Sunday, September 20, 2026
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450 सीटें, 11 करोड़ वोटर और यूक्रेन युद्ध का साया… रूस के संसदीय चुनाव में क्या दांव पर?

मॉस्को, 20 सितंबर 2026: रूस में तीन दिन से चल रहा स्टेट ड्यूमा चुनाव रविवार को अंतिम चरण में पहुंच गया। 18 से 20 सितंबर तक हो रहे इस चुनाव में निचले सदन की 450 सीटों के लिए मतदान हो रहा है। करीब 11.1 करोड़ मतदाता इस चुनाव में वोट डालने के पात्र हैं। यह फरवरी 2022 में यूक्रेन पर रूस के पूर्ण पैमाने के हमले के बाद पहला संसदीय चुनाव है, इसलिए इसकी राजनीतिक अहमियत सामान्य चुनाव से कहीं अधिक मानी जा रही है।

450 सीटों वाली ड्यूमा का चुनाव कैसे होता है?

रूस की स्टेट ड्यूमा में कुल 450 सदस्य होते हैं। इनमें 225 सीटें पार्टी लिस्ट के जरिए और बाकी 225 सीटें सिंगल-मेंबर निर्वाचन क्षेत्रों से चुनी जाती हैं।

इस बार मतदान तीन दिनों तक रखा गया है और इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग की भी व्यवस्था है। इसी अवधि में 11 क्षेत्रों में गवर्नर और 39 क्षेत्रों में क्षेत्रीय विधानसभाओं के चुनाव भी हो रहे हैं।

यूनाइटेड रूस के सामने क्या चुनौती?

राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की समर्थक यूनाइटेड रूस लंबे समय से ड्यूमा की सबसे बड़ी पार्टी है। 2021 के चुनाव में पार्टी ने 450 में से दो-तिहाई से अधिक सीटें हासिल की थीं।

2026 में भी पार्टी की स्थिति मजबूत मानी जा रही है। उसकी सूची में विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव, मॉस्को के मेयर सर्गेई सोबयानिन और युद्ध संवाददाता येवगेनी पोदुब्नी जैसे प्रमुख नाम शामिल हैं। पुतिन ने अगस्त में पार्टी सम्मेलन में यूक्रेन युद्ध में जीत के लिए प्रयास जारी रखने की बात कही थी।

हालांकि इस बार केवल सीटों की संख्या ही नहीं, बल्कि मत प्रतिशत और मतदान प्रतिशत भी महत्वपूर्ण संकेतक होंगे। आर्थिक दबाव और लंबे समय से जारी युद्ध के बीच मतदाताओं का रुख अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों की नजर में रहेगा।

कौन-कौन सी पार्टियां मैदान में हैं?

यूनाइटेड रूस के अलावा कम्युनिस्ट पार्टी (KPRF), LDPR, A Just Russia–For Truth और New People समेत कई दल चुनाव लड़ रहे हैं।

कम्युनिस्ट पार्टी लंबे समय से ड्यूमा में दूसरी बड़ी राजनीतिक ताकत रही है। LDPR का राष्ट्रवादी रुख है, जबकि New People अपेक्षाकृत युवा और तकनीक-केंद्रित मतदाताओं को आकर्षित करने की कोशिश करती रही है। इन प्रमुख पार्टियों में से कई यूक्रेन युद्ध के मुद्दे पर सरकार की नीति का समर्थन करती हैं।

Yabloko को लेकर क्यों उठा विवाद?

चुनाव में Yabloko का मामला खास चर्चा में रहा है। यह पार्टी रूस की प्रमुख युद्ध-विरोधी राजनीतिक पार्टियों में रही है। अगस्त में रूस के सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद Yabloko की संघीय उम्मीदवार सूची का पंजीकरण रद्द कर दिया गया। इसके बाद पार्टी राष्ट्रीय पार्टी-लिस्ट मुकाबले में शामिल नहीं है, हालांकि उसके कुछ उम्मीदवार सिंगल-मेंबर सीटों पर चुनाव लड़ रहे हैं।

Yabloko ने अदालत के फैसले को चुनौती भी दी है। पार्टी के अनुसार उसके संघीय उम्मीदवारों की सूची हटाए जाने से चुनाव में उसके राष्ट्रीय स्तर के विकल्प सीमित हुए हैं। दूसरी ओर, रूसी अधिकारियों और अदालतों ने अपने फैसलों को कानूनी प्रक्रिया के तहत लिया गया निर्णय बताया है।

क्या यह पुतिन के लिए समर्थन का संकेत होगा?

