Tuesday, August 18, 2026
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हरीश द्विवेदी को BJP ने बनाया राष्ट्रीय महासचिव, 2027 से पहले यूपी में ब्राह्मण चेहरे को मिली बड़ी जिम्मेदारी

“संघ-विद्यार्थी परिषद से शुरू हुआ राजनीतिक सफर, दो बार बस्ती से सांसद रह चुके हैं हरीश द्विवेदी | राष्ट्रीय संगठन में निभा चुके हैं कई अहम जिम्मेदारियां | ओबीसी के बाद ब्राह्मण समीकरण साधने की रणनीति पर टिकी नजर”

उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी ने अपने संगठन में बड़ा बदलाव करते हुए पूर्व सांसद हरीश द्विवेदी को राष्ट्रीय महासचिव की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी है। बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन की नई टीम में हरीश द्विवेदी को जगह मिलना कई मायनों में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बस्ती से आने वाले हरीश द्विवेदी लंबे समय से पार्टी संगठन में सक्रिय हैं और राष्ट्रीय स्तर पर बीजेपी के भरोसेमंद नेताओं में उनकी पहचान रही है।

हरीश द्विवेदी को राष्ट्रीय महासचिव बनाए जाने के बाद उत्तर प्रदेश की सियासत में इसके राजनीतिक मायने भी निकाले जा रहे हैं। माना जा रहा है कि 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी संगठन में अलग-अलग सामाजिक वर्गों के प्रभावशाली चेहरों को अहम जिम्मेदारियां देकर अपने सामाजिक समीकरण को मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रही है। एक ओर अमरपाल मौर्य को ओबीसी मोर्चे की राष्ट्रीय कमान दी गई है, वहीं दूसरी ओर हरीश द्विवेदी को राष्ट्रीय महासचिव बनाकर ब्राह्मण समाज के बीच मजबूत संगठनात्मक चेहरा आगे किया गया है।

संघ की शाखा से शुरू हुआ राजनीतिक सफर

हरीश द्विवेदी का संगठनात्मक और राजनीतिक सफर छात्र जीवन से शुरू हुआ। 22 अक्टूबर 1973 को एक मध्यमवर्गीय ब्राह्मण परिवार में जन्मे हरीश द्विवेदी के पिता साधुशरण दुबे किसान इंटर कॉलेज में शिक्षक रहे हैं। शुरुआती दौर में ही उनका झुकाव राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और विद्यार्थी परिषद की विचारधारा की ओर हुआ।

1990 से 1992 के बीच उन्होंने अपने गांव की संघ शाखा में मुख्य शिक्षक की जिम्मेदारी संभाली। वर्ष 1991 में वह अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के संपर्क में आए। इसके बाद संगठन में उनकी जिम्मेदारियां लगातार बढ़ती चली गईं।

1993 से 1995 तक उन्होंने विद्यार्थी परिषद, बस्ती के जिला प्रमुख के तौर पर काम किया। इसके बाद 1994 से 1996 तक प्रदेश सहमंत्री और 1995 से 1998 तक एबीवीपी गोरखपुर के विभाग संगठन मंत्री की जिम्मेदारी संभाली। संगठन के प्रति उनकी सक्रियता को देखते हुए उन्हें आगे भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां मिलती रहीं।

1998 से 2000 तक वह प्रयाग विभाग संगठन मंत्री रहे। इसके बाद 2000 से 2003 तक प्रयागराज और सुल्तानपुर विभाग के संगठन मंत्री के रूप में काम किया। विद्यार्थी परिषद के इन वर्षों ने उनके राजनीतिक और संगठनात्मक कौशल को मजबूत आधार दिया।

बीजेपी में एंट्री के बाद बढ़ता गया कद

वर्ष 2004 में हरीश द्विवेदी बीजेपी के संपर्क में आए और इसके बाद उनके राजनीतिक सफर ने नया मोड़ लिया। 2005 से 2007 तक उन्होंने तत्कालीन प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष केशरीनाथ त्रिपाठी के राजनीतिक सलाहकार के रूप में काम किया।

इसी अवधि में उन्हें भारतीय जनता युवा मोर्चा में भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिली। 2005 से 2007 तक वह युवा मोर्चा के प्रदेश महामंत्री रहे और 2007 से 2010 तक प्रदेश उपाध्यक्ष की भूमिका निभाई।

युवाओं के बीच उनकी सक्रियता और संगठनात्मक क्षमता को देखते हुए वर्ष 2010 में उन्हें बीजेपी युवा मोर्चा की उत्तर प्रदेश इकाई का प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया। 2010 से 2013 तक इस जिम्मेदारी को संभालते हुए उन्होंने प्रदेश में संगठन को मजबूत करने और युवाओं को पार्टी से जोड़ने के लिए काम किया।

