे के नीचे दब गए।
घटना के तुरंत बाद मौके पर मौजूद अन्य दमकल कर्मियों और पुलिस टीम ने राहत एवं बचाव अभियान शुरू किया। भारी मशक्कत के बाद सभी घायलों को मलबे से बाहर निकाला गया और तत्काल एंबुलेंस के माध्यम से अस्पताल पहुंचाया गया।
दो बहादुर फायरकर्मियों ने ड्यूटी निभाते हुए दी शहादत
अस्पताल पहुंचने पर चिकित्सकों ने फायरमैन रोहित यादव और मुख्य आरक्षी चालक तीरथपाल सिंह को मृत घोषित कर दिया। दोनों जवान आग बुझाने के दौरान अपनी ड्यूटी निभाते हुए वीरगति को प्राप्त हुए।
वहीं मुख्य आरक्षी चालक राजपाल सिंह, फायरमैन मनीष कुमार और फायरमैन अमित कुमार घायल हो गए। चिकित्सकों के अनुसार तीनों की हालत फिलहाल खतरे से बाहर है और उनका इलाज जारी है।
औद्योगिक सुरक्षा व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल
इस दर्दनाक हादसे के बाद औद्योगिक इकाइयों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार आग के कारण फैक्ट्री की संरचना कमजोर हो गई थी, जिसके चलते दीवार और भारी लोहे का बीम अचानक गिर गया।
विशेषज्ञों का मानना है कि इलेक्ट्रॉनिक चिप निर्माण जैसी अत्याधुनिक फैक्ट्रियों में अग्नि सुरक्षा के उच्चतम मानकों का पालन किया जाना चाहिए। यदि भवन की संरचनात्मक मजबूती और आपातकालीन सुरक्षा प्रणाली का समय-समय पर परीक्षण किया जाता, तो संभव है कि इतना बड़ा हादसा टल सकता था।
हादसे की जांच शुरू, आग लगने के कारणों का पता लगाया जा रहा
पुलिस और प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कर दी है। फॉरेंसिक विशेषज्ञों और अग्निशमन विभाग की तकनीकी टीम को मौके पर बुलाया गया है, जो यह पता लगाएगी कि आग किस कारण से लगी और राहत कार्य के दौरान भवन का हिस्सा क्यों ढह गया।
अधिकारियों का कहना है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद यदि किसी प्रकार की लापरवाही सामने आती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
फायर सर्विस विभाग में शोक की लहर
दो फायरकर्मियों की शहादत की खबर मिलते ही फायर सर्विस विभाग में शोक की लहर दौड़ गई। साथी कर्मचारियों ने दोनों दिवंगत जवानों को कर्तव्यनिष्ठ, साहसी और समर्पित बताया। अधिकारियों ने कहा कि दोनों ने अपनी जान की परवाह किए बिना दूसरों की सुरक्षा के लिए आखिरी सांस तक संघर्ष किया।
घटना की सूचना मिलते ही वरिष्ठ अधिकारी और प्रशासनिक अधिकारी अस्पताल पहुंचे तथा घायलों का हालचाल जाना। शहीद फायरकर्मियों के परिजनों को हरसंभव सहायता देने का आश्वासन भी दिया गया।
औद्योगिक क्षेत्र में सुरक्षा मानकों की होगी समीक्षा
घटना के बाद प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि ग्रेटर नोएडा के औद्योगिक क्षेत्रों में स्थित फैक्ट्रियों के अग्नि सुरक्षा मानकों और भवनों की संरचनात्मक मजबूती की व्यापक समीक्षा कराई जाएगी। जिन इकाइयों में सुरक्षा मानकों की अनदेखी पाई जाएगी, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
विशेषज्ञों का कहना है कि तेजी से विकसित हो रहे औद्योगिक क्षेत्रों में केवल उत्पादन बढ़ाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि कर्मचारियों और राहत दलों की सुरक्षा सुनिश्चित करना भी उतना ही आवश्यक है।
ड्यूटी निभाते हुए अमर हो गए दो जांबाज
ग्रेटर नोएडा की इस दर्दनाक घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया कि फायरकर्मी हर दिन अपनी जान जोखिम में डालकर लोगों की सुरक्षा करते हैं। जब फैक्ट्री में आग लगी तो इन बहादुर जवानों ने पीछे हटने के बजाय आग की लपटों का सामना किया। लेकिन किसे पता था कि आग से लड़ते-लड़ते अचानक गिरने वाली दीवार और लोहे का बीम उनकी जिंदगी छीन लेगा।
रोहित यादव और तीरथपाल सिंह की शहादत हमेशा याद रखी जाएगी। वहीं घायल तीनों फायरकर्मियों के शीघ्र स्वस्थ होने की पूरे प्रदेश में दुआ की जा रही है। यह हादसा औद्योगिक सुरक्षा और अग्नि सुरक्षा व्यवस्थाओं को लेकर एक गंभीर चेतावनी भी है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए कठोर कदम उठाना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।














