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डीएससी एलिवेटेड रोड के नीचे सड़क निर्माण की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल, शिकायत के बाद नोएडा प्राधिकरण ने कहा—जल्द शुरू होगा बिटुमिन वर्क

“सेक्टर-41 से डीएससी एलिवेटेड रोड के नीचे सड़क निर्माण का मामला; IGRS शिकायत में अधिकारियों की कार्यप्रणाली, निर्माण सामग्री, GSB, मिट्टी-मलबे और सड़क की गुणवत्ता पर उठे सवाल”

नोएडा। पर्दाफाश न्यूज़।
नोएडा की आधारभूत संरचना और सड़कों की गुणवत्ता को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। सेक्टर-41 से डीएससी एलिवेटेड रोड के नीचे स्थित सड़क के निर्माण और उसकी गुणवत्ता को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता प्रशांत त्यागी द्वारा नोएडा प्राधिकरण के तत्कालीन/संबंधित महाप्रबंधक को पत्र भेजकर स्थलीय निरीक्षण, तकनीकी जांच और निर्माण कार्य की गुणवत्ता की तथ्यात्मक रिपोर्ट तैयार कराने की मांग की गई है। वहीं, इसी प्रकरण से संबंधित आईजीआरएस शिकायत संख्या 60000260169595 के जवाब में नोएडा प्राधिकरण के वर्क सर्किल-8 की ओर से 11 अगस्त 2026 को जारी पत्र में बताया गया कि डीएससी मार्ग पर एलिवेटेड रोड के नीचे सीसी रोड का निर्माण कार्य प्रगति पर है और शीघ्र ही बिटुमिन वर्क शुरू कराया जाना प्रस्तावित है।

यह पूरा मामला केवल एक सड़क के निर्माण तक सीमित नहीं दिखाई देता। उपलब्ध दस्तावेजों, शिकायत में उठाए गए सवालों और मौके की तस्वीरों को एक साथ देखने पर सड़क निर्माण की गुणवत्ता, निर्माण सामग्री, मिट्टी-मलबे के निस्तारण, सड़क की सतह तथा आम लोगों की सुरक्षा जैसे कई महत्वपूर्ण प्रश्न सामने आते हैं।

प्रशांत त्यागी ने महाप्रबंधक को लिखा पत्र

उपलब्ध पत्र में प्रशांत त्यागी ने नोएडा प्राधिकरण के महाप्रबंधक ए.के. अरोड़ा को संबोधित करते हुए विषय रखा है—“सेक्टर-41, नोएडा से DSC एलिवेटेड रोड के नीचे स्थित सड़क के निर्माण एवं गुणवत्ता के स्थलीय निरीक्षण के संबंध में।”

पत्र में कहा गया है कि नोएडा सेक्टर-41 से डीएससी एलिवेटेड रोड के नीचे स्थित सड़क के निर्माण एवं उसकी गुणवत्ता को लेकर नोएडा के अनेक निवासियों तथा प्रमुख सामाजिक कार्यकर्ताओं द्वारा शिकायतें और आपत्तियां व्यक्त की गई हैं। सोशल मीडिया पर सार्वजनिक रूप से उपलब्ध कराए गए छायाचित्रों तथा नागरिकों की शिकायतों का हवाला देते हुए सड़क की निर्माण गुणवत्ता को लेकर गंभीर प्रश्न उठाए गए हैं।

पत्र में यह भी कहा गया है कि प्रथमदृष्टया उपलब्ध सामग्री से सड़क की गुणवत्ता तथा निर्माण कार्य में अपनाए जा रहे मानकों के संबंध में स्थिति स्पष्ट किया जाना आवश्यक प्रतीत होता है।

प्रशांत त्यागी ने व्यापक जनहित और सड़क की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए महाप्रबंधक से अपनी अध्यक्षता एवं निगरानी में संबंधित अधिकारियों/तकनीकी विशेषज्ञों के माध्यम से स्थलीय निरीक्षण और गुणवत्ता परीक्षण कराने का अनुरोध किया है।

