“1 करोड़ रुपये दो, सीएम को मार दूंगा’—फेसबुक कमेंट से मचा हड़कंप, पुलिस ने मोबाइल नंबर ट्रैक कर आरोपी को दबोचा”
गुवाहाटी/मोरीगांव। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा को सोशल मीडिया पर कथित तौर पर जान से मारने की धमकी देने के मामले ने राज्य की सुरक्षा व्यवस्था और साइबर निगरानी को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मोरीगांव जिले में पुलिस ने इस मामले में अब्दुल मुतालेब नाम के एक टेलर को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि उसने फेसबुक पर मुख्यमंत्री के स्वतंत्रता दिवस भाषण के लाइव प्रसारण के दौरान आपत्तिजनक और धमकी भरा कमेंट किया।
पुलिस के मुताबिक, फेसबुक लाइव के दौरान किए गए कथित कमेंट में लिखा गया था कि एक करोड़ रुपये दिए जाएं तो मुख्यमंत्री को मार दिया जाएगा। कमेंट के साथ कथित तौर पर संपर्क के लिए एक मोबाइल नंबर भी साझा किया गया था। पुलिस ने इसी मोबाइल नंबर और संबंधित सोशल मीडिया अकाउंट की जांच शुरू की, जिसके बाद जांच की कड़ी मोरीगांव के भुरागांव इलाके तक पहुंची और अब्दुल मुतालेब को हिरासत में लिया गया।
स्वतंत्रता दिवस भाषण के दौरान आया धमकी भरा कमेंट
यह पूरा मामला उस समय सामने आया, जब मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा 15 अगस्त को गुवाहाटी के खानापारा वेटनरी एंड एग्रीकल्चरल फील्ड में स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर राज्य को संबोधित कर रहे थे। उनके भाषण का सोशल मीडिया पर लाइव प्रसारण किया जा रहा था।
इसी लाइव प्रसारण के दौरान एक कमेंट में मुख्यमंत्री को कथित तौर पर जान से मारने की धमकी दी गई। पुलिस के अनुसार, धमकी के साथ रकम और संपर्क नंबर का उल्लेख किए जाने के बाद मामला बेहद गंभीर हो गया। सोशल मीडिया पर मौजूद इस टिप्पणी को लेकर पुलिस ने तत्काल डिजिटल स्तर पर जांच शुरू की।
जांच एजेंसियों ने सबसे पहले कमेंट से जुड़े मोबाइल नंबर की जानकारी जुटाई। नंबर किसके नाम पर पंजीकृत है, सोशल मीडिया अकाउंट से उसका क्या संबंध है और उस अकाउंट का इस्तेमाल किस डिवाइस या स्थान से किया गया—इन तमाम पहलुओं की पड़ताल की गई।
मोबाइल नंबर की जांच से आरोपी तक पहुंची पुलिस
पुलिस की जांच में सामने आया कि धमकी वाले कमेंट में इस्तेमाल किया गया मोबाइल नंबर अब्दुल मुतालेब के नाम पर रजिस्टर्ड था। इसके बाद पुलिस ने उसे हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की।
हालांकि, मुतालेब ने आरोपों से इनकार किया है। उसका कहना है कि किसी अन्य व्यक्ति ने फर्जी फेसबुक अकाउंट बनाया और उसमें उसकी तस्वीर का इस्तेमाल किया। आरोपी ने यह भी दावा किया कि धमकी भरा कमेंट उसने नहीं किया।
अब पुलिस के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि संबंधित सोशल मीडिया अकाउंट वास्तव में कौन चला रहा था। क्या अकाउंट अब्दुल मुतालेब का था, क्या उसकी जानकारी या अनुमति के बिना उसकी तस्वीर का इस्तेमाल किया गया, या फिर किसी अन्य व्यक्ति ने जानबूझकर उसकी पहचान का सहारा लिया—इन सभी संभावनाओं की जांच की जा रही है।
‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ के नारों की भी जांच
मामला सिर्फ मुख्यमंत्री को दी गई कथित धमकी तक सीमित नहीं है। जांच अधिकारियों के मुताबिक, सोशल मीडिया पर किए गए कथित कमेंट में भारत विरोधी बातें और ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ जैसे नारे भी शामिल थे।
इस वजह से पुलिस ने मामले को और गंभीरता से लेते हुए संबंधित सोशल मीडिया अकाउंट की गतिविधियों की जांच शुरू कर दी है। जांचकर्ता यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि अकाउंट से पहले भी कोई आपत्तिजनक पोस्ट या कमेंट किया गया था या नहीं।
पुलिस अब अकाउंट से जुड़े डिजिटल फुटप्रिंट, मोबाइल नंबर, इस्तेमाल किए गए डिवाइस और अन्य उपलब्ध इलेक्ट्रॉनिक सबूतों को खंगाल रही है। अधिकारियों का मकसद यह पता लगाना है कि धमकी के पीछे वास्तविक व्यक्ति कौन है और क्या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश या अन्य लोग भी शामिल हैं।
