नई दिल्ली: दिल्ली यूनिवर्सिटी की लॉ फैकल्टी में सोमवार को एक प्रोफेसर पर कथित तौर पर हमला और थप्पड़ मारने की घटना ने कैंपस में शिक्षकों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि एक रिसर्च स्कॉलर ने उमंग भवन में प्रोफेसर के पहुंचने का इंतजार किया और जैसे ही वह बिल्डिंग में प्रवेश कर रहे थे, उन पर हमला कर दिया। घटना के सामने आने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी शोधार्थी शुभम सिंह को लॉ फैकल्टी से तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। साथ ही उसके दिल्ली यूनिवर्सिटी परिसर में प्रवेश पर भी रोक लगा दी गई है।
घटना के बाद शिक्षकों के संगठनों ने कड़ी नाराजगी जताई है। डेमोक्रेटिक टीचर्स फ्रंट (DTF) ने इसे बेहद गंभीर मामला बताते हुए आरोपी के खिलाफ सख्त और प्रभावी कार्रवाई की मांग की है। वहीं दिल्ली यूनिवर्सिटी टीचर्स एसोसिएशन (DUTA) ने भी कुलपति योगेश सिंह को पत्र लिखकर घटना की निंदा की और दोषी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
CCTV में कैद हुई पूरी घटना, प्रोफेसर को थप्पड़ मारने का आरोप
दिल्ली यूनिवर्सिटी प्रशासन के मुताबिक, मामले में कार्रवाई CCTV फुटेज के आधार पर की गई है। प्रॉक्टर कार्यालय की ओर से जारी नोटिस में कहा गया है कि विश्वविद्यालय को मिली CCTV फुटेज में आरोपी शोधार्थी प्रोफेसर का इंतजार करता दिखाई देता है। इसके बाद जैसे ही प्रोफेसर उमंग भवन में प्रवेश करते हैं, शोधार्थी उनके साथ कथित तौर पर मारपीट करता और थप्पड़ मारता दिखाई देता है।
घटना सोमवार सुबह करीब 10:30 बजे की बताई जा रही है। CCTV फुटेज सामने आने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लिया और आरोपी छात्र के खिलाफ तत्काल अनुशासनात्मक कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी।
DU प्रॉक्टर मनोज कुमार सिंह के मुताबिक, घटना की जांच के लिए एक कमेटी का गठन किया गया है। जांच समिति पूरे मामले के तथ्यों, घटना के कारणों और उपलब्ध साक्ष्यों की पड़ताल करेगी।
आरोपी रिसर्च स्कॉलर शुभम सिंह सस्पेंड, कैंपस में एंट्री पर भी रोक
प्रॉक्टर कार्यालय की ओर से जारी नोटिस के अनुसार, संबंधित शोधार्थी को तत्काल प्रभाव से दिल्ली यूनिवर्सिटी की लॉ फैकल्टी से निलंबित कर दिया गया है। इसके साथ ही उसके विश्वविद्यालय परिसर में प्रवेश पर भी प्रतिबंध लगा दिया गया है।
नोटिस में बताया गया है कि आरोपी शोधार्थी को शैक्षणिक सत्र 2024-25 (फेज-दो) में लॉ फैकल्टी में प्रवेश मिला था। विश्वविद्यालय प्रशासन ने कहा है कि यह कार्रवाई CCTV फुटेज और घटना से संबंधित उपलब्ध जानकारी के आधार पर की गई है।
प्रशासन की इस कार्रवाई से साफ है कि विश्वविद्यालय ने मामले को केवल छात्र-शिक्षक विवाद के तौर पर नहीं देखा, बल्कि इसे कैंपस में शिक्षक पर हमले की गंभीर घटना माना है। हालांकि, अंतिम निष्कर्ष जांच कमेटी की रिपोर्ट के बाद सामने आएगा।
DUTA ने VC को लिखा पत्र, सख्त कार्रवाई की मांग
घटना के बाद दिल्ली यूनिवर्सिटी टीचर्स एसोसिएशन (DUTA) भी सक्रिय हो गया है। संगठन ने विश्वविद्यालय के कुलपति योगेश सिंह को पत्र लिखकर घटना की कड़ी निंदा की है। DUTA ने कहा कि शिक्षकों के साथ इस तरह की घटनाएं किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं हैं।
शिक्षक संगठन ने विश्वविद्यालय प्रशासन से मांग की है कि मामले में दोषी पाए जाने वाले व्यक्ति के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
DUTA का कहना है कि शिक्षकों को कैंपस के भीतर सुरक्षित वातावरण मिलना जरूरी है। यदि किसी शिक्षक के साथ विश्वविद्यालय परिसर में ही हिंसक व्यवहार होता है, तो इससे न केवल संबंधित शिक्षक बल्कि पूरे शिक्षण समुदाय में असुरक्षा की भावना पैदा होती है।