तिरंगा यात्रा समेत पार्टी के कई अभियानों में उनकी सक्रिय भागीदारी रही। संगठन में लगातार बढ़ती जिम्मेदारियों ने उन्हें बीजेपी के जमीनी और संगठनात्मक नेताओं की पहली कतार में ला खड़ा किया।

2014 में पहली बार बस्ती से लोकसभा पहुंचे

संगठन की राजनीति में लंबा अनुभव हासिल करने के बाद हरीश द्विवेदी ने चुनावी राजनीति में कदम रखा। 2012 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने उन्हें बस्ती सदर विधानसभा सीट से उम्मीदवार बनाया। हालांकि उनका असली चुनावी कद लोकसभा की राजनीति में सामने आया।

2014 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने उन्हें बस्ती संसदीय सीट से मैदान में उतारा। उन्होंने जीत दर्ज कर पहली बार संसद में प्रवेश किया। इसके बाद 2019 के लोकसभा चुनाव में भी उन्होंने बस्ती से जीत हासिल की और लगातार दूसरी बार सांसद बने।

सांसद के तौर पर भी उन्हें कई महत्वपूर्ण संसदीय जिम्मेदारियां मिलीं। उन्होंने ऊर्जा, सूचना एवं प्रौद्योगिकी, वित्त, प्राक्कलन और याचिका सहित विभिन्न संसदीय समितियों में सदस्य के रूप में काम किया। संसद की महत्वपूर्ण याचिका समिति के अध्यक्ष के रूप में भी उन्होंने जिम्मेदारी निभाई।

दो बार लोकसभा सदस्य रहने का अनुभव उनके राजनीतिक सफर की बड़ी उपलब्धियों में शामिल है। संगठन और संसद दोनों स्तरों पर काम करने के अनुभव ने उनकी भूमिका को पार्टी के भीतर और मजबूत किया।

राष्ट्रीय संगठन में भी दिखा भरोसा

हरीश द्विवेदी का राजनीतिक कद सिर्फ उत्तर प्रदेश तक सीमित नहीं रहा। बीजेपी के राष्ट्रीय नेतृत्व ने उन्हें अलग-अलग राज्यों में संगठनात्मक जिम्मेदारियां देकर उनकी क्षमता का इस्तेमाल किया।

जेपी नड्डा के नेतृत्व वाली बीजेपी की राष्ट्रीय टीम में उन्हें राष्ट्रीय मंत्री की जिम्मेदारी भी मिली। इसके अलावा वह बिहार जैसे राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण राज्य के सह-प्रभारी के तौर पर भी काम कर चुके हैं।

वर्तमान में संगठनात्मक दृष्टि से महत्वपूर्ण असम के प्रभारी के रूप में भी उनकी भूमिका रही है। हाल ही में पार्टी ने राजस्थान के स्थानीय निकाय चुनाव की जिम्मेदारी भी उन्हें सौंपी थी। अलग-अलग राज्यों में संगठन और चुनाव प्रबंधन का अनुभव उन्हें राष्ट्रीय महासचिव की नई भूमिका के लिए मजबूत दावेदार बनाता है।

2027 से पहले क्यों महत्वपूर्ण है हरीश द्विवेदी की नई जिम्मेदारी?

उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारी के बीच बीजेपी की नई राष्ट्रीय टीम को सामाजिक और संगठनात्मक समीकरण के लिहाज से देखा जा रहा है। यूपी देश का सबसे बड़ा राजनीतिक राज्य है और यहां विधानसभा चुनाव में जातीय और सामाजिक समीकरणों की भूमिका हमेशा महत्वपूर्ण रही है।

ऐसे में हरीश द्विवेदी को राष्ट्रीय महासचिव बनाया जाना पार्टी की रणनीति का अहम हिस्सा माना जा रहा है। बीजेपी पहले से ही ओबीसी, दलित, पिछड़े और गैर-यादव पिछड़े वर्गों के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने पर जोर देती रही है। अब ब्राह्मण समाज के बीच भी संगठनात्मक रूप से मजबूत चेहरे को आगे बढ़ाने की कोशिश के तौर पर इस नियुक्ति को देखा जा रहा है।

अमरपाल मौर्य को ओबीसी मोर्चे की राष्ट्रीय जिम्मेदारी और हरीश द्विवेदी को राष्ट्रीय महासचिव का पद दिए जाने से बीजेपी की सामाजिक रणनीति की तस्वीर कुछ हद तक स्पष्ट होती है। पार्टी एक तरफ पिछड़े वर्गों के बीच अपनी पहुंच मजबूत करना चाहती है, तो दूसरी तरफ परंपरागत समर्थक माने जाने वाले ब्राह्मण वर्ग में भी संगठनात्मक भरोसा बनाए रखने की कोशिश कर रही है।

ब्राह्मण चेहरे के तौर पर कितने अहम होंगे हरीश?