राष्ट्रपति पुतिन ने इस चुनाव को यूक्रेन युद्ध के संदर्भ में समर्थन से जोड़ा है। ऐसे में चुनाव परिणामों को रूस की घरेलू राजनीति के साथ-साथ युद्ध के प्रति राजनीतिक समर्थन के संकेतक के रूप में भी देखा जा रहा है। हालांकि यह ध्यान रखना जरूरी है कि चुनाव परिणामों से युद्ध के प्रति पूरे रूसी समाज की राय सीधे मापना आसान नहीं है, खासकर तब जब कई युद्ध-विरोधी उम्मीदवार चुनावी प्रक्रिया से बाहर हैं।

यूक्रेन के कब्जे वाले क्षेत्रों में भी मतदान

रूस ने यूक्रेन के उन क्षेत्रों में भी चुनावी प्रक्रिया कराई है, जिन पर उसका नियंत्रण है। यूक्रेन और उसके सहयोगी इन क्षेत्रों पर रूस के दावे और वहां कराए जा रहे मतदान को मान्यता नहीं देते। इस वजह से चुनाव का यह पहलू सीधे रूस-यूक्रेन क्षेत्रीय विवाद से जुड़ जाता है।

चुनाव के बीच मॉस्को पर बड़ा ड्रोन हमला

रविवार को चुनाव के अंतिम दिन मॉस्को और उसके आसपास बड़े पैमाने पर ड्रोन हमले की खबर सामने आई। रूसी अधिकारियों के अनुसार, 1,600 से अधिक ड्रोन इंटरसेप्ट किए गए, जिनमें लगभग 450 मॉस्को की ओर बढ़ रहे थे। मॉस्को के मेयर सर्गेई सोबयानिन ने इसे राजधानी पर अब तक का सबसे बड़ा ड्रोन हमला बताया। हमले में मॉस्को क्षेत्र में दो लोगों की मौत और एक तेल रिफाइनरी समेत कुछ बुनियादी ढांचे को नुकसान की सूचना है।

सोबयानिन ने हमले को चुनाव बाधित करने की कोशिश बताया, लेकिन यूक्रेन की ओर से तत्काल इसकी औपचारिक जिम्मेदारी स्वीकार नहीं की गई। इसलिए हमले के उद्देश्य को लेकर रूसी अधिकारियों के दावे को उसी रूप में देखना जरूरी है।

अब किन आंकड़ों पर रहेगी नजर?

रूस के इस चुनाव में मुख्य रूप से पांच आंकड़े महत्वपूर्ण होंगे—

– कुल मतदान प्रतिशत

– यूनाइटेड रूस का वोट शेयर

– यूनाइटेड रूस की कुल सीटें

– अन्य प्रमुख दलों का प्रदर्शन

– इलेक्ट्रॉनिक और पारंपरिक मतदान के आंकड़े

2021 में आधिकारिक तौर पर मतदान करीब 51.7% रहा था। इस बार युद्ध, आर्थिक दबाव, सीमित राजनीतिक प्रतिस्पर्धा और सुरक्षा परिस्थितियों के बीच मतदान प्रतिशत पर भी नजर रहेगी।

रूस का 2026 संसदीय चुनाव केवल 450 सांसदों के चुनाव तक सीमित नहीं है। यह चुनाव यूक्रेन युद्ध, घरेलू राजनीति, आर्थिक दबाव, यूनाइटेड रूस के वर्चस्व, विपक्ष की स्थिति और रूस के कब्जे वाले यूक्रेनी क्षेत्रों में मतदान जैसे कई मुद्दों से जुड़ा है।

अंतिम परिणाम यह बताएंगे कि नई ड्यूमा की संरचना कैसी होगी और यूनाइटेड रूस को कितनी सीटें मिलती हैं। शुरुआती परिणाम रविवार देर रात आने की उम्मीद है, जबकि अंतिम तस्वीर सोमवार तक स्पष्ट होने की संभावना है।

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