साथ ही सड़क निर्माण में इस्तेमाल की गई सामग्री, निर्धारित तकनीकी मानकों, निर्माण की गुणवत्ता और वर्तमान स्थिति की जांच कराकर तथ्यात्मक रिपोर्ट तैयार कराने तथा आवश्यकता पड़ने पर संबंधित एजेंसी, ठेकेदार और लापरवाह अधिकारियों/कर्मचारियों की जवाबदेही तय करने की मांग की गई है।

सवाल सिर्फ सड़क का नहीं, जनता के विश्वास का भी

पत्र में एक महत्वपूर्ण बात यह कही गई है कि मामला केवल आम नागरिकों की सुविधा और सुरक्षित आवागमन से जुड़ा हुआ नहीं है, बल्कि नोएडा की आधारभूत संरचना की गुणवत्ता और जनता के विश्वास से भी संबंधित है।

यही वह बिंदु है जिसे गंभीरता से समझने की जरूरत है। करोड़ों रुपये की लागत से तैयार होने वाली सड़क यदि निर्माण के शुरुआती चरण में ही गुणवत्ता संबंधी सवालों के घेरे में आती है, तो केवल सड़क तैयार कर देना पर्याप्त नहीं माना जा सकता। यह देखना जरूरी है कि निर्माण में किस स्तर की सामग्री इस्तेमाल हुई, निर्धारित तकनीकी मानकों का पालन हुआ या नहीं, अलग-अलग परतों का कार्य नियमानुसार हुआ या नहीं और सड़क बनने के बाद उसकी टिकाऊ क्षमता कितनी होगी।

IGRS शिकायत में क्या-क्या सवाल उठाए गए?

इसी प्रकरण में अमित गुप्ता की ओर से दर्ज कराई गई IGRS शिकायत का भी दस्तावेज में उल्लेख है। शिकायत में डीएससी एलिवेटेड रोड के नीचे सड़क निर्माण को लेकर संबंधित अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए गए।

शिकायत में आरोप लगाया गया कि पिछले लगभग तीन महीनों से इस संबंध में महाप्रबंधक और संबंधित वरिष्ठ प्रबंधक स्तर पर शिकायतें, ई-मेल और IGRS के माध्यम से सूचनाएं दी जा रही थीं। शिकायतकर्ता के अनुसार कई बार शिकायतों के जवाब में केवल “Noted” अथवा “Instructed” जैसे जवाब मिलते रहे, जबकि मौके पर अपेक्षित कार्रवाई दिखाई नहीं दी।

शिकायत में सड़क की गुणवत्ता को लेकर भी सवाल उठाया गया। इसमें बताया गया कि एलिवेटेड रोड के नीचे सड़क का काम चल रहा है, लेकिन निर्माण की गुणवत्ता संतोषजनक नहीं होने की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं।

शिकायत में अलग-अलग स्थानों का उल्लेख करते हुए सड़क निर्माण से संबंधित कई बिंदु उठाए गए हैं। इनमें उन स्थानों का भी जिक्र है जहां सड़क निर्माण के लिए पॉइंट चिन्हित किए जाने के बावजूद काम नहीं किए जाने, GSB सामग्री, मिट्टी और मलबे के सड़क पर पड़े रहने तथा निर्माण स्थल को पर्याप्त रूप से व्यवस्थित नहीं किए जाने पर आपत्ति जताई गई।

भंगेल क्षेत्र और अन्य हिस्सों को लेकर भी शिकायत

शिकायत में भंगेल क्षेत्र से जुड़े हिस्से का भी उल्लेख किया गया है। शिकायतकर्ता की ओर से आरोप लगाया गया कि कुछ स्थानों पर सड़क के हिस्सों में काम के दौरान लापरवाही हुई और सड़क पर पत्थर, मिट्टी तथा मलबा पड़ा रहा, जिससे दुर्घटना की आशंका बनी रहती है।

इसके अलावा सेक्टर-66 से सेक्टर-60 तक के मार्ग को लेकर भी शिकायत में सड़क की स्थिति तथा निर्माण/मरम्मत के दौरान मिट्टी, धूल और अन्य सामग्री से संबंधित समस्याओं का उल्लेख किया गया है।

यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि ये बातें शिकायतकर्ता द्वारा लगाए गए आरोप और उपलब्ध दस्तावेजों में दर्ज आपत्तियां हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र तकनीकी जांच के बाद ही यह तय हो सकता है कि निर्माण में वास्तव में निर्धारित मानकों का उल्लंघन हुआ है या नहीं।