उत्तर प्रदेश की राजनीति में ब्राह्मण समाज का प्रभाव लंबे समय से महत्वपूर्ण रहा है। प्रदेश की कई विधानसभा सीटों पर यह वर्ग चुनावी नतीजों को प्रभावित करने की स्थिति में रहता है। ऐसे में बीजेपी के लिए इस समुदाय के बीच मजबूत संगठनात्मक चेहरों की भूमिका अहम हो जाती है।

हरीश द्विवेदी की सबसे बड़ी ताकत यह है कि उनकी पहचान केवल जातीय चेहरे के तौर पर नहीं बल्कि संगठन से निकले हुए नेता के रूप में भी है। संघ, विद्यार्थी परिषद, युवा मोर्चा, बीजेपी संगठन और संसद—इन सभी स्तरों पर काम करने का उन्हें लंबा अनुभव हासिल है।

यही वजह है कि राष्ट्रीय महासचिव की जिम्मेदारी को सिर्फ यूपी के सामाजिक समीकरण से जोड़कर नहीं देखा जा रहा, बल्कि इसे पार्टी के राष्ट्रीय संगठन में उनके बढ़ते कद के तौर पर भी देखा जा रहा है।

जमीनी संगठन से राष्ट्रीय महासचिव तक का सफर

हरीश द्विवेदी की कहानी बीजेपी की उस संगठनात्मक कार्यशैली का उदाहरण है, जिसमें छात्र संगठन से शुरू होकर कार्यकर्ता धीरे-धीरे पार्टी के शीर्ष पदों तक पहुंचते हैं। संघ की शाखा से लेकर विद्यार्थी परिषद और फिर बीजेपी के युवा संगठन तक उन्होंने लंबे समय तक काम किया।

इसके बाद प्रदेश स्तर की जिम्मेदारियां, दो बार लोकसभा सदस्य के रूप में संसदीय अनुभव और विभिन्न राज्यों में संगठनात्मक जिम्मेदारियां—इन सभी पड़ावों ने उनके राजनीतिक सफर को व्यापक बनाया।

अब राष्ट्रीय महासचिव के रूप में उनके सामने पार्टी के राष्ट्रीय संगठन को मजबूत करने की बड़ी जिम्मेदारी होगी। खासकर उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले उनकी भूमिका पर राजनीतिक विश्लेषकों और पार्टी कार्यकर्ताओं की नजर रहेगी।

2027 की सियासी बिसात में बढ़ा कद

बीजेपी की नई टीम में हरीश द्विवेदी की एंट्री को इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि पार्टी अगले विधानसभा चुनाव से पहले संगठन के साथ-साथ सामाजिक समीकरणों को भी साधने की तैयारी में है। राष्ट्रीय स्तर पर उन्हें बड़ी जिम्मेदारी मिलने से यूपी की राजनीति में उनका कद निश्चित तौर पर बढ़ा है।

हालांकि यह देखना दिलचस्प होगा कि राष्ट्रीय महासचिव के तौर पर उनकी भूमिका कितनी व्यापक होती है और उत्तर प्रदेश के आगामी विधानसभा चुनाव में पार्टी उनकी संगठनात्मक क्षमता का किस तरह इस्तेमाल करती है।

फिलहाल इतना तय है कि संघ और विद्यार्थी परिषद की पृष्ठभूमि से निकले हरीश द्विवेदी ने संगठन, युवा राजनीति, चुनावी राजनीति और संसदीय जिम्मेदारियों के कई पड़ाव पार किए हैं। अब राष्ट्रीय महासचिव के रूप में उनका नया सफर शुरू हो चुका है। 2027 के यूपी विधानसभा चुनाव की सियासी जंग में बीजेपी के सामाजिक समीकरण और संगठनात्मक रणनीति में हरीश द्विवेदी की भूमिका कितनी निर्णायक साबित होती है, इस पर सभी की निगाहें रहेंगी।

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VIKAS TRIPATHI
VIKAS TRIPATHIhttp://www.pardaphaas.com
VIKAS TRIPATHI भारत देश की सभी छोटी और बड़ी खबरों को सामने दिखाने के लिए "पर्दाफास न्यूज" चैनल को लेके आए हैं। जिसके लोगो के बीच में करप्शन को कम कर सके। हम देश में समान व्यवहार के साथ काम करेंगे। देश की प्रगति को बढ़ाएंगे।
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