परिवार के सदस्यों से भी पूछताछ
मामले की जांच के दौरान पुलिस ने अब्दुल मुतालेब के परिवार के कुछ सदस्यों को भी हिरासत में लिया है। शुक्रवार देर रात तक मोरीगांव से कुल तीन अन्य लोगों को हिरासत में लिए जाने की बात सामने आई। इनमें मुतालेब के पिता और भाई भी शामिल हैं, जबकि तीसरे व्यक्ति की पहचान फिलहाल सार्वजनिक नहीं की गई है।
पुलिस इन लोगों से यह जानने की कोशिश कर रही है कि धमकी वाले सोशल मीडिया अकाउंट के बारे में उन्हें कोई जानकारी थी या नहीं। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि आरोपी के मोबाइल फोन अथवा अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का इस्तेमाल किसी दूसरे व्यक्ति ने तो नहीं किया।
फर्जी अकाउंट के दावे की भी होगी जांच
अब्दुल मुतालेब द्वारा फर्जी अकाउंट बनाए जाने और उसकी तस्वीर इस्तेमाल किए जाने के दावे ने जांच को एक नया मोड़ दे दिया है। अब पुलिस के सामने यह साबित करना जरूरी है कि धमकी वाला अकाउंट वास्तव में किस व्यक्ति द्वारा संचालित किया जा रहा था।
साइबर जांच में आम तौर पर लॉगिन डिटेल, आईपी एड्रेस, डिवाइस संबंधी जानकारी, मोबाइल नंबर, अकाउंट गतिविधियों और उपलब्ध डिजिटल रिकॉर्ड की मदद ली जाती है। पुलिस इन्हीं माध्यमों से आरोपी के दावे की सत्यता की जांच कर रही है।
यदि जांच में यह साबित होता है कि अकाउंट किसी अन्य व्यक्ति ने बनाया और मुतालेब की तस्वीर का इस्तेमाल किया, तो उसके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। वहीं, यदि पुलिस को मुतालेब की संलिप्तता के पर्याप्त डिजिटल सबूत मिलते हैं, तो उसके खिलाफ संबंधित धाराओं के तहत आगे कार्रवाई होगी।
मुख्यमंत्री के भाषण के दौरान हुई घटना ने बढ़ाई चिंता
मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा का स्वतंत्रता दिवस भाषण असम सरकार की विकास योजनाओं, राज्य की प्राथमिकताओं और भविष्य की दिशा पर केंद्रित था। इसी दौरान सोशल मीडिया पर मुख्यमंत्री को कथित तौर पर जान से मारने की धमकी सामने आने से सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ गई।
खास तौर पर इसलिए भी कि धमकी सार्वजनिक मंच पर लाइव प्रसारण के दौरान दी गई थी। पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि यह केवल सोशल मीडिया पर की गई एक आपत्तिजनक टिप्पणी थी या इसके पीछे किसी वास्तविक हिंसक योजना की मंशा थी।
डिजिटल सबूत जुटाने में जुटी पुलिस
पुलिस ने धमकी से जुड़े सोशल मीडिया अकाउंट और पोस्ट की गहन जांच शुरू कर दी है। जांचकर्ता यह पता लगाने में जुटे हैं कि अकाउंट कब बनाया गया, इससे पहले किस तरह की गतिविधियां हुईं और धमकी वाला कमेंट किस डिवाइस या नेटवर्क से पोस्ट किया गया।
इसके साथ ही पुलिस यह भी जांच रही है कि क्या आरोपी के नाम पर पंजीकृत मोबाइल नंबर का इस्तेमाल स्वयं मुतालेब कर रहा था या किसी दूसरे व्यक्ति के हाथ में वह नंबर या डिवाइस था।
मामले में आगे की कार्रवाई डिजिटल जांच के नतीजों पर काफी हद तक निर्भर करेगी।
अभी कई सवालों के जवाब बाकी
इस मामले में पुलिस की कार्रवाई के बावजूद कई अहम सवालों का जवाब मिलना अभी बाकी है। मुख्यमंत्री को धमकी देने वाला कमेंट वास्तव में किसने किया? क्या अब्दुल मुतालेब ही संबंधित फेसबुक अकाउंट चला रहा था? अगर अकाउंट फर्जी था तो उसे किसने बनाया? मुतालेब की तस्वीर और मोबाइल नंबर का इस्तेमाल किस उद्देश्य से किया गया? और क्या धमकी के पीछे कोई अन्य व्यक्ति या समूह भी शामिल है?
इन सभी सवालों के जवाब पुलिस की आगे की जांच से सामने आएंगे।
फिलहाल अब्दुल मुतालेब पुलिस हिरासत में है और उससे पूछताछ जारी है। पुलिस सोशल मीडिया अकाउंट से जुड़े अन्य डिजिटल सबूतों को भी खंगाल रही है। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि मुख्यमंत्री को दी गई कथित धमकी के पीछे वास्तविक साजिश क्या थी।
एक फेसबुक कमेंट से शुरू हुआ यह मामला अब साइबर अपराध, पहचान के दुरुपयोग और मुख्यमंत्री की सुरक्षा से जुड़े कई गंभीर पहलुओं की जांच में बदल गया है।