DTF बोला- केवल निलंबन पर्याप्त नहीं, सुरक्षा की स्थायी व्यवस्था हो
डेमोक्रेटिक टीचर्स फ्रंट (DTF) ने भी घटना को लेकर विश्वविद्यालय प्रशासन पर सवाल उठाए हैं। संगठन का कहना है कि केवल आरोपी छात्र को निलंबित कर देना पर्याप्त नहीं है। शिक्षकों की सुरक्षा के लिए विश्वविद्यालय को ऐसी सख्त और प्रभावी व्यवस्था बनानी होगी, जिससे भविष्य में किसी शिक्षक के साथ बदसलूकी या हिंसा की घटना न हो।
DTF ने दावा किया कि शिक्षकों के साथ दुर्व्यवहार और हमले की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। संगठन के मुताबिक, हाल ही में लॉ फैकल्टी के कुछ प्रोफेसरों के साथ भी एक छात्र द्वारा कथित तौर पर अभद्र व्यवहार किए जाने की शिकायत सामने आई थी।
संगठन ने पिछले साल की एक घटना का भी हवाला दिया, जिसमें उसके अनुसार DUSU की जॉइंट सेक्रेटरी दीपिका झा पर डॉ. भीमराव आंबेडकर कॉलेज में एक प्रोफेसर को थप्पड़ मारने का आरोप लगा था। DTF ने इस घटना का उल्लेख करते हुए प्रशासन की कार्रवाई और कैंपस में शिक्षकों की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं।
लगातार सामने आ रही घटनाओं ने बढ़ाई चिंता
दिल्ली यूनिवर्सिटी जैसे प्रतिष्ठित केंद्रीय विश्वविद्यालय में शिक्षक पर हमले की घटना ने कैंपस के माहौल को लेकर चिंता बढ़ा दी है। विश्वविद्यालयों में छात्र और शिक्षक के बीच मतभेद या विवाद होना नई बात नहीं है, लेकिन विवाद का हिंसा में बदल जाना गंभीर चिंता का विषय है।
शिक्षक संगठनों का कहना है कि किसी भी शिकायत या असहमति के समाधान के लिए विश्वविद्यालय में निर्धारित संस्थागत प्रक्रियाएं मौजूद हैं। ऐसे में किसी शिक्षक के साथ शारीरिक हिंसा या धमकी का सहारा लेना स्वीकार नहीं किया जा सकता।
इस घटना के बाद अब निगाहें विश्वविद्यालय की जांच कमेटी की रिपोर्ट पर हैं। जांच के दौरान यह स्पष्ट किया जाएगा कि हमले के पीछे क्या कारण था, आरोपी और प्रोफेसर के बीच पहले से कोई विवाद था या नहीं और घटना से पहले कोई शिकायत अथवा विवाद विश्वविद्यालय के संज्ञान में आया था या नहीं।
प्रशासन के सामने अब बड़ी चुनौती, कैसे सुरक्षित होगा कैंपस?
घटना के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि दिल्ली यूनिवर्सिटी के शिक्षकों और छात्रों की सुरक्षा के लिए मौजूदा व्यवस्था कितनी प्रभावी है। शिक्षक संगठनों ने प्रशासन से केवल घटना के बाद कार्रवाई करने के बजाय ऐसी व्यवस्था विकसित करने की मांग की है, जिसमें किसी भी शिकायत का समय रहते समाधान हो सके और हिंसा की स्थिति पैदा ही न हो।
CCTV निगरानी, शिकायतों की त्वरित सुनवाई, संवेदनशील मामलों में प्रशासनिक हस्तक्षेप और शिक्षकों की सुरक्षा जैसे मुद्दे अब एक बार फिर चर्चा के केंद्र में हैं। DTF और DUTA दोनों का जोर इस बात पर है कि विश्वविद्यालय प्रशासन को भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए।
फिलहाल आरोपी शोधार्थी शुभम सिंह को निलंबित कर दिया गया है और कैंपस में उसकी एंट्री पर रोक लगा दी गई है। मामले की जांच के लिए कमेटी भी गठित की गई है। अब जांच रिपोर्ट से यह तय होगा कि घटना के पीछे वास्तविक कारण क्या था और आरोपी के खिलाफ आगे क्या कार्रवाई की जाएगी।
दिल्ली यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर पर हमले की इस घटना ने एक बार फिर कैंपस में अनुशासन, शिक्षक सुरक्षा और छात्र-शिक्षक संबंधों को लेकर गंभीर बहस छेड़ दी है। प्रशासन की शुरुआती कार्रवाई के बाद अब शिक्षकों की नजर इस बात पर है कि जांच कितनी निष्पक्ष और प्रभावी होती है और दोष साबित होने पर आरोपी के खिलाफ कितनी सख्त कार्रवाई की जाती है।