11 अगस्त 2026 को प्राधिकरण का जवाब

मामले में नोएडा प्राधिकरण के वर्क सर्किल-8, सेक्टर-39 के वरिष्ठ प्रबंधक कार्यालय से 11 अगस्त 2026 को जारी जवाब महत्वपूर्ण है।

पत्र में IGRS शिकायत संख्या 60000260169595 का संदर्भ देते हुए शिकायत के संबंध में जानकारी दी गई है। प्राधिकरण की ओर से बताया गया कि डीएससी मार्ग पर एलिवेटेड रोड के नीचे सीसी रोड का निर्माण कार्य प्रगति पर है और शीघ्र ही बिटुमिन वर्क का कार्य प्रारंभ कराया जाना प्रस्तावित है।

यानी प्राधिकरण ने शिकायत को पूरी तरह खारिज करने के बजाय यह स्पष्ट किया है कि सड़क निर्माण कार्य चल रहा है और अगले चरण में बिटुमिन कार्य कराया जाना प्रस्तावित है।

यह जवाब अपने आप में एक महत्वपूर्ण दस्तावेज है, क्योंकि अब सवाल यह है कि जब बिटुमिन वर्क शुरू होगा तो उससे पहले सड़क की बेस लेयर, GSB, समतलीकरण, जल निकासी, दबाव/कम्पैक्शन और अन्य तकनीकी मानकों की जांच किस स्तर पर होगी।

NGT के निर्देशों की कसौटी पर भी जरूरी है जांच

सड़क निर्माण का मामला पर्यावरणीय दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। राष्ट्रीय हरित अधिकरण यानी NGT ने NCR में धूल प्रदूषण और सड़क किनारे खुले धूलयुक्त क्षेत्रों को नियंत्रित करने के संबंध में विभिन्न मामलों में सड़क एवं खुले क्षेत्रों को धूल-मुक्त रखने, सड़क किनारों पर हरियाली विकसित करने तथा धूल नियंत्रण उपायों पर जोर दिया है। NGT के रिकॉर्ड में संबंधित मामलों में खुले क्षेत्रों को घास से ढकने, सड़क के किनारे घास/छोटे पौधे लगाने और सड़कों को धूल-मुक्त रखने जैसे निर्देशों का उल्लेख मिलता है।

इसी क्रम में NCR में निर्माण एवं सड़क से जुड़े धूल प्रदूषण पर CAQM की निगरानी भी लगातार बढ़ी है। वर्ष 2026 में CAQM के प्रवर्तन तंत्र ने सड़क धूल नियंत्रण और निर्माण स्थलों से जुड़े उल्लंघनों की जांच को लेकर कार्रवाई की है।

इसलिए डीएससी रोड के नीचे चल रहे कार्य को केवल इंजीनियरिंग प्रोजेक्ट मानकर छोड़ देना पर्याप्त नहीं होगा। निर्माण के दौरान उड़ने वाली धूल, सड़क पर जमा मिट्टी-मलबा, खुले निर्माण क्षेत्र और वाहनों की आवाजाही से पैदा होने वाले जोखिमों को भी गंभीरता से लेना होगा।

25 जून की तस्वीरें भी उठाती हैं कई सवाल

उपलब्ध तस्वीरों पर 25 जून 2026 की तारीख और समय अंकित है। एक तस्वीर में एलिवेटेड रोड के नीचे सड़क के किनारे मिट्टी और निर्माण सामग्री का ढेर दिखाई देता है। दूसरी तस्वीर में दादरी मेन रोड, सेक्टर-101, नोएडा क्षेत्र का उल्लेख दिखाई देता है। तस्वीरों में सड़क की सतह, किनारे की खुदाई, मिट्टी और निर्माण संबंधी गतिविधियां स्पष्ट दिखाई देती हैं।

इन तस्वीरों को अंतिम तकनीकी प्रमाण मानना उचित नहीं होगा, लेकिन ये इतना जरूर बताती हैं कि मौके की वास्तविक स्थिति का तकनीकी निरीक्षण किया जाना चाहिए। खासतौर पर यदि नागरिकों द्वारा पहले से शिकायतें दर्ज कराई गई हैं तो केवल कागजी जवाब के बजाय मौके पर जांच कर वास्तविक स्थिति सार्वजनिक करना ज्यादा भरोसेमंद तरीका होगा।

अब सबसे बड़ा सवाल—गुणवत्ता की जांच कौन करेगा?

