अयोध्या स्थित श्रीराम मंदिर में चढ़ावे और वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े कथित मामलों को लेकर उत्तर प्रदेश कांग्रेस ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और कांग्रेस विधायक दल की नेता आराधना मिश्रा ने इस पूरे प्रकरण की इलाहाबाद हाईकोर्ट के किसी वर्तमान (सिटिंग) न्यायाधीश की निगरानी में समयबद्ध जांच कराने की मांग की है।
कांग्रेस का आरोप: आस्था के नाम पर संगठित वित्तीय अनियमितताएं
दिल्ली में आयोजित एक प्रेस वार्ता में कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि श्रीराम मंदिर से जुड़ी वित्तीय गतिविधियों में व्यापक स्तर पर अनियमितताएं हुई हैं। उनका कहना है कि यह मामला केवल आर्थिक गड़बड़ी का नहीं, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की धार्मिक आस्था से जुड़ा हुआ है।
अजय राय ने आरोप लगाया कि मंदिर निर्माण और चढ़ावे से जुड़े विभिन्न मामलों में पारदर्शिता का अभाव रहा है तथा धर्म और आस्था के नाम पर धन संग्रह और उसके उपयोग को लेकर कई गंभीर प्रश्न खड़े हुए हैं।
एसआईटी जांच पर कांग्रेस ने जताया अविश्वास
उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) पर सवाल उठाते हुए कांग्रेस ने इसकी निष्पक्षता पर संदेह व्यक्त किया है। अजय राय ने कहा कि जांच की जिम्मेदारी जिन अधिकारियों को सौंपी गई है, उनकी भूमिका को लेकर पहले भी विवाद रहे हैं। उन्होंने मांग की कि एसआईटी अपनी रिपोर्ट एक सप्ताह के भीतर सार्वजनिक करे, ताकि पूरे मामले में पारदर्शिता बनी रहे।
प्रधानमंत्री और ट्रस्ट की भूमिका पर उठाए गए सवाल
कांग्रेस ने श्रीराम मंदिर निर्माण समिति और ट्रस्ट की संरचना को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं। अजय राय ने आरोप लगाया कि मंदिर निर्माण से जुड़े निर्णयों और वित्तीय प्रक्रियाओं की जवाबदेही तय की जानी चाहिए। उन्होंने मंदिर ट्रस्ट से जुड़े कुछ पदाधिकारियों और निर्माण समिति के सदस्यों की नियुक्तियों को लेकर भी प्रश्न उठाए।
हालांकि, इन आरोपों पर संबंधित पक्षों की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आना अभी बाकी है।
कथित वित्तीय अनियमितताओं के प्रमुख आरोप
कांग्रेस नेताओं ने कई गंभीर आरोप लगाए हैं, जिनमें शामिल हैं—
चढ़ावे और दान की राशि के प्रबंधन में कथित अनियमितताएं।
मंदिर निर्माण से संबंधित भूमि खरीद में कथित रूप से कीमतों में भारी अंतर।
मंदिर परिसर और आसपास की जमीनों के अधिग्रहण एवं हस्तांतरण प्रक्रियाओं में पारदर्शिता की कमी।
कथित रूप से ऐतिहासिक महत्व की लगभग 1,250 श्रीराम शिलाओं के गायब होने का मामला।
मंदिर परिसर के निर्माण कार्यों की गुणवत्ता को लेकर सवाल, जिनमें पहली बारिश में सड़क धंसने और गर्भगृह की छत से पानी टपकने जैसी शिकायतें शामिल हैं।
कांग्रेस ने दावा किया है कि इन मामलों की निष्पक्ष जांच आवश्यक है, ताकि सत्य सामने आ सके और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।
1,400 करोड़ रुपये से अधिक की कथित अनियमितताओं का दावा
अजय राय ने समाचार रिपोर्टों का हवाला देते हुए दावा किया कि मंदिर से जुड़े मामलों में 1,400 करोड़ रुपये से अधिक की कथित वित्तीय अनियमितताएं हुई हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि भूमि खरीद के दौरान कम कीमत वाली जमीनों को अधिक मूल्य पर ट्रस्ट को बेचा गया।
उन्होंने यह भी कहा कि मंदिर में श्रद्धालुओं, विशेषकर महिलाओं और परिवारों द्वारा श्रद्धा से अर्पित किए गए चढ़ावे के उपयोग को लेकर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं।
आराधना मिश्रा का आरोप: सनातन आस्था के साथ विश्वासघात
कांग्रेस विधायक दल की नेता आराधना मिश्रा ने आरोप लगाया कि मंदिर निर्माण और उससे जुड़े प्रबंधन में पारदर्शिता का अभाव रहा है। उन्होंने कहा कि यदि आरोप सही साबित होते हैं, तो यह करोड़ों सनातन श्रद्धालुओं की भावनाओं के साथ गंभीर विश्वासघात होगा।
उन्होंने यह भी मांग की कि मामले की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराई जाए तथा दोषी पाए जाने वाले व्यक्तियों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
महत्वपूर्ण तथ्य
यह उल्लेखनीय है कि अब तक कांग्रेस द्वारा लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। उत्तर प्रदेश सरकार ने मामले की जांच के लिए एसआईटी गठित की है और जांच प्रक्रिया जारी है। अंतिम निष्कर्ष जांच रिपोर्ट और संबंधित एजेंसियों की आधिकारिक जानकारी के आधार पर ही सामने आएंगे।
धार्मिक संस्थाओं से जुड़े किसी भी वित्तीय विवाद का सीधा संबंध करोड़ों लोगों की आस्था और विश्वास से होता है। इसलिए इस मामले में पारदर्शिता, निष्पक्ष जांच और जवाबदेही सुनिश्चित करना लोकतांत्रिक व्यवस्था और जनविश्वास, दोनों के लिए अत्यंत आवश्यक है।