प्रशांत त्यागी के पत्र में इसी कारण स्पष्ट रूप से मांग की गई है कि संबंधित तकनीकी विशेषज्ञों के माध्यम से सड़क का स्थलीय निरीक्षण कराया जाए और निर्माण सामग्री तथा तकनीकी मानकों की जांच कराई जाए।

यदि जांच में निर्माण सामग्री निर्धारित मानकों के अनुरूप मिलती है और सड़क की गुणवत्ता संतोषजनक पाई जाती है, तो इससे जनता के सामने स्थिति स्पष्ट होगी। लेकिन यदि कहीं कमी पाई जाती है तो जिम्मेदारी तय करना भी उतना ही जरूरी होगा।

नोएडा में सड़कें केवल यातायात का माध्यम नहीं हैं, बल्कि शहर की आर्थिक और सामाजिक गतिविधियों की आधारभूत संरचना हैं। डीएससी मार्ग पर एलिवेटेड रोड बनने के बाद नीचे की सड़क का सुचारु, सुरक्षित और टिकाऊ होना और भी महत्वपूर्ण है। इस मार्ग पर बड़ी संख्या में वाहन चलते हैं और आसपास घनी आबादी, बाजार तथा आवागमन के प्रमुख क्षेत्र हैं।

पर्दाफाश न्यूज़ का सवाल

अब देखने वाली बात यह होगी कि नोएडा प्राधिकरण इस पूरे प्रकरण में केवल “बिटुमिन वर्क जल्द शुरू कराया जाएगा” तक सीमित रहता है या उससे आगे बढ़कर सड़क की गुणवत्ता की स्वतंत्र और पारदर्शी तकनीकी जांच भी कराता है।

क्या निर्माण में इस्तेमाल सामग्री के मानकों की जांच होगी?
क्या GSB और अन्य आधारभूत परतों की गुणवत्ता का परीक्षण होगा?
क्या सड़क की मोटाई और कम्पैक्शन की जांच होगी?
क्या निर्माण स्थल से मिट्टी-मलबे को व्यवस्थित तरीके से हटाया जाएगा?
क्या धूल नियंत्रण और NGT/CAQM से जुड़े पर्यावरणीय मानकों का पालन सुनिश्चित किया जाएगा?
और सबसे महत्वपूर्ण—यदि जांच में कोई कमी सामने आती है तो क्या संबंधित एजेंसी, ठेकेदार अथवा जिम्मेदार अधिकारी की जवाबदेही तय होगी?

इन सवालों का जवाब केवल संबंधित विभाग ही दे सकता है।

पर्दाफाश न्यूज़ का मानना है कि विकास कार्यों की असली सफलता केवल सड़क बन जाने में नहीं, बल्कि उसके गुणवत्तापूर्ण, टिकाऊ, सुरक्षित और निर्धारित मानकों के अनुरूप बनने में है। जनता के पैसे से तैयार होने वाली किसी भी आधारभूत संरचना पर सवाल उठें तो जांच को टालने के बजाय पारदर्शी तरीके से तथ्य सामने रखना ही प्रशासन और जनता दोनों के हित में है।

डीएससी एलिवेटेड रोड के नीचे सड़क निर्माण को लेकर सामने आए ये दस्तावेज और तस्वीरें अब नोएडा प्राधिकरण के सामने एक स्पष्ट अवसर रखते हैं—मौके की तकनीकी जांच कराकर वास्तविक स्थिति जनता के सामने रखी जाए और यदि कहीं कमी है तो निर्माण पूरा होने से पहले ही उसे दुरुस्त कराया जाए।

क्योंकि सड़क एक बार बन जाने के बाद उसकी खराब गुणवत्ता की कीमत सिर्फ सरकारी खजाने को नहीं, बल्कि आम नागरिक की सुरक्षा, समय, वाहन और पर्यावरण को भी चुकानी पड़ती है।

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VIKAS TRIPATHI
VIKAS TRIPATHIhttp://www.pardaphaas.com
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